प्रिलिम्स के लिए: कांफ्रेंस ऑफ द पार्टीज (COP), जलवायु न्याय, हानि और क्षति (L&D), COP31 का पूर्ण रूप, मुख्य घटना, नोडल वक्ता, वर्तमान संदर्भ
मेन्स के लिए: "तीसरे ध्रुव की भेद्यता", "जलवायु शासन में समानता", "सीमा पार जल सुरक्षा"
स्रोत:
चर्चा में क्यों?
नेपाल आगामी COP31 शिखर सम्मेलन में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के असमान प्रभाव और इसके वैश्विक निहितार्थों का मुद्दा उठाएगा। देश की प्रमुख प्राथमिकताओं में हिमालयी क्षेत्र में हानि और क्षति को संबोधित करना, जलवायु वित्त सुरक्षित करना और जलवायु न्याय की वकालत करना शामिल है, क्योंकि वैश्विक उत्सर्जन में इसका न्यूनतम योगदान है, जबकि यह गंभीर रूप से संवेदनशील है।
सारांश
- नेपाल COP31 में चार प्रमुख प्राथमिकताएं प्रस्तुत करेगा: हिमालयी जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, हानि और क्षति, जलवायु वित्त और जलवायु न्याय।
- हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सीधे पानी, भोजन, ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है, जिससे इसका संरक्षण एक अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी बन जाता है।
मुख्य बातें
हिमालयी प्राथमिकताएं
नेपाल COP31 में हिमालयी जलवायु जोखिमों, जलवायु वित्त और न्याय को प्राथमिकता देगा।
जलवायु न्याय पर ध्यान
नेपाल अपने कम उत्सर्जन लेकिन जलवायु प्रभावों के प्रति उच्च संवेदनशीलता के कारण जलवायु न्याय पर जोर देता है।
वैश्विक जिम्मेदारी
हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण एक साझा अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
संदर्भ / पृष्ठभूमि
हिमालयी क्षेत्र, जिसे अक्सर 'तीसरा ध्रुव' कहा जाता है, जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है, जिसमें ग्लेशियरों का पीछे हटना और अनियमित मानसून जैसे प्रभाव निचले प्रवाह में एक अरब से अधिक लोगों को प्रभावित करते हैं। COP31 में नेपाल का रुख COP27 में स्थापित हानि और क्षति कोष को चालू करने और UNFCCC के तहत समानता के सिद्धांतों के लिए कमजोर राष्ट्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर आधारित है।
मुख्य विश्लेषण और निहितार्थ
नेपाल का चार-सूत्रीय एजेंडा हिमालयी जलवायु जोखिमों को क्षेत्रीय से वैश्विक सुरक्षा मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करता है, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को पानी, भोजन और ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ता है। यह जलवायु वित्त को सहायता के रूप में नहीं, बल्कि 'प्रदूषण फैलाने वाला भुगतान करे' सिद्धांत के तहत मुआवजे के रूप में प्रस्तुत करता है। भारत के लिए, यह जल प्रबंधन पर सीमा पार सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों में जलवायु न्याय के लिए भारत की अपनी वकालत को मजबूत करता है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे का रास्ता
COP31 हानि और क्षति कोष के संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी। नेपाल की वकालत अन्य पर्वतीय और कमजोर राष्ट्रों को प्रेरित कर सकती है। इसके एजेंडे की सफलता विकसित राष्ट्रों से प्रतिबद्धताएं हासिल करने और अन्य G77 राष्ट्रों के साथ गठबंधन बनाने पर निर्भर करती है, जिससे अधिक न्यायसंगत वैश्विक जलवायु शासन के लिए मंच तैयार होगा।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए ज़रूरी किताबी जानकारी
- कांफ्रेंस ऑफ द पार्टीज (COP)
- संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय, जहाँ सदस्य राष्ट्र प्रगति का आकलन करने और प्रतिबद्धताओं पर बातचीत करने के लिए सालाना मिलते हैं।
- जलवायु न्याय
- एक अवधारणा जो जलवायु परिवर्तन के नैतिक आयामों को संबोधित करती है, जिसमें कमजोर आबादी और विकासशील देशों द्वारा वहन किए गए असमान बोझ पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिन्होंने वैश्विक उत्सर्जन में सबसे कम योगदान दिया है।
- हानि और क्षति (L&D)
- UNFCCC के तहत एक तंत्र जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को संबोधित करता है जो अनुकूलन की सीमाओं से परे हैं, अक्सर अपरिवर्तनीय आर्थिक और गैर-आर्थिक नुकसानों को संदर्भित करता है, जिससे एक समर्पित कोष की स्थापना होती है।
याद रखने वाले तथ्य
कार्ड दबाएँ और जवाब देखें। पहले खुद याद करने की कोशिश करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: COP31 में नेपाल की चार प्राथमिकताएं (हिमालयी प्रभाव, हानि और क्षति, जलवायु वित्त, जलवायु न्याय)
- नोडल निकाय: संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC)
- कानूनी बिंदु: सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों (CBDR) और संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत
गलती मत करना!
