राजव्यवस्था

सर्वोच्च न्यायालय ने भाखड़ा-ब्यास ऊर्जा विवाद सुलझाया: हिमाचल को 20 वर्षों में 11,973 MU बिजली मिलेगी

6 नवंबर 20262 मिनट2 स्रोत4 प्रश्नखबर 7 / 77

प्रिलिम्स के लिए: भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB), अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956, संविधान का अनुच्छेद 262, विवाद की अवधि, कुल स्वीकृत बिजली, बकाये की दर, पूंजी लागत समायोजन, मूल हिस्सा (CEA)

मेन्स के लिए: अंतरराज्यीय जल विवाद, सहकारी संघवाद, नकद-रहित भुगतान व्यवस्था, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड, विवाद निपटारे में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका

स्रोत:The HinduThe HinduHindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने भाखड़ा नंगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाओं के बकाये को लेकर दशकों पुराना अंतरराज्यीय ऊर्जा विवाद सुलझा दिया है। 2011 के फैसले के अनुसार पंजाब और हरियाणा 20 वर्षों तक 7.19% की दर से हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देंगे। समझौते में ऐतिहासिक पूंजी लागत के रूप में ₹420 करोड़ का समायोजन भी शामिल है।

सारांश

  • सर्वोच्च न्यायालय ने भाखड़ा-ब्यास ऊर्जा विवाद सुलझाने के लिए केंद्र का नकद-रहित प्रस्ताव स्वीकार किया। भुगतान नकद के बजाय बिजली के रूप में होगा।
  • हिमाचल प्रदेश को 20 वर्षों की अवधि में पंजाब और हरियाणा से 11,973 मिलियन यूनिट (MU) बिजली मिलेगी।
  • यह समझौता 2011 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर आधारित है, जिसमें हिमाचल प्रदेश के पक्ष में बिजली बकाये की दर 7.19% तय की गई थी।

मुख्य बातें

  • सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरराज्यीय जल-ऊर्जा विवाद सुलझाया

    सर्वोच्च न्यायालय ने भाखड़ा-ब्यास परियोजनाओं से जुड़े बिजली बकाये पर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच 60 वर्ष पुराना विवाद सुलझाया।

  • ऊर्जा रूप में नकद-रहित भुगतान

    नकद के बजाय बकाया 20 वर्षों में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली के रूप में चुकाया जाएगा, जिसे केंद्र ने 'नकद-रहित प्रस्ताव' के रूप में स्वीकार किया।

  • ₹420 करोड़ पूंजी लागत समायोजन

    बांध निर्माण की ऐतिहासिक पूंजी लागत के लिए ₹420 करोड़ का समायोजन जोड़ा गया है, और हिमाचल प्रदेश को पंजाब और हरियाणा को कुछ भी नहीं चुकाना होगा।

पृष्ठभूमि

यह विवाद 1966 से जुड़ा है, जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत की गई व्यवस्थाओं और भाखड़ा नंगल तथा ब्यास परियोजनाओं के आवंटन से संबंधित है। भाखड़ा-ब्यास परियोजनाओं का संचालन भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) करता है, जो साझेदार राज्यों के बीच बिजली का बंटवारा करता है। हिमाचल प्रदेश का दावा था कि 1966 से उसे अपना उचित हिस्सा नहीं मिल रहा, जिससे लंबी कानूनी लड़ाई चली।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ाव

हिमाचल प्रदेश की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:HPPSC HAS 9/10HPRCA 8/10

हरियाणा की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:HPSC HCS 8/10HSSC 7/10

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB)
पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय, जो भाखड़ा नंगल और ब्यास परियोजनाओं का प्रबंधन करता है। यह पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के बीच जल और बिजली का आवंटन करता है।
अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956
यह कानून अंतरराज्यीय नदियों के जल उपयोग से जुड़े विवादों के निपटारे की व्यवस्था देता है। भाखड़ा-ब्यास विवाद इसी ढांचे के तहत सुलझाया गया।
संविधान का अनुच्छेद 262
अंतरराज्यीय नदियों से जुड़े विवादों के निर्णय का प्रावधान करता है। इस उद्देश्य के लिए संसद न्यायाधिकरण की स्थापना का प्रावधान कर सकती है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 7.19% दर पर 20 वर्षों में 11,973 MU बिजली
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB)
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: 2011 का सर्वोच्च न्यायालय का फैसला

यह गलती न करें!

परीक्षक '11,973 MU' को '13,066 MU' (CEA का मूल हिस्सा) से बदल सकता है, या भुगतान अवधि '20 वर्ष' से बदलकर '15 वर्ष' (पंजाब की प्रारंभिक मांग) या '10 वर्ष' (हिमाचल की मांग) कर सकता है। साथ ही 7.19% की दर को '12%' जैसे किसी अन्य आंकड़े से बदला जा सकता है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • अंतरराज्यीय जल विवाद, सहकारी संघवाद, नकद-रहित भुगतान व्यवस्था, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड, विवाद निपटारे में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

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  1. Q1आसान

    कौन-सा वैधानिक निकाय भाखड़ा नंगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाओं का प्रबंधन करता है, जिनके बिजली बकाये पर हाल में सर्वोच्च न्यायालय ने समझौता किया?

  2. Q2कठिन

    भाखड़ा-ब्यास ऊर्जा विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के समझौते के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र का नकद-रहित प्रस्ताव स्वीकार किया, जिसके तहत पंजाब और हरियाणा 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देंगे।
    2. 2.2011 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार बिजली बकाये की दर 7.19% तय की गई थी।
    3. 3.ऐतिहासिक पूंजी लागत के लिए हिमाचल प्रदेश को पंजाब और हरियाणा को ₹420 करोड़ चुकाने होंगे।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    सर्वोच्च न्यायालय के समझौते के अनुसार पंजाब और हरियाणा कितने वर्षों में हिमाचल प्रदेश को बिजली बकाया चुकाएंगे?

  4. Q4मध्यम

    भाखड़ा-ब्यास ऊर्जा विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का मुख्य महत्व क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. हिमाचल प्रदेश को पंजाब और हरियाणा से कितनी बिजली मिलेगी?

हिमाचल प्रदेश को 20 वर्षों की अवधि में 11,973 मिलियन यूनिट (MU) बिजली मिलेगी।

2. भाखड़ा-ब्यास विवाद में बिजली बकाये की दर का आधार क्या था?

7.19% की दर 2011 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से तय हुई, जिसने बिजली बकाये का निपटारा हिमाचल प्रदेश के पक्ष में किया।

3. भाखड़ा-ब्यास ऊर्जा विवाद में कौन-कौन से राज्य शामिल हैं?

इस विवाद में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं, जो 1966 से भाखड़ा नंगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाओं के बकाये के भुगतान को लेकर आमने-सामने हैं।

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