राजव्यवस्था

बिहार: बिजली कटौती का आंकड़ा सांसदों, विधायकों और मुखियाओं को फोन पर मिलेगा; मुख्यमंत्री ने समर्पित टीम बनाने का निर्देश दिया

6 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 75 / 102

प्रिलिम्स के लिए: पंचायती राज व्यवस्था, वित्त आयोग, सोलराइजेशन, नोडल विभाग, उद्देश्य, मुख्य लाभार्थी, सोलर पैनल क्षमता (नई), वर्तमान संदर्भ

मेन्स के लिए: शासन में पारदर्शिता, जमीनी लोकतंत्र, स्थानीय स्तर पर अक्षय ऊर्जा, वित्त आयोग से धनराशि का हस्तांतरण

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने सभी सांसदों, विधायकों और मुखियाओं को फोन पर रोजाना बिजली आपूर्ति और कटौती का आंकड़ा देने के लिए एक समर्पित टीम बनाने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण बिजली वितरण में पारदर्शिता और स्थानीय निगरानी बढ़ाना है।

सारांश

  • बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायती राज विभाग को एक समर्पित टीम बनाने को कहा है, जो स्थानीय जनप्रतिनिधियों को उनके क्षेत्र में रोजाना बिजली आपूर्ति के घंटों और कटौती की जानकारी देगी।
  • यह टीम क्षेत्र के मुखियाओं, विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों के मोबाइल नंबर पर अपडेट भेजेगी।
  • मुख्यमंत्री ने जलमीनारों पर सोलर पैनल की क्षमता प्रस्तावित 5 kW से बढ़ाकर 20 kW करने का निर्देश दिया है। साथ ही पंचायत सरकारी भवनों के सोलराइजेशन को 15वें वित्त आयोग और 7वें राज्य वित्त आयोग से जोड़ने को कहा है।

मुख्य बातें

  • फोन पर बिजली कटौती का आंकड़ा

    एक समर्पित टीम रोजाना सांसदों, विधायकों और मुखियाओं को उनकी पंचायतों में बिजली आपूर्ति के घंटों और कटौती की जानकारी देगी।

  • सोलर क्षमता में बढ़ोतरी

    जलमीनारों पर लगे सोलर पैनल की क्षमता स्थानीय लाभ बढ़ाने के लिए 5 kW से 20 kW की जाएगी।

  • पंचायत भवनों का सोलराइजेशन

    पंचायत सरकार भवनों के सोलराइजेशन को निर्माण अनुमान में शामिल किया जाएगा और वित्त आयोगों से जोड़ा जाएगा।

पृष्ठभूमि

बिहार में ग्रामीण बिजली आपूर्ति लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। बार-बार होने वाली बिजली कटौती खेती, छोटे कारोबार और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करती है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास आपूर्ति का तात्कालिक आंकड़ा अक्सर नहीं होता, जिससे शिकायतों का समाधान या बिजली कंपनी की जवाबदेही तय करना कठिन हो जाता है। यह नई व्यवस्था इसी सूचना की कमी को दूर करने के लिए है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

चुने हुए जनप्रतिनिधियों को सीधे रोजाना बिजली का आंकड़ा देकर सरकार ने एक पारदर्शिता तंत्र बनाया है, जिससे स्थानीय निगरानी सुधर सकती है। इस कदम से मुखिया (गांव के प्रमुख) के साथ विधायकों और सांसदों की भूमिका मज़बूत होती है और जमीनी लोकतंत्र को बल मिलता है। जलमीनारों पर सोलर पैनल की क्षमता 5 kW से बढ़ाकर 20 kW करने का फैसला स्थानीय स्तर पर अक्षय ऊर्जा अपनाने पर ज़ोर दिखाता है।

आगे की राह

इस पहल की सफलता समर्पित टीम के समय पर और सटीक काम करने पर तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा इस आंकड़े के उपयोग की इच्छा पर निर्भर करेगी। सोलराइजेशन के काम को 15वें वित्त आयोग और 7वें राज्य वित्त आयोग से जोड़ने से समर्पित धनराशि सुनिश्चित होनी चाहिए। पंचायती राज विभाग की नियमित निगरानी इसमें अहम होगी।

