सर्वोच्च न्यायालय ने NPPA की आलोचना की: ₹11,000 का इंजेक्शन ₹1.3 लाख में बिका, दवाओं की कीमतों पर सवाल
किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी
- UPSC7/10
1खबर एक नज़र में
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आवश्यक दवाओं पर अत्यधिक व्यापार मार्जिन को नियंत्रित करने में सरकार और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की कड़ी आलोचना की है। न्यायालय ने एक ऐसे मामले का हवाला दिया जहाँ ₹11,000 के कैंसर इंजेक्शन को ₹1.3 लाख में बेचा गया था। न्यायालय ने मौजूदा मूल्य नियंत्रण तंत्रों की प्रभावकारिता पर सवाल उठाया और वर्तमान व्यवस्था को 'लूट और डकैती' करार दिया।
न्यायिक जांच
सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की मूल्य नियंत्रण नीति पर सवाल उठाया और MRP-PTR के बड़े अंतर को 'लूट और डकैती' करार दिया।
कीमतों में असमानता
₹11,000 के आधार मूल्य वाले कैंसर इंजेक्शन को मरीजों को ₹1.3 लाख में बेचा जा रहा था, जो भारी व्यापार मार्जिन को उजागर करता है।
नियामक कार्रवाई
NPPA ने कैंसर की दवाओं पर व्यापार मार्जिन को MRP के 30% तक सीमित कर दिया, लेकिन न्यायालय ने इस उपाय को अपर्याप्त पाया।
2याद रखने वाले तथ्य
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3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ / पृष्ठभूमि
भारत सरकार, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के माध्यम से औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (DPCO) के तहत आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है। इस प्रणाली का उद्देश्य दवाओं की सामर्थ्य और उद्योग जगत की व्यवहार्यता के बीच संतुलन बनाना है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप खुदरा विक्रेता को कीमत (PTR) और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच भारी अंतर के बारे में लगातार शिकायतों से उपजा है, जो मरीजों, विशेष रूप से कैंसर जैसे गंभीर उपचारों के लिए, पर बोझ डालता है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
न्यायालय की आलोचना नियामक ढांचे में एक मूलभूत खामी को उजागर करती है। जबकि सरकार का तर्क है कि दूरदराज के क्षेत्रों तक दवाओं के वितरण को सुनिश्चित करने के लिए व्यापार मार्जिन की आवश्यकता है, न्यायालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 1000% से अधिक का मार्जिन (जैसा कि ₹11,000 से ₹1.3 लाख के मामले में) उचित नहीं ठहराया जा सकता। कैंसर की दवाओं पर हाल ही में 30% व्यापार मार्जिन की सीमा, हालांकि एक कदम है, इसे प्रतिक्रियात्मक और अपर्याप्त माना जाता है। यह मामला स्वास्थ्य सेवा में मुक्त-बाजार दृष्टिकोण और सस्ती चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत राज्य के दायित्व के बीच संघर्ष को रेखांकित करता है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता
सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जो सरकार को मूल्य नियंत्रण के तहत दवाओं की सूची का विस्तार करने और NPPA की प्रवर्तन शक्तियों को मजबूत करने का निर्देश दे सकता है। एक संभावित परिणाम अधिक पारदर्शी मूल्य निर्धारण तंत्र और अस्पताल तथा खुदरा विक्रेता मार्जिन के सख्त ऑडिट का जनादेश है। इससे DPCO में संशोधन या आवश्यक दवाओं में मुनाफाखोरी को रोकने के लिए नए कानून बन सकते हैं।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA)
- रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के तहत एक स्वतंत्र निकाय, जो औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (DPCO) के तहत भारत में आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है।
- औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (DPCO)
- भारत सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी एक आदेश, जो आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों को विनियमित करता है।
- व्यापार मार्जिन
- यह निर्माता द्वारा खुदरा विक्रेता को बेची गई कीमत (PTR) और उपभोक्ता को बेची गई अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच का अंतर है। इसमें खुदरा विक्रेता का लाभ, वितरण लागत और कर शामिल होते हैं।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: कैंसर की दवाओं पर व्यापार मार्जिन की सीमा MRP का 30% है (अक्टूबर 2026)।
- नोडल निकाय: औषध विभाग के तहत राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA)।
- कानूनी बिंदु: औषधि मूल्य नियंत्रण औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (DPCO) के तहत लागू किया जाता है।
गलती मत करना!
वे पूछ सकते हैं कि NPPA किस मंत्रालय के अंतर्गत आता है (रसायन एवं उर्वरक, स्वास्थ्य नहीं) या व्यापार मार्जिन प्रतिशत (जैसे, 50% बनाम 30%) को भ्रमित कर सकते हैं। एक और प्रश्न संवैधानिक अनुच्छेद (अनुच्छेद 21 - जीवन का अधिकार) के बारे में पूछा जा सकता है जो सस्ती स्वास्थ्य सेवा के संदर्भ में लागू किया गया था।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
सार्वजनिक स्वास्थ्य में न्यायिक सक्रियताबाजार अर्थशास्त्र और कल्याणकारी राज्य के बीच संघर्षनियामक विफलता और रोगी की भेद्यता
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1कठिन
दवाओं की कीमतों पर हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.न्यायालय ने राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की 'पूरी तरह निष्क्रिय' होने के लिए आलोचना की।
- 2.सरकार ने सभी आवश्यक दवाओं पर व्यापार मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30% तक सीमित कर दिया है।
- 3.न्यायालय ने दवाओं के उच्च मूल्य मार्जिन की मौजूदा व्यवस्था को 'लूट और डकैती' करार दिया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि लेख में कहा गया है कि न्यायालय ने NPPA को 'पूरी तरह निष्क्रिय' पाया। कथन 2 गलत है क्योंकि लेख के अनुसार 30% व्यापार मार्जिन की सीमा विशेष रूप से कैंसर की दवाओं पर लागू होती है, न कि सभी आवश्यक दवाओं पर। कथन 3 सही है क्योंकि न्यायालय ने इस व्यवस्था को 'लूट और डकैती' बताया।
- Q2मध्यम
समाचार के अनुसार, कैंसर की दवाओं के लिए सरकार द्वारा निर्धारित व्यापार मार्जिन की सीमा क्या है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि सर्वोच्च न्यायालय की आलोचना के बाद, सरकार ने कैंसर की दवाओं पर व्यापार मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित करने का फैसला किया। यह निर्णय NPPA की 8 अक्टूबर, 2026 को हुई 151वीं बैठक में लिया गया था।
- Q3मध्यम
भारत में दवाओं की कीमतें कई देशों की तुलना में कम हैं, सरकार के इस तर्क की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आलोचना का प्राथमिक कारण क्या था?
व्याख्या: लेख के अनुसार, जब सरकार के वकील ने तर्क दिया कि भारत में दवाओं की कीमतें कई देशों की तुलना में कम हैं, तो न्यायालय ने सवाल किया कि क्या ऐसा 'पूंजीवादी दृष्टिकोण' तब अपनाया जाना चाहिए जब मुद्दा मरीजों और उनके जीवन से संबंधित हो। यह विशुद्ध रूप से बाजार-आधारित तर्क पर न्यायालय के कल्याण-उन्मुख दृष्टिकोण को उजागर करता है।
7सभी स्रोत
मूल खबर28 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
