पर्यावरण

भारत में चरम मौसम से 3,220 मौतें, 42.5 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद (जनवरी-सितंबर 2026)

4 नवंबर 20263 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 3 / 122

प्रिलिम्स के लिए: चरम मौसमी घटनाएं, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE), मानसून की कमी, रिपोर्ट का नाम, नोडल निकाय, कवर की गई अवधि, चरम मौसम वाले दिन, मानव मौतें

मेन्स के लिए: जलवायु संवेदनशीलता, आपदा जोखिम में कमी, कृषि लचीलापन, पशुधन क्षेत्र पर प्रभाव, चरम मौसम के असर में अंतर-राज्यीय असमानता

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

CSE और डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट बताती है कि 2026 के पहले नौ महीनों में भारत में 92% दिनों तक चरम मौसम की घटनाएं हुईं। इससे 3,220 लोगों की मौत हुई, 42.5 लाख हेक्टेयर फसलें क्षतिग्रस्त हुईं और 1,28,334 मकान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए। सबसे ज्यादा मानव मौतें उत्तर प्रदेश में (811) और सबसे ज्यादा फसल नुकसान महाराष्ट्र में (28.3 लाख हेक्टेयर) हुआ। रिपोर्ट यह भी बताती है कि फरवरी 2026 1901 के बाद का सबसे सूखा फरवरी और पिछले 125 वर्षों का चौथा सबसे गर्म फरवरी रहा।

सारांश

  • CSE और डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट 'क्लाइमेट इंडिया 2026: एन असेसमेंट ऑफ एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स' जनवरी से सितंबर 2026 की अवधि को कवर करती है।
  • इस अवधि के 92% दिनों में कम से कम एक चरम मौसम घटना (लू, शीत लहर, बिजली गिरना, तूफान, भारी बारिश, बाढ़ या भूस्खलन) दर्ज हुई।
  • चरम मौसम से 47,244 पशुओं की भी मौत हुई।
  • 2022 से 2026 के पांच वर्षों में कुल फसल नुकसान (2.06 करोड़ हेक्टेयर) का 82% से ज्यादा हिस्सा 2024 से 2026 के बीच हुआ।
  • फरवरी 2026 1901 के बाद भारत का सबसे सूखा फरवरी और 125 वर्षों का चौथा सबसे गर्म फरवरी रहा; मानसून की बारिश सामान्य से 13% कम रही।
  • क्लाइमेट ट्रेंड्स की एक संबंधित रिपोर्ट 'फ्रॉम रिस्क टू रेजिलिएंस: क्लाइमेट चेंज, इकोलॉजी एंड द फ्यूचर ऑफ इंडियन एग्रीकल्चर' के अनुसार अत्यधिक गर्मी से दूध उत्पादन में हर साल ₹2,661 करोड़ का नुकसान होता है (18 लाख टन, कुल उत्पादन का लगभग 2%)।

मुख्य बातें

  • 92% दिन चरम मौसम वाले

    2026 के पहले नौ महीनों में 273 में से 252 दिनों में चरम मौसमी घटनाएं हुईं, जिनमें 3,220 लोगों की जान गई और 42.5 लाख हेक्टेयर फसलें क्षतिग्रस्त हुईं।

  • फसल और पशुओं का नुकसान

    महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 28.3 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुईं, और 47,000 से अधिक पशु मरे; अकेले अत्यधिक गर्मी से सालाना ₹2,661 करोड़ का दूध नुकसान होता है।

  • 2022 से बिगड़ता रुझान

    चरम मौसम वाले दिन 2022-23 में 86-88% से बढ़कर 2024 में 93% और 2025 में 99% हो गए; पांच वर्षों के फसल नुकसान का 82% 2023 के बाद हुआ।

पृष्ठभूमि

जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम के प्रति भारत की संवेदनशीलता बढ़ रही है। CSE और डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट 'क्लाइमेट इंडिया 2026' जनवरी से सितंबर 2026 के आंकड़े संकलित करती है, जिनके अनुसार 92% दिनों में कम से कम एक चरम घटना दर्ज हुई। यह बढ़ते रुझान का हिस्सा है: 2022-23 में 86-88%, 2024 में 93% और 2025 में 99%। रिपोर्ट यह भी सामने लाती है कि फरवरी 2026 1901 के बाद का सबसे सूखा और 125 वर्षों का चौथा सबसे गर्म फरवरी रहा, और मानसून सामान्य से 13% कम रहा।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

मानवीय और आर्थिक नुकसान गंभीर है: 3,220 मौतें, 42.5 लाख हेक्टेयर फसलें क्षतिग्रस्त, 1,28,334 मकान नष्ट या क्षतिग्रस्त और 47,244 पशुओं की मौत। सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में (811) हुईं, इसके बाद महाराष्ट्र (286) और बिहार (245) रहे। फसल क्षेत्र का सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र में (28.3 लाख हेक्टेयर) हुआ। उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में चरम मौसम वाले दिन सबसे ज्यादा (235) रहे। क्लाइमेट ट्रेंड्स की एक अलग रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक गर्मी से भारत को हर साल दूध उत्पादन में ₹2,661 करोड़ का नुकसान होता है (18 लाख टन, कुल का 2%), और 40% पशुधन तथा 45% कृषि भूमि पर बाढ़ का गंभीर खतरा बना रहता है।

