टैग:अर्थव्यवस्थाUPSC
प्रिलिम्स के लिए: संविधान पीठ, वस्तु एवं सेवा कर (GST), बड़ी पीठ को संदर्भ, न्यायालय, पीठ, मुख्य न्यायाधीश, फैसला बरकरार, विवाद अकादमिक होने का कारण
मेन्स के लिए: न्यायिक संयम, अकादमिक विवाद, GST द्वारा राज्य करों का समाहित होना, निष्प्रभावी प्रश्न का सिद्धांत (mootness doctrine)
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- मामला सर्वोच्च न्यायालय की 7 जजों की संविधान पीठ ने सुना।
- पीठ की अगुवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की।
- अदालत ने राज्य बिक्री कर अधिभार पर 1974 के फैसले को बरकरार रखा।
- GST लागू होने के कारण विवाद को अकादमिक घोषित किया गया।
- सर्वोच्च न्यायालय के सामने यह कानूनी संदर्भ 27 साल तक लंबित रहा।
चर्चा में क्यों?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली सर्वोच्च न्यायालय की 7 जजों की संविधान पीठ ने कहा कि क्या राज्य बिक्री कर पर अधिभार लगा सकते हैं, यह लंबित कानूनी संदर्भ GST लागू होने के बाद अब अकादमिक हो गया है। अदालत ने 1974 के उस फैसले को बरकरार रखा जिसने राज्यों को यह अधिकार दिया था, लेकिन यह भी कहा कि संबंधित राज्य-स्तरीय कर कानूनों की जगह GST आ गया है या वे उसमें समाहित हो गए हैं, इसलिए विवाद व्यावहारिक रूप से अप्रासंगिक हो गया है।
सारांश
- सर्वोच्च न्यायालय की 7 जजों की संविधान पीठ ने राज्य बिक्री कर अधिभार से जुड़े 27 साल पुराने कानूनी संदर्भ पर फैसला देने से इनकार किया, क्योंकि GST ने पुरानी कर व्यवस्था की जगह ले ली है।
- अदालत ने सर्वसम्मति से 1974 की संविधान पीठ के उस फैसले को बरकरार रखा जिसने राज्यों को अतिरिक्त बिक्री कर या अधिभार लगाने का अधिकार दिया था।
- चुनौती दिए गए राज्य-स्तरीय कर कानूनों को या तो निरस्त कर दिया गया है या GST ढांचे में मिला दिया गया है, इसलिए विवाद अकादमिक हो गया।
मुख्य बातें
अकादमिक विवाद पर फैसला
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य बिक्री कर अधिभार पर 27 साल पुराने संदर्भ पर फैसला देने से इनकार किया, क्योंकि GST ने इस सवाल को व्यावहारिक रूप से अप्रासंगिक बना दिया है।
1974 का फैसला बरकरार
अदालत ने 1974 की संविधान पीठ का वह फैसला बरकरार रखा जिसने राज्यों को अतिरिक्त बिक्री कर या अधिभार लगाने की अनुमति दी थी।
GST: निर्णायक बदलाव
GST लागू होने से कई राज्य-स्तरीय अप्रत्यक्ष कर समाहित हो गए, जिससे GST से पहले के कर अधिकारों पर विवाद अकादमिक हो गया।
पृष्ठभूमि
मामले में सर्वोच्च न्यायालय की 7 जजों की संविधान पीठ को यह संदर्भ भेजा गया था कि राज्यों को बिक्री कर पर अधिभार लगाने का अधिकार है या नहीं। 1974 की संविधान पीठ ने यह अधिकार पहले ही मान्य किया था। बाद में राज्य-स्तरीय कर कानूनों को चुनौती दी गई और मामला पुनर्विचार के लिए बड़ी पीठ को सौंपा गया। वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने 2017 में बिक्री कर सहित कई राज्य करों को समाहित करके अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का स्वरूप बदल दिया।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
संदर्भ पर फैसला न देने का अदालत का निर्णय न्यायिक संयम को दर्शाता है। विवाद को अकादमिक घोषित करके अदालत ने राज्यों के वित्तीय अधिकारों से जुड़े उस स्थापित संवैधानिक सवाल को फिर से खोलने से परहेज़ किया, जिसे एक नई कर व्यवस्था ने पीछे छोड़ दिया है। 7 जजों की पीठ का सर्वसम्मत फैसला, जिसमें न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन का अलग सहमति वाला मत भी शामिल है, इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि अदालतों को काल्पनिक या निष्प्रभावी सवालों पर फैसला नहीं देना चाहिए। मौजूदा कर प्रशासन पर इसका कोई व्यावहारिक असर नहीं होगा, क्योंकि शासन का आधार GST ही है।
