राजव्यवस्थाखबर 3 / 36

संसदीय समिति करेगी आरटीआई, सीआईसी के कामकाज की समीक्षा, 10,000 से अधिक मामले लंबित

28 अक्टूबर 2026Hindustan2 मिनट2 प्रश्न

किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी

  • UPSC8/10

1खबर एक नज़र में

एक विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समिति सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के क्रियान्वयन और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के कामकाज की व्यापक समीक्षा करेगी। CIC में 11 आयुक्तों की पूरी स्वीकृत क्षमता होने के बावजूद, यह वर्तमान में 10,000 से अधिक लंबित मामलों से जूझ रहा है। यह समीक्षा पारदर्शिता और जवाबदेही तंत्रों पर संसदीय निगरानी का संकेत देती है।

  • संसदीय जांच

    एक प्रमुख संसदीय समिति ऐतिहासिक RTI अधिनियम के क्रियान्वयन और केंद्रीय सूचना आयोग के प्रदर्शन की समीक्षा करेगी।

  • लंबित मामलों का संकट

    11 आयुक्तों की अपनी पूर्ण क्षमता होने के बावजूद, CIC पर 10,000 से अधिक लंबित मामलों का बोझ है, जिससे देरी हो रही है।

  • व्यापक समीक्षा का जनादेश

    पैनल केंद्र सरकार में रिक्तियों, सतर्कता प्रशासन, न्यायिक अवसंरचना और शिकायत निवारण प्रणाली की भी जांच करेगा।

2याद रखने वाले तथ्य

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3विस्तृत विश्लेषण

संदर्भ/पृष्ठभूमि

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, भारत के पारदर्शिता और जवाबदेही ढांचे की आधारशिला है, जो नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों से जानकारी मांगने का अधिकार देता है। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) केंद्रीय स्तर पर अधिनियम के तहत अपीलों और शिकायतों का निपटारा करने वाला सर्वोच्च निकाय है। मामलों के निपटान में लगातार बैकलॉग और देरी लंबे समय से आलोचना का विषय रही है, जिससे कानून की प्रभावशीलता कम हुई है। यह संसदीय समीक्षा इन्हीं परिचालन चुनौतियों की पृष्ठभूमि में हो रही है।

मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ

विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समिति का यह निर्णय एक महत्वपूर्ण शासन कानून के कार्यकारी क्रियान्वयन पर विधायी निगरानी को दर्शाता है। पूर्ण आयुक्त क्षमता के बावजूद CIC के कामकाज की समीक्षा, जिसमें इसकी केस निपटान दर भी शामिल है, प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने, डिजिटल अवसंरचना या यहां तक कि RTI अधिनियम में संशोधनों पर सिफारिशें दे सकती है। समिति के एजेंडे में केंद्रीय सेवाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण नीति के क्रियान्वयन को शामिल करना पारदर्शिता को सामाजिक न्याय से जोड़ता है, जिसमें प्रणालीगत बाधाओं की जांच की जाती है।

भविष्य की संभावनाएं/आगे का रास्ता

समिति के निष्कर्ष और सिफारिशें, जो संसद को एक रिपोर्ट में अपेक्षित हैं, लंबित मामलों को कम करने के लिए ठोस उपाय सुझा सकती हैं, जैसे राज्य और केंद्रीय स्तरों पर सूचना आयोगों को मजबूत करना, समयबद्ध निपटान अनिवार्य करना, या सक्रिय प्रकटीकरण को बढ़ाना। यह राज्य सूचना आयोगों में आयुक्तों के पदों को न भरने जैसे मुद्दों को भी संबोधित कर सकता है। यह समीक्षा RTI व्यवस्था को पुनर्जीवित करने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि यह नागरिक सशक्तिकरण के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बना रहे।

4पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005
भारतीय संसद का एक अधिनियम जो सार्वजनिक प्राधिकरणों से नागरिकों के सूचना के अधिकार से संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं को निर्धारित करता है। इसने सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम, 2002 का स्थान लिया।
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC)
RTI अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय। यह केंद्रीय स्तर पर RTI मामलों के लिए अंतिम अपीलीय प्राधिकरण है और इसका नेतृत्व मुख्य सूचना आयुक्त करते हैं।
विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समिति
सरकार के काम की जांच के लिए संसद द्वारा गठित सांसदों की एक समिति। वे संबंधित मंत्रालयों के बजटीय आवंटन, विधेयकों और नीतियों की जांच करते हैं। उल्लिखित समिति कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय के लिए है।

5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • डेटा: CIC में 10,000 से अधिक लंबित मामले
  • नोडल निकाय: कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति
  • कानूनी बिंदु: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

गलती मत करना!

वे 'CIC की कुल स्वीकृत क्षमता' (मुख्य सहित 11) बनाम 'वर्तमान कार्य क्षमता' के बारे में पूछ सकते हैं। वे CIC को राज्य सूचना आयोग (SIC) या निर्वाचन आयोग जैसे अन्य आयोगों के साथ भी भ्रमित कर सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें

पारदर्शिता घाटा, नागरिक-केंद्रित शासन, संसदीय निगरानी, न्यायिक बैकलॉग, सामाजिक लेखापरीक्षा

6अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1कठिन

    संसदीय पैनल समीक्षा के बारे में समाचार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.RTI अधिनियम की समीक्षा करने वाला पैनल कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय संबंधी विभागीय स्थायी समिति है।
    2. 2.केंद्रीय सूचना आयोग वर्तमान में 11 की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले केवल 7 आयुक्तों के साथ कार्य कर रहा है।
    3. 3.पैनल केंद्रीय सेवाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण नीतियों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा करेगा।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  2. Q2मध्यम

    RTI अधिनियम और CIC के कामकाज की समीक्षा करने के संसदीय समिति के निर्णय का प्राथमिक महत्व क्या है?

7सभी स्रोत

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