सामाजिक मुद्दे

भारत में सीवर सफ़ाई में 859 मौतें (2014-2025), सर्वोच्च न्यायालय ने ₹30 लाख मुआवज़ा अनिवार्य किया

6 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 57 / 77

प्रिलिम्स के लिए: हाथ से मैला ढोना, राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी आयोग, कुल मौतें (2014-2025), कुल मौतें (1993-2025), ऐतिहासिक सर्वोच्च न्यायालय निर्णय (2023), लागू अधिनियम, मशीनी सफ़ाई के लिए नोडल निकाय

मेन्स के लिए: जाति-आधारित व्यावसायिक जोखिम, क्रियान्वयन की कमी, अनौपचारिक श्रम का औपचारिकीकरण, NAMSE योजना की सीमाएं, सामाजिक न्याय में सर्वोच्च न्यायालय की सक्रिय भूमिका

स्रोत:The HinduThe Hindu

चर्चा में क्यों?

कानून, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और मशीनी तकनीक के बावजूद भारत में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफ़ाई करते स्वच्छता कर्मियों की रोकी जा सकने वाली मौतें लगातार हो रही हैं। 2014 से 2025 के बीच 859 कर्मियों की जान गई। सर्वोच्च न्यायालय ने 2023 में प्रति मौत मुआवज़ा बढ़ाकर ₹30 लाख किया। यह मामला हाथ से मैला ढोने पर रोक, जाति-आधारित व्यावसायिक जोखिमों और हाथ से मैला ढोने की प्रथा के निषेध एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत कानून लागू करने में विफलता से सीधे जुड़ा है।

सारांश

  • 2014 से 2025 के बीच भारत में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफ़ाई की घटनाओं में 859 कर्मियों की मौत हुई; 2019 से 2026 के मध्य तक यह आंकड़ा 498 रहा।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने डॉ. बलराम सिंह मामले (2023) में सीवर सफ़ाई में मौत पर प्रति कर्मी मुआवज़ा ₹30 लाख किया और निर्देश दिया कि आउटसोर्स अनुबंधों में कर्मियों को सीवर में उतारने की शर्त नहीं होनी चाहिए।
  • हाथ से मैला ढोने पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013 कानूनी रूप से खतरनाक सीवर/सेप्टिक टैंक सफ़ाई को गंदे शौचालयों से हाथ से मैला उठाने से अलग मानता है।

मुख्य बातें

  • लगातार बना खतरा

    कानूनों, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और मशीनी तकनीक के बावजूद भारत में 2014-2025 के बीच सीवर सफ़ाई से 859 मौतें दर्ज हुईं, जिनमें 2019 से 2026 के मध्य तक 498 मौतें थीं।

  • सर्वोच्च न्यायालय ने ₹30 लाख मुआवज़ा अनिवार्य किया

    डॉ. बलराम सिंह (2023) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सुरक्षा उपाय मज़बूत किए और प्रति कर्मी मृत्यु मुआवज़ा ₹30 लाख किया।

  • क्रियान्वयन में कमी

    राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्य योजना (NAMSE) के लक्ष्यों और परिणामों में बड़ा अंतर है; निजी ठेकेदार और नगर निकाय बिना दस्तावेज़ वाले दिहाड़ी मज़दूरों को रखकर ज़िम्मेदारी से बच रहे हैं।

पृष्ठभूमि

भारत में सीवर सफ़ाई की मौतें लंबे समय से चला आ रहा मानवाधिकार और श्रम का मुद्दा है। हाथ से मैला ढोने पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013 सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफ़ाई पर रोक लगाने के लिए बना, जो गंदे शौचालयों से हाथ से मैला उठाने से अलग है। इसके बावजूद कमज़ोर क्रियान्वयन, अनौपचारिक भर्ती और जाति-आधारित व्यावसायिक विभाजन के कारण मौतें जारी हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक होटल के खाद्य-अपशिष्ट चैंबर की सफ़ाई करते चार कर्मियों की मौत इस संकट की निरंतरता दिखाती है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

आंकड़े चिंताजनक तस्वीर दिखाते हैं: 2014 से 2025 तक 859 मौतें, और 2019 से 2026 के मध्य तक, लगभग सात वर्षों में, 498 मौतें। राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2021-26 में 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 332 मौतें हुईं। सरकार का 2021 से यह दावा कि गंदे शौचालयों से मानव मल हाथ से साफ़ करने की प्रथा समाप्त हो गई है, भ्रामक है, क्योंकि यह खतरनाक सीवर और सेप्टिक टैंक की सफ़ाई को नज़रअंदाज़ करता है। सर्वोच्च न्यायालय ने डॉ. बलराम सिंह (2023) और सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन (2014) में बार-बार हस्तक्षेप किया है, फिर भी निजी ठेकेदार और नगर निकाय बिना दस्तावेज़ वाले दिहाड़ी मज़दूरों को रखकर ज़िम्मेदारी से बच निकलते हैं और मौतों का चक्र चलता रहता है। इन कामों में ऐतिहासिक रूप से हाशिये पर रही जातियों की अधिक उपस्थिति सामाजिक न्याय के पहलू को सामने लाती है।

