प्रिलिम्स के लिए: असम राइफल्स, ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौता, यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC), विरोध करने वाले समूह, मुख्य मांगें, रैलियों का स्थान, ट्रिगर करने वाली घटना, वर्तमान संदर्भ
मेन्स के लिए: मणिपुर में जातीय संघर्ष, असम राइफल्स की भूमिका, ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौता, पूर्वोत्तर भारत की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां
स्रोत:Indian Express
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- मणिपुर के नागा समूहों ने उखरुल और कामजोंग ज़िलों में रैलियां कीं।
- रैलियों का नेतृत्व तंगखुल नागा लोंग (TNL) और यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने किया।
- प्रदर्शनकारियों ने नागा बहुल इलाकों से असम राइफल्स की वापसी की मांग की।
- ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौते को रद्द करने की मांग भी उठाई गई।
- विरोध प्रदर्शन 4 नवंबर 2026 को इंफाल-उखरुल राजमार्ग पर हुई गोलीबारी की घटना के बाद हुए।
चर्चा में क्यों?
यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) और तंगखुल नागा लोंग (TNL) की अगुवाई में मणिपुर के नागा समूहों ने नागा बहुल इलाकों से असम राइफल्स की वापसी, कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों के ज़रिए चलाए जा रहे छद्म युद्ध के अंत और ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौते को रद्द करने की मांग को लेकर बड़ी रैलियां कीं। इन विरोध प्रदर्शनों से मणिपुर में गहराते जातीय संघर्ष की तस्वीर सामने आती है और आंतरिक सुरक्षा तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भूमिका पर सवाल उठते हैं।
सारांश
- यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) और तंगखुल नागा लोंग (TNL) के तहत मणिपुर के नागा समूहों ने उखरुल और कामजोंग में रैलियां कीं और नागा बहुल इलाकों से असम राइफल्स की वापसी की मांग की।
- प्रदर्शनकारी कथित 'छद्म युद्ध' को खत्म करने की मांग कर रहे हैं, जो कुकी उग्रवादी समूहों के ज़रिए चलाया जा रहा है, और ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौते को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं।
- विरोध प्रदर्शन इंफाल-उखरुल राजमार्ग पर हुई गोलीबारी की घटना के बाद शुरू हुए, और राज्य सरकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता को लेकर चिंता भी इसकी वजह बनी।
मुख्य बातें
नागा समूहों की बड़ी रैलियां
TNL और UNC ने उखरुल और कामजोंग में रैलियों का नेतृत्व किया और असम राइफल्स की वापसी तथा छद्म युद्ध के अंत की मांग की।
राजमार्ग पर गोलीबारी की घटना
4 नवंबर को इंफाल-उखरुल राजमार्ग पर संदिग्ध उग्रवादियों ने यात्री वाहनों पर गोलियां चलाईं, जिससे दहशत फैली और विरोध प्रदर्शन शुरू हुए।
प्रधानमंत्री मोदी को ज्ञापन
प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें केंद्र से मांगों को गंभीरता से लेने और चल रहे संकट में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया।
पृष्ठभूमि
मणिपुर मई 2023 से मेइतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा से जूझ रहा है। मुख्य रूप से उखरुल और कामजोंग के पहाड़ी ज़िलों के नागा समूहों ने अब विरोध का रास्ता अपनाया है और राज्य सरकार पर कुकी उग्रवादियों को हथियार देने और उन्हें दूसरे समुदायों के खिलाफ प्रॉक्सी के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। कुकी उग्रवादी समूहों के साथ हुआ ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौता विवाद का विषय बना हुआ है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
ये विरोध प्रदर्शन मणिपुर में जातीय संघर्ष के फैलाव का संकेत हैं, जिसमें अब नागा समुदाय भी शामिल हो गया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल असम राइफल्स की वापसी की मांग राज्य के सुरक्षा ढांचे को चुनौती देती है। छद्म युद्ध के आरोप राज्य सरकार की भूमिका और SoO समझौते की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाते हैं। यह संकट नाज़ुक शांति को खतरे में डालता है और क्षेत्र को और अस्थिर कर सकता है।
आगे की राह
केंद्र को नागा समूहों सहित सभी हितधारकों से बातचीत करनी होगी ताकि उनकी शिकायतों का समाधान हो सके। SoO समझौते की समीक्षा और संवेदनशील इलाकों में असम राइफल्स की तैनाती पर पुनर्विचार ज़रूरी हो सकता है। संघर्ष को और बढ़ने से रोकने के लिए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्रशासन में भरोसा बहाल करना अहम है।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- असम राइफल्स
- भारत का सबसे पुराना केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, जिसे 1835 में खड़ा किया गया था। यह गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है और मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में सीमा सुरक्षा और उग्रवाद-विरोधी अभियानों के लिए तैनात होता है।
- ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौता
- भारत सरकार और कुछ उग्रवादी समूहों के बीच एक युद्धविराम समझौता, जिसके तहत समूह अपने अभियान रोकने पर सहमत होते हैं और बदले में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर रोक लगती है। यह अक्सर शांति वार्ता की भूमिका तैयार करता है।
- यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC)
- मणिपुर के नागा जनजातियों का एक प्रमुख शीर्ष निकाय, जो नागा लोगों के राजनीतिक अधिकारों और हितों की पैरवी करता है, जिसमें एक एकीकृत नागा क्षेत्र की मांग भी शामिल है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: नागा समूह: यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC), तंगखुल नागा लोंग (TNL); ज़िले: उखरुल, कामजोंग
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: गृह मंत्रालय (असम राइफल्स और SoO के लिए)
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौता
यह गलती न करें!
