राजव्यवस्था

पारिवारिक पेंशन की पात्रता: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बकाया पर 6% ब्याज का निर्देश दिया, यूपी सेवा नियमों के तहत अविवाहित बहनों के अधिकारों को बरकरार रखा

28 अक्टूबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 5 / 62

प्रिलिम्स के लिए: संविधान का अनुच्छेद 309, पारिवारिक पेंशन, उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार, न्यायालय और न्यायाधीश, मुख्य कानूनी प्रावधान, प्रासंगिक राज्य नियम, बकाया पर ब्याज दर, शामिल विभाग

मेन्स के लिए: न्यायिक समीक्षा; कार्यकारी आदेशों पर वैधानिक नियमों की प्रधानता; आश्रितों के लिए सामाजिक सुरक्षा; वैध अपेक्षा का सिद्धांत

स्रोत:Dainik Bhaskar

चर्चा में क्यों?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि एक अविवाहित बहन पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र है। न्यायालय ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें पेंशन देने से इनकार किया गया था। न्यायालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए वैधानिक सेवा नियमों को कार्यकारी आदेशों द्वारा रद्द नहीं किया जा सकता है, और 6% वार्षिक ब्याज के साथ बकाया के भुगतान का निर्देश दिया।

सारांश

  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ बेंच) ने एक मृत सरकारी कर्मचारी की अविवाहित बहन को पारिवारिक पेंशन देने से इनकार करने वाले एक विभागीय आदेश को रद्द कर दिया।
  • न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्ति लाभ नियमावली, 1961 के नियम 3(5) का हवाला दिया, जिसमें अविवाहित और विधवा बहनों को पेंशन के लिए 'परिवार' की परिभाषा में शामिल किया गया है।
  • यह फैसला स्पष्ट करता है कि कार्यकारी सरकारी आदेश अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए वैधानिक नियमों का स्थान नहीं ले सकते। यह प्रशासनिक विवेक पर कानून की प्रधानता को पुष्ट करता है।

मुख्य बातें

  • न्यायिक अधिरोहण

    उच्च न्यायालय ने एक अविवाहित बहन को पारिवारिक पेंशन देने से इनकार करने वाले राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया, और वैधानिक नियमों को बरकरार रखा।

  • संवैधानिक प्रधानता

    न्यायालय ने फैसला सुनाया कि कार्यकारी आदेश संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए वैधानिक सेवा नियमों को नहीं बदल सकते।

  • वित्तीय राहत

    विभाग को कर्मचारी की मृत्यु की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 6% वार्षिक ब्याज के साथ पारिवारिक पेंशन के बकाया का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।

संदर्भ / पृष्ठभूमि

पारिवारिक पेंशन नियम सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा उपाय हैं। यह मामला तब उठा जब उत्तर प्रदेश सरकार ने 2016 के एक सरकारी आदेश का हवाला देते हुए एक अविवाहित बहन को पेंशन देने से इनकार कर दिया। सरकार का तर्क था कि उसे 'परिवार' की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया था। यह कठोर प्रशासनिक परिपत्रों और वैधानिक नियमों के सुरक्षात्मक इरादे के बीच एक आवर्ती संघर्ष को उजागर करता है।

मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ

यह निर्णय विधायी सर्वोच्चता के सिद्धांत को पुष्ट करता है। न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्ति लाभ नियमावली, 1961 में अविवाहित बहनों को वैधानिक रूप से शामिल किया गया है। 2016 का एक कार्यकारी आदेश इस परिभाषा को संकीर्ण नहीं कर सकता। यह मनमानी बहिष्करण से आश्रित रिश्तेदारों की रक्षा के लिए एक मिसाल कायम करता है और इस बात पर ज़ोर देता है कि क़ानून द्वारा शासित लाभों को कार्यकारी आदेश द्वारा कम नहीं किया जा सकता है।

भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता

6% ब्याज के साथ बकाया का भुगतान करने का निर्देश राज्य पर उसके त्रुटिपूर्ण आदेश के लिए वित्तीय लागत लगाता है, जो एक निवारक के रूप में कार्य करता है। यह निर्णय राज्यों में इसी तरह के प्रतिबंधात्मक सरकारी आदेशों की समीक्षा का कारण बन सकता है। यह विधवा बहनों या आश्रित माता-पिता जैसे अन्य आश्रितों के लिए कानूनी सहारा को मजबूत करता है, जिन्हें वैध लाभों से इसी तरह के अन्यायपूर्ण इनकार का सामना करना पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश से जुड़ाव

