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प्रिलिम्स के लिए: ब्लू कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र, ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF), राष्ट्रीय तटीय मिशन, GCF का पूर्ण रूप, GCF-ECRICC का पूर्ण रूप, नोडल मंत्रालय, प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र, पायलट राज्य
मेन्स के लिए: पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA); समुदाय-आधारित लचीलापन; विज्ञान-नीति इंटरफ़ेस; ब्लू कार्बन; आजीविका विविधीकरण
स्रोत:
चर्चा में क्यों?
भारत पारिस्थितिकी तंत्र बहाली और सामुदायिक आजीविका पर ध्यान केंद्रित करते हुए ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) परियोजना 'GCF-ECRICC' के माध्यम से अपने तटीय जलवायु लचीलेपन को आगे बढ़ा रहा है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) राष्ट्रीय तटीय मिशन को राज्य और स्थानीय स्तरों पर वैज्ञानिक आकलन को कार्रवाई योग्य योजना में बदलने के लिए केंद्रीय ढांचे के रूप में स्थापित कर रहा है, जो विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
सारांश
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) संवेदनशील क्षेत्रों में तटीय लचीलेपन और आजीविका सहायता के लिए मैंग्रोव, समुद्री घास, खारे दलदल और प्रवाल भित्तियों को बहाल करने के लिए GCF-ECRICC परियोजना को लागू कर रहा है।
- राष्ट्रीय तटीय मिशन को तटरेखा-परिवर्तन और भेद्यता आकलन से प्राप्त वैज्ञानिक डेटा को ठोस योजना और निवेश निर्णयों में मुख्यधारा में लाने के लिए प्राथमिक तंत्र के रूप में नामित किया गया है।
- कार्यशाला में 'ECRICC दीदी' (जलवायु चैंपियन) मॉडल का मुद्दा उठाया गया, जो तटीय समुदायों की महिलाओं को तकनीकी जलवायु कार्रवाई ज्ञान को स्थानीय कार्यान्वयन से जोड़ने के लिए सशक्त बनाता है।
मुख्य बातें
तटीय लचीलापन रणनीति
भारत मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियों जैसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्रों को बहाल करने के लिए GCF-वित्तपोषित ECRICC परियोजना को लागू कर रहा है, जिससे तटीय समुदायों के लिए जलवायु लचीलापन बढ़ रहा है।
विज्ञान से नीति सेतु
राष्ट्रीय तटीय मिशन वैज्ञानिक तटरेखा-परिवर्तन और भेद्यता आकलन को कार्रवाई योग्य राज्य और जिला-स्तरीय योजनाओं में एकीकृत करने के लिए केंद्रीय मंच के रूप में कार्य करेगा।
समुदाय-नेतृत्व वाला अनुकूलन
'ECRICC दीदी' मॉडल तटीय समुदायों की महिलाओं को जलवायु चैंपियन के रूप में प्रशिक्षित करता है ताकि तकनीकी जलवायु कार्रवाई को स्थानीय आजीविका हस्तक्षेपों में बदला जा सके।
संदर्भ / पृष्ठभूमि
भारत की लंबी तटरेखा समुद्र-स्तर में वृद्धि और चक्रवातों जैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। सरकार ने तटरेखा-परिवर्तन आकलन, खतरे-रेखा मानचित्रण और तटीय भेद्यता सूचकांकों के माध्यम से एक वैज्ञानिक आधार बनाया है। ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) परियोजना ECRICC कमजोर तटीय जिलों में पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन और आजीविका सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करके इस डेटा को क्रियान्वित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करती है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
रणनीति आकलन से कार्यान्वयन की ओर बढ़ती है। राष्ट्रीय तटीय मिशन को 'धुरी' के रूप में नामित करके, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वैज्ञानिक साक्ष्य सीधे राज्य और जिला स्तरों पर बुनियादी ढांचा और निवेश निर्णयों को सूचित करें। 'ब्लू कार्बन' पारिस्थितिकी तंत्रों (मैंग्रोव, समुद्री घास, खारे दलदल) को बहाल करने पर ध्यान केंद्रित करने से सह-लाभ मिलते हैं: कार्बन पृथक्करण, जैव विविधता संरक्षण, मत्स्य पालन सहायता और प्राकृतिक तूफान संरक्षण। UNDP और द नेचर कंजरवेंसी की भागीदारी स्केलेबल समाधानों के लिए आवश्यक बहु-हितधारक दृष्टिकोण को उजागर करती है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता
कार्यशाला की सिफारिशों से अनुकूली तटीय लचीलेपन के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देशों को आकार मिलने की उम्मीद है। सफलता प्रभावी ऊर्ध्वाधर एकीकरण (राष्ट्रीय से स्थानीय) और संबंधित मंत्रालयों, राज्य प्राधिकरणों और वित्तीय संस्थानों के बीच क्षैतिज समन्वय पर निर्भर करती है। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा से अन्य तटीय राज्यों में पायलट सफलता को दोहराना महत्वपूर्ण होगा। इन प्रयासों को विकसित भारत 2047 और नीली क्रांति के व्यापक दृष्टिकोण के साथ संरेखित करने के लिए निरंतर वित्तपोषण और सामुदायिक स्वामित्व की आवश्यकता होगी।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- ब्लू कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र
- मैंग्रोव, समुद्री घास के मैदान और खारे दलदल जैसे तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र जो वायुमंडल से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अलग और संग्रहीत करते हैं, जलवायु परिवर्तन शमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF)
- जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए अनुकूलन और शमन प्रथाओं में विकासशील देशों की सहायता के लिए UNFCCC (जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन) के ढांचे के भीतर स्थापित एक फंड।
- राष्ट्रीय तटीय मिशन
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत एक प्रस्तावित या मौजूदा मिशन जिसका उद्देश्य भारत के तटीय और समुद्री संसाधनों की रक्षा और उन्हें बनाए रखना, संरक्षण को बढ़ावा देना और तटीय क्षेत्रों को एकीकृत तरीके से प्रबंधित करना है।
याद रखने वाले तथ्य
कार्ड दबाएँ और जवाब देखें। पहले खुद याद करने की कोशिश करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- नोडल निकाय: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
- परियोजना: GCF-ECRICC (भारत के तटीय समुदायों के जलवायु लचीलेपन को बढ़ाना)
- ढांचे: राष्ट्रीय तटीय मिशन
गलती मत करना!
