डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023: प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर मीडिया घरानों ने धारा 7, 17(2), 36, 37, 44(3) को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी
किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी
- UPSC8/10
- BPSC7/10
- UPPSC7/10
1खबर एक नज़र में
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA), जो 21 प्रमुख मीडिया घरानों का प्रतिनिधित्व करता है, ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (DPDP एक्ट) के प्रमुख प्रावधानों को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है। उनका तर्क है कि पत्रकारिता गतिविधियों के लिए कानून में विशिष्ट छूट न होने और डेटा प्रोसेसिंग के लिए पूर्व सहमति लेने की अनिवार्यता से पूर्व-सेंसरशिप हो सकती है और खोजी पत्रकारिता गंभीर रूप से बाधित हो सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होगी।
संवैधानिक चुनौती
मीडिया संघ ने प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरे का हवाला देते हुए अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में DPDP एक्ट 2023 को चुनौती दी।
मुख्य पत्रकारिता संबंधी चिंता
एक्ट में पत्रकारिता संबंधी छूट न होने और पूर्व सहमति की आवश्यकता से खोजी रिपोर्टिंग बाधित हो सकती है और पूर्व-सेंसरशिप को बढ़ावा मिल सकता है।
व्हिसलब्लोअर जोखिम
चुनौती दी गई धारा 36 और नियम 23 सरकार को डेटा तक व्यापक पहुँच की शक्तियाँ प्रदान करते हैं, जिससे गोपनीय पत्रकारिता स्रोतों के उजागर होने की संभावना है।
2याद रखने वाले तथ्य
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3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ / पृष्ठभूमि
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023, वर्षों के विचार-विमर्श के बाद अधिनियमित किया गया, जिसने 2018, 2019 और 2021 के पिछले मसौदा विधेयकों का स्थान लिया। विशेष रूप से, पहले के मसौदों (जैसे 2018 विधेयक की धारा 47) में पत्रकारिता के उद्देश्यों के लिए स्पष्ट छूट शामिल थी, लेकिन अंतिम 2023 एक्ट में इसे छोड़ दिया गया, और इसके बजाय सरकार को छूट अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया। यह चूक मीडिया संस्थाओं द्वारा की गई कानूनी चुनौती का मूल है, जो इसे एक प्रतिगमन के रूप में देखते हैं।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
याचिका निजता के अधिकार (DPDP एक्ट में निहित) और भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(a)) के बीच एक मौलिक संघर्ष उठाती है। इसमें तर्क दिया गया है कि पत्रकारों को समाचार प्रकाशित करने से पहले विषयों से पूर्व सहमति प्राप्त करने के लिए मजबूर करना, विशेष रूप से भ्रष्टाचार या सार्वजनिक हित के मामलों में, पत्रकारिता के मूल सार को कमजोर करता है। धारा 36 और नियम 23 को चुनौती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पर्याप्त न्यायिक निरीक्षण के बिना 'डेटा फिड्यूशियरी' से डेटा तक पहुँचने की सरकार की शक्तियों पर सवाल उठाती है, जिससे व्हिसलब्लोअर और गोपनीय स्रोत संभावित रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएँ / आगे का रास्ता
सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस इंगित करता है कि वह निजता और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन की जाँच करने में योग्यता देखता है। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों पर सुझाव आमंत्रित किए हैं। परिणाम एक ऐतिहासिक निर्णय का कारण बन सकता है जो स्वतंत्र प्रेस के संदर्भ में डेटा संरक्षण की सीमाओं को परिभाषित करेगा, संभावित रूप से एक विशिष्ट पत्रकारिता छूट या सरकारी डेटा पहुँच शक्तियों के लिए मजबूत प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को अनिवार्य करेगा।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- संविधान का अनुच्छेद 32
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्रदान करता है, जिससे व्यक्तियों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने की अनुमति मिलती है। यह स्वयं एक मौलिक अधिकार है।
- प्रेस की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a))
- हालांकि स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है, सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि प्रेस की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत गारंटीकृत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में निहित है।
- डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023
- भारत का प्रमुख कानून जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण को नियंत्रित करता है। यह व्यक्तियों (डेटा प्रिंसिपल) के अधिकारों और डेटा को संसाधित करने वाली संस्थाओं (डेटा फिड्यूशियरी) के कर्तव्यों को स्थापित करता है, और भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड का गठन करता है।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- कानूनी बिंदु: DPDP एक्ट 2023 की धारा 7, 17(2), 36, 37, 44(3) और नियम 16, 17, 23 को चुनौती।
- नोडल निकाय: डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) जो 21 मीडिया घरानों का प्रतिनिधित्व करता है।
- संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका।
- तारीख: सर्वोच्च न्यायालय की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को निर्धारित है।
गलती मत करना!