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बिहार की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:BPSC 8/10BSSC 7/10

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

पंचायती राज व्यवस्था
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन की त्रिस्तरीय व्यवस्था: ग्राम पंचायत (गांव स्तर), पंचायत समिति (प्रखंड स्तर) और ज़िला परिषद (ज़िला स्तर)। यह भारतीय संविधान के भाग IX के तहत एक संवैधानिक व्यवस्था है।
वित्त आयोग
संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच साल पर गठित एक संवैधानिक निकाय, जो संघ और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे की सिफारिश करता है। 15वां वित्त आयोग (2021-26) और राज्यों के वित्त आयोग स्थानीय निकायों के लिए धनराशि तय करते हैं।
सोलराइजेशन
सूर्य के प्रकाश से बिजली बनाने के लिए सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया। यह राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत भारत के अक्षय ऊर्जा प्रयासों का एक प्रमुख हिस्सा है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: बिहार में जलमीनारों पर सोलर पैनल क्षमता 5 kW से बढ़ाकर 20 kW
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: पंचायती राज विभाग, बिहार
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: 15वें वित्त आयोग और 7वें राज्य वित्त आयोग से जुड़ाव

यह गलती न करें!

परीक्षक 'पंचायती राज विभाग' की जगह 'ऊर्जा विभाग' या 'ग्रामीण विकास विभाग' रख सकते हैं, या सोलर क्षमता बढ़ोतरी (5 kW से 20 kW) को किसी अन्य मान से भ्रमित कर सकते हैं। वे 15वें वित्त आयोग की भूमिका के बारे में भी पूछ सकते हैं, बिना यह बताए कि वह सोलराइजेशन के लिए है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • शासन में पारदर्शिता, जमीनी लोकतंत्र, स्थानीय स्तर पर अक्षय ऊर्जा, वित्त आयोग से धनराशि का हस्तांतरण

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बिजली कटौती की जानकारी देने की नई व्यवस्था लागू करने की मुख्य ज़िम्मेदारी बिहार सरकार के किस विभाग की है?

  2. Q2कठिन

    बिहार सरकार की नई पहल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.एक समर्पित टीम मुखियाओं, विधायकों और सांसदों को मोबाइल फोन के जरिए रोजाना बिजली आपूर्ति के घंटों और कटौती की जानकारी देगी।
    2. 2.मुख्यमंत्री ने आदेश दिया कि जलमीनारों पर सोलर पैनल की क्षमता 20 kW से घटाकर 5 kW की जाए।
    3. 3.पंचायत सरकार भवनों के सोलराइजेशन को 15वें वित्त आयोग से जोड़ा जाना है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    जलमीनारों पर सोलर पैनल की वह प्रस्तावित क्षमता क्या थी, जिसे मुख्यमंत्री ने 20 kW तक बढ़ाने का निर्देश दिया?

  4. Q4मध्यम

    फोन के जरिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बिजली कटौती का आंकड़ा देने के बिहार सरकार के फैसले का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बिहार सरकार की नई व्यवस्था में रोजाना बिजली कटौती का अपडेट किन्हें मिलेगा?

सांसदों, विधायकों और मुखियाओं (गांव के प्रमुख) को मोबाइल फोन के जरिए उनके क्षेत्र में बिजली आपूर्ति के घंटों और कटौती का रोजाना अपडेट मिलेगा।

2. बिहार में यह व्यवस्था लागू करने की ज़िम्मेदारी किस विभाग की है?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर बिहार का पंचायती राज विभाग इसके लिए ज़िम्मेदार है।

3. बिहार में जलमीनारों पर सोलर पैनल की नई क्षमता कितनी करने का आदेश दिया गया है?

मुख्यमंत्री ने आदेश दिया कि जलमीनारों पर सोलर पैनल की प्रस्तावित 5 kW क्षमता को बढ़ाकर 20 kW किया जाए।

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