प्रिलिम्स के लिए: केंद्रीय सशक्त समिति (CEC), वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980, CEC का पूरा नाम, नोडल निकाय, परियोजना की लागत, स्थान, वर्तमान संदर्भ
मेन्स के लिए: वन संरक्षण बनाम विकास, न्यायिक निगरानी, पर्यावरणीय अनुपालन, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त समितियां
स्रोत:Indian Express
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- CEC का अर्थ केंद्रीय सशक्त समिति है, जिसे भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने नियुक्त किया है।
- कुकराइल नाइट सफारी परियोजना कुकराइल वन, लखनऊ, उत्तर प्रदेश में स्थित है।
- परियोजना की अनुमानित लागत ₹1,510.57 करोड़ है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने नवाब वाजिद अली शाह चिड़ियाघर को दूसरी जगह ले जाने और एडवेंचर पार्क बनाने को अस्वीकार किया।
- CEC ने अपनी स्थिति रिपोर्ट 27 अक्टूबर 2026 को सौंपी।
चर्चा में क्यों?
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) ने उत्तर प्रदेश सरकार से लखनऊ में ₹1,510.57 करोड़ की कुकराइल नाइट सफारी और चिड़ियाघर परियोजना की व्यापक दोबारा जांच करने को कहा है। समिति ने वन की भूमि पर साफ़ दिखने वाली गड़बड़ी और पेड़ों की गिनती में विसंगतियों का हवाला दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2026 में सख्त शर्तों के साथ इस परियोजना को मंज़ूरी दी थी, लेकिन नवाब वाजिद अली शाह चिड़ियाघर को दूसरी जगह ले जाने और एडवेंचर पार्क बनाने जैसे मुख्य हिस्सों को अस्वीकार कर दिया था।
सारांश
- CEC को कुकराइल स्थल पर झाड़ियों और वन की भूमि में साफ़ गड़बड़ी दिखी, जिसमें मिट्टी समतल करना भी शामिल है। कटाई के लिए गिने गए पेड़ों की संख्या में भी विसंगतियां मिलीं, जबकि विभाग ने अभी तक स्थल औपचारिक रूप से नहीं सौंपा था।
- सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2026 में शर्तों के साथ परियोजना की अनुमति दी थी, लेकिन नवाब वाजिद अली शाह चिड़ियाघर को दूसरी जगह ले जाने, एडवेंचर पार्क बनाने और एक सड़क को चार लेन करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
- CEC ने निर्देश दिया है कि प्रस्तावित सभी हिस्सों की जांच सर्वोच्च न्यायालय के 15 जुलाई के आदेश के अनुरूप की जाए, और कोई भी ऐसी गतिविधि शुरू न हो जिसके लिए वैधानिक मंज़ूरी ज़रूरी है।
मुख्य बातें
CEC ने वन में गड़बड़ी को चिह्नित किया
CEC को कुकराइल स्थल पर झाड़ियों और वन की भूमि में साफ़ गड़बड़ी दिखी, जिसमें मिट्टी समतल करना भी शामिल है, और पेड़ों की सूची में विसंगतियां मिलीं।
सर्वोच्च न्यायालय की शर्तें पूरी तरह नहीं हुईं
CEC ने पूरी परियोजना की दोबारा जांच का निर्देश दिया, ताकि वह सर्वोच्च न्यायालय के 15 जुलाई के आदेश और अपनी सिफारिशों के अनुरूप हो।
मुख्य हिस्से पहले ही अस्वीकार हो चुके हैं
सर्वोच्च न्यायालय ने नवाब वाजिद अली शाह चिड़ियाघर को दूसरी जगह ले जाने, एडवेंचर पार्क बनाने और एक सड़क को चार लेन करने को अस्वीकार किया था।
पृष्ठभूमि
लगभग ₹1,510.57 करोड़ की अनुमानित लागत वाली कुकराइल नाइट सफारी और चिड़ियाघर परियोजना लखनऊ के उत्तर-पूर्व में कुकराइल वन में प्रस्तावित है। एक पूर्व अदालती आदेश में वन क्षेत्रों में अनुमति के बिना चिड़ियाघर या सफारी बनाने पर रोक थी, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 में सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। जुलाई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त शर्तों के साथ परियोजना की अनुमति दी और CEC को समय-समय पर निरीक्षण करने का निर्देश दिया।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
