राजव्यवस्था

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए विशेष सेल गठित करने का निर्देश दिया

4 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 4 / 122

प्रिलिम्स के लिए: बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016, बाल श्रम से संबंधित संवैधानिक प्रावधान, सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति, नोडल मंत्रालय, प्रमुख विधान, प्रभावी तिथि, मुख्य प्रतिबंध, मूल अधिनियम

मेन्स के लिए: पूर्ण प्रतिबंध, प्रवर्तन की कमी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, न्यायिक निगरानी, अनुच्छेद 24, शिक्षा का अधिकार

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए विशेष सेल गठित करने को कहा है। यह अधिनियम 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में लगाने पर पूरी तरह रोक लगाता है।

सारांश

  • सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को विशेष सेल गठित करने और बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 (2016 का अधिनियम संख्या 35) के कार्यान्वयन की निगरानी करने का निर्देश दिया।
  • यह अधिनियम 1 सितंबर 2016 से लागू हुआ और खतरनाक उद्योगों सहित किसी भी काम या प्रक्रिया में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को लगाने पर रोक लगाता है।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से प्रवर्तन एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा गया है।

मुख्य बातें

  • सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

    सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए विशेष सेल बनाने को कहा।

  • बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध

    2016 के संशोधन ने खतरनाक उद्योगों सहित किसी भी काम या प्रक्रिया में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के रोजगार पर पूरी तरह रोक लगाई।

  • राज्यों के माध्यम से कार्यान्वयन

    महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश जारी करने होंगे।

पृष्ठभूमि

बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 भारत में बाल श्रम को नियंत्रित करने वाला मूल कानून था। बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 (2016 का अधिनियम संख्या 35) ने इसे काफी मज़बूत बनाया। इसके तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी पेशे या प्रक्रिया में लगाने पर पूर्ण रोक लगा दी गई, और खतरनाक तथा गैर-खतरनाक काम के बीच का पहले का भेद हटा दिया गया। यह 1 सितंबर 2016 से लागू हुआ।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

विशेष सेल गठित करने और राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से कार्यान्वयन की निगरानी का सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश प्रवर्तन में कमियों की ओर इशारा करता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और राज्यों की प्रवर्तन एजेंसियों को शामिल करके न्यायालय एक व्यवस्थित निगरानी तंत्र बनाना चाहता है। यह इसलिए अहम है क्योंकि कानूनी प्रतिबंध के बावजूद कई क्षेत्रों में बाल श्रम जारी है और कमज़ोर प्रवर्तन एक बड़ी चुनौती रहा है।

आगे की राह

अब केंद्र को विशेष सेल गठित करके राज्यों को निर्देश जारी करने होंगे। प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय, नियमित निरीक्षण, जागरूकता अभियान और गरीबी तथा शिक्षा तक सीमित पहुंच जैसे मूल कारणों पर ध्यान देना ज़रूरी है। न्यायालय आवधिक रिपोर्टों के ज़रिए अनुपालन की निगरानी कर सकता है।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016
यह अधिनियम 1986 के कानून में संशोधन करके 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खतरनाक उद्योगों सहित किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में लगाने पर पूर्ण रोक लगाता है। यह गैर-खतरनाक व्यवसायों में किशोरों (14-18 वर्ष) की कार्य परिस्थितियों को भी नियंत्रित करता है।
बाल श्रम से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद 24 कारखानों, खदानों या खतरनाक व्यवसायों में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के रोजगार पर रोक लगाता है। अनुच्छेद 39(e) और (f) राज्य को बच्चों को शोषण से बचाने और उनके स्वस्थ विकास सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति
अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की वह शक्ति, जिससे वह कानूनों और कार्यपालिका की कार्रवाइयों की संवैधानिकता की समीक्षा करता है और मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए निर्देश जारी करता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस तथ्य पर ध्यान दें: बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 1 सितंबर 2016 से लागू हुआ।
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय है।
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: यह अधिनियम संख्या 35 (2016) है, जो बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 में संशोधन करता है।

यह गलती न करें!

परीक्षक संशोधन के वर्ष (2016 बनाम 1986) की अदला-बदली कर सकते हैं, या मूल अधिनियम के वर्ष को संशोधन के वर्ष से भ्रमित कर सकते हैं। वे यह भी कह सकते हैं कि अधिनियम केवल खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर रोक लगाता है, जबकि 2016 के संशोधन ने 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के किसी भी व्यवसाय में रोजगार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • पूर्ण प्रतिबंध, प्रवर्तन की कमी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, न्यायिक निगरानी, अनुच्छेद 24, शिक्षा का अधिकार

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1मध्यम

    बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के कार्यान्वयन के लिए मुख्य रूप से कौन-सा मंत्रालय ज़िम्मेदार है?

  2. Q2कठिन

    निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के रोजगार पर पूरी तरह रोक लगाता है।
    2. 2.मूल बाल श्रम अधिनियम वर्ष 2016 में बनाया गया था।
    3. 3.सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को इस अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए विशेष सेल गठित करने का निर्देश दिया।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 किस तिथि से लागू हुआ?

  4. Q4मध्यम

    बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 की निगरानी के लिए विशेष सेल गठित करने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बाल श्रम कानून के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को क्या करने का निर्देश दिया?

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए विशेष सेल गठित करने का निर्देश दिया।

2. सर्वोच्च न्यायालय ने बाल श्रम कानून की निगरानी के लिए किस मंत्रालय को निर्देश दिया?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को विशेष सेल गठित करने और राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश जारी करने को कहा गया।

3. बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 कब लागू हुआ?

यह अधिनियम 1 सितंबर 2016 को लागू हुआ।

4. बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 किस पर रोक लगाता है?

यह किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के रोजगार पर पूरी तरह रोक लगाता है, जिसमें खतरनाक उद्योग भी शामिल हैं।

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