NMC ने 2019-20 सत्र से प्रवेश लेने वाले छात्रों को MBBS प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा के लिए पांचवां 'मर्सी अटेंप्ट' दिया
किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी
1खबर एक नज़र में
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2019-20 और उसके बाद एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले छात्रों को प्रथम प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा के लिए एक बार का 'मर्सी अटेंप्ट' दिया है। यह उन पात्र छात्रों को पांचवां अवसर प्रदान करता है जो पहले ही चार प्रयास कर चुके हैं। इसका मुख्य कारण कोविड-19 महामारी और अन्य कठिनाइयों के कारण हुई बाधाएं हैं।
अतिरिक्त प्रयास दिया गया
NMC ने 2019-20 बैच से एमबीबीएस प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा के लिए एक बार का पांचवां 'मर्सी अटेंप्ट' दिया है।
कोविड-19 बाधा से राहत
यह निर्णय उन छात्रों के लिए एक राहत उपाय है जिनकी पढ़ाई और परीक्षाएं महामारी से बाधित हुई थीं।
सशर्त लाभ
जिन छात्रों को विश्वविद्यालयों या अदालतों द्वारा पहले ही पांचवां प्रयास दिया जा चुका है, वे इस नई राहत के पात्र नहीं हैं।
2याद रखने वाले तथ्य
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3विस्तृत विश्लेषण
संदर्भ/पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने 2020 में भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) की जगह ली, जो चिकित्सा शिक्षा के लिए सर्वोच्च नियामक निकाय है। कोविड-19 महामारी ने देश भर में छात्रों के शैक्षणिक कैलेंडर, परीक्षाओं और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से बाधित किया, जिससे चिकित्सा महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न हितधारकों से क्षतिपूर्ति उपायों की मांग उठी।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
यह नीति शैक्षणिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक लक्षित नियामक हस्तक्षेप है। इस लाभ को उन छात्रों तक सीमित करके जिन्हें पहले ऐसी राहत नहीं मिली है, NMC का लक्ष्य दोहरे लाभ को रोकना और मानक अखंडता बनाए रखना है। यह सैकड़ों मेडिकल छात्रों को प्रभावित करता है, जिससे उन्हें अपने नियंत्रण से बाहर के कारकों के कारण एक शैक्षणिक वर्ष खोए बिना अपनी शिक्षा जारी रखने की अनुमति मिलती है, जिससे चिकित्सा पेशेवरों की संभावित भविष्य की कमी को भी दूर किया जा सके।
भविष्य की संभावनाएं/आगे का रास्ता
चिकित्सा महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में जैसा कि उल्लेख किया गया है, को अब इन दिशानिर्देशों को लागू करना होगा। NMC को एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए कार्यान्वयन की निगरानी करने की आवश्यकता हो सकती है। यह कठोर शैक्षणिक संरचनाओं में भविष्य के संकट-प्रतिक्रियात्मक समायोजन के लिए एक मिसाल कायम करता है, जो व्यावसायिक पाठ्यक्रम नियमों में अंतर्निहित लचीलेपन की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
4पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC)
- भारत में चिकित्सा शिक्षा और पेशेवरों के लिए सर्वोच्च नियामक निकाय, जिसे 2019 के राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम द्वारा 2020 में स्थापित किया गया था, जिसने भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) का स्थान लिया।
- अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (UGMEB)
- NMC के तहत चार स्वायत्त बोर्डों में से एक, जो स्नातक चिकित्सा शिक्षा, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन के लिए मानक निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार है।
5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: पात्र बैच शैक्षणिक सत्र 2019-20 से आगे का है।
- नोडल निकाय: राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) और इसका अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (UGMEB)।
- अपवाद: उन छात्रों को लाभ नहीं मिलेगा जिन्हें विश्वविद्यालय/कोर्ट के माध्यम से पहले ही पांचवां प्रयास मिल चुका है।
गलती मत करना!
वे पूछ सकते हैं कि कौन सा बैच पात्र है और 2020-21 या 2018-19 जैसे विकल्प दे सकते हैं। वे 'NMC' को पुरानी संस्था 'भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI)' से भी बदल सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
नियामक लचीलापनसंकट-प्रतिक्रियात्मक शासनसमानता के साथ मानकों को संतुलित करना
6अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
खबर के अनुसार, एमबीबीएस छात्रों के लिए 'मर्सी अटेंप्ट' किस नियामक निकाय द्वारा दिया गया है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि पांचवां 'मर्सी अटेंप्ट' देने का निर्णय राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) द्वारा लिया गया था। NMC चिकित्सा शिक्षा के लिए वर्तमान सर्वोच्च नियामक है, जिसने भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) का स्थान लिया है।
- Q2कठिन
एमबीबीएस परीक्षा प्रयासों पर NMC के निर्णय के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.यह प्रथम प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा के लिए एक बार का पांचवां प्रयास प्रदान करता है।
- 2.यह लाभ प्रवेश के वर्ष की परवाह किए बिना सभी एमबीबीएस छात्रों पर लागू होता है।
- 3.जिन छात्रों को अदालत के आदेश के माध्यम से पहले ही पांचवां प्रयास मिल चुका है, वे इस नई राहत के पात्र नहीं हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि लेख में एक बार के 'मर्सी अटेंप्ट' (पांचवें प्रयास) का उल्लेख है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह लाभ विशेष रूप से शैक्षणिक सत्र 2019-20 से आगे प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए है, न कि सभी छात्रों के लिए। कथन 3 सही है क्योंकि लेख स्पष्ट रूप से उन छात्रों को बाहर करता है जिन्हें विश्वविद्यालय या न्यायालय द्वारा पहले ही पांचवां मौका दिया जा चुका है।
- Q3मध्यम
NMC के हालिया निर्णय के अनुसार, किस शैक्षणिक सत्र से एमबीबीएस छात्र एक बार के 'मर्सी अटेंप्ट' के लिए पात्र हैं?
व्याख्या: लेख विशेष रूप से बताता है कि यह लाभ शैक्षणिक सत्र 2019-20 और उसके बाद प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए है। 2019-20 बैच उन पहले बैचों में से था जिन्होंने अपने पाठ्यक्रम के दौरान महत्वपूर्ण कोविड-19 महामारी बाधाओं का अनुभव किया।
- Q4मध्यम
एमबीबीएस छात्रों को अतिरिक्त प्रयास देने के लिए NMC द्वारा उद्धृत प्राथमिक तर्क क्या था?
व्याख्या: लेख में उल्लेख है कि यह निर्णय कोविड-19 महामारी के दौरान आने वाली कठिनाइयों, जिसमें पढ़ाई और परीक्षाओं में बाधाएं, साथ ही अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं शामिल हैं, को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। अन्य विकल्प, हालांकि सामान्य लक्ष्य हो सकते हैं, इस विशिष्ट राहत उपाय का प्राथमिक कारण नहीं हैं।
7सभी स्रोत
मूल खबर27 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
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