प्रिलिम्स के लिए: गाद जमाव / अवसादन, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), MoU (समझौता ज्ञापन), नीति में अग्रणी राज्य, बिहार से संपर्क करने वाले राज्य, किसके साथ MoU हुआ, बिहार के मुख्यमंत्री, वर्तमान संदर्भ
मेन्स के लिए: गाद प्रबंधन, नदी पुनर्जीवन, बाढ़ शमन, चक्रीय अर्थव्यवस्था (अपशिष्ट से संसाधन), अंतर-राज्यीय नीति प्रसार
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- बिहार की गाद नीति अन्य राज्यों के लिए राष्ट्रीय मॉडल बन गई है।
- उत्तर प्रदेश, ओडिशा और गुजरात ने गाद नीति का ब्यौरा मांगने के लिए बिहार से संपर्क किया है।
- बिहार सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों में नदी की गाद के उपयोग के लिए NHAI के साथ MoU किया है।
- गाद की मात्रा और निकासी का फैसला इंजीनियर-इन-चीफ के अधीन समिति करेगी।
- इस नीति का उद्देश्य जल भंडारण क्षमता बढ़ाना और बाढ़ का फैलाव घटाना है।
चर्चा में क्यों?
बिहार की गाद नीति, जिसे राज्य कैबिनेट ने मंज़ूरी दी है, अब राष्ट्रीय मॉडल बन गई है। उत्तर प्रदेश, ओडिशा और गुजरात सहित कई राज्यों ने ऐसी ही नीति लागू करने के लिए बिहार से ब्यौरा मांगा है। इस नीति के तहत नदियों, नहरों और जलाशयों की गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे, राज्य राजमार्ग, सिंचाई और बाढ़ सुरक्षा कार्यों में निर्माण के लिए किया जा सकेगा। इसका मकसद जल भंडारण क्षमता बढ़ाना और बाढ़ का फैलाव घटाना है।
सारांश
- बिहार की गाद नीति को राष्ट्रीय मॉडल के रूप में अपनाया जा रहा है; यूपी, ओडिशा और गुजरात इसे समझने के लिए बिहार के इंजीनियरों से संपर्क में हैं।
- इस नीति के तहत नदियों, नहरों और जलाशयों की गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे, राज्य राजमार्गों, सिंचाई और बाढ़ सुरक्षा कार्यों में किया जा सकेगा।
- गाद की मात्रा और निकासी का फैसला इंजीनियर-इन-चीफ के अधीन बनी समिति करेगी, जबकि निकासी की प्रक्रिया पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति नज़र रखेगी।
मुख्य बातें
बिहार की गाद नीति बनी राष्ट्रीय मॉडल
बिहार की कैबिनेट से मंज़ूर गाद नीति को यूपी, ओडिशा और गुजरात अपने राज्यों में अपनाने के लिए अध्ययन कर रहे हैं।
राजमार्गों में गाद उपयोग के लिए NHAI के साथ MoU
बिहार सरकार ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में नदी की गाद के उपयोग के लिए NHAI के साथ करार किया है।
दोहरा लाभ: जल भंडारण और बाढ़ नियंत्रण
गाद निकालने से जलस्रोतों की जलधारण क्षमता बढ़ती है और बाढ़ का फैलाव घटता है, जिससे सतही और भू-जल दोनों में सुधार होता है।
पृष्ठभूमि
बिहार की नदियों और जलाशयों में वर्षों से जमा गाद के कारण पानी रखने की क्षमता लगातार घट रही है। इससे मानसून में बाढ़ का फैलाव भी बढ़ा है। इसे देखते हुए बिहार कैबिनेट ने एक व्यापक गाद नीति को मंज़ूरी दी, जो नदियों, नहरों और जलाशयों की गाद को वैज्ञानिक ढंग से निकालने और निर्माण सहित अन्य कार्यों में उपयोग की अनुमति देती है।
आगे की राह
उत्तर प्रदेश, ओडिशा और गुजरात के इंजीनियरों से उम्मीद है कि वे नीति को ज़मीन पर समझने के लिए बिहार का दौरा करेंगे। गाद की संरचना और निकासी के पर्यावरणीय प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन अहम होगा। निकासी, परिवहन और उपयोग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया विकसित करनी होगी। इस मॉडल की सफलता सभी नदी-प्रधान राज्यों के लिए गाद प्रबंधन के राष्ट्रीय ढांचे का रास्ता खोल सकती है।
बिहार से जुड़ाव
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- गाद जमाव / अवसादन
- नदियों, झीलों और जलाशयों में गाद (बारीक रेत, मिट्टी या अवसाद) का जमाव, जिससे उनकी जल धारण क्षमता घटती है और बाढ़ आती है।
- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
- सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार है।
- MoU (समझौता ज्ञापन)
- दो या अधिक पक्षों के बीच एक औपचारिक समझौता, जिसमें आपसी समझ की शर्तें और ब्यौरे दर्ज होते हैं। यह आम तौर पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता, पर इरादों की सहमति दिखाता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: बिहार की गाद नीति को मॉडल माना गया; यूपी, ओडिशा, गुजरात ने बिहार से संपर्क किया
- इन नोडल निकायों पर ध्यान दें: बिहार राज्य सरकार; NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण)
- इन कानूनी बिंदुओं पर ध्यान दें: राज्य कैबिनेट की मंज़ूरी; NHAI के साथ MoU
यह गलती न करें!