आगे की राह
यह फैसला GST से पहले के दौर के एक लंबे कानूनी अध्याय को बंद करता है। आगे सभी अप्रत्यक्ष कर विवादों का निपटारा GST ढांचे के तहत होगा। यह निर्णय GST व्यवस्था की सर्वोच्चता और अप्रत्यक्ष कर ढांचे को सरल बनाने में उसकी भूमिका की पुष्टि करता है। साथ ही यह दिखाता है कि विधायी बदलावों से जो मामले अप्रासंगिक हो चुके हैं, न्यायपालिका उन पर संसाधन खर्च नहीं करती।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- संविधान पीठ
- सर्वोच्च न्यायालय की वह पीठ जिसमें पांच या अधिक जज होते हैं और जो संविधान की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर फैसला देने के लिए बनाई जाती है।
- वस्तु एवं सेवा कर (GST)
- वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगने वाला व्यापक, बहु-चरणीय, गंतव्य-आधारित अप्रत्यक्ष कर, जो उत्पाद शुल्क, सेवा कर, VAT और बिक्री कर जैसे कई केंद्रीय और राज्य करों को समाहित करता है।
- बड़ी पीठ को संदर्भ
- जब सर्वोच्च न्यायालय की किसी पीठ के सामने ऐसा कानूनी प्रश्न आता है जो बराबर या बड़ी शक्ति की पीठ के पिछले फैसले से टकराता है, तो वह टकराव सुलझाने के लिए मामला बड़ी पीठ को भेज सकती है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस डेटा पर ध्यान दें: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली 7 जजों की संविधान पीठ
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भारत का सर्वोच्च न्यायालय
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: राज्य बिक्री कर अधिभार पर 1974 की संविधान पीठ का फैसला
यह गलती न करें!
परीक्षक संदर्भ पर उत्तर या फैसले के बारे में पूछ सकते हैं। जाल यह है कि अदालत ने संदर्भ पर गुण-दोष के आधार पर फैसला नहीं दिया; उसने GST के कारण इसे अकादमिक घोषित किया। छात्र गलती से मान सकते हैं कि अदालत ने नए संदर्भ के गुण-दोष पर 1974 के फैसले को बरकरार रखा, जबकि उसने केवल पुराने फैसले का उल्लेख किया और नए संदर्भ को निष्प्रभावी मानकर खारिज कर दिया।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- न्यायिक संयम, अकादमिक विवाद, GST द्वारा राज्य करों का समाहित होना, निष्प्रभावी प्रश्न का सिद्धांत (mootness doctrine)
कहीं अटके? एक टैप में समझें
राज्यों के पास नियमित बिक्री कर के ऊपर अतिरिक्त कर लगाने का अधिकार था। सर्वोच्च न्यायालय ने 1974 में इस अधिकार की पुष्टि की। बाद में इस अधिकार को चुनौती दी गई और मामला बड़ी पीठ तक पहुंचा। लेकिन अदालत फैसला देती, उससे पहले 2017 में GST आने से पूरी कर व्यवस्था बदल गई और कई पुराने कर उसमें समाहित हो गए। इसलिए अदालत ने कहा कि पुराना सवाल व्यवहार में अब मायने नहीं रखता, और पुराने कानून पर नया फैसला दिए बिना संदर्भ का निपटारा कर दिया।
- मामला सर्वोच्च न्यायालय की 7 जजों की संविधान पीठ ने सुना।
- पीठ की अगुवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की।
- अदालत ने राज्य बिक्री कर अधिभार पर 1974 के फैसले को बरकरार रखा।
- GST लागू होने के कारण विवाद को अकादमिक घोषित किया गया।
- सर्वोच्च न्यायालय के सामने यह कानूनी संदर्भ 27 साल तक लंबित रहा।
- राजव्यवस्था: सर्वोच्च न्यायालय और न्यायिक पुनरावलोकन
- अर्थव्यवस्था: वस्तु एवं सेवा कर (GST)
जुड़ी अवधारणाएँ: संविधान पीठ, वस्तु एवं सेवा कर (GST), बड़ी पीठ को संदर्भ
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
GST के बाद राज्य बिक्री कर अधिभार विवाद को अकादमिक घोषित करने वाला फैसला किस संवैधानिक निकाय ने दिया?
