गणना में लापरवाही पर 13 करोड़ मतदाताओं को सूची से हटाने की निर्वाचन आयोग की शक्ति पर सर्वोच्च न्यायालय ने उठाए सवाल

28 अक्टूबर 2026The Hindu3 मिनट3 प्रश्न

किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी

1खबर एक नज़र में

सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान गणना प्रपत्र वापस न करने पर मतदाताओं को स्थायी रूप से मतदाता सूची से हटाने के भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अधिकार पर सवाल उठाया है। न्यायालय ने मतदान के अधिकार के संवैधानिक महत्व पर ज़ोर दिया और निर्वाचन आयोग को सरल उपाय तलाशने का निर्देश दिया, जिससे देश भर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं की स्थिति प्रभावित होगी।

  • मताधिकार से वंचित करने पर न्यायिक जांच

    सर्वोच्च न्यायालय ने गणना प्रपत्र वापस करने में लापरवाही बरतने पर नागरिक के मतदान के अधिकार को हमेशा के लिए समाप्त करने के निर्वाचन आयोग के अधिकार पर सवाल उठाया।

  • प्रपत्र 'अपरिवर्तनीय'

    न्यायालय ने कहा कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत प्रपत्र 6, 7 और 8 को निर्वाचन आयोग द्वारा बदला नहीं जा सकता है।

  • मिसाल स्पष्ट की गई

    सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिहार SIR पर उसका 27 मई का निर्णय बाध्यकारी मिसाल नहीं है और 'तार्किक विसंगति' एक अंतरिम व्यवस्था थी।

2याद रखने वाले तथ्य

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3विस्तृत विश्लेषण

संदर्भ/पृष्ठभूमि

मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए की जाने वाली एक प्रक्रिया है। हालांकि, गणना प्रपत्रों पर प्रतिक्रिया न देने के लिए मतदाताओं को हटाने की विधि विवादास्पद रही है। आलोचकों का तर्क है कि इससे बड़े पैमाने पर, अक्सर अनुचित तरीके से, लोगों को मताधिकार से वंचित होना पड़ता है। कानूनी चुनौती निर्वाचन आयोग की प्रशासनिक शक्तियों और संविधान के तहत मतदान के मौलिक अधिकार के बीच कथित टकराव से उत्पन्न होती है।

मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ

सर्वोच्च न्यायालय का सवाल दंड (स्थायी विलोपन) के आनुपातिकता पर केंद्रित है, जो एक प्रक्रियात्मक चूक (प्रपत्र वापस न करना) के लिए है। यह एक 'संरचनात्मक असंगति' को उजागर करता है, जहाँ SIR प्रक्रिया मौजूदा मतदाताओं को प्रपत्र 6 के माध्यम से 'नए मतदाताओं' के रूप में आवेदन करने के लिए मजबूर करती है, जो कानूनी रूप से पहली बार आवेदन करने वालों के लिए है। प्रक्रिया को 'खुला' रखने और पते में बदलाव के लिए प्रपत्र 8 जैसे सरल तरीकों का उपयोग करने का न्यायालय का निर्देश मतदाता अधिकारों की रक्षा करना है। यह स्पष्टीकरण कि बिहार का निर्णय बाध्यकारी मिसाल नहीं है, निर्वाचन आयोग की 'अवशिष्ट शक्तियों' का व्यापक रूप से उपयोग करने की क्षमता को सीमित करता है।

भविष्य की संभावनाएं/आगे का रास्ता

निर्वाचन आयोग को 'सुधार' पर विचार करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। तत्काल प्रभाव दिल्ली SIR के लिए समय सीमा का विस्तार है। दीर्घकालिक निहितार्थ SIR पद्धति का देशव्यापी संभावित सुधार है ताकि इसे अधिक मतदाता-अनुकूल बनाया जा सके। इसमें संभवतः गणना प्रपत्रों को देर से जमा करने की अनुमति देना और व्यापक जागरूकता के लिए स्थानीय भाषाओं में भौतिक सूचियों का उपयोग करना शामिल है। यह लोकतांत्रिक समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव मशीनरी पर न्यायिक निरीक्षण को मजबूत करता है।

4पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी

भारत निर्वाचन आयोग (ECI)
एक स्थायी संवैधानिक निकाय (अनुच्छेद 324) जो भारत में मतदाता सूचियों की तैयारी और चुनावों के संचालन के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए ज़िम्मेदार है।
मतदान का अधिकार
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 से प्राप्त एक वैधानिक अधिकार (मौलिक अधिकार नहीं)। इसे लोकतंत्र के लिए आवश्यक एक संवैधानिक अधिकार माना जाता है।
मतदाता पंजीकरण नियम, 1960
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत बनाए गए नियम, जो मतदाता सूचियों में नामों को शामिल करने, हटाने और सुधारने के लिए प्रपत्रों और प्रक्रियाओं को निर्धारित करते हैं। प्रपत्र 6 नए मतदाताओं के लिए है, प्रपत्र 7 आपत्ति/विलोपन के लिए है, और प्रपत्र 8 निवास स्थान बदलने के लिए है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)
निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को गहनता से संशोधित करने के लिए चलाया गया एक विशेष अभियान, अक्सर बड़े चुनावों से पहले, डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए।

5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • डेटा: SIR के दौरान देश भर में लगभग 13 करोड़ मतदाता मताधिकार से वंचित हुए।
  • नोडल निकाय: भारत निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324 के तहत संवैधानिक निकाय)।
  • कानूनी बिंदु: मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत प्रपत्र 6, 7 और 8।

गलती मत करना!

जाल 1: मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में भ्रमित करना (यह एक संवैधानिक/वैधानिक अधिकार है)। जाल 2: सर्वोच्च न्यायालय के बिहार SIR निर्णय को बाध्यकारी मिसाल के रूप में प्रस्तुत करना (लेख स्पष्ट करता है कि यह नहीं है)। जाल 3: प्रपत्र 6 (नए मतदाता) और प्रपत्र 8 (पते में बदलाव) के उद्देश्यों को मिलाना।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें

चुनावी अखंडता के लिए न्यायिक सक्रियतास्वच्छ सूचियों और मतदाता समावेशन के बीच संतुलनलोकतांत्रिक अभ्यासों में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता

6अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1कठिन

    समाचार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग का बिहार SIR निर्णय एक बाध्यकारी मिसाल है।
    2. 2.मतदाता पंजीकरण नियम के तहत प्रपत्र 6 नए मतदाताओं द्वारा आवेदन के लिए है।
    3. 3.सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए समय सीमा बढ़ाने पर विचार करने का निर्देश दिया।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  2. Q2मध्यम

    समाचार के अनुसार, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान देश भर में लगभग कितने मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया गया था?

  3. Q3मध्यम

    विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान निर्वाचन आयोग के आचरण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उठाई गई प्राथमिक चिंता क्या थी?

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