प्रिलिम्स के लिए: इबोला वायरस रोग (EVD), क्लिनिकल ट्रायल, mRNA टीका, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), टीका 1, टीका 2, लक्षित वायरस, ट्रायल का नेतृत्वकर्ता
मेन्स के लिए: टीका कूटनीति, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा, mRNA प्लेटफॉर्म, महामारी की तैयारी में भारत की भूमिका, सार्वजनिक-निजी साझेदारी
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- WHO ने दो नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी।
- एक टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
- दूसरा टीका मॉडर्ना का mRNA-1469 है।
- दोनों टीके बुंदिबुग्यो वायरस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं।
- अफ्रीका में मौजूदा इबोला प्रकोप में 5,300 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
चर्चा में क्यों?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला के दो नए टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी है। इनमें से एक टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने और दूसरा मॉडर्ना ने विकसित किया है। दोनों टीके बुंदिबुग्यो वायरस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं। अफ्रीका में जारी इबोला प्रकोप से निपटने के लिए डीआर कॉन्गो का राष्ट्रीय बायोमेडिकल अनुसंधान संस्थान ट्रायल की अगुवाई कर रहा है। इस प्रकोप में 5,300 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
सारांश
- WHO ने इबोला के दो नए टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी है: एक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का, और दूसरा मॉडर्ना का (mRNA-1469)।
- दोनों टीके बुंदिबुग्यो वायरस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं, जो इबोला वायरस की एक खास प्रजाति है।
- डीआर कॉन्गो का राष्ट्रीय बायोमेडिकल अनुसंधान संस्थान क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व कर रहा है।
- यह मंज़ूरी अफ्रीका में इबोला प्रकोप के बीच आई है, जिसमें 5,300 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं।
मुख्य बातें
दो नए टीकों को मंज़ूरी मिली
WHO ने इबोला के दो नए टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी: एक ऑक्सफोर्ड/सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का, और दूसरा मॉडर्ना का (mRNA-1469)।
बुंदिबुग्यो स्ट्रेन को लक्ष्य बनाना
दोनों टीके खास तौर पर बुंदिबुग्यो वायरस के लिए बनाए गए हैं, जो मौजूदा प्रकोप पैदा करने वाला इबोला स्ट्रेन है।
अफ्रीका प्रकोप का संदर्भ
यह मंज़ूरी ऐसे समय आई है जब अफ्रीका में इबोला प्रकोप से 5,300 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
दो नए टीकों को मंज़ूरी, जिनमें से एक भारत के सीरम इंस्टीट्यूट का है (मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा टीका निर्माता), स्ट्रेन-विशिष्ट टीके विकसित करने की दिशा में रणनीतिक बदलाव का संकेत देती है। मॉडर्ना का mRNA-1469 उसी mRNA प्लेटफॉर्म पर आधारित है जिसका इस्तेमाल COVID-19 टीकों में हुआ था, और इससे वायरस के बदलावों के अनुरूप तेज़ी से ढलना संभव होता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की यह साझेदारी वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और टीका कूटनीति में भारत की भूमिका को भी मज़बूत करती है।
आगे की राह
क्लिनिकल ट्रायल डीआर कॉन्गो में उसके राष्ट्रीय बायोमेडिकल अनुसंधान संस्थान के नेतृत्व में होंगे। अगर ट्रायल सफल रहते हैं, तो इन टीकों को मौजूदा प्रकोप पर काबू पाने में इस्तेमाल किया जा सकता है, और भविष्य में वायरल हेमरेजिक फीवर के प्रकोपों पर तेज़ी से प्रतिक्रिया देने का मॉडल बन सकते हैं। आपात स्थिति में टीका विकास के समन्वयक के रूप में WHO की भूमिका महामारी की तैयारी में उसकी अहमियत को दिखाती है।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- इबोला वायरस रोग (EVD)
- इबोला वायरस से होने वाली एक गंभीर, अक्सर घातक बीमारी, जो शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलती है। इसके लक्षणों में बुखार, तेज़ सिरदर्द और अंदरूनी रक्तस्राव शामिल हैं।
- क्लिनिकल ट्रायल
- किसी नई दवा या टीके को आम इस्तेमाल की मंज़ूरी मिलने से पहले स्वयंसेवकों पर किया जाने वाला शोध अध्ययन, जिसमें उसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और दुष्प्रभावों की जांच होती है।
- mRNA टीका
- एक प्रकार का टीका जो मेसेंजर RNA का उपयोग करता है और कोशिकाओं को ऐसा प्रोटीन बनाने का निर्देश देता है जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया जगाता है, इसमें जीवित वायरस का इस्तेमाल नहीं होता। मॉडर्ना का COVID-19 टीका पहला व्यापक रूप से इस्तेमाल हुआ mRNA टीका था।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
- संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी, जो अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ज़िम्मेदार है और जिसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में है। इसके वर्तमान महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस हैं।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस आंकड़े को याद रखें: मौजूदा इबोला प्रकोप में 5,300 से ज़्यादा मौतें
- इस नोडल निकाय को याद रखें: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
यह गलती न करें!