आगे की राह

सीवर सफ़ाई में मौतें खत्म करने के लिए सफ़ाई कर्मियों के रोज़गार को औपचारिक बनाना, 2013 के अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को सख्ती से लागू करना, और 'किट वितरण' के दृष्टिकोण से हटकर ऐसी स्थितियां कम करना ज़रूरी है जो कर्मियों को सीवर में उतरने पर मजबूर करती हैं। राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्य योजना (NAMSE) को मापने योग्य लक्ष्यों और जवाबदेही के साथ मज़बूत करना होगा। जिन राज्यों में मौतें अधिक हैं, उन्हें मुआवज़े पर 2023 के सर्वोच्च न्यायालय आदेश का पालन करना होगा और सभी शहरों में हाथ से सीवर सफ़ाई बंद करनी होगी, केवल 2025-26 में लक्षित चार महानगरों और बेंगलुरु-हैदराबाद तक सीमित नहीं।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

हाथ से मैला ढोना
गंदे शौचालयों (सूखे शौचालयों) से मानव मल को हाथ से हटाना। बिना यांत्रिक सहायता के सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफ़ाई कानूनी और वैचारिक रूप से इससे अलग है।
राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी आयोग
एक वैधानिक निकाय, जो अधिनियम के क्रियान्वयन की निगरानी करता है, स्वच्छता कर्मियों की कार्य-स्थितियों का अध्ययन करता है और उनके कल्याण व पुनर्वास के उपाय सुझाता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: सीवर सफ़ाई में 859 मौतें (2014-2025); 498 मौतें (2019 से 2026 के मध्य तक); 1,350 मौतें (1993-2025)
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी आयोग; हाथ से मैला ढोने पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: डॉ. बलराम सिंह (2023) में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय, जिसमें प्रति मौत मुआवज़ा ₹30 लाख किया गया

यह गलती न करें!

परीक्षक 2013 के अधिनियम के गंदे शौचालयों से हाथ से मैला ढोने पर रोक को सीवर/सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफ़ाई के अलग मुद्दे के साथ भ्रमित कर सकते हैं, या मुआवज़े की राशि (₹30 लाख बनाम पहले की कम राशि) बदल सकते हैं। वे सर्वोच्च न्यायालय निर्णय के वर्ष या किसी अवधि में मौतों की सटीक संख्या के बारे में भी पूछ सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • जाति-आधारित व्यावसायिक जोखिम, क्रियान्वयन की कमी, अनौपचारिक श्रम का औपचारिकीकरण, NAMSE योजना की सीमाएं, सामाजिक न्याय में सर्वोच्च न्यायालय की सक्रिय भूमिका

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    कौन-सा अधिनियम भारत में हाथ से मैला ढोने और सीवर तथा सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफ़ाई के लिए लोगों के नियोजन पर रोक लगाता है?

  2. Q2कठिन

    भारत में सीवर सफ़ाई में मौतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.सर्वोच्च न्यायालय ने डॉ. बलराम सिंह (2023) में सीवर सफ़ाई में मौत पर मुआवज़ा प्रति कर्मी ₹30 लाख किया।
    2. 2.सरकार ने 2021 से यह बनाए रखा है कि गंदे शौचालयों से मानव मल हाथ से साफ़ करने की प्रथा समाप्त हो गई है।
    3. 3.हाथ से मैला ढोने पर रोक और पुनर्वास अधिनियम 2014 में बनाया गया था।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    समाचार में उद्धृत आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2025 के बीच भारत में सीवर सफ़ाई से कितनी मौतें दर्ज हुईं?

  4. Q4मध्यम

    कानूनी प्रतिबंध और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद भारत में सीवर सफ़ाई में मौतें जारी रहने का मुख्य कारण क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 2014 और 2025 के बीच भारत में सीवर सफ़ाई में कितनी मौतें हुईं?

संसद और राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2025 के बीच सीवर और सेप्टिक टैंक की सफ़ाई की घटनाओं में 859 कर्मियों की मौत हुई।

2. 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने सीवर सफ़ाई में मौतों के लिए कितना मुआवज़ा अनिवार्य किया?

डॉ. बलराम सिंह (2023) के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने सीवर सफ़ाई में मौत पर प्रति कर्मी मुआवज़ा ₹30 लाख किया।

3. कौन-सा अधिनियम भारत में हाथ से मैला ढोने और खतरनाक सीवर सफ़ाई पर रोक लगाता है?

हाथ से मैला ढोने पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013 गंदे शौचालयों से हाथ से मैला ढोने और सीवर तथा सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफ़ाई, दोनों पर रोक लगाता है।

4. राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्य योजना (NAMSE) क्या है?

NAMSE सरकारी योजना है, जिसका लक्ष्य सीवर और सेप्टिक टैंक की मशीनी सफ़ाई को बढ़ावा देना है ताकि कर्मियों का हाथ से प्रवेश खत्म हो। इसे नगर निकाय लागू करते हैं।

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