जाल: डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 को उसके पहले के मसौदों (2018, 2019 विधेयक) के साथ भ्रमित करना, जिनमें पत्रकारिता संबंधी छूट थी। परीक्षक पूछ सकता है कि किस विधेयक में पत्रकारिता छूट के लिए धारा 47 थी (उत्तर: 2018 विधेयक), या यह बता सकता है कि 2023 एक्ट में एक स्पष्ट छूट है (जो इसमें नहीं है)।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
मौलिक अधिकारों का संतुलनस्वतंत्र भाषण पर नकारात्मक प्रभावपूर्व-सेंसरशिप बनाम जिम्मेदार पत्रकारितान्यायिक निरीक्षण और राज्य शक्ति
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
संविधान के किस अनुच्छेद के तहत डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अपनी याचिका दायर की है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि DNPA ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है, जो मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार प्रदान करता है।
- Q2कठिन
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 को कानूनी चुनौती के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.याचिका में तर्क दिया गया है कि डेटा प्रोसेसिंग के लिए पूर्व सहमति की एक्ट की आवश्यकता समाचार रिपोर्टिंग की समयबद्ध प्रकृति को खतरे में डालती है।
- 2.एक्ट, अपने 2018 और 2019 के मसौदा संस्करणों के विपरीत, धारा 47 के तहत पत्रकारिता गतिविधियों के लिए एक विशिष्ट छूट खंड शामिल करता है।
- 3.याचिकाकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है कि कुछ प्रावधानों का उपयोग गोपनीय पत्रकारिता स्रोतों की पहचान करने और उन्हें लक्षित करने के लिए किया जा सकता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि लेख में इस तर्क का उल्लेख है कि समाचार समयबद्ध होना चाहिए और पूर्व सहमति इसमें बाधा डालेगी। कथन 2 गलत है; लेख में कहा गया है कि 2018 के विधेयक में धारा 47 में छूट थी, लेकिन अंतिम 2023 एक्ट में विशिष्ट पत्रकारिता छूट नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि लेख में इस आशंका का उल्लेख है कि धारा 36 और नियम 23 के तहत शक्तियों का उपयोग व्हिसलब्लोअर और गोपनीय स्रोतों को उजागर करने के लिए किया जा सकता है।
- Q3मध्यम
लेख के अनुसार, इस याचिका में डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) द्वारा कितने प्रमुख मीडिया संगठनों के डिजिटल विंग का प्रतिनिधित्व किया गया है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) में 21 प्रमुख मीडिया संगठनों के डिजिटल विंग शामिल हैं, जिसमें द इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू और इंडिया टुडे जैसे उदाहरण सूचीबद्ध हैं।
- Q4मध्यम
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 को मीडिया घरानों की चुनौती से उजागर होने वाला प्राथमिक संवैधानिक संघर्ष क्या है?
व्याख्या: याचिका का मूल निजता के अधिकार, जिसे DPDP एक्ट संरक्षित करना चाहता है, और प्रेस की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a) का एक हिस्सा) के बीच तनाव है। लेख में नागरिकों के अधिकारों (निजता) और मीडिया के अधिकारों (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के बीच संतुलन की आवश्यकता पर चर्चा की गई है, जैसा कि मुख्य न्यायाधीश ने उल्लेख किया है।

