अंतरराष्ट्रीय संबंध

WHO ने अफ्रीका में इबोला प्रकोप के बीच इबोला के दो नए टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी

4 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 32 / 122

प्रिलिम्स के लिए: इबोला वायरस रोग (EVD), क्लिनिकल ट्रायल, mRNA टीका, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), टीका 1, टीका 2, लक्षित वायरस, ट्रायल का नेतृत्वकर्ता

मेन्स के लिए: टीका कूटनीति, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा, mRNA प्लेटफॉर्म, महामारी की तैयारी में भारत की भूमिका, सार्वजनिक-निजी साझेदारी

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला के दो नए टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी है। इनमें से एक टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने और दूसरा मॉडर्ना ने विकसित किया है। दोनों टीके बुंदिबुग्यो वायरस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं। अफ्रीका में जारी इबोला प्रकोप से निपटने के लिए डीआर कॉन्गो का राष्ट्रीय बायोमेडिकल अनुसंधान संस्थान ट्रायल की अगुवाई कर रहा है। इस प्रकोप में 5,300 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

सारांश

  • WHO ने इबोला के दो नए टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी है: एक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का, और दूसरा मॉडर्ना का (mRNA-1469)।
  • दोनों टीके बुंदिबुग्यो वायरस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं, जो इबोला वायरस की एक खास प्रजाति है।
  • डीआर कॉन्गो का राष्ट्रीय बायोमेडिकल अनुसंधान संस्थान क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व कर रहा है।
  • यह मंज़ूरी अफ्रीका में इबोला प्रकोप के बीच आई है, जिसमें 5,300 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं।

मुख्य बातें

  • दो नए टीकों को मंज़ूरी मिली

    WHO ने इबोला के दो नए टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी: एक ऑक्सफोर्ड/सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का, और दूसरा मॉडर्ना का (mRNA-1469)।

  • बुंदिबुग्यो स्ट्रेन को लक्ष्य बनाना

    दोनों टीके खास तौर पर बुंदिबुग्यो वायरस के लिए बनाए गए हैं, जो मौजूदा प्रकोप पैदा करने वाला इबोला स्ट्रेन है।

  • अफ्रीका प्रकोप का संदर्भ

    यह मंज़ूरी ऐसे समय आई है जब अफ्रीका में इबोला प्रकोप से 5,300 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

दो नए टीकों को मंज़ूरी, जिनमें से एक भारत के सीरम इंस्टीट्यूट का है (मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा टीका निर्माता), स्ट्रेन-विशिष्ट टीके विकसित करने की दिशा में रणनीतिक बदलाव का संकेत देती है। मॉडर्ना का mRNA-1469 उसी mRNA प्लेटफॉर्म पर आधारित है जिसका इस्तेमाल COVID-19 टीकों में हुआ था, और इससे वायरस के बदलावों के अनुरूप तेज़ी से ढलना संभव होता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की यह साझेदारी वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और टीका कूटनीति में भारत की भूमिका को भी मज़बूत करती है।

आगे की राह

क्लिनिकल ट्रायल डीआर कॉन्गो में उसके राष्ट्रीय बायोमेडिकल अनुसंधान संस्थान के नेतृत्व में होंगे। अगर ट्रायल सफल रहते हैं, तो इन टीकों को मौजूदा प्रकोप पर काबू पाने में इस्तेमाल किया जा सकता है, और भविष्य में वायरल हेमरेजिक फीवर के प्रकोपों पर तेज़ी से प्रतिक्रिया देने का मॉडल बन सकते हैं। आपात स्थिति में टीका विकास के समन्वयक के रूप में WHO की भूमिका महामारी की तैयारी में उसकी अहमियत को दिखाती है।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

इबोला वायरस रोग (EVD)
इबोला वायरस से होने वाली एक गंभीर, अक्सर घातक बीमारी, जो शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलती है। इसके लक्षणों में बुखार, तेज़ सिरदर्द और अंदरूनी रक्तस्राव शामिल हैं।
क्लिनिकल ट्रायल
किसी नई दवा या टीके को आम इस्तेमाल की मंज़ूरी मिलने से पहले स्वयंसेवकों पर किया जाने वाला शोध अध्ययन, जिसमें उसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और दुष्प्रभावों की जांच होती है।
mRNA टीका
एक प्रकार का टीका जो मेसेंजर RNA का उपयोग करता है और कोशिकाओं को ऐसा प्रोटीन बनाने का निर्देश देता है जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया जगाता है, इसमें जीवित वायरस का इस्तेमाल नहीं होता। मॉडर्ना का COVID-19 टीका पहला व्यापक रूप से इस्तेमाल हुआ mRNA टीका था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी, जो अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ज़िम्मेदार है और जिसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में है। इसके वर्तमान महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस हैं।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस आंकड़े को याद रखें: मौजूदा इबोला प्रकोप में 5,300 से ज़्यादा मौतें
  • इस नोडल निकाय को याद रखें: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)

यह गलती न करें!

