भारत बाल पोर्नोग्राफी और बिना सहमति वाली अश्लील सामग्री से निपटने के लिए नीतिगत ढांचे पर विचार कर रहा है, सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई 4 सप्ताह के लिए स्थगित

27 अक्टूबर 2026Hindustan2 मिनट3 प्रश्न

किस परीक्षा के लिए कितनी ज़रूरी

1खबर एक नज़र में

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया है कि वह बाल पोर्नोग्राफी और वयस्कों से संबंधित बिना सहमति वाली अश्लील सामग्री के प्रसार से निपटने के लिए एक विधायी नीतिगत ढांचे पर विचार कर रही है। यह ढांचा ऑनलाइन मध्यस्थों पर सक्रिय रिपोर्टिंग और सामग्री हटाने की बाध्यता लगा सकता है और तीसरे पक्ष से शिकायतें स्वीकार कर सकता है।

  • विचाराधीन नीतिगत ढांचा

    सरकार ऑनलाइन बाल पोर्नोग्राफी और बिना सहमति वाली वयस्क अश्लील सामग्री से निपटने के लिए एक वैधानिक ढांचा विकसित कर रही है।

  • बढ़ी हुई मध्यस्थ देयता

    प्रस्तावित कानून प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक सामग्री को सक्रिय रूप से हटाने और उसके अपलोड की जानकारी अधिकारियों को देने के लिए बाध्य कर सकता है।

  • तीसरे पक्ष की शिकायत का प्रावधान

    यह ढांचा केवल सीधे पीड़ित ही नहीं, बल्कि तीसरे पक्ष की शिकायतों के आधार पर भी कार्रवाई की अनुमति दे सकता है।

2याद रखने वाले तथ्य

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3विस्तृत विश्लेषण

संदर्भ/पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय NGO 'प्रज्वला' सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें बिना सहमति वाली अश्लील सामग्री और यौन उत्पीड़न के वीडियो की स्ट्रीमिंग के खिलाफ वयस्कों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी का मुद्दा उठाया गया है। यह सुनवाई सरकार को IT अधिनियम, 2000 और POCSO अधिनियम, 2012 के तहत ऑनलाइन स्थानों को विनियमित करने के अपने विधायी इरादे को स्पष्ट करने के लिए मजबूर करती है।

मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ

सरकार का यह कदम ऑनलाइन मध्यस्थों के सक्रिय विनियमन की ओर बदलाव का संकेत देता है। प्लेटफॉर्म को न केवल सामग्री हटाने बल्कि अवैध सामग्री के अपलोड की रिपोर्ट करने के लिए अनिवार्य करना एक 'नोटिस और हटाओ प्लस' व्यवस्था बनाता है। इससे अनुपालन का बोझ बढ़ता है, लेकिन इसका उद्देश्य अपलोड को रोकना है। तीसरे पक्ष की शिकायतों की अनुमति देने से प्रवर्तन का दायरा बढ़ता है, जो उन अपराधों के लिए महत्वपूर्ण है जहां पीड़ित आगे आने में असमर्थ या अनिच्छुक हो सकते हैं।

भविष्य की संभावनाएं/आगे का रास्ता

अगला कदम संसद में विधेयक का औपचारिक मसौदा तैयार करना और उसे पेश करना है। सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है, संभवतः ठोस प्रगति की प्रतीक्षा में। इस ढांचे को जघन्य सामग्री पर अंकुश लगाने की अनिवार्यता को निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों के साथ संतुलित करना होगा, जिसके लिए सावधानीपूर्वक विधायी मसौदा तैयार करने की आवश्यकता है।

4पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी

मध्यस्थ (IT अधिनियम, 2000 के तहत)
कोई भी इकाई जो किसी अन्य व्यक्ति की ओर से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्राप्त करती है, संग्रहीत करती है या प्रसारित करती है, या ऐसे रिकॉर्ड के संबंध में कोई सेवा प्रदान करती है (जैसे इंटरनेट सेवा प्रदाता, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, OTT सेवाएँ)।
POCSO अधिनियम, 2012 (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम)
यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी के अपराधों से बच्चों की रक्षा के लिए एक व्यापक कानून, जो ऐसे अपराधों के परीक्षण के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान करता है।
भारत के सॉलिसिटर जनरल
भारत सरकार का दूसरा सबसे बड़ा विधि अधिकारी, जो अटॉर्नी जनरल की सहायता करता है और सर्वोच्च न्यायालय तथा अन्य कानूनी मामलों में संघ का प्रतिनिधित्व करता है।

5परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • कानूनी बिंदु: विचाराधीन प्रस्तावित ढांचा (अभी तक कानून नहीं बना है)।
  • नोडल निकाय: इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) / गृह मंत्रालय (MHA) - संयुक्त जिम्मेदारी की संभावना।
  • प्रावधान: मध्यस्थों के लिए अनिवार्य रिपोर्टिंग और हटाने का कर्तव्य तथा तीसरे पक्ष की शिकायतें।

गलती मत करना!

जाल: प्रस्तावित 'नीतिगत ढांचे' को 'लागू कानून' के साथ भ्रमित करना। लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि यह विचाराधीन है और एक विधेयक अभी संसद में पेश किया जाना बाकी है। विकल्प इसे पहले से पारित अधिनियम के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें

"सक्रिय मध्यस्थ देयता""IT अधिनियम की धारा 79 को पीड़ित अधिकारों के साथ संतुलित करना""साइबर-अपराधों के लिए तीसरे पक्ष की शिकायत तंत्र"

6अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1कठिन

    समाचार में चर्चित प्रस्तावित नीतिगत ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.इसका उद्देश्य केवल बाल पोर्नोग्राफी से निपटना है, वयस्कों से संबंधित सामग्री से नहीं।
    2. 2.यह मध्यस्थों पर आपत्तिजनक सामग्री के अपलोड की जानकारी अधिकारियों को देने का कर्तव्य लगा सकता है।
    3. 3.यह केवल पीड़ित से ही नहीं, बल्कि किसी तीसरे पक्ष से भी शिकायतें स्वीकार करने का प्रस्ताव करता है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  2. Q2मध्यम

    OTT और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यौन रूप से अश्लील सामग्री की स्ट्रीमिंग पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने कितने सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित कर दी?

  3. Q3मध्यम

    समाचार के अनुसार, बिना सहमति वाली अश्लील सामग्री से निपटने के लिए नीतिगत ढांचे की एक प्रमुख प्रस्तावित विशेषता क्या है?

7सभी स्रोत

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मुख्य निर्देश निकाय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय

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Dainik BhaskarHindustan2 स्रोत
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