पंजाब का नशीली दवाओं का संकट: 2024 में 6,060 तस्करी के मामले, 553 किलोमीटर सीमा की संवेदनशीलता और 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' अभियान
1खबर एक नज़र में
पंजाब का लगातार बना हुआ नशीली दवाओं का संकट, जिसमें 2024 में तस्करी के 6,060 मामले दर्ज हुए, ऐतिहासिक उपयोग, भौगोलिक संवेदनशीलता और आर्थिक कारकों में निहित है। पाकिस्तान के साथ राज्य की 553 किलोमीटर लंबी सीमा और गोल्डन क्रिसेंट क्षेत्र तस्करी को बढ़ावा देता है, जबकि AAP सरकार का 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' अभियान तस्करों के वित्त को लक्षित करता है।
खतरनाक आँकड़े
पंजाब में 2024 में नशीली दवाओं की तस्करी के 6,060 मामले और ओवरडोज से 106 मौतें दर्ज की गईं, जो तस्करी में देश में सबसे आगे और मौतों में दूसरे स्थान पर है।
भौगोलिक संवेदनशीलता
पाकिस्तान के साथ राज्य की 553 किलोमीटर लंबी सीमा इसे गोल्डन क्रिसेंट, जो दुनिया के प्रमुख हेरोइन उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, से तस्करी के प्रति संवेदनशील बनाती है।
नीतिगत प्रतिक्रिया
AAP सरकार का 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' अभियान तस्करों के वित्त को बाधित करने और समुदाय-आधारित रोकथाम के लिए 1.5 लाख ग्राम स्वयंसेवकों का उपयोग करने का लक्ष्य है।
2याद रखने वाले तथ्य
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3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ / पृष्ठभूमि
पंजाब की नशीली दवाओं की समस्या की ऐतिहासिक जड़ें हैं, जिसमें अफीम और घर में बनी शराब की सामाजिक स्वीकृति शामिल है। स्वतंत्रता के बाद, प्रतिबंध के कारण राजस्थान से तस्करी हुई जहाँ खेती कानूनी थी। उग्रवाद में कमी के बाद पाकिस्तान ने कथित तौर पर 'नारको-आतंकवाद' अपनाया, सीमा पार से नशीली दवाओं की आपूर्ति की। राज्य की आर्थिक संरचना, महत्वाकांक्षी युवाओं के लिए सीमित नौकरी के अवसरों के साथ, आकर्षक नशीली दवाओं के व्यापार के लिए एक उपजाऊ जमीन बनाती है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
यह संकट पारंपरिक पदार्थों से लेकर फार्मास्युटिकल दवाओं और परिष्कृत ड्रोन-आधारित तस्करी तक विकसित हुआ है। ड्रोन, ज्यादातर चीनी क्वाडकॉप्टर, 2021 में 3 रोके गए से बढ़कर 2025 में 200 से अधिक हो गए। व्यापार की उच्च लाभप्रदता (हेरोइन के प्रति ग्राम ₹1,000-5,000) कार्रवाई के बावजूद इसे बढ़ावा देती है। तस्करों, पुलिस और राजनेताओं के बीच एक सांठगांठ, जिसका उदाहरण 2013 का DSP जगदीश सिंह भोला मामला है, नेटवर्क को बनाए रखती है। NDPS अधिनियम के तहत 2015 से 2022 तक गिरफ्तारी में 85% की वृद्धि के साथ महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है।
भविष्य की संभावना / आगे का रास्ता
वर्तमान AAP रणनीति आपूर्ति-पक्ष प्रवर्तन ('बड़ी मछलियों' को पकड़ना) को जन-पहुँच के माध्यम से मांग-पक्ष रोकथाम के साथ जोड़ती है। हालांकि, डॉ. प्रमोद कुमार जैसे विशेषज्ञ तर्क देते हैं कि EDP दृष्टिकोण त्रुटिपूर्ण है, यह सुझाव देते हुए कि रोकथाम और पुनर्वास प्रवर्तन से पहले होना चाहिए। स्थायी समाधानों के लिए सामाजिक-आर्थिक चालकों को संबोधित करना, सीमा पार और अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत करना और गहरी जड़ें जमा चुके आपराधिक-राजनीतिक सांठगांठ को तोड़ना आवश्यक है।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- गोल्डन क्रिसेंट
- अवैध अफीम और हेरोइन उत्पादन का एक प्रमुख वैश्विक क्षेत्र, जो अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित है।
- NDPS अधिनियम, 1985
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम भारत का प्रमुख कानून है जो चिकित्सा और वैज्ञानिक उद्देश्यों को छोड़कर नारकोटिक और साइकोट्रोपिक पदार्थों को प्रतिबंधित करता है।
- सीमा सुरक्षा बल (BSF)
- भारत का प्राथमिक सीमा सुरक्षा बल जो भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं पर तैनात है, गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: पंजाब में 6,060 नशीली दवाओं की तस्करी के मामले (2024) - भारत में सर्वाधिक।
- नोडल निकाय: सीमा सुरक्षा बल (BSF) जिसका 50 किमी अंतर्देशीय अधिकार क्षेत्र है।
- कानूनी बिंदु: नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985।
गलती मत करना!