परीक्षा में यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) को नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (NSCN) के साथ मिलाया जा सकता है, या मणिपुर के ज़िलों के नाम गड़बड़ाए जा सकते हैं। यह भी कहा जा सकता है कि असम राइफल्स रक्षा मंत्रालय के अधीन है, जबकि वह गृह मंत्रालय के अधीन है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- मणिपुर में जातीय संघर्ष, असम राइफल्स की भूमिका, ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौता, पूर्वोत्तर भारत की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां
कहीं अटके? एक टैप में समझें
मणिपुर के नागा समूहों ने असम राइफल्स, जो एक केंद्रीय सुरक्षा बल है, को अपने इलाकों से हटाने की मांग को लेकर बड़े विरोध प्रदर्शन किए। वे उस कथित 'छद्म युद्ध' को रोकने की भी मांग कर रहे हैं जो कुकी उग्रवादियों के ज़रिए चलाया जा रहा है। ये विरोध प्रदर्शन एक राजमार्ग पर अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा वाहनों पर गोली चलाने के बाद हुए।
- मणिपुर के नागा समूहों ने उखरुल और कामजोंग ज़िलों में रैलियां कीं।
- रैलियों का नेतृत्व तंगखुल नागा लोंग (TNL) और यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने किया।
- प्रदर्शनकारियों ने नागा बहुल इलाकों से असम राइफल्स की वापसी की मांग की।
- ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौते को रद्द करने की मांग भी उठाई गई।
- विरोध प्रदर्शन 4 नवंबर 2026 को इंफाल-उखरुल राजमार्ग पर हुई गोलीबारी की घटना के बाद हुए।
- राजव्यवस्था: केंद्र-राज्य संबंध और आंतरिक सुरक्षा
- भूगोल: पूर्वोत्तर भारत: संघर्ष और उग्रवाद
जुड़ी अवधारणाएँ: असम राइफल्स, ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौता, यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
असम राइफल्स, भारत का सबसे पुराना केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, किस मंत्रालय के अधीन काम करता है?
व्याख्या: असम राइफल्स गृह मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, न कि रक्षा मंत्रालय के अधीन। यह मुख्य रूप से पूर्वोत्तर में सीमा सुरक्षा और उग्रवाद-विरोधी कार्यों के लिए तैनात होता है। विदेश मंत्रालय और विधि एवं न्याय मंत्रालय की इसके प्रशासन में कोई भूमिका नहीं है।
- Q2कठिन
मणिपुर में हाल के विरोध प्रदर्शनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.रैलियों का आयोजन तंगखुल नागा लोंग (TNL) और यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने किया था।
- 2.प्रदर्शनकारियों ने ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौते को रद्द करने की मांग की।
- 3.विरोध प्रदर्शन इंफाल-उखरुल राजमार्ग पर बम विस्फोट से शुरू हुए।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है, क्योंकि रैलियों का नेतृत्व TNL और UNC ने किया। कथन 2 सही है, क्योंकि SoO समझौते को रद्द करना एक प्रमुख मांग थी। कथन 3 गलत है, क्योंकि ट्रिगर बम विस्फोट नहीं, बल्कि यात्री वाहनों पर गोलीबारी की घटना थी। अतः 1 और 2 दोनों सही हैं।
- Q3मध्यम
मणिपुर के किन ज़िलों में नागा समूहों ने बड़ी रैलियां कीं?
व्याख्या: रैलियां उखरुल और कामजोंग के ज़िला मुख्यालयों पर हुईं। इंफाल पश्चिम और पूर्व घाटी के ज़िले हैं, जबकि चुराचांदपुर और कांगपोकपी मुख्य रूप से कुकी बहुल इलाके हैं। सेनापति और तामेंगलोंग भी पहाड़ी ज़िले हैं, लेकिन ये इन विशेष विरोध प्रदर्शनों के स्थान नहीं थे।
- Q4मध्यम
मणिपुर में हाल के विरोध प्रदर्शनों में नागा समूहों की मुख्य मांग क्या है?
व्याख्या: मुख्य मांगों में असम राइफल्स की वापसी और कथित 'छद्म युद्ध' को खत्म करना शामिल है, जिसे कुकी उग्रवादियों के ज़रिए चलाया जाने का आरोप है। राज्य का दर्जा या नागालैंड में विलय लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक मांगें हैं, पर इन विरोध प्रदर्शनों का तात्कालिक कारण नहीं हैं। AFSPA प्रदर्शनकारियों की मांग नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. मणिपुर में विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किन नागा समूहों ने किया?
विरोध प्रदर्शनों का आयोजन तंगखुल नागा लोंग (TNL) और यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने किया।
2. मणिपुर में नागा प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
मुख्य मांगों में नागा बहुल इलाकों से असम राइफल्स की वापसी, कुकी उग्रवादियों के ज़रिए कथित छद्म युद्ध का अंत और ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौते को रद्द करना शामिल है।
3. मणिपुर में हाल के नागा विरोध प्रदर्शनों का कारण क्या बना?
विरोध प्रदर्शन 4 नवंबर 2026 को इंफाल-उखरुल राजमार्ग पर यात्री वाहनों पर हुई गोलीबारी की घटना से शुरू हुए।
4. ऑपरेशन निलंबन (SoO) समझौता क्या है?
SoO सरकार और कुछ उग्रवादी समूहों के बीच एक युद्धविराम समझौता है, जिसके तहत समूह अपने अभियान रोकने पर सहमत होते हैं और बदले में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर रोक लगती है।
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मूल खबर5 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

