प्रिलिम्स के लिए: मैटेरियोविजिलेंस, RTI अधिनियम, 2005 - धारा 8(1)(d), केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC), कुल SAEs (2020-2025), 2025 में SAEs, MvPI के लिए नोडल निकाय, कार्रवाई के लिए नियामक निकाय
मेन्स के लिए: मैटेरियोविजिलेंस, नियामक पारदर्शिता, रोगी सुरक्षा, RTI अधिनियम की छूट
स्रोत:Indian Express
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- IPC ने 2020 से 2025 के बीच चिकित्सा उपकरणों से 9,373 गंभीर प्रतिकूल घटनाएं (SAEs) सार्वजनिक कीं।
- SAEs 2020 के 808 से बढ़कर 2025 में 2,176 हो गईं, यानी लगभग तीन गुना वृद्धि।
- 10 सितंबर 2026 को RTI अधिनियम के तहत CIC के आदेश के बाद आंकड़े जारी हुए।
- भारत का मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MvPI) 2015 में IPC के तहत शुरू हुआ।
- IPC का प्रतिकूल घटनाएं दर्ज करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल प्रतिकूल औषधि निगरानी प्रणाली (ADRMS) है।
चर्चा में क्यों?
भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने पहली बार यह खुलासा किया है कि 2020 से चिकित्सा उपकरणों से 9,373 गंभीर प्रतिकूल घटनाएं (SAEs) दर्ज की गई हैं। इनमें 2025 में 808 से बढ़कर 2,176 हो जाने से लगभग तीन गुना वृद्धि दिखी है। यह आंकड़ा केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के RTI आदेश के बाद जारी हुआ है और भारत के मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MvPI) में पारदर्शिता की कमी को सामने लाता है।
सारांश
- IPC ने 2020 से 2025 के बीच चिकित्सा उपकरणों से 9,373 गंभीर प्रतिकूल घटनाएं (SAEs) सार्वजनिक कीं, जिनमें 2025 में 808 से बढ़कर 2,176 हो गईं।
- यह आंकड़ा RTI अधिनियम के तहत तब मिला, जब CIC ने IPC की आपत्ति को खारिज कर दिया। IPC ने धारा 8(1)(d) के तहत वाणिज्यिक गोपनीयता का हवाला दिया था।
- चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं (MDAEs) में से बहुत कम कार्रवाई के लिए CDSCO को भेजी जाती हैं: वित्त वर्ष 2024-25 में 14,584 में से केवल 22।
मुख्य बातें
SAE में तीन गुना वृद्धि
चिकित्सा उपकरणों से गंभीर प्रतिकूल घटनाएं 2020 के 808 से बढ़कर 2025 में 2,176 हो गईं। छह वर्षों में कुल 9,373 दर्ज हुईं।
RTI से खुलासा
आंकड़े केवल CIC के आदेश के बाद जारी हुए, क्योंकि IPC ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(d) के तहत वाणिज्यिक गोपनीयता का हवाला देकर गंभीर घटनाओं के आंकड़े रोक रखे थे।
कम नियामक कार्रवाई
वित्त वर्ष 2024-25 में 14,584 MDAEs में से केवल 22 CDSCO को भेजी गईं, जिससे मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
पृष्ठभूमि
मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MvPI) 2015 में IPC के तहत चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी के लिए शुरू हुआ था। पूरे देश में IPC के 775 निगरानी केंद्र हैं। इस नेटवर्क के बावजूद IPC ने SAE आंकड़ों को सीमित श्रेणी में रखा और अपनी वार्षिक रिपोर्टों में केवल व्यापक MDAE आंकड़े दिए। यह स्थिति तब बदली जब द इंडियन एक्सप्रेस की RTI अपील पर 10 सितंबर 2026 को CIC ने आदेश दिया।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
छह वर्षों में SAEs का 808 से बढ़कर 2,176 होना, यानी लगभग तीन गुना वृद्धि, या तो उपकरणों से होने वाले वास्तविक नुकसान में असली बढ़ोतरी का संकेत है या बेहतर रिपोर्टिंग का। फिर भी, 2024-25 में 14,584 MDAEs में से केवल 22 मामले CDSCO को भेजे जाने से लगता है कि गंभीर घटनाओं की व्यवस्थित कम रिपोर्टिंग हो रही है या नियामक अनुवर्ती तंत्र कमज़ोर है। वाणिज्यिक गोपनीयता का हवाला देकर IPC द्वारा ब्रांड और निर्माता का विवरण न बताना जनता की जवाबदेही और रोगी सुरक्षा की निगरानी को सीमित करता है।