'गोल्डन क्रिसेंट' (अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान) को 'गोल्डन ट्रायंगल' (म्यांमार, थाईलैंड, लाओस) के साथ भ्रमित करना, दोनों प्रमुख नशीली दवाओं के उत्पादक क्षेत्र हैं। वे ओवरडोज से होने वाली मौतों में अग्रणी राज्यों (तमिलनाडु - 313, पंजाब - 106) को भी बदल सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
नारको-आतंकवादनशीली दवाओं के दुरुपयोग के सामाजिक-आर्थिक निर्धारकसमुदाय-आधारित नशामुक्ति मॉडल
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
कौन सा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल मुख्य रूप से पाकिस्तान के साथ भारत की सीमा की रखवाली के लिए जिम्मेदार है और इसका अधिकार क्षेत्र 50 किमी अंतर्देशीय तक बढ़ा दिया गया है?
व्याख्या: सीमा सुरक्षा बल (BSF) भारत-पाकिस्तान सीमा पर भारत का प्राथमिक सीमा सुरक्षा बल है। लेख में उल्लेख है कि BSF का अधिकार क्षेत्र 2021 में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी अंतर्देशीय कर दिया गया था।
- Q2कठिन
पंजाब के नशीली दवाओं के संकट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.NCRB 2024 के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में भारत में नशीली दवाओं के ओवरडोज से होने वाली मौतों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई।
- 2.'गोल्डन क्रिसेंट' क्षेत्र, हेरोइन का एक प्रमुख स्रोत, में अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के कुछ हिस्से शामिल हैं।
- 3.AAP सरकार का 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' अभियान में अवैध नशीली दवाओं की आय से बने घरों को ध्वस्त करना शामिल है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है। पंजाब में 2024 में ओवरडोज से 106 मौतें दर्ज की गईं, जो तमिलनाडु (313) के बाद दूसरा सबसे अधिक था। कथन 2 गोल्डन क्रिसेंट की लेख की परिभाषा के अनुसार सही है। कथन 3 सही है क्योंकि 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' में तस्करों के वित्त को बाधित करने और अवैध आय से बने घरों को ध्वस्त करने के कदम शामिल हैं।
- Q3मध्यम
लेख में उद्धृत राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2024 के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में नशीली दवाओं की तस्करी के कितने मामले दर्ज किए गए?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि NCRB 2024 के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में नशीली दवाओं की तस्करी के 6,060 मामले दर्ज किए गए, जो देश में सबसे अधिक है। यह प्रदान की गई सामग्री से एक सीधा तथ्यात्मक बिंदु है।
- Q4मध्यम
लेख में दिए गए विश्लेषण के अनुसार, सरकारी कार्रवाई के बावजूद पंजाब में नशीली दवाओं के व्यापार के फलने-फूलने का प्राथमिक कारण क्या बताया गया है?
व्याख्या: लेख में कहा गया है कि व्यापार के फलने-फूलने का एक कारण इसकी उच्च लाभप्रदता है, जहाँ एक ग्राम हेरोइन ₹1,000-5,000 में बिक सकती है और एक ड्रग कैरियर के रूप में एक बार में एक लाख कमाया जा सकता है। यह आर्थिक प्रोत्साहन विशेष रूप से उन राज्यों में शक्तिशाली है जहाँ उच्च आकांक्षाओं वाले युवाओं के लिए नौकरी के सीमित अवसर हैं।
7सभी स्रोत
मूल खबर29 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
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