प्रिलिम्स के लिए: अनुपूरक बजट, अध्यादेश, विनियोग विधेयक, सत्र का प्रकार, आरंभ तिथि, समाप्ति तिथि, अवधि, मुख्य कार्यसूची
मेन्स के लिए: अनुपूरक बजट, वित्तीय निगरानी, विधायी मंज़ूरी, अध्यादेश का पटल पर रखा जाना
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- बिहार शीतकालीन सत्र: 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026।
- वित्त वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट 30 नवंबर को पेश होगा।
- सत्र की अवधि 5 दिन है।
- बिहार के राज्यपाल: सैयद अता हसनैन।
- बिहार के मुख्यमंत्री: सम्राट चौधरी।
चर्चा में क्यों?
बिहार सरकार 30 नवंबर 2026 से शुरू हो रहे राज्य विधानमंडल के 5 दिन के शीतकालीन सत्र में वित्त वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट पेश करेगी। सत्र में राज्यपाल द्वारा स्वीकृत अध्यादेश भी सदन पटल पर रखे जाएंगे, और सरकारी विधेयकों व गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा होगी।
सारांश
- बिहार विधानमंडल (विधान सभा और विधान परिषद) का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 तक चलेगा।
- सम्राट चौधरी की सरकार 30 नवंबर को, यानी पहले दिन, वित्त वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट सदन में रखेगी।
- राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सत्र की तारीखों के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है।
मुख्य बातें
शीतकालीन सत्र की तारीखें तय
राज्यपाल सैयद अता हसनैन की मंज़ूरी से बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 तक चलेगा।
अध्यादेश और विधेयक
राज्यपाल द्वारा स्वीकृत अध्यादेश सदन के सामने रखे जाएंगे, और सत्र में सरकारी विधेयकों पर कार्रवाई होगी।
पृष्ठभूमि
जब सरकार को किसी वित्तीय वर्ष के लिए मंज़ूर मूल बजट से अधिक धन की ज़रूरत होती है, तब अनुपूरक बजट पेश किया जाता है। बिहार सरकार वित्त वर्ष 2026-27 का मुख्य बजट पहले ही पेश कर चुकी है; यह दूसरा अनुपूरक बजट बताता है कि अतिरिक्त खर्च की ज़रूरत है, जो संभवतः नई योजनाओं, बढ़े हुए आवंटन या अप्रत्याशित खर्च के लिए हो सकती है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
5 दिन का सत्र अपेक्षाकृत छोटा है, जो एक केंद्रित विधायी एजेंडा दिखाता है। दूसरे अनुपूरक बजट को पेश करने से सरकार अतिरिक्त खर्च के लिए विधायी मंज़ूरी मांग सकती है, जिससे वित्तीय अनुशासन और संसदीय निगरानी सुनिश्चित होती है। विधानमंडल के सत्र में न होने के दौरान की गई कार्यपालिका की कार्रवाइयों को मान्य ठहराने के लिए राज्यपाल द्वारा स्वीकृत अध्यादेशों को सदन में रखना एक नियमित संवैधानिक आवश्यकता है।
आगे की राह
अनुपूरक बजट पर सदन में चर्चा होगी और मतदान होगा। चर्चा के बाद उससे जुड़ा विनियोग विधेयक पेश किया जाएगा। सत्र का समापन 4 दिसंबर को गैर-सरकारी संकल्पों के साथ होगा। अनुपूरक बजट पारित होने से सरकार को वित्त वर्ष के शेष भाग के लिए अतिरिक्त खर्च करने की अनुमति मिल जाएगी।
बिहार से जुड़ाव
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पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- अनुपूरक बजट
- वित्तीय वर्ष के दौरान पेश किया जाने वाला बजट, जिसके ज़रिए मूल वार्षिक बजट में शामिल न किए गए अतिरिक्त खर्च के लिए संसद या राज्य विधानमंडल की मंज़ूरी ली जाती है।
- अध्यादेश
- जब विधानमंडल सत्र में न हो, तब राष्ट्रपति (केंद्र में) या राज्यपाल (राज्य में) द्वारा जारी किया गया कानून। इसका प्रभाव अधिनियम जैसा ही होता है, लेकिन विधानमंडल के फिर से बैठने के छह सप्ताह के भीतर उसकी मंज़ूरी ज़रूरी है।
- विनियोग विधेयक
- ऐसा विधेयक जो स्वीकृत खर्च के लिए संचित निधि से धन निकालने की सरकार को अनुमति देता है। यह अनुदान की मांगों पर मतदान के बाद पेश किया जाता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस आंकड़े पर ध्यान दें: बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र: 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 (5 दिन)
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: बिहार विधान सभा सचिवालय
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: अनुच्छेद 213 (राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति) से संबंधित संदर्भ
यह गलती न करें!
