प्रिलिम्स के लिए: यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम, महाभारत, राजतरंगिणी, अर्थशास्त्र, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), यूनेस्को रजिस्टर, सत्र, भारत की कुल प्रविष्टियां
मेन्स के लिए: सॉफ्ट पावर, सांस्कृतिक कूटनीति, दस्तावेज़ी विरासत, IGNCA, कल्हण का इतिहास लेखन, कौटिल्य की राज्य-कला
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- तीन भारतीय पांडुलिपियां, महाभारत, राजतरंगिणी और अर्थशास्त्र, यूनेस्को के एशिया-पैसिफिक रजिस्टर में दर्ज।
- राजतरंगिणी कल्हण द्वारा लिखा गया 12वीं सदी का ऐतिहासिक इतिवृत्त है।
- अर्थशास्त्र कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा शासन-कला पर लिखा ग्रंथ है।
- यह फैसला जकार्ता, इंडोनेशिया में हुए 11वें सत्र में लिया गया।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने नामांकन दस्तावेज़ तैयार किए।
चर्चा में क्यों?
भारत की तीन प्राचीन पांडुलिपियां, महाभारत, राजतरंगिणी (कल्हण, 12वीं सदी) और अर्थशास्त्र (कौटिल्य), यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर में दर्ज की गई हैं। भारत की सभ्यतागत विरासत को मिली इस वैश्विक मान्यता के साथ इस क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियां छह हो गई हैं। नामांकन दस्तावेज़ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने तैयार किए।
सारांश
- यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर में तीन भारतीय पांडुलिपियां दर्ज की गई हैं: महाभारत, राजतरंगिणी (कल्हण, 12वीं सदी) और अर्थशास्त्र (कौटिल्य)।
- यह फैसला इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए क्षेत्रीय रजिस्टर के 11वें सत्र में लिया गया।
- इस मान्यता के बाद इस क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियां छह हो गई हैं।
- नामांकन दस्तावेज़ तैयार करने में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने अहम भूमिका निभाई।
- राजतरंगिणी कश्मीर के राजाओं का ऐतिहासिक इतिवृत्त है, जबकि अर्थशास्त्र शासन, अर्थनीति और सैन्य रणनीति पर आधारित ग्रंथ है।
मुख्य बातें
तीन पांडुलिपियां दर्ज
महाभारत, राजतरंगिणी (कल्हण, 12वीं सदी) और अर्थशास्त्र (कौटिल्य) यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर में जोड़े गए हैं।
IGNCA की भूमिका
तीनों कृतियों के नामांकन दस्तावेज़ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने तैयार किए।
भारत की सांस्कृतिक पहचान को मान्यता
क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियां बढ़कर छह हो गई हैं, जो उसकी समृद्ध सभ्यतागत विरासत की वैश्विक स्वीकृति है।
पृष्ठभूमि
यूनेस्को का मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम 1992 में वैश्विक महत्व की दस्तावेज़ी विरासत को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए शुरू हुआ था। एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर इसी कार्यक्रम के तहत बने कई क्षेत्रीय रजिस्टरों में से एक है। भारत अपनी दस्तावेज़ी विरासत के नामांकन में सक्रिय रहा है और इससे पहले इस क्षेत्रीय रजिस्टर में उसकी तीन प्रविष्टियां थीं।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
महाभारत, राजतरंगिणी और अर्थशास्त्र को शामिल करना कई कारणों से अहम है। महाभारत दुनिया का सबसे लंबा महाकाव्य है और भारतीय दर्शन व धर्म के केंद्र में है। कल्हण की राजतरंगिणी (12वीं सदी) साक्ष्य और आलोचनात्मक पद्धति पर आधारित अग्रणी ऐतिहासिक इतिवृत्त है, जो इसे भारतीय इतिहास लेखन में ऐतिहासिक कदम बनाती है। कौटिल्य (चाणक्य) का अर्थशास्त्र शासन, अर्थनीति और सैन्य रणनीति पर आधारित मूल ग्रंथ है, जिसे आज भी दुनिया भर में पढ़ा जाता है। इस मान्यता से भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति को मज़बूती मिलती है, क्योंकि वैश्विक मंच पर उसकी बौद्धिक विरासत सामने आती है।
आगे की राह
