पर्यावरण

सर्वोच्च न्यायालय ने अगस्त्यमलाई में अस्थायी और गैर-निवासी रेशम कपास उत्पादकों को वन अधिकार अधिनियम से सुरक्षा के दायरे से बाहर रखा

7 नवंबर 20263 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 1 / 23

प्रिलिम्स के लिए: अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (FRA अधिनियम), ग्राम सभा, केंद्रीय सशक्त समिति (CEC), गौण वन उपज (MFP), मामले का नाम, न्यायालय, प्रश्नगत अधिनियम, बाहर रखी गई श्रेणियां

मेन्स के लिए: वन अधिकार अधिनियम, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, व्यावसायिक फसल बनाम गौण वन उपज, न्यायिक निगरानी, विशेष समिति

स्रोत:The HinduThe Hindu

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि अगस्त्यमलाई जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में अस्थायी और गैर-निवासी रेशम कपास उत्पादक वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के तहत सुरक्षा के पात्र नहीं हैं। दावों की निगरानी भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली एक विशेष समिति करेगी। न्यायालय ने रेशम कपास को 'गौण वन उपज' के रूप में वर्गीकृत किए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह एक व्यावसायिक फसल है, जिससे वनों का विनाश हो रहा है।

सारांश

  • सर्वोच्च न्यायालय ने अगस्त्यमलाई में श्रेणी II (अस्थायी निवासी, 232 व्यक्ति) और श्रेणी III (वन सीमा के बाहर, 2,867.70 हेक्टेयर पर 2,767 व्यक्ति) के रेशम कपास उत्पादकों को FRA अधिनियम की सुरक्षा से बाहर रखा है।
  • वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत दावों के शीघ्र निपटारे की निगरानी के लिए भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने CEC को निर्देश दिया है कि वह राय दे कि रेशम कपास 'गौण वन उपज' है या नहीं; न्यायालय ने प्रथम दृष्टया इसे प्राकृतिक वन उपज के विपरीत एक व्यावसायिक फसल माना है।

मुख्य बातें

  • FRA पात्रता पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

    अगस्त्यमलाई के अस्थायी और गैर-निवासी रेशम कपास उत्पादक वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत वनवासी अधिकारों का दावा नहीं कर सकते।

  • रेशम कपास: वन उपज या व्यावसायिक फसल?

    सर्वोच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया राज्य के ऐतिहासिक खेती के दावे को खारिज किया और रेशम कपास को एक प्रोत्साहित व्यावसायिक फसल कहा, जो वनों को नष्ट कर रही है।

  • भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश गवई के अधीन विशेष समिति

    भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली एक विशेष समिति पांच महीनों के भीतर FRA अधिनियम के तहत दावों के निपटारे की निगरानी करेगी।

पृष्ठभूमि

तमिलनाडु के अगस्त्यमलाई जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और व्यावसायिक रेशम कपास की खेती को लेकर न्यायिक निगरानी चल रही है। मई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने संरचित बेदखली, पुनर्वास और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन का आदेश दिया था। ताजा आदेश राज्य के उस हलफनामे से उपजा है, जिसमें उत्पादकों को श्रेणियों में बांटा गया है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

श्रेणी II (अस्थायी निवासी) और श्रेणी III (खेती संभालने वाले गैर-निवासी) को बाहर रखकर सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि FRA अधिनियम केवल वास्तविक परंपरागत वनवासियों की रक्षा करता है। रेशम कपास को गौण वन उपज नहीं, बल्कि व्यावसायिक फसल मानने का न्यायालय का प्रथम दृष्टया दृष्टिकोण अन्य वन क्षेत्रों के लिए मिसाल बन सकता है। वन भूमि के 71.7% हिस्से (3,637.83.2 हेक्टेयर) पर रेशम कपास होना व्यावसायिक दोहन के पैमाने को दर्शाता है।

आगे की राह

तमिलनाडु सरकार के पास शेष ग्राम सभाओं के गठन को पूरा करने के लिए 30 दिन हैं। दावों का निपटारा पांच महीनों में पूरा होना है। रेशम कपास को गौण वन उपज के रूप में वर्गीकृत करने पर CEC राय देगी। भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश गवई के अधीन विशेष समिति दावा प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करेगी।

अगस्त्यमलाई में रेशम कपास उत्पादकों की श्रेणियां

श्रेणीविवरणव्यक्तियों की संख्याभूमि (हेक्टेयर)
श्रेणी IIIवन सीमा के बाहर (गैर-निवासी)2,7672,867.70
कुल बाहर रखे गएश्रेणी II + III2,9992,867.70+

