तूतीकोरिन मेगा शिपयार्ड: 2.5 मिलियन GT क्षमता के निर्माण के लिए 4 बिलियन डॉलर की ग्रीनफील्ड परियोजना, भारत-कोरिया साझेदारी की प्रमुख पहल
किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी
- UPSC7/10
1खबर एक नज़र में
भारत, भारत-गणराज्य कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी के तहत एक बड़ी शिपबिल्डिंग पहल को आगे बढ़ा रहा है। तमिलनाडु के तूतीकोरिन में 4 बिलियन डॉलर के ग्रीनफील्ड शिपयार्ड का लक्ष्य प्रति वर्ष 2.5 मिलियन सकल टन (GT) की क्षमता हासिल करना है, जिससे यह भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक शिपयार्ड बन जाएगा। एक संयुक्त कार्य समूह द्वारा निर्देशित यह परियोजना, घरेलू शिपबिल्डिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कार्यबल को कुशल बनाने पर केंद्रित है।
मेगा क्षमता लक्ष्य
प्रस्तावित तूतीकोरिन शिपयार्ड का लक्ष्य 2.5 मिलियन सकल टन की वार्षिक निर्माण क्षमता है, जो भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक शिपयार्ड बनने वाला है।
भारत-कोरिया रणनीतिक साझेदारी
यह परियोजना भारत-गणराज्य कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी के तहत एक प्रमुख पहल है, जिसमें HD KSOE प्राथमिक रणनीतिक निवेशक है।
तकनीकी हस्तांतरण और कौशल विकास पर ध्यान
योजना का मुख्य बिंदु दक्षिण कोरिया से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कार्यबल को कुशल बनाना है, जिसमें भारतीय उद्योग जगत और शिक्षा जगत शामिल होंगे।
2याद रखने वाले तथ्य
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3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ / पृष्ठभूमि
भारत का शिपबिल्डिंग उद्योग दक्षिण कोरिया, चीन और जापान जैसे वैश्विक दिग्गजों से काफी पीछे रहा है, जिसकी वैश्विक बाज़ार हिस्सेदारी 1% से भी कम है। सरकार का 'समुद्री भारत विज़न 2030' और 'अमृत काल विज़न 2047' व्यापार, सुरक्षा और रोज़गार के लिए महत्वपूर्ण एक रणनीतिक सेक्टर में घरेलू क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर इसे ठीक करने का लक्ष्य रखते हैं। यह परियोजना अप्रैल 2026 में हस्ताक्षरित शिपबिल्डिंग में साझेदारी के लिए भारत-कोरिया व्यापक ढांचे पर आधारित है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
4 बिलियन डॉलर का निवेश सरकार की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम के तहत एक बड़ा प्रोत्साहन दर्शाता है। 2.5 मिलियन GT की क्षमता भारत के वर्तमान उत्पादन में नाटकीय रूप से वृद्धि करेगी, जिससे बढ़ती घरेलू मांग (सार्वजनिक एजेंसियों द्वारा 400 से अधिक जहाजों की आवश्यकता) और निर्यात बाजारों को पूरा किया जा सकेगा। HD KSOE के साथ संयुक्त उद्यम पर जोर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुंच सुनिश्चित करता है, जबकि स्थानीय विनिर्माण और कौशल विकास पर ध्यान एक समग्र शिपबिल्डिंग पारिस्थितिकी तंत्र बनाने और आयात निर्भरता को कम करने का लक्ष्य रखता है।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
अर्थशास्त्र से परे, यह भारत-कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करता है, इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा से आगे बढ़ाता है। भारत के लिए, यह दक्षिणी प्रायद्वीप में समुद्री बुनियादी ढांचे को बढ़ाता है, बंदरगाह-आधारित विकास के लिए सागरमाला कार्यक्रम के साथ संरेखित होता है, और भू-आर्थिक प्रभाव को बढ़ाता है। यहां सफलता भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग आपूर्ति श्रृंखला में एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में स्थापित कर सकती है, खासकर जब अन्य राष्ट्र क्षमता बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता
तत्काल अगला कदम एक संयुक्त कार्य समूह (JWG) का गठन और छह महीने के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप देना है। इसमें पोत उत्पाद मिश्रण, सटीक लागत और कार्यान्वयन अनुसूची का विवरण होगा। चुनौतियों में सभी वैधानिक अनुमोदनों को सुरक्षित करना, भूमि आवंटन और समय पर बुनियादी ढांचे का विकास सुनिश्चित करना शामिल है। दीर्घकालिक सफलता निरंतर नीतिगत समर्थन, प्रतिस्पर्धी वित्तपोषण और भारतीय कार्यबल द्वारा प्रभावी प्रौद्योगिकी अवशोषण पर निर्भर करती है।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- सकल टन भार (GT)
- यह किसी जहाज के कुल आंतरिक आयतन का माप है, न कि उसके भार का। एक सकल टन 100 घन फुट के बराबर होता है। यह बंदरगाह शुल्क, विनियमों और शिपयार्ड की क्षमता निर्धारित करने के लिए एक प्रमुख मीट्रिक है।
- ग्रीनफील्ड परियोजना
