प्रिलिम्स के लिए: ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, UPEIDA (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण), भूमि अधिग्रहण, परियोजना की कुल लागत, जारी किया गया भूमि अधिग्रहण व्यय, एक्सप्रेसवे की लंबाई, लेन, अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि
मेन्स के लिए: बुनियादी ढांचा-आधारित विकास, क्षेत्रीय संपर्क, उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियां
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के भूमि अधिग्रहण के लिए ₹2,800 करोड़ जारी किए।
- एक्सप्रेसवे 117 किमी लंबा होगा, 6 लेन (8 तक विस्तार योग्य) का होगा और उसकी लागत ₹9,039 करोड़ है।
- गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर जिलों के 134 गांवों से भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।
- भूमि अधिग्रहण के लिए गाजीपुर को ₹1,100 करोड़, चंदौली को ₹1,200 करोड़ और मिर्जापुर को ₹500 करोड़ मिले हैं।
- इस परियोजना की नोडल एजेंसी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) है।
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश सरकार ने 117 किमी लंबे, 6 लेन वाले विंध्य-पूर्वांचल लिंक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु ₹2,800 करोड़ जारी किए हैं। यह परियोजना पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को विंध्य एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी और गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, सोनभद्र, छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश के सिंगरौली के लिए वैकल्पिक मार्ग देगी।
सारांश
- उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ₹9,039 करोड़ के विंध्य-पूर्वांचल स्पर एक्सप्रेसवे के लिए नोडल एजेंसी है।
- 117 किमी लंबा, 6 लेन (8 लेन तक विस्तार योग्य) एक्सप्रेसवे गाजीपुर के पखनपुरा से मिर्जापुर की चुनार तहसील तक जाएगा और विंध्य एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।
- गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर जिलों के कुल 134 गांवों से भूमि अधिग्रहीत की जाएगी: कुल मिलाकर 1,558.93 हेक्टेयर।
मुख्य बातें
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे
117 किमी लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, जो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को विंध्य एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इसकी लागत ₹9,039 करोड़ है।
भूमि के लिए ₹2,800 करोड़ जारी
धनराशि का वितरण: 1,558.93 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए गाजीपुर को ₹1,100 करोड़, चंदौली को ₹1,200 करोड़ और मिर्जापुर को ₹500 करोड़।
रणनीतिक संपर्क
यह एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश को सोनभद्र, छत्तीसगढ़ और सिंगरौली (मध्य प्रदेश) से जोड़ेगा और वाराणसी को बायपास करने वाला वैकल्पिक मार्ग देगा।
पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश संपर्क सुधारने और आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए एक्सप्रेसवे का तेज़ी से विकास कर रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (340 किमी) और विंध्य एक्सप्रेसवे पहले से मौजूद परियोजनाएं हैं। विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे इन दोनों गलियारों को जोड़ेगा और पूर्वी उत्तर प्रदेश से दक्षिणी जिलों होते हुए छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक एक निर्बाध नेटवर्क बनाएगा।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
₹2,800 करोड़ का जारी होना परियोजना को तेज़ी से पूरा करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है। एक्सप्रेसवे निर्माण में अक्सर भूमि अधिग्रहण सबसे अधिक समय लेने वाला चरण होता है। सीधे जिलाधिकारियों को धनराशि देने और सर्वे पूरे करने से सरकार इस प्रक्रिया को तेज़ करना चाहती है। इससे गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर में आर्थिक गतिविधि बढ़ेगी, विंध्य क्षेत्र तक पहुंच सुधरेगी और छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश के सिंगरौली कोलफील्ड की ओर यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।
आगे की राह
धनराशि उपलब्ध होने पर जिला प्रशासनों की ओर से भूमि की खरीद और सरकार के नाम पर रजिस्ट्री शुरू होगी। मुआवजा सर्किल रेट के आधार पर तय होगा। भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद निर्माण शुरू हो सकेगा। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का एक अहम बुनियादी ढांचा माना जा रहा है और राज्य के 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में सहायक होगा।
जिलवार भूमि अधिग्रहण के लिए जारी धनराशि
| जिला | जारी धनराशि (₹ करोड़) | गांव | भूमि (हेक्टेयर) |
|---|---|---|---|
| गाजीपुर | 1,100 | 48 | 576 |
| चंदौली | 1,200 | 52 | 663 |
| मिर्जापुर | 500 | 34 | 318 |
| कुल | 2,800 | 134 | 1,558.93 |
उत्तर प्रदेश से जुड़ाव
उत्तर प्रदेश की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UPPSC 8/10UPPSC RO/ARO 7/10
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
- ऐसा एक्सप्रेसवे जो मौजूदा सड़क पर नहीं, बल्कि पूरी तरह नए संरेखण पर बनाया जाए, जिसके लिए नई भूमि के अधिग्रहण और निर्माण की ज़रूरत हो।
- UPEIDA (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण)
- उत्तर प्रदेश सरकार का नोडल प्राधिकरण, जो राज्य में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक गलियारों की योजना, विकास और प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार है।
- भूमि अधिग्रहण
- वह प्रक्रिया जिसमें सरकार सार्वजनिक उद्देश्य के लिए निजी भूमि लेती है। इसे भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 नियंत्रित करता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: भूमि अधिग्रहण के लिए ₹2,800 करोड़ जारी; कुल परियोजना लागत ₹9,039 करोड़; एक्सप्रेसवे की लंबाई 117 किमी।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA)।
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर के 134 गांवों से अधिग्रहीत होने वाली 1,558.93 हेक्टेयर भूमि।
यह गलती न करें!