उत्तर प्रदेश की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UPPSC 8/10UPPSC RO/ARO 7/10UPSSSC PET 7/10

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी

संविधान का अनुच्छेद 309
अनुच्छेद 309 संसद और राज्य विधानमंडलों को सार्वजनिक सेवाओं में नियुक्त व्यक्तियों की भर्ती और सेवा शर्तों को विनियमित करने का अधिकार देता है। इस अनुच्छेद के तहत, उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्ति लाभ नियमावली जैसे नियम बनाए जाते हैं।
पारिवारिक पेंशन
एक मृत सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी के पात्र परिवार के सदस्यों (जैसे पति/पत्नी, बच्चे, आश्रित माता-पिता) को दी जाने वाली पेंशन, उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।
उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार
संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत, उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन और किसी अन्य उद्देश्य के लिए किसी भी व्यक्ति या प्राधिकरण, जिसमें सरकार भी शामिल है, को रिट (जैसे सर्टिओरारी, मैंडमस) जारी करने की शक्ति है।

याद रखने वाले तथ्य

कार्ड दबाएँ और जवाब देखें। पहले खुद याद करने की कोशिश करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • कानूनी बिंदु: संविधान का अनुच्छेद 309 और यूपी सेवानिवृत्ति लाभ नियमावली, 1961 का नियम 3(5)।
  • डेटा: न्यायालय द्वारा निर्देशित पेंशन बकाया पर 6% वार्षिक ब्याज।
  • नोडल निकाय: खाद्य एवं रसद विभाग, उत्तर प्रदेश (कार्यान्वयन एजेंसी)।

गलती मत करना!

वे संवैधानिक अनुच्छेद को बदल सकते हैं (उदाहरण के लिए, 309 के बजाय अनुच्छेद 310 या 311 का उपयोग करें) या ब्याज दर को भ्रमित कर सकते हैं (उदाहरण के लिए, 8% या 10%)। वे यह भी पूछ सकते हैं कि किस उच्च न्यायालय पीठ (इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ) ने फैसला सुनाया।

मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें

  • न्यायिक समीक्षा
  • कार्यकारी आदेशों पर वैधानिक नियमों की प्रधानता
  • आश्रितों के लिए सामाजिक सुरक्षा
  • वैध अपेक्षा का सिद्धांत

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    संविधान के किस अनुच्छेद के तहत लोक सेवकों के लिए भर्ती और सेवा शर्तों के नियम बनाए जाते हैं, जैसा कि समाचार में संदर्भित है?

  2. Q2कठिन

    समाचार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि एक अविवाहित बहन को संबंधित उत्तर प्रदेश सेवा नियमों के तहत 'परिवार' की परिभाषा में शामिल किया गया है।
    2. 2.न्यायालय ने कहा कि 2020 में जारी एक सरकारी आदेश अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए वैधानिक नियमों को वैध रूप से रद्द कर सकता है।
    3. 3.न्यायालय ने 8% प्रति वर्ष की ब्याज दर के साथ बकाया के भुगतान का निर्देश दिया।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    चर्चा किए गए मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पारिवारिक पेंशन के बकाया के भुगतान के लिए किस वार्षिक ब्याज दर का निर्देश दिया?

  4. Q4मध्यम

    इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले द्वारा स्थापित प्राथमिक कानूनी सिद्धांत क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. न्यायालय और न्यायाधीश क्या है?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ बेंच), न्यायमूर्ति मनीष कुमार (एकल पीठ)

2. मुख्य कानूनी प्रावधान क्या है?

भारत के संविधान का अनुच्छेद 309

3. प्रासंगिक राज्य नियम क्या है?

उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्ति लाभ नियमावली, 1961 - नियम 3(5)

4. बकाया पर ब्याज दर क्या है?

6% प्रति वर्ष

5. शामिल विभाग क्या है?

खाद्य एवं रसद विभाग, उत्तर प्रदेश

6. याचिकाकर्ता क्या है?

