प्रिलिम्स के लिए: नेसेट, भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी, चाबहार बंदरगाह, इजरायल की संसद, चुनाव की तारीख, नेतन्याहू के गठबंधन की सीटें, आइजेनकोट के गठबंधन की सीटें, अरब पार्टियों की सीटें
मेन्स के लिए: संस्थागत साझेदारी, रक्षा तकनीक सहयोग, पश्चिम एशिया की भू-राजनीति
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें 120 सीटें हैं।
- इजरायल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत चाहिए।
- गादी आइजेनकोट इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं।
- इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग हैं।
- फरवरी 2026 में भारत-इजरायल संबंधों को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा मिला।
चर्चा में क्यों?
इजरायल के अक्टूबर 2026 के चुनाव में त्रिशंकु संसद बनी, और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट सरकार बनाने के सबसे प्रमुख दावेदार बनकर उभरे। भारतीय परीक्षाओं के लिहाज़ से मुख्य सवाल यह है कि फरवरी 2026 में 'शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी' तक उन्नत हुए भारत-इजरायल रणनीतिक संबंध नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद टिकेंगे या नहीं। जवाब है हां: रक्षा, तकनीक, कृषि और व्यापार में यह संबंध अब संस्थागत रूप ले चुका है, हालांकि सहयोग का अंदाज़ और गति बदल सकती है।
सारांश
- इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 के आम चुनाव में नेसेट (120 सीटें) त्रिशंकु रही। नेतन्याहू के लिकुड के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, आइजेनकोट के विपक्षी गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें।
- 5 नवंबर को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने परामर्श पूरा किया: 67 सांसदों ने आइजेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने की सिफारिश की, जबकि 46 ने नेतन्याहू का समर्थन किया। राष्ट्रपति 8 नवंबर को किसी उम्मीदवार को आमंत्रित करेंगे, जिसके पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन होंगे (जरूरत पड़ने पर 14 दिन बढ़ाए जा सकते हैं)।
- फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान भारत-इजरायल संबंधों को 'शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा मिला। इसमें AI, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, रक्षा, कृषि और जल प्रबंधन शामिल हैं।
मुख्य बातें
अक्टूबर 2026 के चुनाव के बाद त्रिशंकु नेसेट
किसी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें नहीं मिलीं। नेतन्याहू के गठबंधन को 53, आइजेनकोट के गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलीं, जो निर्णायक भूमिका में हैं।
भारत-इजरायल संबंधों का संस्थागत रूप
फरवरी 2026 में उन्नत हुआ यह संबंध रक्षा, AI, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि और जल प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों के समझौतों पर टिका है, केवल व्यक्तिगत तालमेल पर नहीं।
आइजेनकोट का सुरक्षा रुख
2015-2019 तक सेना प्रमुख रहे और 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद युद्ध कैबिनेट के सदस्य रहे आइजेनकोट हमास और ईरान के मामले में सख्त रुख रखते हैं, लेकिन शासन, जवाबदेही और अनिवार्य सैन्य सेवा की नीति पर नेतन्याहू से अलग हैं।
पृष्ठभूमि
इजरायल में 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान और ईरान के संघर्षों के बाद 27 अक्टूबर 2026 को पहला आम चुनाव हुआ। नेसेट में 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए 61 चाहिए। चुनाव में त्रिशंकु संसद बनी: नेतन्याहू के लिकुड के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें, आइजेनकोट के विपक्षी गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें मिलीं। 5 नवंबर को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के परामर्श में 67 सांसदों ने आइजेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने और 46 ने नेतन्याहू का समर्थन करने की सिफारिश की। राष्ट्रपति 8 नवंबर को किसी उम्मीदवार को आमंत्रित करेंगे, जिसे सरकार बनाने के लिए 28 दिन मिलेंगे (14 दिन बढ़ाए जा सकते हैं)।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव: भारत-इजरायल संबंधों पर असर
फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत-इजरायल संबंध 'शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी' तक उन्नत हुए। इस ढांचे में AI, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि, जल प्रबंधन और रक्षा शामिल हैं। नवंबर 2025 में रक्षा सहयोग का एक बड़ा समझौता हुआ था और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत जारी है। ये संस्थागत समझौते किसी एक नेता से बड़े हैं। 2015-2019 तक सेना प्रमुख रहे आइजेनकोट के 41 वर्षों के सैन्य अनुभव से रक्षा सहयोग की उनकी समझ गहरी है। आंतरिक शासन सुधार, समान सैन्य सेवा और जवाबदेही पर उनका ज़ोर यह संकेत नहीं देता कि वे हमास या ईरान पर नरम होंगे; वे हमास के सैन्य ढांचे को खत्म करने और ईरानी खतरे का मुकाबला करने के समर्थक हैं, और अलग फिलिस्तीनी राष्ट्र के विरोधी हैं। इसलिए भारत के साथ मूल रणनीतिक तालमेल कमजोर होने की संभावना कम है, हालांकि कुछ परियोजनाओं की गति बदल सकती है।
आगे की राह
आगे क्या होगा: राष्ट्रपति हर्जोग 8 नवंबर को उम्मीदवार को आमंत्रित करेंगे, और चुने गए नेता के पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन (14 दिन तक बढ़ाए जा सकते हैं) होंगे। आइजेनकोट के सामने अरब पार्टियों का समर्थन जुटाने और अपने गठबंधन के भीतर के विरोध को संभालने की चुनौती है। भारत के लिए यह देखना अहम होगा कि नई सरकार ईरान संबंधों और गाजा संघर्ष को कैसे संभालती है, क्योंकि किसी भी तनाव बढ़ने का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा (खाड़ी से कच्चे तेल का आयात) और चाबहार बंदरगाह जैसी रणनीतिक परियोजनाओं पर पड़ सकता है।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- नेसेट
- इजरायल की एकसदनीय राष्ट्रीय विधायिका, जिसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व से चुने गए 120 सदस्य होते हैं।
- भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी
- रक्षा, कृषि, तकनीक और आतंकवाद-रोधी सहयोग को समेटने वाला बहुआयामी संबंध, जिसे 2026 में औपचारिक रूप से 'शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिया गया।
- चाबहार बंदरगाह
- ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत का रणनीतिक बंदरगाह, जिसे भारत ने पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए विकसित किया।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस डेटा पर ध्यान दें: इजरायल की नेसेट में 120 सीटें हैं; सरकार बनाने के लिए बहुमत 61 सीटों का है।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: नेसेट इजरायल की संसद है; राष्ट्रपति इसाक हर्जोग हैं।
यह गलती न करें!
परीक्षक पूछ सकते हैं कि भारत-इजरायल साझेदारी का उन्नयन प्रधानमंत्री मोदी की 2026 की यात्रा के दौरान हुआ (सही) या नेतन्याहू की भारत यात्रा के दौरान (गलत)। वे 'शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी' की जगह सामान्य 'रणनीतिक साझेदारी' लिखकर सटीक नाम की परख भी कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- संस्थागत साझेदारी, रक्षा तकनीक सहयोग, पश्चिम एशिया की भू-राजनीति
कहीं अटके? एक टैप में समझें
इजरायल में अक्टूबर 2026 में चुनाव हुआ, लेकिन किसी भी पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलीं। मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मुख्य चुनौती देने वाले गादी आइजेनकोट, दोनों गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आइजेनकोट पूर्व सेना प्रमुख हैं। भारत के लिए यह मायने रखता है क्योंकि रक्षा और तकनीक में भारत और इजरायल करीबी साझेदार बन चुके हैं। लेकिन उनका संबंध अब कई हस्ताक्षरित समझौतों पर आधारित है, केवल नेताओं की व्यक्तिगत दोस्ती पर नहीं, इसलिए नेता बदलने पर भी इसके जारी रहने की संभावना है।
- इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें 120 सीटें हैं।
- इजरायल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत चाहिए।
- गादी आइजेनकोट इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं।
- इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग हैं।
- फरवरी 2026 में भारत-इजरायल संबंधों को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा मिला।
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: भारत और पश्चिम एशिया
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: भारत-इजरायल संबंध
जुड़ी अवधारणाएँ: नेसेट, भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी, चाबहार बंदरगाह
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
इजरायल की संसद का नाम क्या है?
