राजव्यवस्था

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, मजिस्ट्रेट के सामने 24 घंटे की पेशी की गिनती औपचारिक गिरफ़्तारी से नहीं, हिरासत में लेने से शुरू होगी

5 नवंबर 20262 मिनट3 स्रोत4 प्रश्नखबर 1 / 54

प्रिलिम्स के लिए: अनुच्छेद 22, अनुच्छेद 22(2), UAPA, PMLA, संवैधानिक अनुच्छेद, पेश करने की समय-सीमा, 24 घंटे के नियम का अपवाद, विशेष कानूनों पर न्यायालय का फैसला

मेन्स के लिए: अनुच्छेद 22(2), हिरासत बनाम औपचारिक गिरफ़्तारी, मौलिक अधिकार बनाम विशेष कानून, स्वतंत्रता का अधिकार

स्रोत:The HinduThe HinduIndian ExpressIndian ExpressDainik BhaskarDainik Bhaskar

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि अनुच्छेद 22(2) के तहत गिरफ़्तार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की अवधि औपचारिक गिरफ़्तारी से नहीं, बल्कि हिरासत में लेने के क्षण से शुरू होती है। इस फैसले से हिरासत और गिरफ़्तारी का फर्क धुंधला पड़ता है। अदालत ने यह भी कहा कि मौलिक अधिकार उन विशेष कानूनों पर भी भारी पड़ते हैं जो ज़मानत पर सख्त रोक लगाते हैं, जैसे UAPA और PMLA।

सारांश

  • अनुच्छेद 22(2) के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की समय-सीमा हिरासत में लेने से शुरू होती है, औपचारिक गिरफ़्तारी से नहीं।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हिरासत और गिरफ़्तारी, दोनों अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को सीमित करते हैं।
  • अनुच्छेद 22 के तहत मौलिक अधिकार UAPA और PMLA जैसे उन विशेष कानूनों पर भारी पड़ते हैं जो ज़मानत पर कड़ी रोक लगाते हैं।

मुख्य बातें

  • अनुच्छेद 22(2) के लिए हिरासत = गिरफ़्तारी

    सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की अवधि औपचारिक गिरफ़्तारी से नहीं, हिरासत से शुरू होती है, और इस तरह दोनों के बीच का फर्क धुंधला पड़ता है।

  • मौलिक अधिकार विशेष कानूनों पर भारी

    अदालत ने माना कि अनुच्छेद 22 के तहत मौलिक अधिकार UAPA और PMLA जैसे उन विशेष कानूनों पर भी भारी पड़ते हैं जो ज़मानत को सीमित करते हैं।

  • मजिस्ट्रेट को हिरासत का समय दर्ज करना होगा

    पेश करते समय मजिस्ट्रेट को 24 घंटे की समय-सीमा के पालन की जाँच के लिए हिरासत की सटीक तारीख और समय दर्ज करना होगा।

पृष्ठभूमि

संविधान का अनुच्छेद 22(2) कहता है कि गिरफ़्तार और हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए। यह प्रावधान मनमानी गिरफ़्तारी और हिरासत के खिलाफ सुरक्षा कवच है। लेकिन व्यवहार में कई बार अधिकारी 'औपचारिक गिरफ़्तारी' को 24 घंटे की गिनती का आधार मान लेते थे और गिरफ़्तारी दर्ज करने से पहले लोगों को अनौपचारिक रूप से हिरासत में रखते थे। यह फैसला इसी कमी को दूर करता है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

फैसले में स्पष्ट किया गया है कि अनुच्छेद 22(2) के तहत 24 घंटे की समय-सीमा व्यक्ति को हिरासत में लेने के क्षण से शुरू होती है, औपचारिक गिरफ़्तारी के क्षण से नहीं। इससे हिरासत और गिरफ़्तारी का कानूनी फर्क धुंधला होता है, क्योंकि दोनों स्वतंत्रता को सीमित करते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि अवैध गतिविधि (निवारण) अधिनियम (UAPA) और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) जैसे विशेष कानून, जिनमें ज़मानत की शर्तें कड़ी हैं, मौलिक अधिकारों को कमज़ोर नहीं कर सकते। इससे वैधानिक प्रतिबंधों पर संवैधानिक सुरक्षा उपायों की प्रधानता फिर से स्थापित होती है।

