प्रिलिम्स के लिए: प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स, 3D प्रिंटिंग (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग), UNIDO (संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन), UNIDO का पूरा नाम, नोडल संस्था, उद्देश्य, प्रमुख साझेदार, निवेश
मेन्स के लिए: सहायक तकनीक, सामाजिक समावेशन, UNIDO वैश्विक दक्षिण, भारत-जापान स्वास्थ्य सहयोग, डिजिटल स्वास्थ्य विनिर्माण
स्रोत:Dainik Bhaskar
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश की पहली कृत्रिम अंग 3D प्रिंटिंग लैब खुली।
- लैब का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स दिवस (5 नवंबर 2026) पर हुआ।
- जापान की इंस्टालिम्ब इंडिया ने ₹1.77 करोड़ मूल्य की मशीनें दीं।
- परियोजना को UNIDO (संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन) का समर्थन है।
- उद्घाटन पर 12 दिव्यांगजनों को मुफ्त 3D प्रिंटेड कृत्रिम अंग मिले।
चर्चा में क्यों?
लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश की पहली 3D प्रिंटिंग लैब स्थापित की है, जिसमें दिव्यांगजनों (divyangjan) के लिए कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण बनाए जाएंगे। यह लैब जापान की इंस्टालिम्ब इंडिया से मिली ₹1.77 करोड़ की मशीनों के साथ UNIDO के वैश्विक दक्षिण सहयोग के तहत बनी है, और इसमें डिजिटल डिज़ाइन व परिसर में ही क्लिनिकल सेवाएं एक साथ जुड़ी हैं।
सारांश
- लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश की पहली 3D प्रिंटिंग लैब का उद्घाटन हुआ, जो कृत्रिम अंगों के लिए बनी है।
- लैब डिजिटल डिज़ाइन और शरीर के सटीक माप के आधार पर हल्के और आरामदायक कृत्रिम अंग पारंपरिक तरीकों से तेज़ी से बनाती है।
- UNIDO के वैश्विक दक्षिण सहयोग के तहत जापान की इंस्टालिम्ब इंडिया से ₹1.77 करोड़ की मशीनें और सॉफ्टवेयर मिले हैं।
- अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स दिवस पर उद्घाटन कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 12 दिव्यांगजनों को 3D प्रिंटिंग से बने कृत्रिम अंग मुफ्त दिए गए।
मुख्य बातें
कृत्रिम अंग लैब
लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश की पहली 3D प्रिंटिंग लैब खुली है, जो परिसर में ही क्लिनिकल सेवाएं देगी।
जापान-UNIDO साझेदारी
लैब को UNIDO के वैश्विक दक्षिण सहयोग ढांचे के तहत जापान की इंस्टालिम्ब इंडिया का समर्थन मिला है, जिसमें ₹1.77 करोड़ के उपकरण और सॉफ्टवेयर लगे हैं।
छात्र प्रशिक्षण केंद्र
लैब विश्वविद्यालय के छात्रों को 3D प्रिंटिंग तकनीक और कृत्रिम अंग निर्माण का प्रशिक्षण देगी, जिससे पुनर्वास विज्ञान में उनका व्यावहारिक कौशल बढ़ेगा।
पृष्ठभूमि
भारत में पारंपरिक तरीके से कृत्रिम अंग बनाने में हाथ से साँचा तैयार करना और कई बार फिटिंग करनी पड़ती है, जिसमें अक्सर हफ्तों लगते हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के दिव्यांगजनों को लंबा इंतज़ार करना पड़ता है और उनकी पहुंच अपने माप के उपकरणों तक सीमित है। नई लैब डिजिटल स्कैनिंग और 3D प्रिंटिंग से यह अंतर कम करती है, और कृत्रिम अंग कम समय में तैयार होते हैं।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
इस पहल में तीन आयाम एक साथ हैं: स्वास्थ्य सेवा के लिए तकनीक (3D प्रिंटिंग), दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक कल्याण (सहायक उपकरण) और विश्वविद्यालय के छात्रों का व्यावहारिक प्रशिक्षण। UNIDO के वैश्विक दक्षिण सहयोग से अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता और धन आया है, जबकि इंस्टालिम्ब इंडिया के ज़रिए भारत-जापान साझेदारी उन्नत निर्माण क्षमता जोड़ती है। परिसर में क्लिनिकल सेवाएं मिलने से मरीजों को कई जगह जाने की ज़रूरत कम होगी।
आगे की राह
यह लैब दूसरे राज्य विश्वविद्यालयों के लिए ऐसी सुविधाएं शुरू करने का मॉडल बन सकती है। उत्पादन बढ़ाने और उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन पेंशन योजना जैसी राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ने पर पहुंच और बढ़ सकती है। UNIDO और जापानी साझेदारों के साथ सहयोग जारी रहा तो तकनीक का हस्तांतरण हो सकता है और पुनर्वास क्षेत्र में देसी 3D प्रिंटिंग क्षमता विकसित हो सकती है।
उत्तर प्रदेश से जुड़ाव
उत्तर प्रदेश की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UPPSC 8/10
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स
- प्रोस्थेटिक्स कृत्रिम अंगों (प्रोस्थेसिस) से शरीर के खोए हिस्से की जगह लेने से जुड़ा है; ऑर्थोटिक्स ब्रेस और सहारे (ऑर्थोसिस) से कमज़ोर या विकृत अंगों को सहारा देने से जुड़ा है।
- 3D प्रिंटिंग (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग)
- डिजिटल फाइल से परत-दर-परत सामग्री जमाकर त्रि-आयामी ठोस वस्तु बनाने की प्रक्रिया। स्वास्थ्य क्षेत्र में कस्टम इम्प्लांट, कृत्रिम अंग और सर्जिकल मॉडल के लिए इसका उपयोग होता है।
- UNIDO (संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन)
- संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी, जो गरीबी घटाने, समावेशी वैश्वीकरण और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए औद्योगिक विकास को बढ़ावा देती है। मुख्यालय: वियना, ऑस्ट्रिया।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: ₹1.77 करोड़ का निवेश; उद्घाटन पर 12 दिव्यांगजनों को मुफ्त कृत्रिम अंग
- इस नोडल संस्था पर ध्यान दें: डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ
यह गलती न करें!