परीक्षक जिलवार धनराशि बदल सकते हैं: गाजीपुर ₹1,100 करोड़, चंदौली ₹1,200 करोड़, मिर्जापुर ₹500 करोड़। वे लंबाई (117 किमी) को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (340 किमी) या विंध्य एक्सप्रेसवे से भी भ्रमित कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- बुनियादी ढांचा-आधारित विकास, क्षेत्रीय संपर्क, उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियां
कहीं अटके? एक टैप में समझें
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नए एक्सप्रेसवे के लिए भूमि खरीदने हेतु ₹2,800 करोड़ दिए हैं। यह एक्सप्रेसवे दो मौजूदा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और विंध्य एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा। 117 किमी की यह सड़क गाजीपुर से मिर्जापुर होते हुए छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक जाने का रास्ता देगी, और लोग भीड़भाड़ वाले शहरों से गुज़रे बिना यात्रा कर सकेंगे। इस राशि से तीन जिलों के 134 गांवों में किसानों से भूमि खरीदी जाएगी।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के भूमि अधिग्रहण के लिए ₹2,800 करोड़ जारी किए।
- एक्सप्रेसवे 117 किमी लंबा होगा, 6 लेन (8 तक विस्तार योग्य) का होगा और उसकी लागत ₹9,039 करोड़ है।
- गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर जिलों के 134 गांवों से भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।
- भूमि अधिग्रहण के लिए गाजीपुर को ₹1,100 करोड़, चंदौली को ₹1,200 करोड़ और मिर्जापुर को ₹500 करोड़ मिले हैं।
- इस परियोजना की नोडल एजेंसी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) है।
- भूगोल: परिवहन और संचार
- शासन-प्रशासन: बुनियादी ढांचा विकास
जुड़ी अवधारणाएँ: ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, UPEIDA (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण), भूमि अधिग्रहण
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे विकास के लिए नोडल प्राधिकरण कौन-सा है?
व्याख्या: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे विकास के लिए UPEIDA नोडल एजेंसी है। NHAI राष्ट्रीय राजमार्ग संभालता है, UPSRTC बस परिवहन का प्रबंधन करता है और UPIIDC औद्योगिक विकास के लिए है। इसलिए विकल्प B सही है।
- Q2कठिन
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.यह 6 लेन वाला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, जिसे 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है।
- 2.परियोजना की कुल लागत ₹9,039 करोड़ है और 134 गांवों से भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।
- 3.यह एक्सप्रेसवे मिर्जापुर को बायपास करते हुए गाजीपुर को वाराणसी से जोड़ेगा।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: एक्सप्रेसवे 6 लेन का है, जिसे 8 तक बढ़ाया जा सकता है। कथन 2 सही है: परियोजना की लागत ₹9,039 करोड़ है और भूमि 134 गांवों से ली जाएगी। कथन 3 गलत है: एक्सप्रेसवे गाजीपुर को मिर्जापुर की चुनार तहसील से जोड़ता है, वाराणसी से नहीं। इसलिए विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है?
व्याख्या: विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे 117 किमी लंबा है। 340 किमी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की लंबाई है। 296 किमी और 200 किमी अन्य एक्सप्रेसवे की लंबाई हैं, इस एक्सप्रेसवे की नहीं। इसलिए विकल्प A सही है।
- Q4मध्यम
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को विंध्य एक्सप्रेसवे से जोड़ना है, ताकि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के सिंगरौली की ओर यातायात के लिए मार्ग बने। विकल्प A गलत है क्योंकि यह एक्सप्रेसवे लखनऊ से नहीं जुड़ता। विकल्प C और D अन्य एक्सप्रेसवे का वर्णन करते हैं। इसलिए विकल्प B सही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे क्या है?
यह 117 किमी लंबा, 6 लेन वाला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है (8 लेन तक विस्तार योग्य), जो उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को विंध्य एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
2. इस एक्सप्रेसवे के लिए कितनी भूमि और किन जिलों से अधिग्रहीत की जाएगी?
गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर जिलों के 134 गांवों से कुल 1,558.93 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।
3. विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना की कुल लागत कितनी है?
परियोजना की कुल लागत लगभग ₹9,039 करोड़ है।
4. इस एक्सप्रेसवे के विकास की ज़िम्मेदारी किस एजेंसी की है?
इस परियोजना के लिए नोडल एजेंसी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) है।
सभी स्रोत
मूल खबर5 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
