राजव्यवस्थाखबर 5 / 30

UAPA के तहत विदेशी नागरिकों की ज़मानत: सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 43D(7) की शर्तें स्पष्ट कीं, ज़मानत से इनकार के लिए वैध प्रवेश का प्रमाण अनिवार्य किया

27 अक्टूबर 2026Dainik BhaskarHindustan2 स्रोत3 मिनट3 प्रश्न

किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी

  • UPSC8/10
  • BPSC7/10
  • UPPSC7/10
  • JPSC7/10

1खबर एक नज़र में

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि केवल विदेशी नागरिक होना गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत ज़मानत से इनकार करने का आधार नहीं है। न्यायालय ने कहा कि धारा 43D(7) के तहत ज़मानत से इनकार के लिए, अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि आरोपी ने भारत में अवैध रूप से प्रवेश किया था, साथ ही उस पर UAPA के तहत आरोप भी हों और वह गैर-नागरिक हो।

  • ज़मानत के मानदंड स्पष्ट किए गए

    सर्वोच्च न्यायालय ने UAPA की धारा 43D(7) की व्याख्या करते हुए कहा कि ज़मानत से इनकार के लिए अवैध प्रवेश का प्रमाण ज़रूरी है, न कि केवल विदेशी नागरिकता।

  • संयोजक शर्तें

    कानून में 'और' शब्द शर्तों को जोड़ता है, जिसका अर्थ है कि ज़मानत से इनकार के लिए विदेशी नागरिकता और अवैध प्रवेश दोनों साबित होने चाहिए।

  • न्यायालय की शक्ति बरकरार

    सर्वोच्च न्यायालय ने पुष्टि की कि न्यायालयों के पास ज़मानत रद्द करने की शक्ति है, लेकिन ऐसी शक्ति का प्रयोग सावधानी से और मनमाने ढंग से नहीं किया जाना चाहिए।

2याद रखने वाले तथ्य

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3विस्तृत विश्लेषण

संदर्भ / पृष्ठभूमि

गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) भारत का प्राथमिक आतंकवाद विरोधी कानून है जिसमें ज़मानत के कड़े प्रावधान हैं। धारा 43D(7) विशेष रूप से विदेशी नागरिकों के लिए ज़मानत से संबंधित है। इस बात पर कानूनी अस्पष्टता रही है कि क्या केवल विदेशी होना ज़मानत से इनकार करने के लिए पर्याप्त है, खासकर उन मामलों में जहां प्रवेश शुरू में वैध था। इस मामले ने सर्वोच्च न्यायालय को इस व्याख्या को सुलझाने का अवसर प्रदान किया।

मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ

सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला UAPA के तहत विदेशियों की मनमानी हिरासत के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करता है। 'और' शब्द का उपयोग करके अवैध प्रवेश के प्रमाण को एक संयोजक शर्त के रूप में अनिवार्य करके, यह फैसला अनिश्चित हिरासत के लिए राष्ट्रीयता के दुरुपयोग को एक अकेले आधार के रूप में रोकता है। यह इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि ज़मानत प्रतिबंधों को पलायन या अपराध के खतरे से जुड़े विशिष्ट वैधानिक मानदंडों पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल नागरिकता की स्थिति पर। यह राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में संभावित अतिरेक की जाँच में न्यायपालिका की भूमिका को भी रेखांकित करता है।

भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता

यह फैसला विदेशी नागरिकों से जुड़े UAPA मामलों को संभालने वाली निचली अदालतों के लिए एक मिसाल कायम करता है। NIA जैसी अभियोजन एजेंसियों को ज़मानत का विरोध करने के लिए प्रवेश की अवैधता को सावधानीपूर्वक स्थापित करना होगा। यह अन्य मामलों की समीक्षा को भी प्रेरित कर सकता है जहां ज़मानत मुख्य रूप से विदेशी राष्ट्रीयता के आधार पर अस्वीकृत की गई थी। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाता है, एक ऐसा सिद्धांत जो आतंकवाद विरोधी कानूनों की भविष्य की न्यायिक व्याख्याओं का मार्गदर्शन करेगा।

4पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी

गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967
एक भारतीय कानून जिसका उद्देश्य उन गैरकानूनी गतिविधियों और संघों को रोकना है जो भारत की संप्रभुता और अखंडता को खतरा पैदा करते हैं। यह देश का प्राथमिक आतंकवाद विरोधी कानून है।
UAPA के तहत ज़मानत के प्रावधान
UAPA में धारा 43D के तहत ज़मानत की कड़ी शर्तें हैं। आम तौर पर, ज़मानत प्राप्त करना मुश्किल होता है क्योंकि न्यायालय को संतुष्ट होना चाहिए कि आरोपी दोषी नहीं है और ज़मानत पर रहते हुए कोई अपराध नहीं करेगा।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
भारत की केंद्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी, जिसकी स्थापना 2008 के मुंबई हमलों के बाद हुई थी। इसे देश भर में UAPA जैसे अधिनियमों के तहत अपराधों की जांच और मुकदमा चलाने का अधिकार है।

5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • कानूनी बिंदु: गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43D(7)।
  • शर्त: UAPA के तहत एक विदेशी नागरिक को ज़मानत से इनकार करने के लिए, अभियोजन पक्ष को गैर-नागरिकता और अनधिकृत/अवैध प्रवेश दोनों साबित करने होंगे।
  • मामले के विवरण: यह फैसला मोहम्मद रिफास के मामले में आया, जो एक श्रीलंकाई नागरिक है जिसने 2009 में वैध वीज़ा पर भारत में प्रवेश किया था।

गलती मत करना!

परीक्षक एक कथन-आधारित प्रश्न पूछ सकते हैं जहां एक कथन कहता है कि 'विदेशी नागरिकों को UAPA के तहत ज़मानत नहीं मिल सकती' (गलत) या ज़मानत से इनकार की शर्तों में संयोजक 'और' को वियोजक 'या' से बदल सकते हैं। वे विशिष्ट धारा संख्या के बारे में भी पूछ सकते हैं, इसे UAPA की अन्य धाराओं या NDPS अधिनियम जैसे अन्य कानूनों के साथ भ्रमित कर सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें

न्यायिक व्याख्या, राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संतुलन, दंडात्मक कानूनों का सख्त निर्माण, सुरक्षा कानूनों में कार्यकारी अतिरेक की जाँच में न्यायपालिका की भूमिका

6अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1कठिन

    UAPA के तहत विदेशी नागरिकों की ज़मानत पर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.न्यायालय ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत ज़मानत से इनकार करने के लिए विदेशी नागरिक होना पर्याप्त आधार है।
    2. 2.UAPA की धारा 43D(7) के तहत ज़मानत से इनकार के लिए, अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि आरोपी ने भारत में अवैध रूप से प्रवेश किया था।
    3. 3.यह फैसला मद्रास उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ अपील की सुनवाई करते हुए सुनाया गया था।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  2. Q2मध्यम

    सर्वोच्च न्यायालय द्वारा चर्चा किए गए मामले में, आरोपी श्रीलंकाई नागरिक मोहम्मद रिफास ने किस वर्ष भारत में प्रवेश किया था?

  3. Q3मध्यम

    UAPA की धारा 43D(7) में 'और' शब्द की सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या का प्राथमिक कानूनी महत्व क्या है?

7सभी स्रोत

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