प्रिलिम्स के लिए: पाठ्यक्रम, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सिनौली और राखीगढ़ी, राज्य, समिति का नाम, समिति के चेयरपर्सन, लक्ष्यित जारी करने की तिथि, मुख्य भाषाई परिवर्तन
मेन्स के लिए: शिक्षा के माध्यम से वैचारिक छाप; राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के स्थल के रूप में पाठ्यक्रम; भाषाई शुद्धतावाद और पहचान की राजनीति
स्रोत:
चर्चा में क्यों?
पश्चिम बंगाल सरकार की पाठ्यक्रम समीक्षा समिति ने 2027 के लिए राज्य के स्कूली पाठ्यपुस्तकों में महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव दिया है, जिसमें भाषाई संशोधन, मुगल इतिहास और मार्क्सवादी दर्शन सामग्री में कमी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन को शामिल करना शामिल है।
सारांश
- जुलाई 2026 में गठित पश्चिम बंगाल पाठ्यक्रम और सिलेबस समीक्षा समिति ने सरकारी स्कूलों के लिए प्रमुख पाठ्यपुस्तक संशोधनों की सिफारिश की है।
- मुख्य परिवर्तनों में बंगाली में 'अब्बा-अम्मी' जैसे शब्दों को 'बाबा-मां' से बदलना, इतिहास में मुगल/ब्रिटिश औपनिवेशिक/मार्क्सवादी सामग्री को कम करना और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा सिनौली और राखीगढ़ी जैसे पुरातात्विक स्थलों पर अध्याय जोड़ना शामिल है।
- संशोधित पुस्तकों को जनवरी 2027 तक जारी करने का लक्ष्य रखा गया है, जो सरकार की अंतिम मंज़ूरी पर निर्भर है, और इसमें पिछली सरकार द्वारा शुरू किए गए सिंगूर भूमि आंदोलन और कन्याश्री योजना पर अध्यायों को हटाने का भी प्रस्ताव है।
मुख्य बातें
भाषा और विचारधारा
बंगाली पाठ्यपुस्तकों में उर्दू-प्रभावित शब्दों ('अब्बा-अम्मी') को अधिक सामान्य बंगाली शब्दों ('बाबा-मां') से बदला जाएगा, जो भाषाई प्रामाणिकता पर ज़ोर देता है।
ऐतिहासिक आख्यान में बदलाव
मुगल इतिहास, ब्रिटिश उपनिवेशवाद और मार्क्सवादी दर्शन को कम करने का प्रस्ताव, साथ ही हिंदू राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जोड़ना।
नीतिगत उलटफेर
पिछली सरकार के सिंगूर आंदोलन और कन्याश्री योजना पर अध्यायों को हटाया जा सकता है, जो शिक्षा में पूर्ववर्ती की राजनीतिक विरासत की समीक्षा का संकेत देता है।
संदर्भ / पृष्ठभूमि
यह समीक्षा पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार में बदलाव के बाद हुई है, जहाँ नया प्रशासन अक्सर पिछली सरकार की शैक्षिक नीतियों का पुनर्मूल्यांकन करना चाहता है। पाठ्यपुस्तक संशोधन नई सरकारों के लिए युवा दिमागों पर अपनी वैचारिक परिप्रेक्ष्य को अंकित करने का एक सामान्य उपकरण है, एक ऐसी घटना जो भारतीय राज्यों में देखी जाती है। भाषा और ऐतिहासिक आख्यान पर ध्यान सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय इतिहास के बारे में व्यापक बहसों से सीधे जुड़ा है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
प्रस्तावों के बहुस्तरीय निहितार्थ हैं। भाषाई रूप से, यह बंगाली के 'शुद्धतावादी' रूप को बढ़ावा देता है, संभावित रूप से उर्दू जैसे अन्य भाषाई प्रभावों से शब्दों को हाशिए पर धकेलता है। ऐतिहासिक रूप से, मुगल और मार्क्सवादी सामग्री को कम करना जबकि डॉ. मुखर्जी जैसे व्यक्तियों को जोड़ना और सिनौली/राखीगढ़ी (आर्यन प्रवास बहसों से जुड़ा) का संदर्भ देना एक हिंदू-राष्ट्रवादी और स्वदेशी-सभ्यता-केंद्रित आख्यान की ओर बदलाव का संकेत देता है। सिंगूर और कन्याश्री पर अध्यायों को हटाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जो पिछली सरकार के प्रमुख राजनीतिक और कल्याणकारी मील के पत्थर को अकादमिक रिकॉर्ड से मिटा रहा है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता
समिति की सिफारिशें अंतिम नहीं हैं; सरकार की मंज़ूरी वास्तविक परिवर्तनों को निर्धारित करेगी। छपाई की चुनौतियों को देखते हुए जनवरी 2027 की समय-सीमा महत्वाकांक्षी है। इस कदम को शिक्षाविदों और विपक्षी दलों की ओर से जांच का सामना करना पड़ेगा, जिससे संभावित रूप से कानूनी या सार्वजनिक बहस हो सकती है। यह इस बात के लिए एक मिसाल कायम करता है कि चुनाव के बाद राज्य के पाठ्यक्रम को कितनी तेज़ी से नया रूप दिया जा सकता है, जिससे छात्रों की दीर्घकालिक ऐतिहासिक चेतना प्रभावित होती है।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- पाठ्यक्रम
- औपचारिक निर्देश का नियोजित क्रम या एक स्कूल द्वारा प्रदान किए गए कुल अनुभव, जिसमें विषय, सामग्री और सीखने के उद्देश्य शामिल हैं।
- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
- एक हिंदू राष्ट्रवादी राजनेता, भारतीय जनसंघ (भाजपा का अग्रदूत) के संस्थापक, और अनुच्छेद 370 के प्रबल विरोधी। उन्होंने भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया।
- सिनौली और राखीगढ़ी
- क्रमशः उत्तर प्रदेश और हरियाणा में महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल। सिनौली (रथ, ताबूत) और राखीगढ़ी (एक प्रमुख हड़प्पा स्थल) से प्राप्त निष्कर्ष सिंधु घाटी सभ्यता और आर्यन प्रवास सिद्धांतों पर बहसों के केंद्र में हैं।
याद रखने वाले तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- समिति: पश्चिम बंगाल की 'पाठ्यक्रम और सिलेबस समीक्षा समिति', जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी कर रहे हैं।
- समय-सीमा: पाठ्यपुस्तक परिवर्तनों के लिए सिफारिशें जनवरी 2027 से लागू करने का लक्ष्य है।
- विशिष्ट परिवर्तन: बंगाली पाठ्यपुस्तकों में 'अब्बा', 'अम्मी', 'पानी' शब्दों को 'बाबा', 'मां', 'जॉल' से बदलना।
गलती मत करना!
