राजव्यवस्था

इलाहाबाद उच्च न्यायालय: निर्वाचित प्रतिनिधि अनुच्छेद 19 के तहत अल्पसंख्यकों की चिंताएँ उठा सकते हैं

5 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 69 / 85

प्रिलिम्स के लिए: अनुच्छेद 19 (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), निर्वाचित प्रतिनिधि का विशेषाधिकार, न्यायालय, न्यायाधीश, प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेद, उद्धृत BNS धारा, वर्तमान संदर्भ

मेन्स के लिए: वाक् की स्वतंत्रता बनाम उचित प्रतिबंध, निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका, आपराधिक अभियोजन में न्यायिक संयम

स्रोत:Indian ExpressIndian Express

चर्चा में क्यों?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2023 में अमेरिका में सिखों की सुरक्षा पर दिए गए बयान को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ FIR का आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के तहत समुदाय की चिंताएँ उठाने का अधिकार है। अदालत के अनुसार किसी विचार से असहमति आपराधिक अपराध नहीं है, और संदेह अभियोजन का आधार नहीं बन सकता।

सारांश

  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान) ने 2023 में अमेरिका में सिखों पर दिए गए बयान को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ FIR का आदेश देने से इनकार किया।
  • अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों को किसी समुदाय की चिंताएँ उठाने का अधिकार है।
  • याचिका में भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।

मुख्य बातें

  • उच्च न्यायालय का फैसला

    इलाहाबाद HC ने 2023 में सिखों पर दिए बयान को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ FIR का आदेश देने से इनकार किया और कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि समुदाय की चिंताएँ उठा सकते हैं।

  • अनुच्छेद 19 की सुरक्षा

    अदालत ने कहा कि यह भाषण अनुच्छेद 19 (वाक् की स्वतंत्रता) के तहत संरक्षित है और केवल असहमति आपराधिक अपराध नहीं है।

  • संदेह, प्रमाण नहीं

    अदालत ने कहा कि संदेह आपराधिक अभियोजन का आधार नहीं हो सकता; याचिकाकर्ता भारत की संप्रभुता को वास्तविक खतरा दिखाने में विफल रहे।

पृष्ठभूमि

2023 में अमेरिका यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने सवाल उठाया था कि क्या भारत में सिख पगड़ी पहन सकते हैं या गुरुद्वारे जा सकते हैं। वाराणसी में धारा 152 BNS (संप्रभुता को खतरा) के तहत FIR की मांग करते हुए याचिका दायर हुई। मजिस्ट्रेट और सत्र न्यायालय ने इनकार किया, जिसके बाद मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहुंचा।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

HC का फैसला दोहराता है कि अनुच्छेद 19 के तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों को अल्पसंख्यकों की चिंताएँ उठाने की व्यापक छूट है। अदालत ने चिंता उठाने और हिंसा भड़काने के बीच अंतर किया, और कहा कि किसी तीसरे पक्ष द्वारा भाषण के दुरुपयोग से वक्ता जवाबदेह नहीं ठहरता। फैसला यह भी पुष्ट करता है कि आपराधिक अभियोजन संदेह से नहीं, प्रमाण से शुरू हो सकता है।

आगे की राह

यह निर्णय विदेशी धरती पर दिए गए राजनीतिक भाषणों के प्रति अदालतों के रुख के लिए एक मिसाल बनता है। इसमें कहा गया है कि विचारों का विरोध करने के लिए संसदीय बहस और सार्वजनिक चर्चा उचित मंच हैं, आपराधिक अदालतें नहीं। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों के समान बयानों के खिलाफ भविष्य की शिकायतों पर असर पड़ सकता है।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

अनुच्छेद 19 (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता)
भारतीय संविधान के भाग III के तहत एक मौलिक अधिकार, जो नागरिकों को अपने विचार स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने का अधिकार देता है, और जो अनुच्छेद 19(2) के तहत संप्रभुता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता आदि के आधार पर उचित प्रतिबंधों के अधीन है।
निर्वाचित प्रतिनिधि का विशेषाधिकार
संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों को सदन में स्वतंत्र रूप से बोलने के कुछ विशेषाधिकार प्राप्त हैं। सदन के बाहर भी उन्हें अनुच्छेद 19 के तहत वाक् की स्वतंत्रता प्राप्त है, हालांकि वह उचित प्रतिबंधों के अधीन है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • ध्यान दें यह न्यायालय: इलाहाबाद उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान
  • ध्यान दें यह तथ्य: 2023 में अमेरिका में सिखों पर दिए बयान के लिए राहुल गांधी के खिलाफ FIR से इनकार
  • ध्यान दें यह कानूनी बिंदु: अनुच्छेद 19 (वाक् की स्वतंत्रता) और BNS की धारा 152

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • वाक् की स्वतंत्रता बनाम उचित प्रतिबंध, निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका, आपराधिक अभियोजन में न्यायिक संयम

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

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  1. Q1आसान

    राहुल गांधी के सिखों पर दिए बयान को लेकर FIR का आदेश देने से किस उच्च न्यायालय ने इनकार किया?

  2. Q2कठिन

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय के राहुल गांधी के बयान संबंधी फैसले के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.न्यायालय ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि को अनुच्छेद 19 के तहत समुदाय की चिंताएँ उठाने का अधिकार है।
    2. 2.न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 के तहत FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
    3. 3.न्यायालय ने कहा कि केवल संदेह आपराधिक अभियोजन का आधार नहीं हो सकता।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    राहुल गांधी के भाषण को संरक्षण देने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संविधान के किस अनुच्छेद का सहारा लिया?

  4. Q4मध्यम

    निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले का मुख्य महत्व क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी के सिखों पर दिए बयानों के बारे में क्या फैसला किया?

न्यायालय ने FIR का आदेश देने से इनकार किया और कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को अनुच्छेद 19 (वाक् की स्वतंत्रता) के तहत समुदाय की चिंताएँ उठाने का अधिकार है।

2. इस मामले में किस न्यायाधीश ने आदेश सुनाया?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने आदेश सुनाया।

3. राहुल गांधी के खिलाफ दायर याचिका में कानून का कौन-सा प्रावधान उद्धृत किया गया था?

याचिका में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 का हवाला दिया गया था, जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है।

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