इस मान्यता से मूल पांडुलिपियों के बेहतर संरक्षण और डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिल सकता है। भारत भविष्य के यूनेस्को रजिस्टरों के लिए और दस्तावेज़ी विरासत के नामांकन कर सकता है, जिससे उसकी सांस्कृतिक कूटनीति मज़बूत होगी। परीक्षार्थी इसे भारत की सॉफ्ट पावर और विरासत संरक्षण में IGNCA जैसी संस्थाओं की भूमिका के उदाहरण के रूप में याद रखें।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम
- 1992 में शुरू किया गया एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम, जो विश्व महत्व की दस्तावेज़ी विरासत को संरक्षित और प्रचारित करता है। यह एक विश्व रजिस्टर और क्षेत्रीय रजिस्टर बनाए रखता है।
- महाभारत
- संस्कृत में रचित दुनिया का सबसे लंबा महाकाव्य, जिसका श्रेय ऋषि व्यास को दिया जाता है। इसमें कुरुक्षेत्र युद्ध की कथा है और भगवद्गीता भी इसी का अंश है।
- राजतरंगिणी
- कल्हण द्वारा लिखा गया 12वीं सदी का कश्मीर के राजाओं का ऐतिहासिक इतिवृत्त। इसे भारतीय इतिहास लेखन की सबसे पुरानी कृतियों में गिना जाता है।
- अर्थशास्त्र
- कौटिल्य (चाणक्य) के नाम से जुड़ा प्राचीन भारतीय ग्रंथ, जो शासन, आर्थिक नीति और सैन्य रणनीति पर है। इसके रचनाकाल पर मतभेद है, विद्वान मोटे तौर पर इसे चौथी सदी ईसा पूर्व से तीसरी सदी ईस्वी के बीच रखते हैं।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA)
- भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था, जो भारतीय कला और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन और संरक्षण पर केंद्रित है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस डेटा पर ध्यान दें: तीन पांडुलिपियां (महाभारत, राजतरंगिणी, अर्थशास्त्र) यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर में दर्ज
- इस डेटा पर ध्यान दें: जकार्ता, इंडोनेशिया में 11वां सत्र
- इस डेटा पर ध्यान दें: इस रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियां अब छह
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), जिसने नामांकन तैयार किया
यह गलती न करें!
परीक्षक पूछ सकते हैं कि इन्हें किस यूनेस्को रजिस्टर में जोड़ा गया, 'विश्व रजिस्टर' या 'एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर'। वे राजतरंगिणी के लेखक कल्हण को दूसरे इतिहासकारों से भ्रमित करने की कोशिश भी कर सकते हैं, या इसके रचनाकाल की सदी (10वीं या 14वीं नहीं, 12वीं) पूछ सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- सॉफ्ट पावर, सांस्कृतिक कूटनीति, दस्तावेज़ी विरासत, IGNCA, कल्हण का इतिहास लेखन, कौटिल्य की राज्य-कला
कहीं अटके? एक टैप में समझें
यूनेस्को ने भारत की तीन बहुत पुरानी किताबों को विश्व विरासत का दर्जा दिया है। ये हैं महाभारत (एक विशाल महाकाव्य), राजतरंगिणी (900 साल पहले लिखा गया कश्मीर का इतिहास) और अर्थशास्त्र (चाणक्य द्वारा लिखा गया राज्य चलाने का मार्गदर्शक ग्रंथ)। इससे इन कृतियों को वैश्विक मान्यता मिली है, और इस सूची में अब भारत की छह मान्यता प्राप्त कृतियां हैं।
- तीन भारतीय पांडुलिपियां, महाभारत, राजतरंगिणी और अर्थशास्त्र, यूनेस्को के एशिया-पैसिफिक रजिस्टर में दर्ज।
- राजतरंगिणी कल्हण द्वारा लिखा गया 12वीं सदी का ऐतिहासिक इतिवृत्त है।
- अर्थशास्त्र कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा शासन-कला पर लिखा ग्रंथ है।
- यह फैसला जकार्ता, इंडोनेशिया में हुए 11वें सत्र में लिया गया।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने नामांकन दस्तावेज़ तैयार किए।
- कला और संस्कृति: यूनेस्को और भारतीय विरासत
- इतिहास: प्राचीन भारतीय ग्रंथ और इतिहास लेखन
जुड़ी अवधारणाएँ: यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम, महाभारत, राजतरंगिणी, अर्थशास्त्र
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर में दर्ज तीन भारतीय पांडुलिपियों के नामांकन दस्तावेज़ किस संस्था ने तैयार किए?
