प्रिलिम्स के लिए: नार्को-आतंकवाद, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), डार्कनेट, मुख्य फोकस वाले देश, मुख्य प्रस्तावित उपाय, घरेलू रणनीति के स्तंभ
मेन्स के लिए: आतंकवादी नेटवर्क का वित्तीय घेराव, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सामंजस्य, आपूर्ति-मांग में कमी मॉडल
स्रोत:
चर्चा में क्यों?
भारत नार्को-आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ एक एकीकृत रणनीति बनाने के लिए वैश्विक पहल का नेतृत्व कर रहा है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य विभिन्न देशों के कानूनों में सामंजस्य स्थापित करना, ड्रग्स के पैसे से होने वाले आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाना और सीमा पार खुफिया जानकारी साझा करने में सुधार करना है। घरेलू स्तर पर, यह रणनीति केवल ज़ब्ती से आगे बढ़कर पुनर्वास, युवा जागरूकता और डार्कनेट व क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से डिजिटल युग की तस्करी से निपटने तक फैली हुई है।
सारांश
- भारत की पहल का ध्यान समान अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने, सिंथेटिक ड्रग्स की साझा परिभाषा तय करने और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स को खत्म करने के लिए प्रत्यर्पण में तेज़ी लाने पर है।
- इस रणनीति का उद्देश्य मादक पदार्थ तस्करी और आतंकवाद के वित्तपोषण के बीच वित्तीय संबंधों को निशाना बनाकर नार्को-आतंकवाद से राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे के रूप में निपटना है।
- घरेलू उपायों में प्रवर्तन, पुनर्वास, युवा जागरूकता अभियान और डार्कनेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी का बहुआयामी दृष्टिकोण शामिल है।
मुख्य बातें
वैश्विक कानूनी सामंजस्य
भारत ड्रग कार्टेल द्वारा शोषण की जाने वाली कानूनी खामियों को दूर करने के लिए समान अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सिंथेटिक ड्रग्स की साझा परिभाषा का प्रस्ताव करता है।
आतंकवाद के वित्तपोषण पर घेराव
यह रणनीति उस वित्तीय पाइपलाइन को निशाना बनाती है जहाँ मादक पदार्थ तस्करी से आतंकवाद को धन मिलता है, इसे एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे के रूप में मानती है।
डिजिटल और पुनर्वास पर ध्यान
घरेलू प्रयासों में डार्कनेट और क्रिप्टो लेनदेन की निगरानी करना, पुनर्वास केंद्रों की क्षमता बढ़ाना और शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाना शामिल है।
संदर्भ / पृष्ठभूमि
नार्को-आतंकवाद संगठित मादक पदार्थ तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों का संगम है, जहाँ अवैध मादक पदार्थों के मुनाफे से हिंसक चरमपंथी समूहों को धन मिलता है। ऐतिहासिक रूप से, गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) और गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड) जैसे क्षेत्र इसके केंद्र रहे हैं। भारत का यह कदम सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते दुरुपयोग और इस बात के सबूतों के बीच आया है कि आतंकवादी समूह परिष्कृत नेटवर्क का उपयोग करते हैं, और बिना किसी दंड के काम करने के लिए देशों के बीच कानूनी असमानताओं का फायदा उठाते हैं।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
भारत की प्रस्तावित वैश्विक रणनीति बहुआयामी है। कानूनी रूप से, इसका उद्देश्य परिभाषाओं और प्रत्यर्पण प्रक्रियाओं को मानकीकृत करना है, जिससे अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने खोजना कठिन हो जाएगा। वित्तीय रूप से, यह अवैध धन प्रवाह को लक्षित करता है, जो ड्रग सिंडिकेट्स और आतंकी गुटों दोनों को खत्म करने में एक महत्वपूर्ण कदम है। परिचालन रूप से, यह नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) जैसी एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के बीच वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर देती है। घरेलू स्तर पर, केवल ज़ब्ती से 'आपूर्ति-मांग' मॉडल (प्रवर्तन + पुनर्वास) में बदलाव मूल कारण को अधिक समग्र रूप से संबोधित करता है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता
सफलता व्यापक बहुपक्षीय समझौतों को सुरक्षित करने पर निर्भर करती है, संभवतः संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और अपराध कार्यालय (UNODC) जैसे मंचों के माध्यम से। भारत को अपने NDPS अधिनियम प्रवर्तन और पुनर्वास बुनियादी ढांचे को मजबूत करके एक उदाहरण स्थापित करने की आवश्यकता हो सकती है। भविष्य के कदमों में उल्लिखित देशों (अमेरिका, यूरोपीय संघ, अफगानिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका) के साथ औपचारिक साझेदारी करना, डार्कनेट गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए साइबर-खुफिया में निवेश करना और इस रणनीति को कोलंबो योजना या BRICS जैसे व्यापक सुरक्षा संवादों में एकीकृत करना शामिल है।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- नार्को-आतंकवाद
