ब्रह्मपुत्र पर चीन का 168 अरब डॉलर का बांध बढ़ा सकता है बाढ़ का खतरा, 21वीं सदी में बढ़ेगा नदी का जलप्रवाह
किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी
- UPSC8/10
- SSC7/10
1खबर एक नज़र में
चीनी वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ब्रह्मपुत्र नदी (तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो) में इस सदी में जलवायु परिवर्तन के कारण जलप्रवाह बढ़ सकता है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, जबकि चीन इसी नदी पर 168 अरब डॉलर की लागत से दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध बना रहा है।
बाढ़ के खतरे की चेतावनी
वैज्ञानिक अध्ययन में जलवायु परिवर्तन के कारण 21वीं सदी में ब्रह्मपुत्र नदी में जलप्रवाह बढ़ने और बाढ़ का खतरा बढ़ने का अनुमान लगाया गया है।
विशाल बांध परियोजना
चीन ब्रह्मपुत्र पर 168 अरब डॉलर का बांध बना रहा है, जो 60,000 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना होगी।
जलवायु का प्रभाव
तिब्बती पठार वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी तेज़ी से गर्म हो रहा है, जिससे ब्रह्मपुत्र बेसिन में बर्फ का आवरण और जल चक्र बाधित हो रहा है।
2याद रखने वाले तथ्य
कार्ड दबाएँ और जवाब देखें। पहले खुद याद करने की कोशिश करें।
3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ / पृष्ठभूमि
ब्रह्मपुत्र तिब्बत (यारलुंग त्सांगपो के रूप में) से निकलने वाली और भारत तथा बांग्लादेश में बहने वाली एक सीमापार नदी है। चीन की ऊपरी धारा की गतिविधियां, जिनमें बांध निर्माण भी शामिल है, लंबे समय से निचले देशों के लिए एक भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय चिंता का विषय रही हैं। नई वैज्ञानिक चेतावनी मौजूदा जल-साझाकरण की जटिलताओं में जलवायु परिवर्तन का आयाम जोड़ती है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
शोध तिब्बती पठार पर तेज़ी से गर्म होने और ब्रह्मपुत्र बेसिन में बढ़ी हुई जल संबंधी अस्थिरता के बीच सीधा संबंध दर्शाता है। एक विशाल बांध का एक साथ निर्माण, जिसका उद्देश्य बिजली उत्पादन है, बाढ़ के जोखिमों को बढ़ा सकता है या उनसे खतरे में पड़ सकता है। यह एक दोहरी चुनौती पैदा करता है: अप्रत्याशित जलप्रवाह का प्रबंधन और विशाल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना, जिसके भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश और असम के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं।
भविष्य की संभावना / आगे का रास्ता
शोधकर्ता भविष्य के जल संसाधन विकास और भंडारण बुनियादी ढांचे के लिए इन अनुमानित जल संबंधी परिवर्तनों को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। इसके लिए चीन और भारत के बीच मजबूत सीमापार सहयोग और जोखिम मूल्यांकन तंत्र की आवश्यकता है। भारत के लिए, यह अपनी बाढ़ पूर्वानुमान, जल भंडारण क्षमता और साझा नदी प्रबंधन पर राजनयिक जुड़ाव को बढ़ाने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- ब्रह्मपुत्र नदी
- एशिया की एक प्रमुख सीमापार नदी, जो तिब्बत में चेमायुंगडुंग ग्लेशियर से निकलती है। इसे तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो, अरुणाचल प्रदेश में सियांग/दिहांग और असम तथा बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है। यह निर्वहन के हिसाब से सबसे बड़ी नदियों में से एक है।
- सीमापार नदियाँ
- वे नदियाँ जो दो या दो से अधिक देशों की सीमाओं के पार या उनके साथ बहती हैं। उनके प्रबंधन में अक्सर अंतर्राष्ट्रीय कानून और संधियाँ शामिल होती हैं, जैसे सिंधु जल संधि या अंतर्राष्ट्रीय नदियों के उपयोग पर हेलसिंकी नियम।
- थ्री गॉर्जेस बांध
- वर्तमान में स्थापित क्षमता (22,500 मेगावाट) के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा चालू जलविद्युत बांध, जो चीन में यांग्त्ज़ी नदी पर स्थित है। यह विशाल बांध परियोजनाओं के लिए एक बेंचमार्क के रूप में कार्य करता है।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: बांध की लागत - 168 बिलियन डॉलर; क्षमता - >60,000 मेगावाट
- नोडल निकाय: चीनी विज्ञान अकादमी और युन्नान विश्वविद्यालय
- कानूनी बिंदु: अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत सीमापार जल-साझाकरण के मुद्दे
गलती मत करना!
विभिन्न क्षेत्रों में नदी के नाम (यारलुंग त्सांगपो बनाम ब्रह्मपुत्र बनाम सियांग) को भ्रमित करना या क्षमता तुलना को बदलना (थ्री गॉर्जेस बांध 22,500 मेगावाट है, न कि नए बांध की क्षमता)।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
जलवायु-प्रेरित जल संबंधी अस्थिरतासीमापार जल कूटनीतिऊर्जा सुरक्षा बनाम पर्यावरणीय स्थिरता
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
ब्रह्मपुत्र नदी को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में किस नाम से जाना जाता है?
व्याख्या: जैसा कि लेख में उल्लेख किया गया है, ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से निकलती है। यह अरुणाचल प्रदेश में सियांग और फिर असम में ब्रह्मपुत्र बन जाती है।
- Q2कठिन
समाचार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.चीनी वैज्ञानिकों ने 21वीं सदी के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में जलप्रवाह और बाढ़ के खतरे में वृद्धि का अनुमान लगाया है।
- 2.इस अनुमान के लिए शोध पिछले 500 वर्षों के हिमालय से प्राप्त बर्फ-कोर डेटा पर आधारित था।
- 3.चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र पर प्रस्तावित बांध की क्षमता मिस्र के असवान बांध की तुलना में तीन गुना होने की उम्मीद है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 लेख के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है; शोध में 1325-2020 तक के पेड़ के छल्ले के डेटा का उपयोग किया गया था, न कि बर्फ-कोर डेटा का। कथन 3 गलत है; बांध की क्षमता की तुलना चीन के थ्री गॉर्जेस बांध की क्षमता से तीन गुना होने की है, न कि असवान बांध से।
- Q3मध्यम
लेख में उल्लिखित ब्रह्मपुत्र नदी पर प्रस्तावित विशाल बांध की अनुमानित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता कितनी है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि पूरा होने पर, बांध की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 60,000 मेगावाट से अधिक होने की उम्मीद है। थ्री गॉर्जेस बांध की क्षमता (22,500 मेगावाट) एक भ्रामक जानकारी है।
- Q4मध्यम
समाचार लेख के अनुसार, वैज्ञानिकों द्वारा ब्रह्मपुत्र बेसिन के संबंध में मुख्य चिंता क्या बताई गई है?
व्याख्या: लेख में मुख्य वैज्ञानिक चेतावनी यह है कि तिब्बती पठार वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी तेज़ी से गर्म हो रहा है, जो बर्फ के आवरण और जल चक्र को प्रभावित कर रहा है, जिससे ब्रह्मपुत्र बेसिन में जलप्रवाह और बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि का अनुमान है।
7सभी स्रोत
मूल खबर26 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
