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उदयपुर कन्हैयालाल हत्याकांड: राजस्थान उच्च न्यायालय ने 8 आरोपियों पर UAPA के आतंकवाद के आरोप बरकरार रखे

6 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 19 / 77

प्रिलिम्स के लिए: UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम), आरोप तय करने का चरण, प्रथम दृष्टया मामला, IPC धारा 302, IPC धारा 153A, मामला, न्यायालय, बरकरार रखा गया मुख्य कानून

मेन्स के लिए: UAPA, प्रथम दृष्टया मामला, मिनी-ट्रायल, आतंकी मॉड्यूल, सोशल मीडिया से कट्टरपंथ, NIA का अधिकार क्षेत्र

स्रोत:Dainik BhaskarDainik Bhaskar

चर्चा में क्यों?

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 2022 के उदयपुर कन्हैयालाल हत्याकांड में 8 आरोपियों पर आतंकवाद के कानून UAPA के तहत आरोप बरकरार रखे हैं और सख्त कानून हटाने की उनकी याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में केवल प्रथम दृष्टया मामला देखा जाता है, मिनी-ट्रायल नहीं होता। साथ ही UAPA लागू होने के लिए किसी आतंकी संगठन की औपचारिक सदस्यता होना ज़रूरी नहीं है।

सारांश

  • राजस्थान उच्च न्यायालय ने कन्हैयालाल हत्याकांड में UAPA के आरोप हटाने की मांग वाली 8 आरोपियों की याचिका खारिज की।
  • अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में अदालत मिनी-ट्रायल नहीं चला सकती, वह केवल यह देखती है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं।
  • NIA ने आरोपियों पर UAPA (धारा 16, 18, 20), IPC (120B, 302, 307, 153A, 295A) और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप लगाए थे।

मुख्य बातें

  • उच्च न्यायालय ने UAPA के आरोप बरकरार रखे

    राजस्थान उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कन्हैयालाल हत्याकांड में 8 आरोपियों पर UAPA के तहत आतंकवाद के आरोप चलेंगे।

  • प्रथम दृष्टया मामले का मानक

    अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में केवल प्रथम दृष्टया मामला चाहिए, मिनी-ट्रायल नहीं, और 'गंभीर संदेह' होने पर आरोप तय करना उचित है।

  • औपचारिक सदस्यता ज़रूरी नहीं

    NIA ने दलील दी कि UAPA के षड्यंत्र से जुड़े प्रावधान व्यापक हैं और इनमें किसी आतंकी संगठन की औपचारिक सदस्यता ज़रूरी नहीं है; आरोपियों का आचरण और धमकियां बड़ी साजिश की ओर इशारा करती हैं।

पृष्ठभूमि

28 जून 2022 को उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की उनकी दुकान में घुसकर दो लोगों ने बेरहमी से हत्या कर दी। आरोप है कि उन्होंने नूपुर शर्मा की टिप्पणियों का समर्थन करने वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर की थी, जिसके कारण यह हत्या हुई। मामला पहले धानमंडी थाने में दर्ज हुआ और उसी दिन NIA ने इसे री-रजिस्टर्ड कर लिया। NIA ने 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जिसमें आरोप है कि उन्होंने पूरे देश में आतंक फैलाने के लिए एक आतंकी मॉड्यूल के रूप में काम किया।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

राजस्थान उच्च न्यायालय का फैसला स्पष्ट करता है कि किसी आतंकी संगठन की औपचारिक सदस्यता साबित हुए बिना भी UAPA के आरोप लगाए जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि आरोपियों की धमकियां, घटना के बाद उनका आचरण, बरामद वीडियो और अन्य सबूत मिलकर बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हैं, और इनकी जांच केवल ट्रायल के दौरान हो सकती है। यह फैसला ऐसे मामलों के लिए अहम नज़ीर बन सकता है जहां सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हिंसक घटनाएं होती हैं, क्योंकि इससे UAPA के तहत आतंकवादी कृत्य की परिभाषा का दायरा व्यापक होता है।