जाल 1: यह पूछना कि तटीय क्षेत्र प्रबंधन के लिए कौन सा मंत्रालय नोडल है (यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) है, न कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय या मत्स्य पालन मंत्रालय)। जाल 2: GCF-ECRICC परियोजना को अनुकूलन फंड या जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय अनुकूलन फंड (NAFCC) जैसे अन्य जलवायु फंडों के साथ भ्रमित करना।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
- पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA)
- समुदाय-आधारित लचीलापन
- विज्ञान-नीति इंटरफ़ेस
- ब्लू कार्बन
- आजीविका विविधीकरण
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
समाचार में उल्लिखित राष्ट्रीय तटीय मिशन और GCF-ECRICC परियोजना के लिए कौन सा केंद्रीय मंत्रालय नोडल एजेंसी है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से बताता है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) कार्यशाला का आयोजन कर रहा है और राष्ट्रीय तटीय मिशन तटीय लचीलेपन के लिए एक धुरी के रूप में काम करेगा। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) भारत में तटीय क्षेत्र प्रबंधन के लिए नोडल मंत्रालय है।
- Q2कठिन
समाचार में चर्चा की गई GCF-ECRICC परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.यह ग्रीन क्लाइमेट फंड द्वारा वित्त पोषित है और मैंग्रोव और समुद्री घास जैसे तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों को बहाल करने पर केंद्रित है।
- 2.यह परियोजना वर्तमान में भारत के सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है।
- 3.परियोजना का एक प्रमुख घटक 'ECRICC दीदी' मॉडल है, जिसमें तटीय समुदायों की महिलाएं जलवायु चैंपियन के रूप में शामिल हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि लेख में कहा गया है कि परियोजना ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) के तहत है और मैंग्रोव, समुद्री घास आदि को बहाल करने पर केंद्रित है। कथन 2 गलत है; लेख में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में प्रगति का उल्लेख है, जिसका अर्थ है कि यह अभी तक सभी तटीय राज्यों में नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि 'ECRICC दीदी' मॉडल को विशेष रूप से उजागर किया गया है।
- Q3मध्यम
समाचार के अनुसार, तटीय लचीलेपन को बढ़ाने के लिए GCF-ECRICC परियोजना निम्नलिखित में से किन राज्यों में प्रगति कर रही है?
व्याख्या: लेख विशेष रूप से उल्लेख करता है कि GCF-ECRICC परियोजना के तहत आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा राज्यों में प्रगति हुई है। अन्य विकल्प विभिन्न तटीय राज्यों को सूचीबद्ध करते हैं, जिससे वे प्रशंसनीय लेकिन गलत भ्रमित करने वाले विकल्प बन जाते हैं।
- Q4मध्यम
समाचार लेख के अनुसार राष्ट्रीय तटीय मिशन के लिए परिकल्पित प्राथमिक भूमिका क्या है?
व्याख्या: लेख में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के सचिव का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय तटीय मिशन यह सुनिश्चित करने के लिए एक धुरी के रूप में काम करेगा कि आकलन से प्राप्त वैज्ञानिक साक्ष्य राज्य, जिला और स्थानीय स्तरों पर वास्तविक योजना और निवेश निर्णयों में परिवर्तित हों। यह इसकी मुख्य परिकल्पित भूमिका है, न कि अनुसंधान, नियामक सुधार या बंदरगाह विकास।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. GCF का पूर्ण रूप क्या है?
ग्रीन क्लाइमेट फंड
2. GCF-ECRICC का पूर्ण रूप क्या है?
ग्रीन क्लाइमेट फंड - भारत के तटीय समुदायों के जलवायु लचीलेपन को बढ़ाना
3. नोडल मंत्रालय क्या है?
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
4. प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र क्या है?
मैंग्रोव, तटीय जलक्षेत्र, समुद्री घास, खारे दलदल, प्रवाल
5. पायलट राज्य क्या है?
आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा
6. केंद्रीय ढांचा क्या है?
राष्ट्रीय तटीय मिशन
7. व्यापक दृष्टिकोण क्या है?
विकसित भारत 2047 और नीली क्रांति
8. वर्तमान संदर्भ क्या है?
नई दिल्ली में 29-30 अक्टूबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला
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मूल खबर29 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