छात्र 'अनुपूरक बजट' को 'संशोधित अनुमान' या 'लेखानुदान' से भ्रमित कर सकते हैं। अनुपूरक बजट नया अतिरिक्त खर्च जोड़ता है, जबकि संशोधित अनुमान मौजूदा आवंटनों का पुनः आकलन है। साथ ही, यह शीतकालीन सत्र है, बजट सत्र या मानसून सत्र नहीं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- अनुपूरक बजट, वित्तीय निगरानी, विधायी मंज़ूरी, अध्यादेश का पटल पर रखा जाना
कहीं अटके? एक टैप में समझें
बिहार सरकार 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 तक राज्य विधानमंडल का शीतकालीन सत्र आयोजित करेगी। इस सत्र में सरकार चालू वित्तीय वर्ष में अतिरिक्त खर्च की मंज़ूरी लेने के लिए दूसरा अनुपूरक बजट पेश करेगी। विधानमंडल के सत्र में न होने पर राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश भी सदन के सामने रखे जाएंगे।
- बिहार शीतकालीन सत्र: 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026।
- वित्त वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट 30 नवंबर को पेश होगा।
- सत्र की अवधि 5 दिन है।
- बिहार के राज्यपाल: सैयद अता हसनैन।
- बिहार के मुख्यमंत्री: सम्राट चौधरी।
- राजव्यवस्था: राज्य विधानमंडल
- अर्थव्यवस्था: बजट और राजकोषीय नीति
जुड़ी अवधारणाएँ: अनुपूरक बजट, अध्यादेश, विनियोग विधेयक
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
बिहार विधानमंडल का सत्र बुलाने के प्रस्ताव को कौन मंज़ूरी देता है?
व्याख्या: राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत राज्य विधानमंडल के सत्र आहूत करते हैं। मुख्यमंत्री की कैबिनेट तारीखों का प्रस्ताव देती है, लेकिन राज्यपाल औपचारिक मंज़ूरी देकर सत्र आहूत करते हैं। अध्यक्ष सदन का संचालन करते हैं, पर सत्र आहूत नहीं करते।
- Q2कठिन
बिहार के शीतकालीन सत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.सत्र 30 नवंबर 2026 को शुरू होगा और 4 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा।
- 2.वित्त वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट सत्र के आखिरी दिन पेश किया जाएगा।
- 3.राज्यपाल द्वारा स्वीकृत अध्यादेश पहले दिन सदन के सामने रखे जाएंगे।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: सत्र 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 तक चलेगा। कथन 2 गलत है: अनुपूरक बजट पहले दिन (30 नवंबर) पेश किया जाएगा, आखिरी दिन नहीं। कथन 3 सही है: राज्यपाल द्वारा स्वीकृत अध्यादेश पहले दिन पटल पर रखे जाएंगे। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
नवंबर 2026 में घोषित बिहार शीतकालीन सत्र की कुल अवधि कितनी है?
व्याख्या: बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 तक, कुल 5 दिन के लिए होगा। 3 दिन, 7 दिन और 10 दिन की अवधियाँ गलत हैं।
- Q4मध्यम
राज्य विधानमंडल में अनुपूरक बजट पेश करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: अनुपूरक बजट वित्तीय वर्ष के दौरान इसलिए पेश किया जाता है ताकि मूल बजट से अधिक खर्च के लिए विधायी मंज़ूरी मिल सके। राजकोषीय घाटा कम करना इसका उद्देश्य नहीं है; वह व्यापक राजकोषीय नीति का लक्ष्य है। वार्षिक वित्तीय विवरण मुख्य बजट होता है, और नए कर प्रस्ताव मुख्य बजट या वित्त विधेयक का हिस्सा होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. बिहार शीतकालीन सत्र 2026 कब शुरू होता है?
बिहार शीतकालीन सत्र 30 नवंबर 2026 को शुरू होता है।
2. बिहार शीतकालीन सत्र 2026 का मुख्य एजेंडा क्या है?
मुख्य एजेंडा वित्त वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट पेश करना और उसे पारित कराना है।
3. बिहार के वह राज्यपाल कौन हैं जिन्होंने सत्र की तारीखों को मंज़ूरी दी?
बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन हैं।
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मूल खबर7 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