आगे की राह
भारत को अमेरिका की MAUDE प्रणाली जैसा सार्वजनिक और खोजने योग्य डेटाबेस चाहिए, जिसमें उपकरणों से होने वाली मौतों और चोटों का विस्तृत विवरण हो। अनिवार्य रिपोर्टिंग, CDSCO की तेज़ नियामक कार्रवाई और चिकित्सा उपकरणों के लिए RTI छूट पर स्पष्ट दिशानिर्देशों से MvPI को मज़बूत किया जा सकता है, जिससे रोगी सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- मैटेरियोविजिलेंस
- चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की व्यवस्थित निगरानी, जो दवाओं के लिए फार्माकोविजिलेंस के समान है।
- RTI अधिनियम, 2005 - धारा 8(1)(d)
- ऐसी सूचना को खुलासे से छूट देती है जो वाणिज्यिक गोपनीयता, व्यापार रहस्यों या बौद्धिक संपदा से जुड़ी हो, जिसके खुलासे से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान हो।
- केंद्रीय सूचना आयोग (CIC)
- RTI अधिनियम, 2005 के तहत बना वैधानिक निकाय, जो केंद्रीय जन सूचना अधिकारियों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें सुनता है।
- भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC)
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन स्वायत्त निकाय, जो भारत में दवाओं और औषधि उत्पादों के लिए आधिकारिक मानक तय करता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 2020-2025 के बीच चिकित्सा उपकरणों से 9,373 SAEs; 2025 में 2,176
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC)
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: RTI अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(d)
यह गलती न करें!
भ्रम हो सकता है कि भारत का मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MvPI) और भारत का फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (PvPI) एक जैसे हैं, या नोडल निकाय को IPC की जगह CDSCO मान लिया जाए। याद रखें: MvPI का संचालन IPC करता है; भेजे गए मामलों पर नियामक कार्रवाई CDSCO करता है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- मैटेरियोविजिलेंस, नियामक पारदर्शिता, रोगी सुरक्षा, RTI अधिनियम की छूट
कहीं अटके? एक टैप में समझें
स्टेंट, वेंटिलेटर और सिरिंज जैसे चिकित्सा उपकरण कभी-कभी मरीज़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ऐसी 'गंभीर प्रतिकूल घटनाओं' पर नज़र रखता है, लेकिन उसने आंकड़े गोपनीय रखे थे। एक समाचार पत्र की RTI अपील के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने IPC को आंकड़े जारी करने का आदेश दिया। आंकड़े दिखाते हैं कि गंभीर घटनाएं 2020 के 808 से बढ़कर 2025 में 2,176 हो गईं, यानी लगभग तीन गुना। फिर भी इनमें से बहुत कम मामले नियामक कार्रवाई के लिए दवा नियामक तक पहुंचते हैं, जिससे मरीज़ों की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।
- IPC ने 2020 से 2025 के बीच चिकित्सा उपकरणों से 9,373 गंभीर प्रतिकूल घटनाएं (SAEs) सार्वजनिक कीं।
- SAEs 2020 के 808 से बढ़कर 2025 में 2,176 हो गईं, यानी लगभग तीन गुना वृद्धि।
- 10 सितंबर 2026 को RTI अधिनियम के तहत CIC के आदेश के बाद आंकड़े जारी हुए।
- भारत का मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MvPI) 2015 में IPC के तहत शुरू हुआ।
- IPC का प्रतिकूल घटनाएं दर्ज करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल प्रतिकूल औषधि निगरानी प्रणाली (ADRMS) है।
- शासन: RTI अधिनियम और पारदर्शिता
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी: चिकित्सा उपकरण और स्वास्थ्य तकनीक
जुड़ी अवधारणाएँ: मैटेरियोविजिलेंस, RTI अधिनियम, 2005 - धारा 8(1)(d), केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
भारत के मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MvPI) को लागू करने के लिए कौन-सा निकाय ज़िम्मेदार है?