- एक निवेश परियोजना जिसमें एक नई सुविधा पहले से अप्रयुक्त या अविकसित भूमि ('ग्रीनफील्ड') पर बनाई जाती है, 'ब्राउनफील्ड' परियोजना के विपरीत जो मौजूदा सुविधा को संशोधित या विस्तारित करती है।
- विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR)
- किसी परियोजना की योजना और कार्यान्वयन के लिए तैयार किया गया एक व्यापक दस्तावेज़। इसमें तकनीकी विवरण, लागत अनुमान, कार्यान्वयन अनुसूची, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और वित्तीय व्यवहार्यता विश्लेषण शामिल है।
- संयुक्त उद्यम (JV)
- एक व्यावसायिक व्यवस्था जहाँ दो या दो से अधिक पक्ष किसी विशिष्ट कार्य को पूरा करने के लिए अपने संसाधनों को एकत्रित करने के लिए सहमत होते हैं, जो एक नई परियोजना या व्यावसायिक गतिविधि हो सकती है। प्रत्येक प्रतिभागी इससे जुड़े लाभ, हानि और लागत के लिए ज़िम्मेदार होता है।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: 2.5 मिलियन सकल टन (GT) की प्रस्तावित वार्षिक क्षमता और 4 बिलियन डॉलर का निवेश।
- नोडल निकाय: बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय और कार्यान्वयन कंपनी नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हैवी इंडस्ट्रीज पार्क, तमिलनाडु लिमिटेड (NSHIP-TN)।
- साझेदारी: यह परियोजना भारत-गणराज्य कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी के तहत एक प्रमुख पहल है।
गलती मत करना!
वे 'तूतीकोरिन' के बजाय 'कोच्चि' या 'विशाखापत्तनम' (अन्य प्रमुख भारतीय शिपबिल्डिंग हब) को स्थान के रूप में पूछ सकते हैं। वे क्षमता इकाई को 'सकल टन भार (GT)' के बजाय 'डेडवेट टन भार (DWT)' के रूप में भ्रमित कर सकते हैं। एक और जाल भागीदार देश को 'जापान' या 'जर्मनी' से बदलना है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
"शिपबिल्डिंग में आत्मनिर्भरता", "सागरमाला के तहत बंदरगाह-आधारित विकास", "औद्योगिक उन्नयन के लिए रणनीतिक प्रौद्योगिकी साझेदारी"
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
तूतीकोरिन में प्रस्तावित मेगा शिपयार्ड के विकास के लिए कौन सा केंद्रीय मंत्रालय नोडल मंत्रालय है?
व्याख्या: यह लेख बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की एक प्रेस विज्ञप्ति है, और बैठक की अध्यक्षता इसके मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने की थी। शिपबिल्डिंग और बंदरगाह बुनियादी ढांचा इस मंत्रालय के जनादेश के अंतर्गत आते हैं।
- Q2कठिन
तूतीकोरिन में प्रस्तावित मेगा शिपयार्ड के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.इसकी परिकल्पना लगभग 2.5 मिलियन सकल टन (GT) की वार्षिक शिपबिल्डिंग क्षमता के लिए की गई है।
- 2.यह परियोजना केवल भारत सरकार और दक्षिण कोरिया सरकार के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित की जा रही है।
- 3.सहयोग का एक प्रमुख उद्देश्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कार्यबल का कौशल विकास है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 लेख के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है; संयुक्त उद्यम नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हैवी इंडस्ट्रीज पार्क, तमिलनाडु लिमिटेड (NSHIP-TN) और निजी कोरियाई कंपनी HD कोरिया शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग (HD KSOE) के बीच है, न कि सीधे दोनों सरकारों के बीच। कथन 3 सही है क्योंकि लेख प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कार्यबल के कौशल विकास पर जोर देता है।
- Q3मध्यम
लेख में उल्लिखित तूतीकोरिन में ग्रीनफील्ड मेगा शिपयार्ड के लिए प्रस्तावित कुल निवेश कितना है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से कहता है: '4 बिलियन डॉलर के निवेश वाला एक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड एक बड़ा मील का पत्थर है...'। अन्य विकल्प विभिन्न आंकड़ों या मुद्राओं के साथ संभावित भ्रमित करने वाले विकल्प हैं।
- Q4मध्यम
लेख से अनुमानित, तूतीकोरिन शिपयार्ड के लिए HD हुंडई/KSOE के साथ साझेदारी में भारत का प्राथमिक रणनीतिक उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: लेख में बार-बार 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण', 'वैश्विक विशेषज्ञता', 'उन्नत विनिर्माण' और 'भारत में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपबिल्डिंग पारिस्थितिकी तंत्र' स्थापित करने के लक्ष्य पर जोर दिया गया है। जबकि घरेलू मांग (वाणिज्यिक जहाजों सहित) का उल्लेख किया गया है, मुख्य रणनीतिक उद्देश्य तकनीकी उन्नयन और पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण है।
7सभी स्रोत
मूल खबर28 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
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2 स्रोत