राजव्यवस्था

दिल्ली में हटाए गए मतदाताओं को फिर से शामिल करने पर फार्म-6 के स्पष्टीकरण पर सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई करेगा

4 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 7 / 122

प्रिलिम्स के लिए: फार्म-6, फार्म-8, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951, अगली सुनवाई की तारीख, नए मतदाता पंजीकरण का फॉर्म, मतदाता सूची में सुधार का फॉर्म, मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया

मेन्स के लिए: मताधिकार, मतदाता सूची पुनरीक्षण, ECI के निर्णयों की न्यायिक समीक्षा, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय 19 नवंबर को निर्वाचन आयोग के उस स्पष्टीकरण पर सुनवाई करेगा, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, वे फार्म-6 से दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। इससे झूठी घोषणा और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की आशंकाओं का समाधान होने की उम्मीद है।

सारांश

  • सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं को फिर से शामिल करने के लिए फार्म-6 के उपयोग पर आयोग के 3 नवंबर के स्पष्टीकरण पर सुनवाई करेगा।
  • आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसे मतदाताओं द्वारा फार्म-6 भरने को झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा, जिससे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई का डर दूर हो गया।
  • न्यायालय ने पहले सवाल उठाया था कि मौजूदा मतदाताओं से फार्म-8 या गणना प्रपत्र के बजाय फार्म-6 से नए मतदाता के रूप में आवेदन क्यों करवाया जा रहा है।

मुख्य बातें

  • सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई

    सर्वोच्च न्यायालय 19 नवंबर को आयोग के उस स्पष्टीकरण पर सुनवाई करेगा, जिसमें दिल्ली के SIR में हटाए गए मतदाताओं को फिर से शामिल कराने के लिए फार्म-6 के उपयोग की बात कही गई है।

  • फार्म-6 पर आयोग का स्पष्टीकरण

    आयोग ने कहा कि SIR में नाम हटाए गए मतदाताओं द्वारा फार्म-6 भरने को झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।

  • मतदाता अधिकार का मुद्दा

    न्यायालय ने सवाल उठाया था कि मौजूदा मतदाताओं से सरल सुधार फॉर्म के बजाय फार्म-6 से नए मतदाता के रूप में पंजीकरण क्यों करवाया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने दिल्ली की मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया, जिसमें 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए। इससे प्रभावित मतदाताओं के मताधिकार को लेकर चिंता पैदा हुई।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

आयोग का 3 नवंबर का स्पष्टीकरण उस आशंका को दूर करने के लिए था कि नए मतदाताओं के लिए बने फार्म-6 का उपयोग जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत झूठी घोषणा माना जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले इस तरीके पर सवाल उठाते हुए सुझाव दिया था कि इसके बजाय फार्म-8 (सुधार के लिए) या गणना प्रपत्र का उपयोग होना चाहिए। इस मामले से प्रशासनिक सुविधा और मौलिक मताधिकार के बीच तनाव सामने आता है।

आगे की राह

सर्वोच्च न्यायालय 19 नवंबर को इस मामले की सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि ज़रूरत पड़ने पर न्यायालय आयोग को आवेदन की समय-सीमा बढ़ाने का निर्देश दे सकता है। इस फैसले से पूरे भारत में मतदाता सूची पुनरीक्षण के तरीके की दिशा तय होगी, जिसमें सटीक सूची की ज़रूरत और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के बीच संतुलन रखना होगा।

मतदाता सूची के फॉर्म

फॉर्मउद्देश्य
फार्म-6पहली बार मतदाता पंजीकरण
फार्म-8मौजूदा सूची में प्रविष्टियों में सुधार

दिल्ली से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

फार्म-6
किसी नए मतदाता के किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहली बार पंजीकरण के लिए उपयोग किया जाने वाला आवेदन फॉर्म।
फार्म-8
मौजूदा मतदाता सूची में प्रविष्टियों (जैसे नाम, पता, आयु) में सुधार के लिए, या किसी प्रविष्टि को सूची के दूसरे भाग में स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला आवेदन फॉर्म।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)
निर्वाचन आयोग द्वारा योग्य मतदाताओं को जोड़कर और दोहरे या मृत मतदाताओं के नाम हटाकर मतदाता सूची को संशोधित और साफ करने के लिए चलाया गया विशेष अभियान।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951
संसद का एक अधिनियम, जो संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानमंडलों के सदनों के चुनाव संचालित करने, सदस्यों की अर्हता और अयोग्यता तथा मतदाता सूचियों के नियमन का प्रावधान करता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए।
  • इस नोडल संस्था पर ध्यान दें: भारत निर्वाचन आयोग (ECI)
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951

यह गलती न करें!

परीक्षक फार्म-6 (नया पंजीकरण) को फार्म-8 (सुधार) से बदल सकते हैं, या विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को सामान्य वार्षिक पुनरीक्षण से भ्रमित कर सकते हैं। वे अगली सुनवाई की सटीक तारीख, 19 नवंबर, 2026, की भी जांच कर सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • मताधिकार, मतदाता सूची पुनरीक्षण, ECI के निर्णयों की न्यायिक समीक्षा, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    किस फॉर्म का उपयोग मतदाता सूची में किसी नए मतदाता के पहली बार पंजीकरण के लिए होता है?

  2. Q2कठिन

    निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.सर्वोच्च न्यायालय 19 नवंबर, 2026 को फार्म-6 के उपयोग पर निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण की सुनवाई करेगा।
    2. 2.ECI ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम हटाए गए मतदाता फार्म-8 से दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
    3. 3.मामले की सुनवाई करने वाली पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शामिल हैं।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए?

  4. Q4मध्यम

    फार्म-6 के उपयोग को लेकर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में नाम हटाए गए मतदाताओं की मुख्य चिंता क्या थी?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सर्वोच्च न्यायालय 19 नवंबर 2026 को किस मामले की सुनवाई करेगा?

सर्वोच्च न्यायालय निर्वाचन आयोग के उस स्पष्टीकरण पर सुनवाई करेगा, जिसमें दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में नाम हटाए गए मतदाताओं को फिर से शामिल करने के लिए फार्म-6 के उपयोग की बात कही गई है।

2. फार्म-6 के बारे में निर्वाचन आयोग ने क्या स्पष्ट किया?

ECI ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में नाम हटाए गए मतदाता फार्म-6 से दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं, और इसे झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।

3. दिल्ली में हटाए गए नामों से कितने मतदाता प्रभावित हुए?

दिल्ली के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए थे।

4. मतदाता पंजीकरण और सुधार के लिए कौन-से फॉर्म उपयोग होते हैं?

फार्म-6 पहली बार पंजीकरण के लिए है, और फार्म-8 मौजूदा मतदाता सूची में सुधार के लिए है।

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