- आतंकवादी गतिविधियों और संगठनों को वित्तपोषित करने और उनका समर्थन करने के लिए मादक पदार्थ तस्करी का उपयोग। यह आपराधिक नेटवर्क और चरमपंथी समूहों के बीच एक सहजीवी संबंध बनाता है।
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985
- भारत में प्रमुख कानून जो चिकित्सा और वैज्ञानिक उद्देश्यों को छोड़कर नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों के उत्पादन, निर्माण, बिक्री, परिवहन और उपभोग को प्रतिबंधित करता है।
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)
- गृह मंत्रालय के तहत भारत की नोडल ड्रग कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसी, जो मादक पदार्थ तस्करी और अवैध पदार्थों के दुरुपयोग से लड़ने के लिए जिम्मेदार है।
- डार्कनेट
- इंटरनेट का एक हिस्सा जिसे एक्सेस करने के लिए विशिष्ट सॉफ्टवेयर या कॉन्फ़िगरेशन की आवश्यकता होती है, जिसका उपयोग अक्सर गुमनाम और अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है, जिसमें ड्रग्स और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री शामिल है।
याद रखने वाले तथ्य
कार्ड दबाएँ और जवाब देखें। पहले खुद याद करने की कोशिश करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- नोडल निकाय: गृह मंत्रालय और उसकी एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)।
- कानूनी बिंदु: नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985।
- रणनीति: वैश्विक कानूनी सामंजस्य, वित्तीय घेराबंदी और घरेलू पुनर्वास के संयोजन वाला बहुआयामी दृष्टिकोण।
गलती मत करना!
वे 'नोडल मंत्रालय' के बारे में पूछ सकते हैं और स्वास्थ्य मंत्रालय या सामाजिक न्याय मंत्रालय जैसे विकल्प दे सकते हैं, लेकिन प्रवर्तन के लिए सही विकल्प गृह मंत्रालय है। एक और भ्रम 'नार्को-आतंकवाद' को केवल 'मादक पदार्थ तस्करी' के साथ भ्रमित करना है; पूर्व स्पष्ट रूप से आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़ा है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
- आतंकवादी नेटवर्क का वित्तीय घेराव, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सामंजस्य, आपूर्ति-मांग में कमी मॉडल
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1कठिन
नार्को-आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रस्तावित वैश्विक रणनीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.यह सिंथेटिक ड्रग्स के लिए एक साझा अंतरराष्ट्रीय परिभाषा स्थापित करना चाहता है।
- 2.यह रणनीति पूरी तरह से भारत की सीमाओं के भीतर मादक पदार्थों की खेप को जब्त करने पर केंद्रित है।
- 3.इसमें वांछित अपराधियों के तेज़ प्रत्यर्पण और वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने के उपाय शामिल हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि लेख में 'सिंथेटिक ड्रग्स की साझा परिभाषा' को एक प्रस्तावित उपाय के रूप में उल्लेख किया गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि घरेलू रणनीति स्पष्ट रूप से नेटवर्क की पहचान, पुनर्वास आदि को शामिल करने के लिए 'ज़ब्ती से आगे' जाती है। कथन 3 सही है क्योंकि 'तेज़ प्रत्यर्पण' और 'खुफिया जानकारी साझा करना' पर प्रकाश डाला गया है।
- Q2मध्यम
समाचार लेख के अनुसार, नार्को-आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक रणनीति के लिए भारत के जोर का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: लेख नार्को-आतंकवाद को आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे के रूप में प्रस्तुत करता है। वैश्विक रणनीति का मुख्य उद्देश्य वित्तीय नेटवर्क को खत्म करने के लिए कानूनी और परिचालन ढांचे बनाकर इस संबंध को संबोधित करना है। अन्य विकल्प लेख की सामग्री द्वारा समर्थित नहीं हैं।
- Q3मध्यम
लेख के अनुसार, मादक पदार्थ विरोधी पहल में सहयोग के लिए भारत द्वारा विशेष रूप से किस देश से संपर्क करने का उल्लेख किया गया है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से कहता है, '...अमेरिका और यूरोपीय देश भी शामिल हैं'। जबकि अफगानिस्तान, म्यांमार और श्रीलंका का भी उल्लेख किया गया है, दिए गए विकल्पों में से केवल अमेरिका और यूरोपीय देशों का सीधे संपर्क किए जाने के रूप में उल्लेख किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. मुख्य फोकस वाले देश क्या है?
अमेरिका, यूरोपीय देश, अफगानिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका
2. मुख्य प्रस्तावित उपाय क्या है?
सिंथेटिक ड्रग्स की साझा परिभाषा, प्रभावी कानूनी प्रावधान, तेज़ प्रत्यर्पण, वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करना
3. घरेलू रणनीति के स्तंभ क्या है?
नेटवर्क की पहचान, अवैध कमाई पर कार्रवाई, डिजिटल अपराधों की निगरानी, युवा जागरूकता, पुनर्वास
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मूल खबर28 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
