प्रिलिम्स के लिए: सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्ग (BCs), पोरंबोक भूमि, नोडल निकाय, आयोग के अध्यक्ष, सर्वेक्षण की समय-सीमा, आयोग का गठन, संबंधित कानूनी मुद्दा
मेन्स के लिए: डेटा-आधारित नीति; सामाजिक न्याय और सकारात्मक कार्रवाई; आरक्षण नीति में संघवाद; न्यायिक समीक्षा और उसकी सीमाएँ
स्रोत:
चर्चा में क्यों?
कैबिनेट ने पिछड़े वर्गों से इस्लाम धर्म अपनाने वालों के लिए आरक्षण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर करने का भी फैसला किया।
सारांश
- तमिलनाडु कैबिनेट ने 2027 में एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक आयोग द्वारा सामाजिक न्याय सर्वेक्षण कराने को मंज़ूरी दी, जिसका गठन फरवरी-मार्च 2027 तक किया जाएगा।
- यह सर्वेक्षण, जो तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) का चुनावी वादा था, चल रही राष्ट्रीय जनगणना पूरी होने के बाद होगा।
- कैबिनेट ने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ एक पुनर्विचार याचिका दायर करने का भी फैसला किया, जिसमें हिंदू पिछड़े वर्ग के उन सदस्यों को आरक्षण लाभ देने से इनकार किया गया था जिन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया है।
मुख्य बातें
सामाजिक न्याय सर्वेक्षण
तमिलनाडु 2027 में एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक आयोग के माध्यम से एक व्यापक सामाजिक न्याय सर्वेक्षण करेगा।
आरक्षण की समीक्षा
राज्य कैबिनेट ने हिंदू पिछड़े वर्गों से इस्लाम धर्म अपनाने वालों के लिए आरक्षण लाभों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया।
भूमि और औद्योगिक निर्णय
कैबिनेट ने 3,000 लोगों को प्रभावित करने वाले 20 साल पुराने भूमि मुद्दे को सुलझाने पर भी चर्चा की और आठ नए औद्योगिक प्रस्तावों को मंज़ूरी दी।
संदर्भ/पृष्ठभूमि
सामाजिक न्याय सर्वेक्षण 2026 के विधानसभा चुनावों में तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) का एक प्रमुख चुनावी वादा था, जिसकी घोषणा बाद में राज्यपाल के अभिभाषण में की गई थी। यह सामाजिक न्याय आंदोलनों और डेटा-आधारित आरक्षण नीतियों के तमिलनाडु के लंबे इतिहास के अनुरूप है, जिसका उदाहरण प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग (काका कालेलकर) और द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग (मंडल आयोग) जैसे आयोग हैं। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य न्यायसंगत नीति निर्माण के लिए एक समकालीन डेटाबेस तैयार करना है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को नियुक्त करने का निर्णय सर्वेक्षण की इच्छित कानूनी मज़बूती और निष्पक्षता को रेखांकित करता है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने का कदम धर्म, जाति और आरक्षण के जटिल अंतर्संबंध को उजागर करता है, जो भारतीय राजनीति में एक विवादास्पद मुद्दा है। थलंबूर पोरंबोक भूमि मुद्दे पर समानांतर चर्चा, जो 3,000 लोगों और 15 संस्थानों को प्रभावित करती है, कैबिनेट का लंबे समय से लंबित प्रशासनिक और कानूनी शिकायतों को हल करने पर ध्यान केंद्रित करती है।
भविष्य की संभावना/आगे का रास्ता
आयोग का गठन फरवरी-मार्च 2027 तक किया जाना है, जिसके बाद यह सर्वेक्षण के लिए विशिष्ट नियम बनाएगा। वास्तविक डेटा संग्रह 2021 की जनगणना (जो चल रही है) के बाद शुरू होगा। सर्वोच्च न्यायालय की पुनर्विचार याचिका का परिणाम धार्मिक रूपांतरण से संबंधित आरक्षण न्यायशास्त्र के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखेगा। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार भूमि मुद्दे का समाधान सरकार की प्रशासनिक दक्षता की परीक्षा होगी।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- सामाजिक न्याय
- व्यक्ति और समाज के बीच निष्पक्ष और न्यायपूर्ण संबंधों की एक अवधारणा, जिसे धन, अवसरों और विशेषाधिकारों के वितरण से मापा जाता है। भारतीय संदर्भ में, यह प्रस्तावना में उल्लिखित एक प्रमुख उद्देश्य है और आरक्षण जैसी सकारात्मक कार्रवाई नीतियों के माध्यम से इसका अनुसरण किया जाता है।
- पिछड़े वर्ग (BCs)
- भारतीय संविधान (अनुच्छेद 15(4), 16(4), 340) में शैक्षिक और सामाजिक रूप से वंचित जातियों को वर्गीकृत करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सामूहिक शब्द। पिछड़े वर्गों की पहचान और आरक्षण मुख्य रूप से राज्य के विषय हैं, जिससे राज्यों में अलग-अलग सूचियाँ बनती हैं।
- पोरंबोक भूमि
- दक्षिण भारत, विशेष रूप से तमिलनाडु में इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द, जो सरकार के स्वामित्व वाली भूमि को दर्शाता है जिसका राजस्व के लिए मूल्यांकन नहीं किया जाता है (अक्सर चराई, रास्ते या जल निकायों जैसे सांप्रदायिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है)। ऐसी भूमि पर अतिक्रमण एक सामान्य प्रशासनिक मुद्दा है।
याद रखने वाले तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: सामाजिक न्याय सर्वेक्षण 2027 में आयोजित किया जाएगा।
- नोडल निकाय: सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग।
- कानूनी बिंदु: हिंदू पिछड़े वर्गों से इस्लाम धर्म अपनाने वालों के लिए आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला।
गलती मत करना!