राजस्थान से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम)
गैरकानूनी गतिविधियों और आतंकवाद को रोकने के लिए बनाया गया भारतीय कानून। इसके तहत सरकार किसी संगठन को आतंकी संगठन घोषित कर सकती है और आतंकी कृत्यों में शामिल व्यक्तियों की जांच व अभियोजन के अधिकार एजेंसियों को देता है।
आरोप तय करने का चरण
आपराधिक मुकदमे का वह चरण जिसमें अदालत पेश सबूतों के आधार पर आरोपी के खिलाफ विशिष्ट आरोप तय करती है। इस चरण में पूरा ट्रायल नहीं होता, केवल यह देखा जाता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं।
प्रथम दृष्टया मामला
कानूनी शब्द जिसका अर्थ है कि अभियोजन द्वारा पेश सबूत, उन्हें सच मानते हुए, ट्रायल आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त हैं। इस चरण में उचित संदेह से परे प्रमाण की ज़रूरत नहीं होती।
IPC धारा 302
हत्या के लिए सज़ा। इसमें मृत्युदंड या आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
IPC धारा 153A
धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने और सौहार्द बिगाड़ने वाले कार्यों के लिए सज़ा।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: 8 आरोपियों ने कन्हैयालाल हत्याकांड में UAPA के आरोपों को चुनौती दी; उच्च न्यायालय ने 6 नवंबर 2026 को आरोप बरकरार रखे
  • इस नोडल एजेंसी पर ध्यान दें: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) की धारा 16, 18, 20

यह गलती न करें!

परीक्षक पूछ सकते हैं कि UAPA के आरोपों के लिए किसी आतंकी संगठन की औपचारिक सदस्यता ज़रूरी है या नहीं। सही उत्तर है नहीं: UAPA के षड्यंत्र प्रावधान योजना बनाने, प्रयास, उकसाने और तैयारी को शामिल करते हैं, और इनमें औपचारिक सदस्यता की ज़रूरत नहीं होती।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • UAPA, प्रथम दृष्टया मामला, मिनी-ट्रायल, आतंकी मॉड्यूल, सोशल मीडिया से कट्टरपंथ, NIA का अधिकार क्षेत्र

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1मध्यम

    कन्हैयालाल हत्याकांड की जांच मुख्य रूप से किस एजेंसी के पास है?

  2. Q2मध्यम

    कन्हैयालाल हत्याकांड के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.राजस्थान उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी आतंकी संगठन की औपचारिक सदस्यता साबित हुए बिना UAPA के आरोप नहीं लगाए जा सकते।
    2. 2.अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में सबूतों की विस्तृत जांच के लिए मिनी-ट्रायल ज़रूरी है।
    3. 3.NIA ने आरोपियों पर UAPA, IPC और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप लगाए थे।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    कन्हैयालाल हत्याकांड में NIA की चार्जशीट में कितने आरोपी नामजद किए गए थे?

  4. Q4मध्यम

    इस मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले का मुख्य कानूनी महत्व क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कन्हैयालाल हत्याकांड में राजस्थान उच्च न्यायालय ने क्या फैसला सुनाया?

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 8 आरोपियों पर UAPA (आतंकवाद के आरोप) लागू रखे और उनकी आरोप हटाने की याचिका खारिज कर दी।

2. UAPA क्या है और इस मामले में कौन-सी धाराएं लगाई गईं?

UAPA का अर्थ है गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम। NIA ने इस मामले में धारा 16 (आतंकी कृत्य), 18 (षड्यंत्र) और 20 (आतंकी गिरोह/संगठन का सदस्य होना) लगाई।

3. अदालत ने आरोपियों की UAPA के आरोप हटाने की याचिका क्यों खारिज की?

अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में केवल प्रथम दृष्टया मामला चाहिए, मिनी-ट्रायल नहीं, और UAPA के लिए किसी आतंकी संगठन की औपचारिक सदस्यता ज़रूरी नहीं है।

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