UNEP रिपोर्ट: 2035 तक वैश्विक उत्सर्जन में केवल 6% कटौती का अनुमान, आवश्यक 60% कमी से बहुत कम
किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी
1खबर एक नज़र में
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक रिपोर्ट चेतावनी देती है कि मौजूदा राष्ट्रीय वादों से 2035 तक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में केवल 6% की कटौती होगी, जो वैज्ञानिकों द्वारा 1.5°C तक तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए आवश्यक 60% कमी का दसवां हिस्सा मात्र है। यह अंतर वैश्विक जलवायु कार्रवाई में एक गंभीर कमी को उजागर करता है, जिसमें वायुमंडलीय GHG सांद्रता रिकॉर्ड स्तर पर है और जलवायु वित्तपोषण अपर्याप्त है।
भारी उत्सर्जन अंतर
वर्तमान वैश्विक जलवायु वादों से 2035 तक केवल 6% उत्सर्जन कटौती होगी, जो आवश्यक 60% कमी से बहुत कम है।
रिकॉर्ड GHG स्तर
2025 में CO₂, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की सांद्रता रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गई, जिससे सदियों तक तापमान वृद्धि बनी रहेगी।
अपर्याप्त वित्तपोषण
वार्षिक जलवायु वित्तपोषण बढ़कर 1.9 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, लेकिन वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए यह अभी भी गंभीर रूप से अपर्याप्त है।
2याद रखने वाले तथ्य
कार्ड दबाएँ और जवाब देखें। पहले खुद याद करने की कोशिश करें।
3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ / पृष्ठभूमि
यह रिपोर्ट तुर्किये में COP31 शिखर सम्मेलन से पहले आई है और 2015 के पेरिस समझौते के तहत 127 नए राष्ट्रीय वादों पर आधारित है। पेरिस ढाँचा 154 देशों द्वारा प्रस्तुत स्वैच्छिक राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) पर निर्भर करता है, एक ऐसी प्रणाली जो अब अपनी सीमाओं को दर्शा रही है क्योंकि वादे वैज्ञानिक लक्ष्यों से कम पड़ रहे हैं। यह राजनीतिक प्रतिबद्धताओं और जलवायु विज्ञान द्वारा आवश्यक कठोर कार्रवाई के बीच लगातार अंतर को उजागर करता है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
अनुमानित 6% कटौती बनाम 60% की आवश्यकता वैश्विक शासन की एक विनाशकारी विफलता को दर्शाती है। यदि सभी सशर्त नीतियां लागू की जाती हैं, तब भी कटौती केवल 9% तक पहुँचती है। रिपोर्ट में क्षेत्रीय योगदानों का विवरण दिया गया है: बिजली (37%), उद्योग जगत (20%), परिवहन (15%), कृषि/वानिकी (19%), भवन (6%), और कचरा (3%)। रिकॉर्ड GHG स्तर (CO₂ 426.8 पीपीएम पर) और नेट-ज़ीरो लक्ष्यों (ज्यादातर 2050) पर धीमी प्रगति का अर्थ है सदी के अंत तक 1.7-2.3°C तापमान वृद्धि, जिससे गंभीर मौसमी व्यवधान होंगे।
भविष्य की संभावना / आगे का रास्ता
आगामी COP31 सम्मेलन देशों के लिए अपने NDC को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा। प्रमुख चुनौतियों में सालाना 1.9 ट्रिलियन डॉलर से अधिक जलवायु वित्तपोषण बढ़ाना, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में तेजी लाना और कृषि तथा कचरे से मीथेन उत्सर्जन को संबोधित करना शामिल है। रिपोर्ट बाध्यकारी तंत्रों और बोझ-साझाकरण में समानता की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है, खासकर विकसित देशों के लिए गहरी कटौती करने और वित्तपोषण प्रदान करने हेतु।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- पेरिस समझौता (2015)
- UNFCCC के तहत एक अंतर्राष्ट्रीय संधि, जिसे 2015 में अपनाया गया था, जिसका उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों की तुलना में 2°C से काफी नीचे, अधिमानतः 1.5°C तक सीमित करना है। यह देशों द्वारा प्रस्तुत बढ़ती महत्वाकांक्षी जलवायु कार्य योजनाओं (NDC) के 5-वर्षीय चक्र पर संचालित होता है।
- नेट-ज़ीरो उत्सर्जन
- एक ऐसी स्थिति जहाँ वायुमंडल में उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा वायुमंडल से हटाई गई मात्रा से संतुलित होती है, जिसे कमी और वनीकरण जैसे ऑफसेटिंग उपायों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। अधिकांश देश इसे 2050 तक लक्षित करते हैं।
- UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम)
- प्रमुख वैश्विक पर्यावरणीय प्राधिकरण जो वैश्विक पर्यावरणीय एजेंडा निर्धारित करता है, सतत विकास को बढ़ावा देता है, और पर्यावरणीय मुद्दों पर आधिकारिक आकलन प्रदान करता है।
- ग्रीनहाउस गैसें (GHGs)
- पृथ्वी के वायुमंडल में गर्मी को फँसाने वाली गैसें, मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄), नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O), और फ्लोरीनेटेड गैसें। वे मानवजनित जलवायु परिवर्तन के प्राथमिक चालक हैं।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: 2035 तक अनुमानित वैश्विक उत्सर्जन कटौती 6% है (9% या 60% नहीं)।
- नोडल निकाय: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने रिपोर्ट जारी की।
- कानूनी बिंदु: राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के साथ 2015 का पेरिस समझौता ढाँचा।
गलती मत करना!
