सर्वोच्च न्यायालय ECI की निर्णय लेने की प्रक्रिया की जांच करेगा, 2023 के अधिनियम के अनुच्छेद 324 और धारा 18 के तहत सर्वसम्मति की पड़ताल करेगा।
किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी
1खबर एक नज़र में
यह न्यायिक पड़ताल अनुच्छेद 324 के तहत संवैधानिक अधिकार और भारत के स्वतंत्र चुनाव निकाय की कार्यात्मक अखंडता से संबंधित है।
न्यायिक पड़ताल
सर्वोच्च न्यायालय जांच करेगा कि क्या मतदाता सूची पुनरीक्षण पर ECI के निर्णय कानून के अनुसार सर्वसम्मत थे।
कानूनी अधिदेश
ECI का हलफनामा संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के निर्वाचन आयोग अधिनियम की धारा 18 के अनुपालन का हवाला देता है।
आरोप और बचाव
याचिकाकर्ताओं ने गैर-सर्वसम्मत निर्णयों और फॉर्म 6 में छेड़छाड़ का आरोप लगाया है, जबकि ECI अपनी प्रक्रिया को सर्वसम्मत और वैध बताकर बचाव कर रहा है।
2याद रखने वाले तथ्य
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3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ / पृष्ठभूमि
यह विवाद एक समाचार रिपोर्ट और उसके बाद की याचिकाओं से उपजा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग के हाल के निर्णय, विशेष रूप से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित, उसके तीन सदस्यीय निकाय द्वारा सर्वसम्मति से नहीं लिए गए थे। यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित और बाद में ECI को नियंत्रित करने वाले 2023 के अधिनियम में संहिताबद्ध सामूहिक निर्णय लेने के मूल सिद्धांत को चुनौती देता है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
इस मुद्दे के केंद्र में 2023 के अधिनियम की धारा 18 है, जो अनिवार्य करती है कि निर्वाचन आयोग अपने कामकाज का संचालन अपने सदस्यों के 'बहुमत के अनुसार' करेगा। ECI का हलफनामा सर्वसम्मत अनुपालन का दावा करता है, लेकिन याचिकाकर्ता सबूत के तौर पर आंतरिक फाइल नोटिंग की मांग कर रहे हैं। यह न्यायिक समीक्षा एक संवैधानिक निकाय की परिचालन स्वायत्तता और आंतरिक पारदर्शिता का परीक्षण करती है। मतदाता नामांकन के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म 6 में छेड़छाड़ के आरोप चुनावी अखंडता और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया की पवित्रता के बारे में और चिंताएं बढ़ाते हैं।
भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता
17 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। न्यायालय के अंतिम अवलोकन या निर्देश संवैधानिक निकायों के भीतर आंतरिक शासन और रिकॉर्ड-कीपिंग के लिए एक मिसाल कायम कर सकते हैं। इससे निर्णयों में सर्वसम्मति प्रदर्शित करने पर स्पष्ट दिशानिर्देश भी बन सकते हैं, जो न केवल ECI बल्कि अन्य बहु-सदस्यीय नियामक निकायों के कामकाज को प्रभावित करेंगे। परिणाम भारत के चुनाव प्रबंधन निकाय पर नियंत्रण और संतुलन को सुदृढ़ या फिर से परिभाषित करेगा।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- अनुच्छेद 324
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 भारत निर्वाचन आयोग, एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण में चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार देता है।
- भारत निर्वाचन आयोग
- अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित एक स्थायी, स्वतंत्र संवैधानिक निकाय, जो लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के कार्यालयों के लिए चुनाव प्रक्रियाओं के प्रशासन के लिए जिम्मेदार है।
- फॉर्म 6
- मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत एक निर्धारित फॉर्म, जिसका उपयोग एक पात्र नागरिक द्वारा मतदाता सूची में नाम शामिल करने के आवेदन के लिए किया जाता है, जिसने अर्हक तिथि पर 18 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- कानूनी बिंदु: मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 बहुमत से निर्णय अनिवार्य करती है।
- संवैधानिक अनुच्छेद: अनुच्छेद 324 भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना करता है।
- तारीख: सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर, 2026 को सूचीबद्ध किया।
गलती मत करना!
परीक्षक 'सर्वसम्मति' की आवश्यकता के बारे में पूछ सकते हैं। इसमें भ्रम यह है कि 2023 का अधिनियम 'बहुमत' से निर्णय की आवश्यकता है, न कि अनिवार्य रूप से 'सर्वसम्मति' की। ECI का सर्वसम्मति का दावा बहुमत की कानूनी न्यूनतम आवश्यकता से उच्च मानक है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
संवैधानिक निकायों की न्यायिक समीक्षाचुनावी अखंडता और पारदर्शितास्वतंत्र संस्थानों में स्वायत्तता और जवाबदेही के बीच तनाव
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई है?
व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना करता है और इसमें चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार देता है। यह राजनीति के लिए एक मौलिक स्थैतिक सामान्य ज्ञान तथ्य है।
- Q2कठिन
खबर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.सर्वोच्च न्यायालय जांच कर रहा है कि क्या मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग के निर्णय सर्वसम्मत थे।
- 2.ECI ने अपने हलफनामे में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 28 के अनुपालन का हवाला दिया।
- 3.याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया है कि ECI ने नए मतदाताओं के नामांकन के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म 7 में छेड़छाड़ की।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 लेख के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि ECI ने 2023 के अधिनियम की धारा 18 का हवाला दिया था, न कि धारा 28 का। कथन 3 गलत है क्योंकि आरोप फॉर्म 6 से संबंधित है, न कि फॉर्म 7 से। फॉर्म 7 नाम शामिल करने पर आपत्ति के लिए है।
- Q3मध्यम
खबर में उल्लिखित ECI के हलफनामे के अनुसार, निम्नलिखित में से किस तारीख को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए आदेश जारी नहीं किया गया था?
व्याख्या: ECI के हलफनामे में SIR आदेश 24 जून, 2025, 27 अक्टूबर, 2025 और 14 मई, 2026 को जारी किए गए थे। 23 सितंबर, 2026, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की तारीख है जिसने याचिकाओं को जन्म दिया, न कि SIR आदेश की तारीख।
- Q4मध्यम
इस मामले में ECI के निर्णयों की 'सर्वसम्मति' की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जांच का प्राथमिक कानूनी महत्व क्या है?
व्याख्या: लेख में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ECI के निर्णयों की 'सर्वसम्मति' की जांच का वर्णन किया गया है और ECI के हलफनामे में कहा गया है कि आदेश अनुच्छेद 324 और 2023 के अधिनियम की धारा 18 के अनुपालन में थे; मूल विकल्पों में से किसी ने भी इस महत्व को सही ढंग से नहीं बताया।
7सभी स्रोत
मूल खबर27 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
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UAPA का पूर्ण रूप: गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम
2 स्रोतडिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023: प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर मीडिया घरानों ने धारा 7, 17(2), 36, 37, 44(3) को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी
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DNPA का पूर्ण रूप: डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन

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NPPA का पूर्ण रूप: राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण

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