व्याख्या: इजरायल की एकसदनीय संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व से चुने गए 120 सदस्य होते हैं। 'मजलिस' ईरान और कुछ अरब देशों में प्रयोग होता है; 'डाइट' जापान की संसद है; 'कांग्रेस' अमेरिका की विधायिका है।
- Q2कठिन
इजरायल की हालिया राजनीतिक घटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.27 अक्टूबर 2026 के आम चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू के लिकुड के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला।
- 2.गादी आइजेनकोट इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख हैं और 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद युद्ध कैबिनेट में रहे।
- 3.राष्ट्रपति इसाक हर्जोग 8 नवंबर 2026 को सरकार बनाने के लिए किसी उम्मीदवार को आमंत्रित करेंगे।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है, क्योंकि चुनाव से त्रिशंकु संसद बनी: नेतन्याहू के गठबंधन को 53, आइजेनकोट के गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलीं, जबकि बहुमत के लिए 61 चाहिए। कथन 2 सही है: आइजेनकोट 2015-2019 तक सेना प्रमुख थे और 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद युद्ध कैबिनेट में शामिल हुए। कथन 3 सही है: राष्ट्रपति हर्जोग 8 नवंबर 2026 को उम्मीदवार को आमंत्रित करेंगे।
- Q3मध्यम
इजरायल की नेसेट में सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें चाहिए?
व्याख्या: नेसेट में 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का साधारण बहुमत चाहिए। 60 सीटें बराबरी होती, जबकि 75 और 80 ऐसी ऊंची सीमाएं हैं जो इजरायली कानून में ज़रूरी नहीं हैं।
- Q4मध्यम
गादी आइजेनकोट के इजरायल के प्रधानमंत्री बनने का भारत-इजरायल संबंधों पर सबसे संभावित असर क्या होगा?
व्याख्या: भारत-इजरायल संबंध 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' तक उन्नत हुए हैं, जिसमें रक्षा, AI, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, कृषि और जल प्रबंधन के समझौते हैं। ये संस्थागत ढांचे किसी एक नेता से बड़े हैं। आइजेनकोट की सैन्य पृष्ठभूमि रक्षा सहयोग को और गहरा भी कर सकती है। विकल्प C और D अतिवादी हैं और समाचार से समर्थित नहीं हैं। विकल्प A संबंधों की संस्थागत गहराई को कम आंकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. गादी आइजेनकोट कौन हैं?
गादी आइजेनकोट 2015-2019 तक इजरायल के सेना प्रमुख रहे और याशार पार्टी के नेता हैं। 27 अक्टूबर 2026 के चुनाव में त्रिशंकु संसद बनने के बाद वे इजरायल के प्रधानमंत्री बनने के सबसे प्रमुख दावेदार हैं।
2. नेसेट क्या है?
नेसेट इजरायल की एकसदनीय राष्ट्रीय संसद है, जिसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व से चुने गए 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत चाहिए।
3. इजरायल में नेतृत्व परिवर्तन से भारत-इजरायल संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
भारत-इजरायल संबंध अब 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' के रूप में रक्षा, तकनीक, कृषि और व्यापार में संस्थागत हो चुके हैं। नेतृत्व परिवर्तन से इन समझौतों के बाधित होने की संभावना कम है, हालांकि सहयोग की गति बदल सकती है।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
