अंतरराष्ट्रीय संबंध

हूती विद्रोहियों ने युद्धविराम के बदले सऊदी अरब से 51 अरब डॉलर और यमन के शासक के रूप में मान्यता की मांग की

5 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 76 / 101

प्रिलिम्स के लिए: यमन गृहयुद्ध, हूती आंदोलन, छद्म युद्ध, हूतियों द्वारा मांगी गई राशि, हूतियों का समर्थक, हूती बढ़त का लक्ष्य, अक्टूबर 2026 में निशाना बनी प्रमुख सऊदी सुविधाएं, शबवाह प्रांत का सबसे घातक हमला

मेन्स के लिए: पश्चिम एशिया में छद्म युद्ध, ईरान-सऊदी प्रतिस्पर्धा, यमन का मानवीय संकट, लाल सागर हमलों से ऊर्जा सुरक्षा के खतरे

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने युद्धविराम के बदले सऊदी अरब से 51 अरब डॉलर (लगभग ₹4.81 लाख करोड़) का मुआवजा और यमन के वैध शासक के रूप में औपचारिक मान्यता मांगी है। यह मांग ऐसे समय आई है जब हूती सेनाएं अदन की ओर बढ़ रही हैं, सऊदी तेल सुविधाओं और हवाई अड्डों पर हमले कर रही हैं, और लंबे समय से चल रहे यमन गृहयुद्ध को तेज़ कर रही हैं। इससे रियाद के सामने महंगे समझौते, लगातार हमलों या ज़मीनी युद्ध में से एक चुनने की मजबूरी खड़ी हो गई है।

सारांश

  • ईरान समर्थित हूती विद्रोही युद्धविराम के बदले सऊदी अरब से 51 अरब डॉलर का मुआवजा और यमन के शासक के रूप में मान्यता मांग रहे हैं।
  • हूती सेनाएं अदन से 80 किलोमीटर के भीतर पहुंच गई हैं। अदन सऊदी अरब समर्थित उस अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का मुख्यालय है।
  • अक्टूबर 2026 में हूती हमलों ने सऊदी अरब के नागरिक हवाई अड्डों और अरामको की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया, जिससे उड़ानें प्रभावित हुईं और निवेश के सुरक्षित ठिकाने के रूप में सऊदी अरब की छवि को खतरा पहुंचा।

मुख्य बातें

  • अदन की ओर हूती बढ़त

    हूती सेनाएं अदन से 80 किलोमीटर के भीतर आ गई हैं। अदन सऊदी समर्थित अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का मुख्यालय है।

  • सऊदी बुनियादी ढांचे पर हमले

    अक्टूबर में हूती हमलों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सऊदी अरामको की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया, जिससे हज़ारों उड़ानें प्रभावित हुईं।

पृष्ठभूमि

यमन गृहयुद्ध 2015 में शुरू हुआ, जब सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को बहाल करने के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ हस्तक्षेप किया। यह संघर्ष एक महंगे छद्म युद्ध में बदल गया है। हूती राजधानी सना सहित यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं, जबकि मान्यता प्राप्त सरकार अदन से काम करती है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

हूतियों की मांग दो हिस्सों में है: कथित सऊदी बमबारी और नाकेबंदी से हुए नुकसान के लिए 51 अरब डॉलर का मुआवजा, और यमन के वैध शासक के रूप में औपचारिक मान्यता। इसे स्वीकार करने से सऊदी अरब की दक्षिणी सीमा पर शक्ति संतुलन मूल रूप से बदल जाएगा और ईरान-समर्थित एक सशस्त्र समूह को वैधता मिलेगी। इसे ठुकराने से महत्वपूर्ण सऊदी बुनियादी ढांचे पर हमलों का खतरा बना रहेगा, जो विज़न 2030 के उन लक्ष्यों के लिए चुनौती है जिनमें सऊदी अरब को निवेश और पर्यटन का सुरक्षित केंद्र बनाना है।

सैन्य स्थिति

हूती सेनाएं अदन से 80 किलोमीटर के भीतर पहुंच गई हैं, जो शुरुआती युद्ध के बाद से उनकी सबसे करीबी स्थिति है। शबवाह प्रांत में हूती हमले में 75 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए, जिसे युद्ध फिर से शुरू होने के बाद का सबसे घातक हमला बताया गया है। सऊदी हवाई हमले हूती बढ़त को रोकने या उनके ड्रोन और मिसाइल हमलों को बंद कराने में विफल रहे हैं।