व्याख्या: IPC, MvPI का नोडल निकाय है, जो चिकित्सा उपकरणों की प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी करता है। CDSCO भेजे गए मामलों पर नियामक कार्रवाई करता है, पर कार्यक्रम नहीं चलाता। NPPA दवाओं की कीमत संभालता है और DTAB तकनीकी विषयों पर सलाह देता है।
- Q2कठिन
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.IPC ने चिकित्सा उपकरणों के SAE आंकड़े केवल RTI अधिनियम के तहत CIC के आदेश के बाद सार्वजनिक किए।
- 2.IPC को रिपोर्ट की गई सभी MDAEs स्वतः कार्रवाई के लिए CDSCO को भेजी जाती हैं।
- 3.IPC के पास प्रतिकूल घटनाएं दर्ज करने के लिए प्रतिकूल औषधि निगरानी प्रणाली (ADRMS) नामक ऑनलाइन पोर्टल है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: आंकड़े 10 सितंबर के CIC आदेश के बाद जारी हुए। कथन 2 गलत है: 2024-25 में 14,584 में से केवल 22 MDAEs CDSCO को भेजी गईं। कथन 3 सही है: चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए ADRMS पोर्टल का उपयोग होता है।
- Q3मध्यम
IPC द्वारा 2020 से 2025 के बीच चिकित्सा उपकरणों से दर्ज की गई गंभीर प्रतिकूल घटनाओं (SAEs) की कुल संख्या कितनी थी?
व्याख्या: IPC ने 2020-2025 की अवधि के लिए 9,373 SAEs के आंकड़े सार्वजनिक किए।
- Q4मध्यम
भारत के मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MvPI) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: MvPI विशेष रूप से चिकित्सा उपकरणों की प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी के लिए बना है, जैसे फार्माकोविजिलेंस दवाओं की प्रतिक्रियाओं पर नज़र रखता है। मूल्य निर्धारण NPPA देखता है, आयात नियमन CDSCO और दवा प्रमाणन IPC के फार्माकोपिया मानकों से होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भारत का मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MvPI) क्या है?
MvPI 2015 में भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) के अधीन शुरू किया गया कार्यक्रम है, जो चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी और रिपोर्टिंग करता है।
2. 2020 से 2025 के बीच भारत में चिकित्सा उपकरणों से कितनी गंभीर प्रतिकूल घटनाएं (SAEs) दर्ज हुईं?
कुल 9,373 SAEs दर्ज हुईं, और 2020 के 808 से बढ़कर 2025 में 2,176 हो जाने से लगभग तीन गुना वृद्धि हुई।
3. उपकरण निर्माताओं का विवरण रोकने के लिए IPC ने RTI अधिनियम की कौन-सी धारा का हवाला दिया?
IPC ने RTI अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(d) का हवाला दिया, जो वाणिज्यिक गोपनीयता और तीसरे पक्ष की सूचना से जुड़ी जानकारी को छूट देती है।
4. IPC द्वारा भेजी गई प्रतिकूल घटनाओं पर नियामक कार्रवाई कौन-सा निकाय करता है?
केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) IPC द्वारा भेजे गए मामलों पर आवश्यक कार्रवाई करता है।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