परीक्षक 'बुंदिबुग्यो वायरस' के बारे में पूछ सकते हैं और उसे इबोला के दूसरे स्ट्रेन (ज़ायर, सूडान) या दूसरे हेमरेजिक फीवर (मारबर्ग, लासा) से बदलकर भ्रम पैदा कर सकते हैं। याद रखें: बुंदिबुग्यो वह खास स्ट्रेन है जिसे ये टीके लक्षित करते हैं। साथ ही, पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भारत बायोटेक या दूसरे भारतीय टीका निर्माताओं से न मिलाएं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- टीका कूटनीति, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा, mRNA प्लेटफॉर्म, महामारी की तैयारी में भारत की भूमिका, सार्वजनिक-निजी साझेदारी
कहीं अटके? एक टैप में समझें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला नामक घातक वायरस के खिलाफ दो नए टीकों के परीक्षण को हरी झंडी दे दी है। एक टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने मिलकर बनाया है। दूसरा मॉडर्ना का है, वही कंपनी जिसने COVID का टीका बनाया था। दोनों इबोला के एक खास प्रकार, बुंदिबुग्यो, के लिए बनाए गए हैं। परीक्षण डीआर कॉन्गो में होंगे, जहां प्रकोप से 5,300 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
- WHO ने दो नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी।
- एक टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
- दूसरा टीका मॉडर्ना का mRNA-1469 है।
- दोनों टीके बुंदिबुग्यो वायरस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं।
- अफ्रीका में मौजूदा इबोला प्रकोप में 5,300 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी: जैव प्रौद्योगिकी और टीके
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: वैश्विक स्वास्थ्य शासन और WHO
जुड़ी अवधारणाएँ: इबोला वायरस रोग (EVD), क्लिनिकल ट्रायल, mRNA टीका, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
इबोला के दो नए टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को किस संगठन ने मंज़ूरी दी?
व्याख्या: WHO वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ज़िम्मेदार संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है। इसी ने दो नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी। UNICEF बच्चों के कल्याण पर, IMF वित्तीय स्थिरता पर और विश्व बैंक आर्थिक विकास पर काम करता है, टीकों की मंज़ूरी पर नहीं।
- Q2कठिन
WHO द्वारा मंज़ूर इबोला के नए टीकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.इनमें से एक टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- 2.ये टीके इबोला वायरस के ज़ायर स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं।
- 3.मॉडर्ना का mRNA-1469 मंज़ूर टीकों में से एक है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: पहला टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। कथन 2 गलत है: ये टीके ज़ायर नहीं, बुंदिबुग्यो वायरस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं। कथन 3 सही है: मॉडर्ना का mRNA-1469 दूसरा मंज़ूर टीका है। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
समाचार के अनुसार अफ्रीका में जारी इबोला प्रकोप में कितनी मौतें दर्ज की गई हैं?
व्याख्या: इबोला प्रकोप में 5,300 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसलिए 5,300 सही संख्या है।
- Q4मध्यम
नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व कौन-सा संस्थान कर रहा है?
व्याख्या: क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व डीआर कॉन्गो का राष्ट्रीय बायोमेडिकल अनुसंधान संस्थान कर रहा है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट एक टीके के सह-विकासकर्ता हैं और मॉडर्ना दूसरे टीके का विकासकर्ता है, लेकिन इनमें से कोई भी ट्रायल का नेतृत्व नहीं कर रहा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को किस संगठन ने मंज़ूरी दी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दो नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी।
2. दो नए इबोला टीके किसने विकसित किए हैं?
पहला टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। दूसरा टीका मॉडर्ना का mRNA-1469 है।
3. नए टीके इबोला वायरस के किस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं?
दोनों टीके खास तौर पर बुंदिबुग्यो वायरस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं।
4. नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व कौन-सा संस्थान कर रहा है?
डीआर कॉन्गो का राष्ट्रीय बायोमेडिकल अनुसंधान संस्थान क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व कर रहा है।
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मूल खबर4 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