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (FRA अधिनियम)
इसे वन अधिकार अधिनियम भी कहते हैं। यह पीढ़ियों से वनों में रह रहे अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के वन अधिकारों को मान्यता देता और उन्हें प्रदान करता है, तथा वनों और वन्यजीवों के संरक्षण का प्रावधान करता है।
ग्राम सभा
किसी गांव के सभी वयस्क सदस्यों से बनी ग्राम विधानसभा। FRA अधिनियम के तहत व्यक्तिगत या सामुदायिक वन अधिकारों की प्रकृति और सीमा तय करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए ग्राम सभा सक्षम प्राधिकरण है।
केंद्रीय सशक्त समिति (CEC)
भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एक समिति, जो वन और पर्यावरण से जुड़े आदेशों के पालन की निगरानी करती है, विशेषकर वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के मामलों में।
गौण वन उपज (MFP)
बांस, बेंत, औषधीय पौधे, शहद, गोंद और वनों से एकत्र की जाने वाली अन्य प्राकृतिक गैर-इमारती वन उपज। FRA अधिनियम MFP को एकत्र करने, उपयोग करने और बेचने के अधिकार को मान्यता देता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: श्रेणी II बाहर: 232 अस्थायी निवासी उत्पादक; श्रेणी III बाहर: 2,867.70 हेक्टेयर पर 2,767 व्यक्ति
  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: कुल वन भूमि: 5,072.64.3 हेक्टेयर; रेशम कपास के अधीन भूमि: 3,637.83.2 हेक्टेयर
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (पीठ: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता)
  • इस विधिक बिंदु पर ध्यान दें: अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (FRA अधिनियम)

यह गलती न करें!

परीक्षार्थी 'अस्थायी निवासियों' को FRA अधिनियम के 'परंपरागत वन निवासियों' से भ्रमित कर सकते हैं, या यह मान सकते हैं कि रेशम कपास 'गौण वन उपज' है (सर्वोच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया इसे खारिज किया है)। साथ ही, विशेष समिति (जिसकी अध्यक्षता भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई कर रहे हैं) को CEC या ग्राम सभा के साथ न मिलाएं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • वन अधिकार अधिनियम, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, व्यावसायिक फसल बनाम गौण वन उपज, न्यायिक निगरानी, विशेष समिति

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    भारत में अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के वन अधिकारों की मान्यता मुख्यतः किस अधिनियम द्वारा शासित होती है?

  2. Q2कठिन

    सर्वोच्च न्यायालय के अगस्त्यमलाई संरक्षण मामले के आदेश के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.सर्वोच्च न्यायालय ने अस्थायी निवासी रेशम कपास उत्पादकों (श्रेणी II) को FRA अधिनियम की सुरक्षा से बाहर रखा है।
    2. 2.दावों की निगरानी के लिए भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई है।
    3. 3.न्यायालय ने केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) को निर्देश दिया है कि वह राय दे कि रेशम कपास गौण वन उपज की श्रेणी में आती है या नहीं।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    तमिलनाडु सरकार के हलफनामे के अनुसार, श्रेणी III (वन सीमा के बाहर) में वर्गीकृत कितने व्यक्ति रेशम कपास की खेती संभाल रहे हैं?

  4. Q4मध्यम

    अगस्त्यमलाई जैवमंडल में अस्थायी और गैर-निवासी रेशम कपास उत्पादकों को FRA अधिनियम की सुरक्षा से बाहर रखने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सर्वोच्च न्यायालय ने रेशम कपास उत्पादकों की किन श्रेणियों को FRA अधिनियम की सुरक्षा से बाहर रखा?

न्यायालय ने श्रेणी II (अस्थायी निवासी, 232 व्यक्ति) और श्रेणी III (वन सीमा के बाहर रहने वाले, 2,867.70 हेक्टेयर पर 2,767 व्यक्ति) को वन-निवासी अनुसूचित जनजाति या अन्य परंपरागत वन निवासी मानने से बाहर रखा।

2. अगस्त्यमलाई मामले के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेष समिति की अध्यक्षता कौन कर रहे हैं?

विशेष समिति की अध्यक्षता भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई कर रहे हैं। वे FRA अधिनियम के तहत दावों के शीघ्र निपटारे की निगरानी करेंगे।

3. अगस्त्यमलाई जैवमंडल में रेशम कपास की खेती पर सर्वोच्च न्यायालय का क्या दृष्टिकोण है?

न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि रेशम कपास एक प्रोत्साहित व्यावसायिक फसल है, प्राकृतिक रूप से उगने वाली गौण वन उपज नहीं, और इसकी बड़े पैमाने पर खेती वनों को नष्ट कर रही है।

4. अगस्त्यमलाई में कितनी वन भूमि पर रेशम कपास की खेती होती है?

5,072.64.3 हेक्टेयर वन भूमि में से 3,637.83.2 हेक्टेयर (लगभग 71.7%) पर रेशम कपास की खेती होती है।

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