आगे की राह

सऊदी अरब के सामने तीन कठिन विकल्प हैं: (1) हूती शर्तें मानकर ईरान समर्थित समूह को वैधता देने का जोखिम उठाना, (2) अर्थव्यवस्था और छवि को नुकसान पहुंचाने वाले हमले झेलते रहना, या (3) ज़मीनी हमले के ज़रिए टकराव बढ़ाना, जो महंगा होगा और जिसमें भरोसेमंद साथी भी नहीं हैं। यह स्थिति ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज़ से पश्चिम एशियाई भू-राजनीति का एक बड़ा संकट बिंदु बनी हुई है।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

यमन गृहयुद्ध
यह संघर्ष 2014-15 में ईरान समर्थित हूती आंदोलन और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा समर्थित यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के बीच शुरू हुआ। इससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हुआ है।
हूती आंदोलन
उत्तरी यमन में आधारित एक ज़ैदी शिया इस्लामी राजनीतिक और सशस्त्र आंदोलन। माना जाता है कि इसे ईरान से समर्थन मिलता है, और यह राजधानी सना सहित यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है।
छद्म युद्ध
ऐसा संघर्ष जिसमें दो विरोधी शक्तियाँ विपरीत पक्षों के लड़ाकों को समर्थन और वित्तीय मदद देती हैं, बिना एक-दूसरे की सेनाओं से सीधे भिड़े। यमन युद्ध को अक्सर सऊदी अरब और ईरान के बीच छद्म युद्ध कहा जाता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: युद्धविराम के लिए हूतियों की 51 अरब डॉलर (लगभग ₹4.81 लाख करोड़) की मांग
  • इस डेटा पर ध्यान दें: अदन से 80 किलोमीटर दूर हूती सेनाएं
  • इस डेटा पर ध्यान दें: शबवाह हमले में 75 मारे गए, 200 से अधिक घायल

यह गलती न करें!

परीक्षक 51 अरब डॉलर की मांग को यमन को दी गई सऊदी सहायता राशि से बदल सकते हैं, या हूतियों के समर्थक (ईरान) को क्षेत्र की अन्य शक्तियों से भ्रमित कर सकते हैं। वे अदन (मान्यता प्राप्त सरकार की सीट) को सना (हूती-नियंत्रित राजधानी) से भी बदल सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • पश्चिम एशिया में छद्म युद्ध, ईरान-सऊदी प्रतिस्पर्धा, यमन का मानवीय संकट, लाल सागर हमलों से ऊर्जा सुरक्षा के खतरे

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अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    यमन में हूती आंदोलन का प्रमुख समर्थक किस देश को माना जाता है?

  2. Q2कठिन

    यमन संघर्ष के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.हूती विद्रोहियों ने युद्धविराम के लिए सऊदी अरब से 51 अरब डॉलर का मुआवजा मांगा है।
    2. 2.हूती सेनाएं यमन की राजधानी सना से 80 किलोमीटर के भीतर पहुंच गई हैं।
    3. 3.सऊदी अरब ने 2015 में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने के लिए यमन में हस्तक्षेप किया था।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    रिपोर्ट के अनुसार, शबवाह प्रांत में हूती हमले में कितने लोग मारे गए?

  4. Q4मध्यम

    यदि सऊदी अरब हूतियों की यमन के शासक के रूप में मान्यता की मांग स्वीकार करता है, तो उसके लिए मुख्य रणनीतिक चिंता क्या होगी?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. युद्धविराम के लिए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब से कितनी राशि मांगी है?

हूती विद्रोहियों ने युद्धविराम के लिए सऊदी अरब से 51 अरब डॉलर (लगभग ₹4.81 लाख करोड़) का मुआवजा मांगा है।

2. यमन में हूती सेनाएं किस शहर की ओर बढ़ रही हैं?

हूती सेनाएं अदन से 80 किलोमीटर के भीतर पहुंच गई हैं। अदन वह दक्षिणी बंदरगाह शहर है जो अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का मुख्यालय है।

3. हूती आंदोलन का समर्थन कौन-सा देश करता है?

माना जाता है कि हूती आंदोलन को ईरान का समर्थन प्राप्त है।

4. अक्टूबर 2026 में हूतियों ने कौन-सा प्रमुख सऊदी बुनियादी ढांचा निशाना बनाया?

हूती हमलों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सऊदी अरामको की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया, जिससे उड़ानें रद्द हुईं और नुकसान हुआ।

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