CEC की स्थिति रिपोर्ट से पता चलता है कि सर्वोच्च न्यायालय की सशर्त मंज़ूरी के बावजूद परियोजना स्थल पर वन की भूमि में साफ़ गड़बड़ी और पेड़ों की सूची में विसंगतियां दिखीं, और यह स्थल लोक निर्माण विभाग को औपचारिक रूप से सौंपे जाने से पहले की बात है। इससे वन संरक्षण मानदंडों के पालन पर चिंता खड़ी होती है। CEC ने अभी तक किसी उल्लंघन का निष्कर्ष नहीं निकाला है, लेकिन योजनाओं, मंज़ूरियों और स्वीकृतियों की व्यापक दोबारा जांच की मांग की है।
आगे की राह
उत्तर प्रदेश सरकार को अब एक सप्ताह के भीतर तय करना है कि DPR, मास्टर प्लान, पर्यावरण मंज़ूरी या अन्य परियोजना दस्तावेज़ों में कोई संशोधन, बदलाव या अतिरिक्त मंज़ूरी ज़रूरी है या नहीं। संशोधित DPR और मास्टर प्लान तभी अंतिम किए जाने चाहिए जब परियोजना के लेआउट, पेड़ों की सूची के मिलान, भूमि सीमा के सत्यापन और जल निकासी मार्गों व सूक्ष्म आवासों की मैपिंग की दोबारा जांच हो जाए।
उत्तर प्रदेश से जुड़ाव
उत्तर प्रदेश की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UPPSC 8/10
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- केंद्रीय सशक्त समिति (CEC)
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति, जो वन और पर्यावरण से जुड़े मामलों में उसके आदेशों के पालन की निगरानी करती है।
- वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
- संसद का एक अधिनियम, जो गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग को सीमित करता है और केंद्र सरकार की पूर्व मंज़ूरी ज़रूरी बनाता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: कुकराइल नाइट सफारी परियोजना की ₹1,510.57 करोड़ लागत
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: केंद्रीय सशक्त समिति (CEC), जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त है
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: सर्वोच्च न्यायालय का 15 जुलाई 2026 का आदेश
यह गलती न करें!
जाल: CEC (केंद्रीय सशक्त समिति, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त) को CEC (केंद्रीय निर्वाचन आयोग) या CEE (Centre for Environment Education) समझ लेना। साथ ही यह परियोजना केवल 'सफारी' नहीं, बल्कि 'नाइट सफारी और चिड़ियाघर' है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- वन संरक्षण बनाम विकास, न्यायिक निगरानी, पर्यावरणीय अनुपालन, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त समितियां
कहीं अटके? एक टैप में समझें
सर्वोच्च न्यायालय के पास CEC नाम की एक विशेष समिति है, जो देखती है कि वन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। CEC ने लखनऊ में एक बड़ी नाइट सफारी परियोजना के स्थल का निरीक्षण किया और वहां खुदाई व पेड़ों की गिनती में गड़बड़ियां पाईं। उसने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि आगे बढ़ने से पहले अपनी सभी योजनाओं और मंज़ूरियों की दोबारा जांच करे।
- CEC का अर्थ केंद्रीय सशक्त समिति है, जिसे भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने नियुक्त किया है।
- कुकराइल नाइट सफारी परियोजना कुकराइल वन, लखनऊ, उत्तर प्रदेश में स्थित है।
- परियोजना की अनुमानित लागत ₹1,510.57 करोड़ है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने नवाब वाजिद अली शाह चिड़ियाघर को दूसरी जगह ले जाने और एडवेंचर पार्क बनाने को अस्वीकार किया।
- CEC ने अपनी स्थिति रिपोर्ट 27 अक्टूबर 2026 को सौंपी।
- पर्यावरण: वन संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण
- राजव्यवस्था: न्यायिक समीक्षा और पर्यावरण शासन
जुड़ी अवधारणाएँ: केंद्रीय सशक्त समिति (CEC), वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1मध्यम
वन से जुड़े आदेशों के पालन की निगरानी करने वाली केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) को किस निकाय ने नियुक्त किया?