आगे की राह

भारत को अपनी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जलवायु-अनुकूल खेती और आपदा तैयारी को मज़बूत करना होगा, खासकर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में। लू से बचाव की कार्य योजनाएं, फसल भूमि की बाढ़ से सुरक्षा और पशु आश्रय कार्यक्रम तुरंत ज़रूरी हैं। चरम मौसम की बढ़ती आवृत्ति को देखते हुए उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए जलवायु अनुकूलन को सभी विकास योजनाओं में शामिल करना होगा।

चरम मौसम वाले दिनों का रुझान (2022-2026)

वर्षचरम मौसम वाले दिन (%)मुख्य विशेषता
202286%आधार वर्ष
202388%हल्की वृद्धि
202493%90% से ऊपर
202599%लगभग हर दिन
2026 (जनवरी-सितंबर)92%1901 के बाद सबसे सूखा फरवरी

उत्तर प्रदेश से जुड़ाव

उत्तर प्रदेश की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UPPSC 8/10

बिहार की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:BPSC 7/10

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

चरम मौसमी घटनाएं
असामान्य, गंभीर या बेमौसम मौसमी घटनाएं, जैसे लू, शीत लहर, भारी वर्षा, बाढ़, भूस्खलन और चक्रवात, जो जीवन, संपत्ति और कृषि को भारी नुकसान पहुंचाती हैं।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE)
नई दिल्ली स्थित एक सार्वजनिक हित शोध और वकालत संस्था, जो पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर काम करती है। यह डाउन टू अर्थ पत्रिका प्रकाशित करती है।
मानसून की कमी
मानसून के मौसम में वास्तविक वर्षा का दीर्घकालिक औसत (LPA) से कम होने का प्रतिशत। 13% की कमी का अर्थ है सामान्य से कम मानसून।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 3,220 मौतें, 42.5 लाख हेक्टेयर फसल नुकसान, 1,28,334 मकान क्षतिग्रस्त/नष्ट (जनवरी-सितंबर 2026)
  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: जनवरी-सितंबर 2026 में चरम मौसम वाले 92% दिन
  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: उत्तर प्रदेश (811 मौतें) और महाराष्ट्र (28.3 लाख हेक्टेयर फसल नुकसान) सबसे अधिक प्रभावित
  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: फरवरी 2026 1901 के बाद का सबसे सूखा और 125 वर्षों का चौथा सबसे गर्म फरवरी

यह गलती न करें!

परीक्षक सबसे ज्यादा मौतों वाले राज्य (उत्तर प्रदेश, 811) को सबसे ज्यादा फसल नुकसान वाले राज्य (महाराष्ट्र, 28.3 लाख हेक्टेयर) से बदल सकते हैं। वे चरम मौसम वाले दिनों का प्रतिशत (जनवरी-सितंबर 2026 के लिए 92%) 2025 के आंकड़े (99%) या 2022-23 के आंकड़ों (86-88%) से भी भ्रमित कर सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • जलवायु संवेदनशीलता, आपदा जोखिम में कमी, कृषि लचीलापन, पशुधन क्षेत्र पर प्रभाव, चरम मौसम के असर में अंतर-राज्यीय असमानता

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    'क्लाइमेट इंडिया 2026: एन असेसमेंट ऑफ एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स' रिपोर्ट किस संगठन ने जारी की?

  2. Q2कठिन

    भारत में चरम मौसम पर CSE-डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट (जनवरी-सितंबर 2026) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.चरम मौसम से सबसे ज्यादा मानव मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं।
    2. 2.फसल क्षति का सबसे बड़ा क्षेत्र महाराष्ट्र में दर्ज हुआ।
    3. 3.फरवरी 2026 1901 के बाद भारत का सबसे गर्म फरवरी था।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    CSE रिपोर्ट के अनुसार 2026 के पहले नौ महीनों में भारत में कितने प्रतिशत दिनों में कम से कम एक चरम मौसम घटना दर्ज हुई?

  4. Q4मध्यम

    2022 से 2026 के पांच वर्षों की 82% फसल क्षति 2024 से 2026 के बीच होने के निष्कर्ष का मुख्य निहितार्थ क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 2026 के पहले नौ महीनों में भारत में चरम मौसम से कितने लोगों की मौत हुई?

जनवरी से सितंबर 2026 के बीच भारत में चरम मौसमी घटनाओं से 3,220 लोगों की मौत हुई।

2. 2026 में चरम मौसम से सबसे ज्यादा मौतें किस राज्य में दर्ज हुईं?

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 811 मौतें दर्ज हुईं, इसके बाद महाराष्ट्र (286) और बिहार (245) रहे।

3. 2026 में चरम मौसम से सबसे ज्यादा फसल नुकसान किस राज्य में हुआ?

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा फसल नुकसान हुआ, जहां 28.3 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुईं।

4. CSE रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2026 की क्या खास बात रही?

फरवरी 2026 1901 के बाद भारत का सबसे सूखा फरवरी और 125 वर्षों का चौथा सबसे गर्म फरवरी था।

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