व्याख्या: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने तीनों कृतियों के नामांकन दस्तावेज़ तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भौतिक विरासत पर, राष्ट्रीय संग्रहालय कलाकृतियों पर और साहित्य अकादमी साहित्य पर काम करते हैं, लेकिन इस यूनेस्को नामांकन को विशेष रूप से IGNCA ने संभाला।
- Q2कठिन
यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.महाभारत, राजतरंगिणी और अर्थशास्त्र, तीनों भारतीय पांडुलिपियां हाल ही में इस रजिस्टर में दर्ज की गई हैं।
- 2.राजतरंगिणी 12वीं सदी का ऐतिहासिक इतिवृत्त है, जिसे इतिहासकार कल्हण ने लिखा।
- 3.यह क्षेत्रीय रजिस्टर का 10वां सत्र था, जो नई दिल्ली में हुआ।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: तीनों पांडुलिपियां दर्ज की गईं। कथन 2 सही है: राजतरंगिणी कल्हण ने 12वीं सदी में लिखी। कथन 3 गलत है: 11वां सत्र जकार्ता, इंडोनेशिया में हुआ था, न कि नई दिल्ली में 10वां सत्र।
- Q3मध्यम
हाल की प्रविष्टि के बाद यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियां कितनी हैं?
व्याख्या: इस मान्यता के साथ क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियां छह हो गई हैं। पहले तीन थीं, उनमें तीन नई जुड़ने से छह होती हैं। विकल्प A (तीन) पहले की गिनती थी, जबकि B और C गलत कुल संख्याएं हैं।
- Q4मध्यम
इन तीन भारतीय पांडुलिपियों को यूनेस्को में दर्ज किए जाने का मुख्य महत्व क्या है?
व्याख्या: यूनेस्को द्वारा दर्ज किया जाना इन कृतियों के वैश्विक महत्व की प्रतीकात्मक मान्यता है, जो भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को बढ़ाती है। इससे न वित्तीय अनुदान मिलता है, न कॉपीराइट संरक्षण, और न ही पाठ्यक्रम में समावेश अनिवार्य होता है। यह मान्यता संरक्षण के प्रति जागरूकता में मदद करती है, पर मूल रूप से यह विरासत मूल्य का प्रतीक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. हाल ही में यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर में कौन-सी तीन भारतीय पांडुलिपियां जोड़ी गईं?
महाभारत, राजतरंगिणी (कल्हण, 12वीं सदी) और अर्थशास्त्र (कौटिल्य) को रजिस्टर में दर्ज किया गया है।
2. इन पांडुलिपियों को दर्ज करने का फैसला कहां और कब लिया गया?
यह फैसला मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर के 11वें सत्र में लिया गया, जो जकार्ता, इंडोनेशिया में हुआ।
3. इन पांडुलिपियों के नामांकन दस्तावेज़ किस भारतीय संस्था ने तैयार किए?
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने तीनों कृतियों के नामांकन दस्तावेज़ तैयार किए।
4. यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियां अब कितनी हैं?
इस जोड़ के बाद इस रजिस्टर में भारत की कुल छह प्रविष्टियां हो गई हैं।