जाल में समितियों के नाम बदलना (जैसे, 'राज्य शिक्षा परिषद' के बजाय 'पाठ्यक्रम और सिलेबस समीक्षा समिति'), जोड़े जा रहे ऐतिहासिक व्यक्तियों को भ्रमित करना (जैसे, 'वी.डी. सावरकर' के बजाय 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी'), या परिवर्तन की दिशा को गलत बताना (जैसे, 'मुगल इतिहास का विस्तार' के बजाय 'कम किया गया') शामिल होगा।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
- शिक्षा के माध्यम से वैचारिक छाप
- राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के स्थल के रूप में पाठ्यक्रम
- भाषाई शुद्धतावाद और पहचान की राजनीति
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
समाचार में उल्लिखित पश्चिम बंगाल पाठ्यक्रम और सिलेबस समीक्षा समिति के अध्यक्ष कौन हैं?
व्याख्या: लेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि समिति की अध्यक्षता कल्याणी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी कर रहे हैं। अन्य नाम इस संदर्भ में उल्लिखित प्रसिद्ध बंगाली बुद्धिजीवी हैं।
- Q2कठिन
पश्चिम बंगाल के स्कूली पाठ्यपुस्तकों में प्रस्तावित परिवर्तनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.समिति ने रवींद्रनाथ टैगोर की कविता 'अफ्रीका' को पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है।
- 2.आर्यन प्रवास के सिद्धांतों पर सवाल उठाने के लिए उत्तर प्रदेश के सिनौली से प्राप्त पुरातात्विक निष्कर्षों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
- 3.द्विजेंद्रलाल राय के नाटक 'मेवाड़ पतन' को साहित्य पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की गई है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है: लेख में कहा गया है कि टैगोर की कविता 'अफ्रीका' को हटाने का प्रस्ताव है, न कि शामिल करने का। कथन 2 सही है: सिनौली से प्राप्त निष्कर्षों का उल्लेख आर्यन प्रवास सिद्धांतों पर सवाल उठाने के लिए शामिल किए जाने के रूप में किया गया है। कथन 3 गलत है: द्विजेंद्रलाल राय के नाटक 'मेवाड़ पतन' को शामिल करने के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है।
- Q3मध्यम
समिति की योजना के अनुसार, पश्चिम बंगाल में संशोधित स्कूली पाठ्यपुस्तकों का पहला संस्करण कब तक तैयार होने का लक्ष्य है?
व्याख्या: लेख में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि नई पाठ्यपुस्तकों का पहला संस्करण तैयार करने का लक्ष्य जनवरी 2027 है। समिति का गठन जुलाई 2026 में हुआ था, जिससे जुलाई/अक्टूबर 2026 जैसी पिछली तारीखें अंतिम पुस्तकों के लिए असंभव हो जाती हैं।
- Q4मध्यम
बंगाली पाठ्यपुस्तकों में 'अब्बा' और 'अम्मी' जैसे शब्दों को 'बाबा' और 'मां' से बदलने के प्रस्तावित परिवर्तन का प्राथमिक निहितार्थ क्या है?
व्याख्या: लेख में कहा गया है कि समिति ने उन शब्दों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है जिनका उपयोग बोलचाल की बंगाली में अधिक होता है, जिसमें 'पानी', 'अब्बा', 'अम्मी' को 'जॉल', 'बाबा', 'मां' से बदलने का हवाला दिया गया है। इसमें 'उर्दू-प्रभावित' शब्दों को बदलने का उल्लेख नहीं है, इसलिए मूल विकल्प B में असमर्थित भाषा जोड़ी गई थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. राज्य क्या है?
पश्चिम बंगाल
2. समिति का नाम क्या है?
पाठ्यक्रम और सिलेबस समीक्षा समिति
3. समिति के चेयरपर्सन क्या है?
प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी, कल्याणी विश्वविद्यालय
4. लक्ष्यित जारी करने की तिथि क्या है?
जनवरी 2027
5. मुख्य भाषाई परिवर्तन क्या है?
'अब्बा', 'अम्मी', 'पानी' को 'बाबा', 'मां', 'जॉल' से बदला गया
6. जोड़ा गया प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्ति क्या है?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
7. प्रस्तावित पुरातात्विक स्थल क्या है?
सिनौली (यूपी), राखीगढ़ी (हरियाणा)
8. वर्तमान संदर्भ क्या है?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार के तहत जुलाई 2026 में गठित समिति की सिफारिशें
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मूल खबर29 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