परीक्षक 'बुंदिबुग्यो वायरस' के बारे में पूछ सकते हैं और उसे इबोला के दूसरे स्ट्रेन (ज़ायर, सूडान) या दूसरे हेमरेजिक फीवर (मारबर्ग, लासा) से बदलकर भ्रम पैदा कर सकते हैं। याद रखें: बुंदिबुग्यो वह खास स्ट्रेन है जिसे ये टीके लक्षित करते हैं। साथ ही, पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भारत बायोटेक या दूसरे भारतीय टीका निर्माताओं से न मिलाएं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • टीका कूटनीति, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा, mRNA प्लेटफॉर्म, महामारी की तैयारी में भारत की भूमिका, सार्वजनिक-निजी साझेदारी

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    इबोला के दो नए टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को किस संगठन ने मंज़ूरी दी?

  2. Q2कठिन

    WHO द्वारा मंज़ूर इबोला के नए टीकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.इनमें से एक टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
    2. 2.ये टीके इबोला वायरस के ज़ायर स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं।
    3. 3.मॉडर्ना का mRNA-1469 मंज़ूर टीकों में से एक है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    समाचार के अनुसार अफ्रीका में जारी इबोला प्रकोप में कितनी मौतें दर्ज की गई हैं?

  4. Q4मध्यम

    नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व कौन-सा संस्थान कर रहा है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को किस संगठन ने मंज़ूरी दी?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दो नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी दी।

2. दो नए इबोला टीके किसने विकसित किए हैं?

पहला टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। दूसरा टीका मॉडर्ना का mRNA-1469 है।

3. नए टीके इबोला वायरस के किस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं?

दोनों टीके खास तौर पर बुंदिबुग्यो वायरस स्ट्रेन को लक्ष्य बनाते हैं।

4. नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व कौन-सा संस्थान कर रहा है?

डीआर कॉन्गो का राष्ट्रीय बायोमेडिकल अनुसंधान संस्थान क्लिनिकल ट्रायल का नेतृत्व कर रहा है।

सभी स्रोत

इसी विषय, राज्य या परीक्षा की पिछले 30 दिनों की खबरें

अंतरराष्ट्रीय संबंधUPSC: अति महत्वपूर्ण

डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस जीती; टैरिफ और वीज़ा पर भारत सतर्क आशावादी

  • परिणाम: डेमोक्रेट्स ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों में जीत हासिल की
  • भारत पर असर: 50% टैरिफ, H1B वीज़ा पर रोक और छात्र वीज़ा पर सख़्ती में संभावित नरमी
नया अपडेटपृष्ठभूमि GK: अमेरिकी मध्यावधि चुनावनोडल: विदेश मंत्रालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 3 मिनटIndian ExpressThe Hindu
अंतरराष्ट्रीय संबंधUPSC: महत्वपूर्ण

ईरान ने होर्मुज प्रतिबंधों से भारत, चीन, इराक और कतर को छूट दी

  • छूट वाले देश: भारत, चीन, इराक, कतर
  • नोडल निकाय (ईरान): ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति
पृष्ठभूमि GK: होर्मुज जलडमरूमध्यनोडल: ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समितियह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटHindustanIndian ExpressDainik Bhaskar
अंतरराष्ट्रीय संबंधUPSC: महत्वपूर्ण

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026: कांग्रेस पर डेमोक्रेटिक पार्टी का क्लीन स्वीप, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर असर

  • नतीजे का मुख्य कारण: ट्रंप के टैरिफ और ईरान युद्ध से बढ़ा महंगाई का संकट
  • ट्रंप के कार्यकारी आदेश (2 वर्ष): 166 (एक कार्यकाल में बाइडन के 162 के मुकाबले)
नया अपडेटपृष्ठभूमि GK: अमेरिकी कांग्रेस1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301नोडल: संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR)यह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटIndian ExpressHindustan
अंतरराष्ट्रीय संबंधUPSC: महत्वपूर्ण

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता: $500 बिलियन की प्रतिबद्धता, 18% शुल्क

  • समझौते का प्रकार: अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क (अभी पूर्ण FTA नहीं)
  • फ्रेमवर्क समझौते की तिथि: फरवरी 2026
पृष्ठभूमि GK: मुक्त व्यापार समझौता (FTA)नोडल: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 3 मिनटIndian Express
अंतरराष्ट्रीय संबंधUPSC: अति महत्वपूर्ण

मक्का समझौता पश्चिम एशियाई सुरक्षा वार्ता के लिए तेहरान पहुंचा।

  • वार्ता के लिए मेज़बान शहर: तेहरान, ईरान
  • ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों की समय-सीमा: फरवरी 2026 से
पृष्ठभूमि GK: असममित युद्धयह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटThe Hindu
अंतरराष्ट्रीय संबंधUPSC: महत्वपूर्ण

अमेरिका ने इज़राइल को 3.8 बिलियन डॉलर की वार्षिक सुरक्षा सहायता समाप्त की

  • 1948 से इज़राइल को कुल अमेरिकी सहायता: 300 बिलियन डॉलर से अधिक (मुद्रास्फीति-समायोजित)
  • कटौती की घोषणा करने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति: डोनाल्ड ट्रंप
नया अपडेटपृष्ठभूमि GK: विदेशी सैन्य वित्तपोषण (FMF)नोडल: अमेरिकी विदेश विभागयह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटThe HinduIndian Express