वे 'उत्तर प्रदेश' की जगह किसी और राज्य का नाम रख सकते हैं, या लैब को 'दिव्यांगजनों के लिए कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण' की जगह 'सामान्य विनिर्माण' के लिए बताने का दावा कर सकते हैं। वे इंस्टालिम्ब इंडिया को किसी भारतीय घरेलू कंपनी से भी भ्रमित कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- सहायक तकनीक, सामाजिक समावेशन, UNIDO वैश्विक दक्षिण, भारत-जापान स्वास्थ्य सहयोग, डिजिटल स्वास्थ्य विनिर्माण
कहीं अटके? एक टैप में समझें
लखनऊ के एक विश्वविद्यालय ने एक विशेष लैब बनाई है, जिसमें लगे 3D प्रिंटर दिव्यांगजनों के लिए कृत्रिम हाथ-पैर बनाते हैं। पुराने धीमे तरीके की जगह यहां शरीर का कंप्यूटर स्कैन लेकर कम समय में अपने माप का अंग प्रिंट किया जाता है। यह ऐसा है जैसे डिजिटल स्कैन से कस्टम जूते का तलवा प्रिंट करना, पर यहां खोए हुए हाथ या पैर के लिए।
- लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश की पहली कृत्रिम अंग 3D प्रिंटिंग लैब खुली।
- लैब का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स दिवस (5 नवंबर 2026) पर हुआ।
- जापान की इंस्टालिम्ब इंडिया ने ₹1.77 करोड़ मूल्य की मशीनें दीं।
- परियोजना को UNIDO (संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन) का समर्थन है।
- उद्घाटन पर 12 दिव्यांगजनों को मुफ्त 3D प्रिंटेड कृत्रिम अंग मिले।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी: 3D प्रिंटिंग और उसके उपयोग
- समाज: दिव्यांगजनों (divyangjan) का कल्याण
जुड़ी अवधारणाएँ: प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स, 3D प्रिंटिंग (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग), UNIDO (संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
उत्तर प्रदेश के किस विश्वविद्यालय ने कृत्रिम अंगों के लिए राज्य की पहली 3D प्रिंटिंग लैब स्थापित की है?
व्याख्या: सही संस्था डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ है। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ का केंद्रीय विश्वविद्यालय है, पर वह पुनर्वास पर केंद्रित नहीं है।
- Q2कठिन
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की 3D प्रिंटिंग लैब के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.लैब का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स दिवस पर हुआ।
- 2.लैब ₹1.77 करोड़ के उपकरणों के साथ बनी है, जो UNIDO साझेदारी के तहत एक जापानी संस्था ने दिए।
- 3.लैब का उपयोग केवल छात्र प्रशिक्षण के लिए होगा, मरीजों को क्लिनिकल सेवाएं नहीं दी जाएंगी।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: लैब का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स दिवस पर हुआ। कथन 2 सही है: UNIDO वैश्विक दक्षिण सहयोग के तहत जापान की इंस्टालिम्ब इंडिया से ₹1.77 करोड़ के उपकरण मिले। कथन 3 गलत है, क्योंकि लैब दिव्यांगजनों को परिसर में क्लिनिकल सेवाएं भी देगी, केवल छात्र प्रशिक्षण नहीं।
- Q3मध्यम
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की 3D प्रिंटिंग लैब के लिए दी गई मशीनों और सॉफ्टवेयर का कुल मूल्य कितना है?
व्याख्या: लगभग ₹1.77 करोड़ मूल्य की मशीनें, सॉफ्टवेयर और डिजिटल तकनीक दी गई।
- Q4मध्यम
समाचार के अनुसार कृत्रिम अंगों के लिए 3D प्रिंटिंग तकनीक का मुख्य लाभ क्या बताया गया है?
व्याख्या: समाचार डिजिटल डिज़ाइन और शरीर के सटीक माप पर ज़ोर देता है, जिससे बेहतर फिटिंग वाले, हल्के और आरामदायक कृत्रिम अंग तेज़ी से बनते हैं। प्रशिक्षित पेशेवरों की ज़रूरत फिर भी रहती है। लैब लखनऊ में कृत्रिम अंग उपलब्ध कराती है, केवल शहरी इलाकों में नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. उत्तर प्रदेश की पहली कृत्रिम अंग 3D प्रिंटिंग लैब कहां स्थित है?
यह लखनऊ, उत्तर प्रदेश के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में स्थित है।
2. 3D प्रिंटिंग लैब में कितना निवेश हुआ?
UNIDO वैश्विक दक्षिण साझेदारी के तहत जापान की इंस्टालिम्ब इंडिया ने लगभग ₹1.77 करोड़ मूल्य की मशीनें, सॉफ्टवेयर और डिजिटल तकनीक दी।
3. 3D प्रिंटिंग लैब का उद्घाटन किसने किया?
लैब का उद्घाटन कुलपति आचार्य संजय सिंह ने अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स दिवस (5 नवंबर 2026) पर किया।
4. इस परियोजना में कौन-कौन से अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं?
जापान की इंस्टालिम्ब इंडिया और संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) वैश्विक दक्षिण सहयोग ढांचे के ज़रिए शामिल हैं।
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मूल खबर5 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

