इसरो की नई पीढ़ी की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां: NGLV (₹8,240 करोड़, 30 टन LEO), RLV पुष्पक, स्क्रैमजेट और इन-स्पेस डॉकिंग
किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी
- UPSC9/10
- SSC8/10
- BPSC7/10
- UPPSC7/10
- JPSC7/10
- Railway7/10
1खबर एक नज़र में
भारत पुन: प्रयोज्य NGLV, इलेक्ट्रिक और ग्रीन प्रोपल्शन तथा स्वायत्त इन-स्पेस डॉकिंग जैसी अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के साथ अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को आगे बढ़ा रहा है।
NGLV: एक बड़ी छलांग
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 टन LEO क्षमता वाले नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल के लिए ₹8,240 करोड़ को मंज़ूरी दी, जिससे भारत की पेलोड क्षमता तीन गुना हो जाएगी।
इन-स्पेस डॉकिंग में महारत हासिल
इसरो के SpaDeX मिशन ने स्वायत्त डॉकिंग हासिल की, जिससे भारत इस क्षमता वाला चौथा देश बन गया, जो अंतरिक्ष स्टेशनों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रोपल्शन क्रांति
इसरो लागत प्रभावी अंतरिक्ष पहुंच के लिए पुन: प्रयोज्य (RLV पुष्पक), एयर-ब्रीदिंग (स्क्रैमजेट), इलेक्ट्रिक और ग्रीन प्रोपल्शन प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ा रहा है।
2याद रखने वाले तथ्य
कार्ड दबाएँ और जवाब देखें। पहले खुद याद करने की कोशिश करें।
3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ / पृष्ठभूमि
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम, जो 1962 में INCOSPAR के साथ शुरू हुआ और 1969 में इसरो के रूप में औपचारिक रूप दिया गया, एक विकास-केंद्रित इकाई से एक वैश्विक नेता के रूप में विकसित हुआ है। सामाजिक लाभों (संचार, मौसम, आपदा प्रबंधन) के लिए अंतरिक्ष का उपयोग करने के दर्शन ने नींव रखी। अब, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्र अन्वेषण और 44 बिलियन डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के लिए पारंपरिक PSLV, GSLV और LVM3 रॉकेटों से परे एक तकनीकी छलांग की आवश्यकता है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
NGLV (₹8,240 करोड़) भारी-भरकम और पुन: प्रयोज्यता की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो अंतरिक्ष तक लागत प्रभावी पहुंच और मेगा-कॉन्स्टेलेशन के लिए आवश्यक है। RLV (पुष्पक), स्क्रैमजेट और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (300 mN थ्रस्टर) जैसी प्रौद्योगिकियों का लक्ष्य प्रक्षेपण लागत और उपग्रह द्रव्यमान को नाटकीय रूप से कम करना है। सफल SpaDeX डॉकिंग (जनवरी-अप्रैल 2025) इन-ऑर्बिट सर्विसिंग, अंतरिक्ष स्टेशन असेंबली और नमूना वापसी मिशनों के लिए एक मूलभूत खंड है, जो रणनीतिक स्वायत्तता और वाणिज्यिक क्षमता को बढ़ाता है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता
मानव अंतरिक्ष उड़ान (गगनयान) और अंतरग्रहीय मिशनों के लिए NGLV को चालू करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। रेडियोआइसोटोप पावर सिस्टम (RHU/RTG) पर परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ सहयोग गहरे सौर मंडल के अन्वेषण को सक्षम करेगा। निजी सेक्टर के निवेश (मार्च 2026 तक स्टार्टअप्स में 618.5 मिलियन डॉलर) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (118 समझौते) की वृद्धि 2033 तक 44 बिलियन डॉलर के अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे भारत एक अग्रणी अंतरिक्ष-यात्री राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (SSO)
- एक निकट-ध्रुवीय कक्षा जहां एक उपग्रह पृथ्वी पर किसी भी दिए गए बिंदु पर प्रत्येक दिन एक ही स्थानीय सौर समय पर गुजरता है, जिससे पृथ्वी अवलोकन के लिए लगातार प्रकाश की स्थिति सक्षम होती है।
- भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा (GTO)