शमीन खान

सभी स्रोत

इसी विषय, राज्य या परीक्षा की पिछले 30 दिनों की खबरें

उत्तर प्रदेशराजव्यवस्था
4 प्रश्न · 2 मिनट

यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती: उच्च न्यायालय ने योग्यता को बरकरार रखा, सामान्य कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने वाले आरक्षित उम्मीदवारों पर रोक को रद्द किया

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक रोज़गार में आरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण सिद्धांत स्पष्ट किया है: आरक्षित श्रेणियों (ओबीसी, आदि) के मेधावी उम्मीदवार, जिन्होंने सामान्य/अनारक्षित कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उन्हें चयन से वंचित नहीं किया जा सकता।

विज्ञापित कुल पद (2018): 31,360 नागरिक पुलिस + 18,208 पीएसी कांस्टेबल

UP SI9UPPSC8UPPSC RO/ARO8+2
Hindustan
उत्तर प्रदेशराजव्यवस्था
3 प्रश्न · 2 मिनट

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वन विभाग के दैनिक वेतनभोगियों को ₹18,000/माह न्यूनतम वेतन से इनकार करने पर यूपी सरकार पर ₹1 लाख का हर्जाना लगाया

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश वन विभाग में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए 'समान काम के लिए समान वेतन' के सिद्धांत को बरकरार रखा है। न्यायालय ने राज्य सरकार की अपीलें खारिज करते हुए ₹1 लाख का हर्जाना लगाया। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि कर्मचारियों को नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर लागू ₹18,000 प्रति माह का न्यूनतम वेतन पाने का अधिकार है, जैसा कि पुत्तीलाल मामले में स्थापित किया गया था।

न्यायालय: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

UPPSC8UPSC7UPSSSC PET7+1
Hindustan
उत्तर प्रदेशराजव्यवस्था
4 प्रश्न · 3 मिनट

अयोध्या भूमि अधिग्रहण पर सर्वोच्च न्यायालय: सामाजिक प्रभाव आकलन और 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत किसानों के अधिकारों पर ज़ोर

अयोध्या में लगभग 450 एकड़ भूमि के अधिग्रहण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए, साथ ही यह चेतावनी भी दी कि इसे 'राज्य के लिए गले की फांस' भी नहीं बनने देना चाहिए। यह मामला SIA और बहु-फसली सिंचित भूमि के अधिग्रहण पर प्रतिबंधों सहित 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के सुरक्षा उपायों को लागू करने पर केंद्रित है।

SIA का पूर्ण रूप: सामाजिक प्रभाव आकलन

UPPSC8UPSC7UPSSSC PET7+1
Hindustan
उत्तर प्रदेशराजव्यवस्था
4 प्रश्न · 3 मिनट

उत्तर प्रदेश साइबर सुरक्षा: IIT कानपुर ₹104.28 करोड़ की लागत से SOC विकसित करेगा, राज्य की डिजिटल संपत्तियों की 24x7 निगरानी होगी

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा ऑपरेशंस सेंटर (SOC) के लिए ₹104.28 करोड़ की परियोजना को मंज़ूरी दी है। IIT कानपुर के C3i हब द्वारा विकसित किया जाने वाला यह केंद्र, राज्य डेटा सेंटर और यूपी स्वान नेटवर्क जैसी महत्वपूर्ण राज्य डिजिटल संपत्तियों की साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों से 24x7 निगरानी और सुरक्षा प्रदान करेगा।

परियोजना लागत: ₹104.28 करोड़

UPPSC8UPSSSC PET7UPPSC RO/ARO7
Hindustan
उत्तर प्रदेशराजव्यवस्था
4 प्रश्न · 2 मिनट

उत्तर प्रदेश अंतरदेशीय जलयान नियमावली 2026: 11 नदियों पर पंजीकरण अनिवार्य, प्रति नाव ₹50 शुल्क

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 11 प्रमुख नदियों पर सुरक्षित जल परिवहन को विनियमित और बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश अंतरदेशीय जलयान नियमावली, 2026 को मंज़ूरी दी है। यह नियमावली सभी जलयानों का पंजीकरण अनिवार्य करती है, गैर-यांत्रिक नावों के लिए ₹50 का शुल्क तय करती है और परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में एक अंतरदेशीय जल प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव करती है।

IWA का पूर्ण रूप: अंतरदेशीय जल प्राधिकरण

UPPSC8SSC7UPSSSC PET7+1
Hindustan
उत्तर प्रदेशराजव्यवस्था
4 प्रश्न · 2 मिनट

उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित आयु सत्यापन दिशानिर्देश: POCSO अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के लिए RTE नियमों के तहत 4 दस्तावेज़

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल में प्रवेश के समय बच्चों की उम्र सत्यापित करने के लिए नए दिशानिर्देश प्रस्तावित किए हैं, जिसमें चार विशिष्ट दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर उठाए गए इस कदम का उद्देश्य POCSO अधिनियम के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना है, जहां गलत आयु प्रमाण पत्रों के कारण 19 से 20 वर्ष की आयु के लड़कों को मामलों में झूठा फंसाया गया है।

POCSO का पूर्ण रूप: यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण

UPPSC8CTET7UPTET7+3
Indian Express