व्याख्या: फैसला भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दिया, विशेष रूप से 7 जजों की संविधान पीठ ने। उच्च न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय के अधीन होते हैं। विधि आयोग कानूनी सुधारों की सिफारिश करता है, और वित्त आयोग राजकोषीय संघवाद से जुड़े मामले देखता है, न्यायिक फैसले नहीं।
- Q2कठिन
सर्वोच्च न्यायालय के राज्य बिक्री कर अधिभार पर हाल के फैसले के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.सर्वोच्च न्यायालय की 7 जजों की संविधान पीठ ने 1974 के उस फैसले को बरकरार रखा जिसने राज्यों को बिक्री कर पर अधिभार लगाने का अधिकार दिया था।
- 2.अदालत ने संदर्भ पर गुण-दोष के आधार पर फैसला दिया और कहा कि GST व्यवस्था में राज्य अब कोई अधिभार नहीं लगा सकते।
- 3.अदालत ने विवाद को अकादमिक घोषित किया, क्योंकि संबंधित राज्य-स्तरीय कर कानूनों की जगह GST आ गया है या वे उसमें समाहित हो गए हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: अदालत ने 1974 के फैसले को बरकरार रखा। कथन 2 गलत है: अदालत ने संदर्भ पर गुण-दोष के आधार पर फैसला नहीं दिया, बल्कि विवाद को अकादमिक घोषित किया। कथन 3 सही है: विवाद इसलिए अकादमिक घोषित हुआ क्योंकि GST ने पुराने कर कानूनों की जगह ले ली। अतः विकल्प C सही है।
- Q3आसान
राज्य बिक्री कर अधिभार विवाद पर फैसला देने वाली सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ में कितने जज थे?
व्याख्या: पीठ 7 जजों की संविधान पीठ थी, जिसकी अगुवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की। संविधान पीठ के लिए न्यूनतम संख्या 5 जज है, लेकिन इस मामले में 7 जजों की पीठ बनी। 9 और 11 जजों की पीठें बहुत बड़े संवैधानिक मामलों के लिए होती हैं।
- Q4मध्यम
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य बिक्री कर अधिभार विवाद को 'अकादमिक' घोषित करने का मुख्य कारण क्या बताया?
व्याख्या: अदालत ने माना कि विवाद अकादमिक है, क्योंकि GST नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है जिसने चुनौती दिए गए राज्य-स्तरीय कर कानूनों की जगह ले ली या उन्हें समाहित कर लिया। राज्यों ने याचिकाएँ वापस नहीं लीं, कोई अध्यादेश जारी नहीं हुआ, और अदालत ने 1974 के फैसले को गलत नहीं पाया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. राज्य बिक्री कर अधिभार विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय ने क्या फैसला सुनाया?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली 7 जजों की संविधान पीठ ने कहा कि विवाद अब अकादमिक है, क्योंकि जिन राज्य-स्तरीय कर कानूनों को चुनौती दी गई थी, उनकी जगह GST ने ले ली है।
2. क्या सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य बिक्री कर अधिभार पर 1974 के फैसले को पलटा?
नहीं, अदालत ने 1974 के उस फैसले को बरकरार रखा जिसने राज्यों को अतिरिक्त बिक्री कर या अधिभार लगाने का अधिकार दिया था।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य बिक्री कर पर 27 साल पुराने संदर्भ पर फैसला क्यों नहीं दिया?
अदालत ने फैसला इसलिए नहीं दिया क्योंकि GST लागू होने से यह कानूनी प्रश्न व्यावहारिक रूप से अप्रासंगिक हो गया, क्योंकि चुनौती दिए गए राज्य-स्तरीय कर कानून निरस्त हो गए या समाहित हो गए।
सभी स्रोत
मूल खबर4 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