वे 'आवश्यक' कटौती (60%) बनाम 'अनुमानित' कटौती (6%) के बारे में पूछ सकते हैं और इन संख्याओं को बदल सकते हैं। वे लक्ष्य के वर्ष (2035) को अधिकांश देशों के लिए नेट-ज़ीरो लक्ष्य वर्ष (2050) के साथ भी भ्रमित कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
"महत्वाकांक्षा-कार्यान्वयन अंतर", "स्वैच्छिक NDC ढाँचा", "जलवायु वित्तपोषण की कमी"
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1कठिन
संयुक्त राष्ट्र जलवायु रिपोर्ट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.यह अनुमान लगाता है कि वर्तमान राष्ट्रीय वादों से 2035 तक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 60% की कमी आएगी।
- 2.यह रिपोर्ट देशों द्वारा कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए किए गए 127 नए वादों के विश्लेषण पर आधारित है।
- 3.इसमें कहा गया है कि 2023-24 की अवधि में जलवायु वित्तपोषण सालाना 1.9 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है: रिपोर्ट में केवल 6% कमी का अनुमान है, न कि 60%। कथन 2 सही है क्योंकि लेख में उल्लेख है कि रिपोर्ट 127 नए वादों पर आधारित है। कथन 3 सही है क्योंकि लेख में कहा गया है कि 2023-24 में जलवायु वित्तपोषण सालाना 1.9 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया।
- Q2मध्यम
UNEP रिपोर्ट के अनुसार, 1.5°C तक तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए 2035 तक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वैज्ञानिक रूप से कितने प्रतिशत कमी की आवश्यकता है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से कहता है कि वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित करने के लिए 2035 तक 2019 के स्तर से 60% कमी की आवश्यकता है। 6% वादों से अनुमानित कटौती है, 9% कटौती है यदि सभी सशर्त नीतियां लागू की जाती हैं, और 30% का उल्लेख नहीं है।
- Q3मध्यम
UNEP रिपोर्ट द्वारा वर्तमान राष्ट्रीय जलवायु वादों के संबंध में उजागर किया गया प्राथमिक निहितार्थ क्या है?
व्याख्या: रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष प्रतिबद्ध कार्रवाई (6% कटौती) और वैज्ञानिक रूप से आवश्यक कार्रवाई (60% कटौती) के बीच भारी अंतर है। लेख यह नहीं कहता कि प्रतिज्ञाएँ पर्याप्त हैं (A), 3-4°C वृद्धि निर्दिष्ट नहीं करता है (B), और उल्लेख करता है कि वित्तपोषण अभी भी अपर्याप्त है (D)।
7सभी स्रोत
इससे जुड़ी खबरें
इसी विषय, राज्य या परीक्षा की पिछले 30 दिनों की खबरें
नेट ज़ीरो 2070 के लिए भारत की CCUS रणनीति: ₹20,000 करोड़ की योजना, IIT बॉम्बे में पहली एकीकृत फील्ड लैब, और उत्सर्जन घटाने में कठिन उद्योगों को कार्बन-मुक्त करना
कार्बन कैप्चर, यूटिलाइज़ेशन और स्टोरेज (CCUS) भारत के लिए 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तकनीकी मार्ग है, खासकर इस्पात, सीमेंट और रिफाइनरियों जैसे 'उत्सर्जन घटाने में कठिन' औद्योगिक क्षेत्रों को कार्बन-मुक्त करने के लिए। केंद्रीय बजट 2026-27 ने CCUS को बढ़ावा देने के लिए पांच वर्षों में ₹20,000 करोड़ आवंटित किए, और भारत की पहली एकीकृत CCUS फील्ड प्रयोगशाला का उद्घाटन मई 2026 में IIT बॉम्बे में किया गया, जो प्रतिदिन 3 टन CO₂ कैप्चर करने में सक्षम है। गुजरात, ओडिशा-झारखंड और पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्रों के लिए एक हब-एंड-क्लस्टर मॉडल विकसित किया जा रहा है।
CCUS का पूर्ण रूप: कार्बन कैप्चर, यूटिलाइज़ेशन और स्टोरेज
भारत का जैव विविधता संरक्षण: 1,134 संरक्षित क्षेत्र, 103 रामसर स्थल, 57 विरासत स्थल और 18 बायोस्फीयर रिज़र्व
भारत ने CBD COP-17 में कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और राष्ट्रीय परिस्थितियों व पर्याप्त वित्तपोषण पर ज़ोर दिया। देश की प्रगति में 1,134 संरक्षित क्षेत्र, 103 रामसर स्थल और 23 राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ एक अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना शामिल है।
CBD का पूर्ण रूप: जैव विविधता पर कन्वेंशन
पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं: 574 में से 72% तरनतारन और अमृतसर में; CAQM ने मशीनरी तक पहुंच पर ज़ोर दिया
पंजाब में पराली जलाने के मौसम में 574 खेतों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें से 72% अमृतसर और तरनतारन ज़िलों में केंद्रित हैं। शुरुआती बढ़ोतरी का संबंध किसानों द्वारा कम अवधि के धान के बाद तीसरी फसल (हरी मटर/आलू) उगाने से है, जिससे अवशेष प्रबंधन के लिए बहुत कम समय बचता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने मशीनरी की उपलब्धता और किसानों द्वारा उसे अपनाने के बीच के अंतर का मुद्दा उठाया है।
खेतों में आग लगने की कुल घटनाएं (15 सितंबर-24 अक्टूबर, 2026): 574