वे पूछ सकते हैं कि कौन सा देश COP31 में हिमालयी जलवायु जोखिमों का मुद्दा उठा रहा है (नेपाल) और इसे भूटान या भारत के साथ भ्रमित करने का प्रयास कर सकते हैं। वे 'हानि और क्षति कोष' को 'ग्रीन क्लाइमेट फंड' के साथ एक भ्रमित करने वाला विकल्प के रूप में भी बदलकर भ्रमित कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर में लिखें
- "तीसरे ध्रुव की भेद्यता", "जलवायु शासन में समानता", "सीमा पार जल सुरक्षा"
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1कठिन
लेख में उल्लिखित नेपाल के रुख के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.नेपाल आगामी COP31 में हिमालयी जलवायु जोखिमों और जलवायु न्याय को प्राथमिकता देगा।
- 2.नेपाल वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में एक प्रमुख योगदानकर्ता है लेकिन इसे न्यूनतम जलवायु प्रभावों का सामना करना पड़ता है।
- 3.हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सीधे क्षेत्रीय जल और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 लेख के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है; लेख स्पष्ट रूप से कहता है कि वैश्विक उत्सर्जन में नेपाल का योगदान 'बहुत कम' है लेकिन इसे 'भारी नुकसान' का सामना करना पड़ता है। कथन 3 सही है क्योंकि विदेश मंत्री खनाल ने हिमालयी स्थिरता को सीधे पानी, भोजन, ऊर्जा और अर्थव्यवस्था से जोड़ा है।
- Q2मध्यम
लेख के अनुसार, नेपाल COP31 में कितनी प्रमुख प्राथमिकताएं प्रस्तुत करेगा?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से कहता है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि देश COP31 में 'चार प्रमुख प्राथमिकताएं' प्रस्तुत करेगा, जिसमें हिमालयी जलवायु जोखिम, हानि और क्षति, जलवायु वित्त और जलवायु न्याय शामिल हैं।
- Q3मध्यम
लेख के अनुसार, नेपाल अपने COP31 एजेंडे में 'जलवायु न्याय' पर जोर क्यों दे रहा है?
व्याख्या: लेख स्पष्ट रूप से कहता है कि 'भले ही वैश्विक उत्सर्जन में नेपाल का योगदान बहुत कम है, लेकिन फिर भी इस देश को जलवायु परिवर्तन से भारी नुकसान उठाना पड़ा है।' योगदान और प्रभाव के बीच यह असमानता जलवायु न्याय के तर्क का मूल है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. COP31 का पूर्ण रूप क्या है?
कांफ्रेंस ऑफ द पार्टीज 31
2. मुख्य घटना क्या है?
नेशनल क्लाइमेट समिट-2026, काठमांडू
3. नोडल वक्ता क्या है?
शिरीष खनाल, नेपाल के विदेश मंत्री
4. वर्तमान संदर्भ क्या है?
COP31 से पहले नेशनल क्लाइमेट समिट-2026 में नेपाल की घोषणा
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मूल खबर29 अक्टूबर 2026 · खबर पढ़ें