- एक अण्डाकार कक्षा जिसका उपयोग उपग्रह को भूस्थिर कक्षा (GEO) में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। उपग्रह का ऑनबोर्ड मोटर भूमध्य रेखा से ~35,786 किमी ऊपर कक्षा को गोलाकार बनाने के लिए अपोजी पर फायर करता है।
- क्रायोजेनिक ऊपरी चरण
- एक रॉकेट का अंतिम चरण जो अत्यधिक कम तापमान पर संग्रहीत तरल हाइड्रोजन (ईंधन) और तरल ऑक्सीजन (ऑक्सीडाइज़र) का उपयोग करता है, जो भारी उपग्रहों को उच्च कक्षाओं में स्थापित करने के लिए उच्च दक्षता प्रदान करता है।
- विशिष्ट आवेग
- प्रोपल्शन दक्षता का एक माप, जो प्रति सेकंड खपत किए गए प्रणोदक के प्रति इकाई भार पर उत्पन्न थ्रस्ट का प्रतिनिधित्व करता है। उच्च विशिष्ट आवेग का अर्थ है अधिक ईंधन दक्षता।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: ₹8,240 करोड़ (NGLV परिव्यय) और 30 टन (LEO क्षमता)
- नोडल निकाय: अंतरिक्ष विभाग / इसरो
- रैंकिंग: स्वायत्त अंतरिक्ष डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश
गलती मत करना!
भ्रमित करने वाली पेलोड क्षमताएं: LVM3 (10 टन LEO) बनाम NGLV (30 टन LEO) बनाम PSLV (1.75 टन SSPO)। वे 'भूस्थिर' को 'भू-तुल्यकालिक' या 'सूर्य-तुल्यकालिक' कक्षाओं से बदल सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
अंतरिक्ष में रणनीतिक स्वायत्तताअंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक-निजी भागीदारीप्रौद्योगिकी स्वदेशीकरण (आत्मनिर्भरता)
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) और SpaDeX डॉकिंग मिशन के विकास के लिए मुख्य रूप से कौन सा भारतीय संगठन ज़िम्मेदार है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि अंतरिक्ष विभाग/इसरो NGLV विकसित कर रहा है और उसने SpaDeX मिशन का संचालन किया। जबकि IN-SPACe एक नियामक निकाय है और DRDO/DAE विशिष्ट क्षेत्रों में सहयोगी हैं, इसरो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए प्राथमिक निष्पादन एजेंसी है।
- Q2कठिन
भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में अधिकतम पेलोड क्षमता 10 टन है।
- 2.भारत SpaDeX मिशन के माध्यम से कक्षा में दो अंतरिक्ष यानों की स्वायत्त डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश बन गया।
- 3.इसरो के स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण में तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन का उपयोग प्रणोदक के रूप में किया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है: NGLV की क्षमता LEO में 30 टन है, जबकि 10 टन वर्तमान LVM3 की क्षमता है। लेख के अनुसार कथन 2 सही है। कथन 3 सही है क्योंकि स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण में LH2 और LOX का उपयोग किया जाता है।
- Q3मध्यम
नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) के विकास के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित वित्तीय परिव्यय कितना है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में NGLV के लिए ₹8,240 करोड़ के परिव्यय को मंज़ूरी दी। इसमें विकास लागत, तीन विकासात्मक उड़ानें और आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं।
- Q4मध्यम
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में पुन: प्रयोज्य लॉन्च व्हीकल (RLV) और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन जैसी प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के पीछे प्राथमिक रणनीतिक उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि RLV की पुन: प्रयोज्यता प्रक्षेपण लागत को कम करती है, और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन बहुत कम प्रणोदक का उपयोग करता है, जिससे पेलोड के लिए द्रव्यमान मुक्त हो जाता है। यह लागत-प्रभावशीलता और मिशन क्षमता को बढ़ाता है, जो कार्यक्रम के विकास और वाणिज्यिक व्यवहार्यता के लिए केंद्रीय हैं।
7सभी स्रोत
मूल खबर28 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
