विज्ञान एवं तकनीक

जयपुर डिस्कॉम ने 1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर वाले पावर ग्रिड के लिए AI-आधारित डिजिटल ट्विन शुरू किया

7 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 25 / 59

प्रिलिम्स के लिए: डिजिटल ट्विन, AT&C लॉस, जियो-टैगिंग, जयपुर डिस्कॉम, लागू करने वाली संस्था, इस्तेमाल की गई तकनीक, कवर किया गया नेटवर्क, मुख्य विशेषताएं

मेन्स के लिए: स्मार्ट ग्रिड, शासन में AI, AT&C लॉस में कमी, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, ऊर्जा दक्षता

स्रोत:Dainik BhaskarDainik Bhaskar

चर्चा में क्यों?

जयपुर डिस्कॉम ने अपने बिजली नेटवर्क का AI-आधारित डिजिटल ट्विन बनाया है, जिसमें जियो-टैगिंग और यूनिक आईडी के ज़रिए 1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर की मैपिंग की गई है।

सारांश

  • जयपुर डिस्कॉम ने अपने बिजली वितरण नेटवर्क का AI-आधारित डिजिटल ट्विन (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित डिजिटल प्रतिरूप) शुरू किया है।
  • इस डिजिटल ट्विन में 1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर के साथ पोल और केबल भी शामिल हैं, और हर संपत्ति को जियो-टैगिंग तथा GPS से जुड़ी यूनिक आईडी दी गई है।
  • इसके मुख्य फायदों में रियल-टाइम लोड और वोल्टेज की निगरानी, ट्रांसफॉर्मर खराब होने से पहले प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस अलर्ट, फॉल्ट का जल्दी पता लगाना, और बिजली चोरी व AT&C लॉस में कमी शामिल हैं।

मुख्य बातें

  • पावर ग्रिड के लिए डिजिटल ट्विन

    जयपुर डिस्कॉम ने अपने बिजली नेटवर्क की एक लाइव डिजिटल प्रतिकृति बनाई है, जिसमें 1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर, पोल और केबल शामिल हैं और जिसे कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा जा सकता है।

  • प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के लिए AI

    AI एल्गोरिदम रियल-टाइम डेटा का विश्लेषण करके ट्रांसफॉर्मर के ज़्यादा गर्म होने और खराब होने का अनुमान लगाते हैं, ताकि बिजली गुल होने से पहले ही कार्रवाई हो सके।

  • चोरी और नुकसान पर अंकुश

    इस सिस्टम से फॉल्ट की सटीक लोकेशन पता चलती है और लाइन लोड पर नज़र रहती है, जिससे बिजली चोरी और एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) लॉस घटाने में मदद मिलती है।

पृष्ठभूमि

भारत का बिजली वितरण सेक्टर लंबे समय से उच्च AT&C लॉस की समस्या से जूझ रहा है, जो चोरी, पायलेजी और अक्षमता के कारण कई राज्यों में 15-20% से भी ज़्यादा है। पारंपरिक मैन्युअल जांच और घटना के बाद की मरम्मत से लंबे समय तक आउटेज और राजस्व का नुकसान होता है। संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) और राष्ट्रीय स्मार्ट मीटर कार्यक्रम के तहत वितरण नेटवर्क का डिजिटलीकरण एक प्रमुख लक्ष्य है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

जयपुर डिस्कॉम का AI-आधारित डिजिटल ट्विन स्मार्ट ग्रिड की दिशा में एक बड़ा कदम है। हर ट्रांसफॉर्मर, पोल और मीटर को GPS से जुड़ी यूनिक आईडी के साथ जियो-टैग करने से कंट्रोल रूम से रियल-टाइम ऑपरेशनल विज़िबिलिटी मिलती है। AI से प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस ट्रांसफॉर्मर खराब होने से पहले ही संकेत दे सकता है, जिससे जबरन आउटेज घटेंगे और खासकर किसानों व घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भरोसेमंद बिजली मिलेगी। फॉल्ट की तेज़ पहचान और लोकेशन से डाउनटाइम घटेगा और लाइन लॉस कम होगा, जिससे डिस्कॉम की वित्तीय सेहत पर सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा।