व्याख्या: केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एक समिति है, जो वन और पर्यावरण से जुड़े मामलों में उसके आदेशों के पालन की निगरानी करती है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय वन नीति के लिए नोडल मंत्रालय है; राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण एक अलग न्यायिक मंच है; और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण चिड़ियाघरों का नियमन करता है।
- Q2मध्यम
कुकराइल नाइट सफारी परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2026 में इस परियोजना पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।
- 2.CEC को परियोजना स्थल पर वन की भूमि में साफ़ गड़बड़ी दिखी।
- 3.यह परियोजना लखनऊ, उत्तर प्रदेश के कुकराइल वन में स्थित है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2026 में परियोजना पर रोक नहीं लगाई, बल्कि सख्त शर्तों के साथ अनुमति दी। कथन 2 सही है, क्योंकि CEC को झाड़ियों और वन की भूमि में साफ़ गड़बड़ी दिखी। कथन 3 सही है, क्योंकि यह परियोजना लखनऊ के उत्तर-पूर्व में उत्तर प्रदेश के कुकराइल वन में प्रस्तावित है।
- Q3मध्यम
कुकराइल नाइट सफारी और चिड़ियाघर परियोजना की अनुमानित लागत कितनी है?
व्याख्या: कुकराइल नाइट सफारी और चिड़ियाघर परियोजना की अनुमानित लागत ₹1,510.57 करोड़ है। ₹1,200 करोड़ और ₹1,750 करोड़ गलत आंकड़े हैं।
- Q4मध्यम
CEC ने कुकराइल नाइट सफारी परियोजना की व्यापक दोबारा जांच का आग्रह मुख्य रूप से किस कारण से किया?
व्याख्या: CEC ने दोबारा जांच का निर्देश इसलिए दिया ताकि परियोजना की योजनाएं, मंज़ूरियां और स्वीकृतियां सर्वोच्च न्यायालय के 15 जुलाई के आदेश और CEC की अपनी सिफारिशों के अनुरूप हों। बजट बढ़ाना, मंज़ूरी में तेज़ी लाना या परियोजना को स्थानांतरित करना CEC के निर्देश के उद्देश्य नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. कुकराइल नाइट सफारी परियोजना क्या है?
यह लखनऊ, उत्तर प्रदेश के कुकराइल वन में प्रस्तावित नाइट सफारी और चिड़ियाघर परियोजना है, जिसकी अनुमानित लागत ₹1,510.57 करोड़ है।
2. CEC ने परियोजना की दोबारा जांच का आदेश क्यों दिया?
CEC ने स्थल पर वन की भूमि में साफ़ गड़बड़ी और पेड़ों की सूची में विसंगतियां पाईं और सर्वोच्च न्यायालय के 15 जुलाई 2026 के आदेश के अनुरूप होने के लिए दोबारा जांच का निर्देश दिया।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने परियोजना के कौन-से हिस्से अस्वीकार किए?
सर्वोच्च न्यायालय ने नवाब वाजिद अली शाह चिड़ियाघर को दूसरी जगह ले जाने, एडवेंचर पार्क बनाने और एक सड़क को चार लेन करने को अस्वीकार किया।
4. केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) क्या है?
CEC भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एक समिति है, जो वन और पर्यावरण से जुड़े मामलों में उसके आदेशों के पालन की निगरानी करती है।
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मूल खबर5 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