छात्र बिहार की गाद नीति को केंद्र सरकार की 'राष्ट्रीय गाद नीति' या 'डिसिल्टेशन नीति' से भ्रमित कर सकते हैं। समाचार स्पष्ट बताता है कि यह राज्य स्तर की नीति है, जिसे अन्य राज्य मॉडल के रूप में अपना रहे हैं। अभी यह केंद्र सरकार की कोई पहल नहीं है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- गाद प्रबंधन, नदी पुनर्जीवन, बाढ़ शमन, चक्रीय अर्थव्यवस्था (अपशिष्ट से संसाधन), अंतर-राज्यीय नीति प्रसार
कहीं अटके? एक टैप में समझें
बिहार सरकार ने नदियों, नहरों और जलाशयों से गाद निकालने और उसे सड़क, रेलवे व अन्य निर्माण कार्यों में उपयोग करने की नीति को मंज़ूरी दी है। इससे नदियों की जल धारण क्षमता बढ़ती है, बाढ़ कम होती है और सस्ती निर्माण सामग्री मिलती है। अब उत्तर प्रदेश, ओडिशा और गुजरात भी यही नीति अपनाना चाहते हैं।
- बिहार की गाद नीति अन्य राज्यों के लिए राष्ट्रीय मॉडल बन गई है।
- उत्तर प्रदेश, ओडिशा और गुजरात ने गाद नीति का ब्यौरा मांगने के लिए बिहार से संपर्क किया है।
- बिहार सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों में नदी की गाद के उपयोग के लिए NHAI के साथ MoU किया है।
- गाद की मात्रा और निकासी का फैसला इंजीनियर-इन-चीफ के अधीन समिति करेगी।
- इस नीति का उद्देश्य जल भंडारण क्षमता बढ़ाना और बाढ़ का फैलाव घटाना है।
- शासन: राज्य नीतियां और योजनाएं
- पर्यावरण: नदी प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण
जुड़ी अवधारणाएँ: गाद जमाव / अवसादन, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), MoU (समझौता ज्ञापन)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
किस भारतीय राज्य की गाद नीति उत्तर प्रदेश, ओडिशा और गुजरात जैसे अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनी है?
व्याख्या: बिहार की कैबिनेट से मंज़ूर गाद नीति को राष्ट्रीय मॉडल के रूप में अपनाया गया है। उत्तर प्रदेश, ओडिशा और गुजरात अपने राज्यों में ऐसी ही नीति लागू करने की जानकारी के लिए बिहार के इंजीनियरों से संपर्क में हैं।
- Q2कठिन
बिहार की गाद नीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.इस नीति के तहत नदियों, नहरों और जलाशयों की गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे और बाढ़ सुरक्षा कार्यों में किया जा सकता है।
- 2.राष्ट्रीय राजमार्गों में गाद उपयोग के लिए MoU पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ हस्ताक्षर हुआ।
- 3.गाद की मात्रा और निकासी का निर्णय इंजीनियर-इन-चीफ के अधीन समिति करती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है, क्योंकि नीति NH, रेलवे, SH, सिंचाई और बाढ़ सुरक्षा कार्यों में गाद के उपयोग की अनुमति देती है। कथन 2 गलत है, क्योंकि MoU NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के साथ हुआ था, पर्यावरण मंत्रालय के साथ नहीं। कथन 3 सही है, क्योंकि गाद की मात्रा और निकासी के निर्णय की समिति की अध्यक्षता इंजीनियर-इन-चीफ करते हैं।
- Q3मध्यम
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में नदी की गाद के उपयोग के लिए बिहार सरकार ने किस संगठन के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए?
व्याख्या: बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में NHAI के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए। इस करार से राज्य के भीतर राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में बिहार की नदियों की गाद का उपयोग संभव होगा।
- Q4मध्यम
बिहार की गाद नीति का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: इस नीति का मकसद जलस्रोतों से गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाना, भू-जल पुनर्भरण में सुधार करना और बाढ़ का फैलाव घटाना है। राजस्व और रोज़गार इसके गौण लाभ हैं, जबकि रेत खनन इसका उद्देश्य नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. बिहार की गाद नीति क्या है?
बिहार की गाद नीति एक राज्य कैबिनेट द्वारा मंज़ूर ढांचा है, जिसके तहत नदियों, नहरों और जलाशयों की गाद को वैज्ञानिक ढंग से निकालकर राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे, राज्य राजमार्गों, सिंचाई और बाढ़ सुरक्षा कार्यों में उपयोग किया जा सकता है।
2. किन राज्यों ने गाद नीति की जानकारी के लिए बिहार से संपर्क किया है?
उत्तर प्रदेश, ओडिशा और गुजरात अपने राज्यों में संभावित लागू करने के लिए बिहार के इंजीनियरों से गाद नीति की जानकारी ले रहे हैं।
3. बिहार के मुख्यमंत्री कौन हैं?
सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री हैं।
4. जलस्रोतों से गाद निकालने का क्या लाभ है?
गाद निकालने से नदियों और जलाशयों की जल भंडारण क्षमता बढ़ती है, भू-जल पुनर्भरण में सुधार होता है और मानसून में बाढ़ का फैलाव घटता है।
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मूल खबर7 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