आगे की राह

इस फैसले के बाद कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हिरासत में लिया गया हर व्यक्ति वास्तविक हिरासत के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश हो, न कि औपचारिक गिरफ़्तारी के बाद। पेश करते समय मजिस्ट्रेट को हिरासत का सटीक समय दर्ज करना होगा। यह फैसला गिरफ़्तारी-पूर्व हिरासत की प्रथाओं पर अधिक जाँच ला सकता है और उन लोगों की रिहाई का कारण बन सकता है जिन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए बिना 24 घंटे से अधिक रखा गया था।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

अनुच्छेद 22
भारतीय संविधान का एक मौलिक अधिकार, जो कुछ मामलों में गिरफ़्तारी और हिरासत से संरक्षण देता है। इसमें गिरफ़्तारी के आधार जानने, वकील से परामर्श करने और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार शामिल है।
अनुच्छेद 22(2)
स्पष्ट रूप से कहता है कि गिरफ़्तार और हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति को गिरफ़्तारी के 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा, गिरफ़्तारी की जगह से मजिस्ट्रेट की अदालत तक यात्रा में लगने वाले आवश्यक समय को छोड़कर।
UAPA
अवैध गतिविधि (निवारण) अधिनियम, एक विशेष कानून जो अवैध गतिविधियों की रोकथाम करता है और इसमें ज़मानत की कड़ी शर्तों तथा हिरासत की विस्तारित अवधि के प्रावधान हैं।
PMLA
धन शोधन निवारण अधिनियम, एक विशेष कानून जो धन शोधन के अपराध से निपटता है और इसमें ज़मानत की कड़ी शर्तों तथा हिरासत की विस्तारित अवधि के प्रावधान हैं।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की अवधि हिरासत से शुरू होती है, औपचारिक गिरफ़्तारी से नहीं।
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भारत का सर्वोच्च न्यायालय
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: संविधान का अनुच्छेद 22(2)

यह गलती न करें!

परीक्षक 24 घंटे की अवधि के शुरुआती बिंदु को लेकर भ्रम पैदा कर सकते हैं। याद रखें: यह 'हिरासत' से शुरू होती है, 'औपचारिक गिरफ़्तारी' से नहीं। साथ ही वे अपवाद के बारे में भी पूछ सकते हैं: केवल मजिस्ट्रेट की अदालत तक यात्रा का समय छोड़ा जाता है, जाँच या पूछताछ का समय नहीं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • अनुच्छेद 22(2), हिरासत बनाम औपचारिक गिरफ़्तारी, मौलिक अधिकार बनाम विशेष कानून, स्वतंत्रता का अधिकार

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1मध्यम

    किस संवैधानिक अनुच्छेद में गिरफ़्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार दिया गया है?

  2. Q2मध्यम

    मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की अवधि औपचारिक गिरफ़्तारी के क्षण से शुरू होती है।
    2. 2.अनुच्छेद 22 के तहत मौलिक अधिकार UAPA और PMLA जैसे विशेष कानूनों पर भी भारी पड़ते हैं।
    3. 3.24 घंटे के नियम का एकमात्र अपवाद गिरफ़्तारी की जगह से मजिस्ट्रेट की अदालत तक यात्रा में लगने वाला आवश्यक समय है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने का अधिकतम समय कितना है?

  4. Q4मध्यम

    सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का मुख्य महत्व क्या है कि 24 घंटे की अवधि औपचारिक गिरफ़्तारी के बजाय हिरासत से शुरू होती है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 24 घंटे के पेशी नियम पर सर्वोच्च न्यायालय ने क्या फैसला दिया?

सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि गिरफ़्तार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की अवधि औपचारिक गिरफ़्तारी के बजाय हिरासत के क्षण से शुरू होती है।

2. कौन-सा संवैधानिक अनुच्छेद मजिस्ट्रेट के सामने 24 घंटे के भीतर पेश करने से संबंधित है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22(2) कहता है कि गिरफ़्तार और हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए।

3. क्या सर्वोच्च न्यायालय का फैसला UAPA और PMLA जैसे विशेष कानूनों पर भी लागू होता है?

हाँ, न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 22 के तहत मौलिक अधिकार UAPA और PMLA जैसे उन विशेष कानूनों पर भी भारी पड़ते हैं जो ज़मानत पर कड़ी रोक लगाते हैं।

4. अनुच्छेद 22(2) 24 घंटे के नियम पर कौन-सा अपवाद देता है?

एकमात्र अपवाद गिरफ़्तारी की जगह से मजिस्ट्रेट की अदालत तक यात्रा में लगने वाला आवश्यक समय है।

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