ब्रिक्स संसदीय मंच 2026: घोषणा में पहलगाम हमले (26 की मौत, अप्रैल 2025) की निंदा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधारों का आग्रह
किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी
- UPSC8/10
- SSC7/10
1खबर एक नज़र में
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की संयुक्त घोषणा आतंकवाद, विशेष रूप से अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले की कड़ी निंदा करती है। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों की वकालत करती है। यह एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ सामूहिक रुख को दर्शाता है और वैश्विक संघर्षों के लिए बहुपक्षीय समाधानों का आह्वान करता है।
आतंकवाद की निंदा
ब्रिक्स मंच ने 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और दोहरे मानकों को खारिज करते हुए शून्य सहिष्णुता का आह्वान किया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर ज़ोर
घोषणा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि और प्रभावी बनाने के लिए तत्काल सुधारों पर ज़ोर दिया।
एकतरफावाद के खिलाफ
मंच ने प्रतिबंधों जैसे एकतरफा ज़बरदस्ती उपायों की निंदा की और मानवाधिकारों व विकास पर उनके नकारात्मक प्रभावों का हवाला दिया।
2याद रखने वाले तथ्य
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3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ / पृष्ठभूमि
ब्रिक्स समूह नए सदस्यों के साथ ब्रिक्स+ में विकसित हुआ है, जिससे इसकी संसदीय घोषणाएं एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने के लिए महत्वपूर्ण हो गई हैं। भारत, एक संस्थापक सदस्य के रूप में, सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता के लिए अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग की वकालत करने के लिए इस मंच का उपयोग करता है। पहलगाम हमले का संदर्भ भारत की सुरक्षा चिंताओं को एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति के साथ जोड़ता है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
आतंकवाद और संयुक्त राष्ट्र सुधार पर घोषणा का दोहरा ध्यान रणनीतिक है। जम्मू-कश्मीर में एक विशिष्ट हमले की निंदा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत के आख्यान को पुष्ट करती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधारों के लिए दबाव, जो भारत का एक सुसंगत राजनयिक लक्ष्य है, सामूहिक ब्रिक्स समर्थन के साथ गति प्राप्त करता है। एकतरफा प्रतिबंधों की आलोचना अप्रत्यक्ष रूप से रूस और ईरान जैसे देशों के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व वाले आर्थिक उपायों को लक्षित करती है, जो वैश्विक शासन के ब्रिक्स के वैकल्पिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है।
भविष्य की संभावना / आगे का रास्ता
यह घोषणा लंबे समय से लंबित अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (CCIT) को अंतिम रूप देने के भारत के प्रयासों को राजनयिक बल देती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधारों के लिए सामूहिक आह्वान वैश्विक विमर्श में इस मुद्दे को जीवित रखेगा, हालांकि संरचनात्मक परिवर्तनों को महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। पश्चिम एशिया पर ब्रिक्स की स्थिति संवाद के माध्यम से क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने के राजनयिक प्रयासों को प्रभावित कर सकती है।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- BRICS
- पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक संघ: ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। इसमें हाल ही में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल करने के लिए विस्तार किया गया है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)
- संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक, जिस पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व है। इसमें वीटो शक्ति वाले 5 स्थायी सदस्य (P5) (अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन, फ्रांस) और दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए 10 गैर-स्थायी सदस्य हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (CCIT)
- आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से एक प्रस्तावित संधि। संयुक्त राष्ट्र में बातचीत दशकों से रुकी हुई है, मुख्य रूप से 'आतंकवादी' की परिभाषा और अभिसमय के दायरे को लेकर।
- एकतरफा ज़बरदस्ती उपाय
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से प्राधिकरण के बिना किसी एक देश या समूह द्वारा लगाए गए आर्थिक या राजनीतिक प्रतिबंध। इनकी अक्सर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने और नागरिक आबादी को नुकसान पहुंचाने के लिए आलोचना की जाती है।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए।
- नोडल निकाय: ब्रिक्स संसदीय मंच (12वां संस्करण)।
- कानूनी बिंदु: अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (CCIT) को अंतिम रूप देने का आह्वान।
गलती मत करना!
वे पूछ सकते हैं कि कौन सा देश ब्रिक्स सदस्य नहीं है, मूल सदस्यों बनाम नए सदस्यों (मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात) को सूचीबद्ध करके। वे पहलगाम हमले में हताहतों की संख्या/तारीख को भी बदल सकते हैं या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधार को संयुक्त राष्ट्र महासभा सुधार के साथ भ्रमित कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, सुधारित बहुपक्षवाद, आतंकवाद के लिए शून्य सहिष्णुता, आतंकवाद विरोधी में दोहरा मापदंड
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्घाटन किस भारतीय संवैधानिक पदाधिकारी ने किया था?
व्याख्या: लेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दो दिवसीय मंच का 'उद्घाटन सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया'। लोकसभा अध्यक्ष भारत की संसद के निचले सदन के पीठासीन अधिकारी होते हैं।
- Q2कठिन
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की संयुक्त घोषणा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.इसने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की।
- 2.इसने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सुधारों का आह्वान किया ताकि इसे अधिक प्रतिनिधि बनाया जा सके।
- 3.इसने पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता व्यक्त की और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा का आह्वान किया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि घोषणा ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले की निंदा की थी। कथन 2 गलत है क्योंकि घोषणा विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की मांग करती है, न कि महासभा में। कथन 3 सही है क्योंकि घोषणा ने पश्चिम एशिया में तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की और नागरिकों की सुरक्षा का आग्रह किया। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
ब्रिक्स संसदीय मंच की घोषणा के अनुसार, अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में कितने लोग मारे गए थे?
व्याख्या: ब्रिक्स संसदीय मंच की संयुक्त घोषणा में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में '26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए'। अन्य विकल्प भ्रमित करने वाले हैं।
- Q4मध्यम
संयुक्त राष्ट्र के संबंध में ब्रिक्स घोषणा में उजागर प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: घोषणा में स्पष्ट रूप से कहा गया है: 'हम वर्तमान अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा वास्तुकला में सुधार की तात्कालिकता पर ज़ोर देते हैं... और संयुक्त राष्ट्र, जिसमें इसकी सुरक्षा परिषद भी शामिल है, के व्यापक सुधार का समर्थन करते हैं।' अन्य विकल्पों का लेख में उल्लेख नहीं है।