आगे की राह

यदि यह मॉडल सफल रहा, तो RDSS ढांचे के तहत राजस्थान और देश की अन्य डिस्कॉम इसे अपना सकती हैं। स्मार्ट मीटर और सौर उत्पादन की निगरानी से जुड़ने पर ग्रिड की दक्षता और बढ़ेगी। सरकार इस डेटा का इस्तेमाल मांग के बेहतर पूर्वानुमान और टैरिफ के तर्कसंगत निर्धारण के लिए भी कर सकती है।

राजस्थान से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

डिजिटल ट्विन
किसी भौतिक संपत्ति, प्रणाली या प्रक्रिया की आभासी प्रतिकृति, जिसे रियल-टाइम डेटा से अपडेट किया जाता है और सिमुलेशन, निगरानी व विश्लेषण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
AT&C लॉस
बिजली वितरण में कुल तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान, जिसमें संचरण में बर्बाद ऊर्जा (तकनीकी) और चोरी या बिलिंग की अक्षमता से हुआ राजस्व नुकसान (वाणिज्यिक) शामिल है।
जियो-टैगिंग
बिजली के पोल और ट्रांसफॉर्मर जैसी विभिन्न संपत्तियों में भौगोलिक पहचान की जानकारी (अक्षांश और देशांतर) जोड़ने की प्रक्रिया।
जयपुर डिस्कॉम
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL), राजस्थान के जयपुर क्षेत्र में बिजली वितरण करने वाली सरकारी कंपनी।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: जयपुर डिस्कॉम के डिजिटल ट्विन में मैप किए गए 1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: जयपुर डिस्कॉम (जयपुर विद्युत वितरण निगम)

यह गलती न करें!

प्रश्नकर्ता 'डिजिटल ट्विन' की जगह 'स्मार्ट मीटर' या 'SCADA' लिख सकते हैं, या यह दावा कर सकते हैं कि परियोजना जयपुर डिस्कॉम के क्षेत्र की जगह पूरे राजस्थान को कवर करती है। वे 'प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस' को 'रिएक्टिव मेंटेनेंस' के साथ भी भ्रमित कर सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • स्मार्ट ग्रिड, शासन में AI, AT&C लॉस में कमी, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, ऊर्जा दक्षता

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर को कवर करने वाली AI-आधारित डिजिटल ट्विन परियोजना किस सरकारी बिजली वितरण कंपनी ने शुरू की?

  2. Q2कठिन

    जयपुर डिस्कॉम द्वारा शुरू की गई AI-आधारित डिजिटल ट्विन परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.डिजिटल ट्विन में पोल और केबल के साथ 1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर शामिल हैं।
    2. 2.नेटवर्क संपत्तियों की मैपिंग के लिए इस सिस्टम में जियो-टैगिंग और यूनिक आईडी का उपयोग होता है।
    3. 3.इस परियोजना का उद्देश्य ग्रिड डेटा तक आसान पहुंच देकर बिजली चोरी बढ़ाना है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    जयपुर डिस्कॉम द्वारा शुरू किए गए AI-आधारित डिजिटल ट्विन नेटवर्क में कितने ट्रांसफॉर्मर शामिल हैं?

  4. Q4मध्यम

    जयपुर डिस्कॉम के डिजिटल ट्विन प्रोजेक्ट में AI-आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. जयपुर डिस्कॉम द्वारा शुरू की गई AI-आधारित डिजिटल ट्विन परियोजना क्या है?

यह बिजली वितरण नेटवर्क की एक डिजिटल प्रतिकृति है, जिसमें 1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर, पोल और केबल शामिल हैं, और जो रियल-टाइम निगरानी व प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के लिए AI का इस्तेमाल करती है।

2. जयपुर डिस्कॉम के डिजिटल ट्विन में कितने ट्रांसफॉर्मर शामिल हैं?

डिजिटल ट्विन में 1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर शामिल हैं।

3. बिजली वितरण के लिए डिजिटल ट्विन के मुख्य फायदे क्या हैं?

फायदों में बिजली चोरी में कमी, AT&C लॉस में कमी, फॉल्ट की तेज़ पहचान, आउटेज रोकने के लिए प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और उपभोक्ताओं के लिए बेहतर वोल्टेज गुणवत्ता शामिल हैं।

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