वे आयोग के अध्यक्ष (एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश) के बारे में पूछ सकते हैं, लेकिन 'उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश', 'सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश', या 'ज़िला न्यायाधीश' जैसे भ्रमित करने वाले विकल्प दे सकते हैं। वे सर्वेक्षण वर्ष (2027) को आयोग के गठन वर्ष (फरवरी-मार्च 2027) या कैबिनेट बैठक की तारीख (अक्टूबर 2026) के साथ भी भ्रमित कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
- डेटा-आधारित नीति
- सामाजिक न्याय और सकारात्मक कार्रवाई
- आरक्षण नीति में संघवाद
- न्यायिक समीक्षा और उसकी सीमाएँ
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
तमिलनाडु में सामाजिक न्याय सर्वेक्षण आयोजित करने के लिए कैबिनेट द्वारा अनुमोदित आयोग की अध्यक्षता कौन करेगा?
व्याख्या: लेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तमिलनाडु कैबिनेट ने सामाजिक न्याय सर्वेक्षण आयोजित करने के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक बहु-सदस्यीय आयोग का गठन करने का फैसला किया।
- Q2कठिन
तमिलनाडु कैबिनेट के निर्णयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.इसने चल रही जनगणना पूरी होने के बाद 2027 में एक सामाजिक न्याय सर्वेक्षण आयोजित करने का फैसला किया।
- 2.इसने अनुसूचित जनजातियों के उन सदस्यों के लिए आरक्षण लाभों से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर करने को मंज़ूरी दी जो ईसाई धर्म अपनाते हैं।
- 3.इसने थलंबूर गाँव में पोरंबोक भूमि से संबंधित एक लंबे समय से लंबित मुद्दे को सुलझाने के उपायों पर चर्चा की, जिससे लगभग 3,000 लोग प्रभावित हुए हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 लेख के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है; पुनर्विचार याचिका हिंदू पिछड़े वर्ग के उन सदस्यों के लिए आरक्षण से संबंधित है जो इस्लाम धर्म अपनाते हैं, न कि ईसाई धर्म अपनाने वाली अनुसूचित जनजातियों के लिए। कथन 3 सही है क्योंकि लेख में उल्लेख है कि कैबिनेट ने थलंबूर पोरंबोक भूमि मुद्दे पर चर्चा की जिससे लगभग 3,000 लोग और 15 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए।
- Q3मध्यम
तमिलनाडु के मंत्री के अनुसार, सामाजिक न्याय सर्वेक्षण के लिए आयोग का गठन कब तक होने की उम्मीद है?
व्याख्या: मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने कहा कि सामाजिक न्याय सर्वेक्षण के लिए आयोग का गठन अगले साल (2027) फरवरी या मार्च तक किया जाएगा।
- Q4मध्यम
तमिलनाडु सरकार द्वारा सामाजिक न्याय सर्वेक्षण आयोजित करने के निर्णय के पीछे प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: लेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सामाजिक न्याय सर्वेक्षण आयोजित करना तमिलगा वेट्री कज़गम का एक प्रमुख चुनावी वादा था और सरकार सर्वेक्षण करेगी; इसमें उद्देश्य को 'न्यायसंगत नीति-निर्माण के लिए डेटा एकत्र करना' नहीं बताया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. नोडल निकाय क्या है?
तमिलनाडु सरकार (कैबिनेट)
2. आयोग के अध्यक्ष क्या है?
सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश
3. सर्वेक्षण की समय-सीमा क्या है?
2027 में आयोजित किया जाएगा
4. आयोग का गठन क्या है?
फरवरी-मार्च 2027 तक
5. संबंधित कानूनी मुद्दा क्या है?
इस्लाम धर्म अपनाने वालों के लिए आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला
6. वर्तमान संदर्भ क्या है?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में 29 अक्टूबर, 2026 को कैबिनेट बैठक में लिया गया निर्णय
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मूल खबर29 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
