राजव्यवस्थाखबर 28 / 36

औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत 'उद्योग' की परिभाषा: सर्वोच्च न्यायालय 'ट्रिपल टेस्ट' मानदंड पर आधारित चुनौती पर सुनवाई करेगा

28 अक्टूबर 2026The Hindu2 मिनट4 प्रश्न

किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी

  • UPSC7/10

1खबर एक नज़र में

सर्वोच्च न्यायालय ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत 'उद्योग' की परिभाषा को चुनौती देने वाली एक कानूनी याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की है। यह परिभाषा श्रमिक सुरक्षा तय करने के लिए महत्वपूर्ण है। एक ट्रेड यूनियन ने यह याचिका दायर कर तर्क दिया है कि नई परिभाषा अस्पष्ट है और इसमें कई महत्वपूर्ण सेक्टर शामिल नहीं हैं। इससे पहले, न्यायालय की हालिया नौ-न्यायाधीशों की पीठ ने नई परिभाषा को 1978 के एक ऐतिहासिक 'ट्रिपल टेस्ट' मिसाल से अलग कर दिया था।

  • कानूनी चुनौती

    सर्वोच्च न्यायालय ने नई औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत 'उद्योग' की परिभाषा को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की है।

  • 'ट्रिपल टेस्ट'

    चुनौती में तर्क दिया गया है कि नई परिभाषा 1978 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले द्वारा स्थापित 'ट्रिपल टेस्ट' को पूरा करने में विफल रहती है, जो यह निर्धारित करता है कि 'उद्योग' क्या है।

  • न्यायिक अलगाव

    हाल ही में नौ-न्यायाधीशों की पीठ ने माना कि नई संहिता की परिभाषा 1978 की व्याख्या से बंधी नहीं है, जिससे वर्तमान चुनौती भविष्य के श्रम कानून के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।

2याद रखने वाले तथ्य

कार्ड दबाएँ और जवाब देखें। पहले खुद याद करने की कोशिश करें।

3विस्तृत विश्लेषण

संदर्भ/पृष्ठभूमि

'उद्योग' की परिभाषा यह तय करती है कि कौन से प्रतिष्ठान और श्रमिक विवाद समाधान, यूनियनों और सुरक्षा के लिए श्रम कानूनों के दायरे में आते हैं। सात-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा 1978 के 'बैंगलोर जल आपूर्ति' मामले में 'ट्रिपल टेस्ट' का उपयोग करके एक व्यापक व्याख्या दी गई थी, जिसमें अस्पताल और शिक्षा जैसे सेक्टर को इसके दायरे में लाया गया। नई औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, जिसने पुराने अधिनियमों को समाहित कर लिया, ने धारा 2(p) में एक नई परिभाषा पेश की, जिससे इसके दायरे और बहिष्करण पर बहस छिड़ गई।

मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ

याचिका में तर्क दिया गया है कि IRC की धारा 2(p) 'अत्यधिक अस्पष्ट' है और धर्मार्थ, सामाजिक तथा संप्रभु सरकारी कार्यों के लिए इसकी व्यापक छूट लाखों श्रमिकों को श्रम सुरक्षा से वंचित कर सकती है। सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की पीठ ने अगस्त 2026 में पहले ही फैसला सुनाया था कि नई परिभाषा 1978 के मिसाल से बंधी नहीं है, जिससे कानूनी अनिश्चितता पैदा हो गई है। इस चुनौती का परिणाम भारत में औद्योगिक न्यायशास्त्र और श्रमिक अधिकारों के परिदृश्य को मौलिक रूप से नया आकार देगा, जो संगठित और असंगठित दोनों सेक्टर को प्रभावित करेगा।

भविष्य की संभावनाएं/आगे का रास्ता

सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई नए श्रम संहिताओं के तहत 'उद्योग' की व्याख्या पर आधिकारिक स्पष्टता प्रदान करेगी। इसका फैसला या तो IRC के विधायी इरादे को बरकरार रखेगा या इसे सामाजिक न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों के साथ संरेखित करने के लिए समायोजित करेगा। यह मामला एकीकृत श्रम संहिताओं के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है, और इसका निर्णय भविष्य के औद्योगिक संबंधों का मार्गदर्शन करेगा। यदि न्यायालय परिभाषा को संवैधानिक रूप से दोषपूर्ण पाता है, तो संभावित रूप से विधायी संशोधनों को ट्रिगर कर सकता है।

4पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी

औद्योगिक संबंध संहिता (IRC), 2020
यह चार नए श्रम संहिताओं में से एक है जो ट्रेड यूनियनों, औद्योगिक विवादों और काम करने की स्थितियों से संबंधित कानूनों को समेकित और संशोधित करता है। इसमें औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947, ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 और औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 शामिल हैं।
बैंगलोर जल आपूर्ति मामला (1978)
सात-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सर्वोच्च न्यायालय का एक ऐतिहासिक फैसला जिसने 'उद्योग' को परिभाषित करने के लिए 'ट्रिपल टेस्ट' निर्धारित किया। इसमें कहा गया कि मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए वस्तुओं/सेवाओं के उत्पादन के लिए नियोक्ता-श्रमिक सहयोग से आयोजित कोई भी व्यवस्थित गतिविधि एक उद्योग है, जिससे इसका दायरा काफी बढ़ गया।
ट्रिपल टेस्ट (उद्योग के लिए)
बैंगलोर जल आपूर्ति मामले में स्थापित तीन-आयामी परीक्षण: 1) व्यवस्थित गतिविधि, 2) नियोक्ता और श्रमिकों के बीच सहयोग से आयोजित, 3) मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए वस्तुओं/सेवाओं का उत्पादन/आपूर्ति/वितरण। तीनों शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए।

5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • कानूनी बिंदु: औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 2(p) के तहत 'उद्योग' की परिभाषा।
  • न्यायिक सिद्धांत: 1978 के बैंगलोर जल आपूर्ति मामले से 'ट्रिपल टेस्ट'।
  • केस कानून: बैंगलोर वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजप्पा (1978)।

गलती मत करना!

परीक्षा में पूछा जा सकता है कि कौन सी संहिता 'उद्योग' को परिभाषित करती है (IRC बनाम अन्य श्रम संहिताएं) या औद्योगिक विवाद अधिनियम की पुरानी धारा 2(j) को IRC की नई धारा 2(p) के साथ भ्रमित किया जा सकता है। एक और भ्रम यह हो सकता है कि किस मामले ने 'ट्रिपल टेस्ट' (बैंगलोर जल आपूर्ति) लागू किया बनाम किस पीठ ने हाल ही में इसकी समीक्षा की (2026 में नौ-न्यायाधीशों की पीठ)।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें

श्रम कानूनों की न्यायिक व्याख्याविधायी इरादे को श्रमिक सुरक्षा के साथ संतुलित करना'उद्योग' की परिभाषा का प्रतिबंधात्मक से व्यापक और फिर संहिताबद्ध दृष्टिकोण में विकास

6अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की किस धारा के तहत 'उद्योग' की परिभाषा प्रदान की गई है?

  2. Q2कठिन

    'उद्योग' की परिभाषा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.उद्योग को परिभाषित करने के लिए 'ट्रिपल टेस्ट' सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1978 के बैंगलोर जल आपूर्ति मामले में निर्धारित किया गया था।
    2. 2.औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, 'उद्योग' की परिभाषा के भीतर सरकार के सभी धर्मार्थ और संप्रभु कार्यों को स्पष्ट रूप से शामिल करती है।
    3. 3.सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की पीठ ने 2026 में माना कि नई संहिता के तहत परिभाषा 1978 की व्याख्या से बंधी नहीं है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    समाचार लेख के अनुसार, IRC, 2020 के तहत 'उद्योग' की परिभाषा को चुनौती देने वाली याचिका किस ट्रेड यूनियन द्वारा दायर की गई थी?

  4. Q4मध्यम

    औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में 'उद्योग' की परिभाषा के खिलाफ याचिका में उठाई गई प्राथमिक कानूनी चिंता क्या है?

7सभी स्रोत

आज का क्विज़पढ़ा है तो परख भी लें20 प्रश्न · तुरंत स्कोरशुरू करें

इस दिन की और खबरें

28 अक्टूबर 2026 की सभी खबरें →
Daily Quiz