प्रिलिम्स के लिए: मतदाता सूची / निर्वाचक नामावली, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), आधार, भारत निर्वाचन आयोग (ECI), कुल गायब मतदाता (14 राज्य), UP में आधार वयस्क बनाम नामांकित मतदाता, सबसे अधिक गायब मतदाता प्रतिशत वाले राज्य, सबसे कम गायब मतदाता प्रतिशत वाले राज्य
मेन्स के लिए: SIR, मतदाता सूची पुनरीक्षण, आधार-मतदाता जुड़ाव, मतदाता बहिष्कार, ECI की स्वायत्तता
स्रोत:Indian Express
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- आधार डेटा की तुलना में 14 राज्यों की मतदाता सूचियों से 9 करोड़ वयस्क गायब हैं।
- उत्तर प्रदेश में आधार में 16.3 करोड़ वयस्क हैं, पर नामांकित मतदाता केवल 13.4 करोड़ हैं (15-18% गायब)।
- गायब मतदाताओं का सबसे अधिक प्रतिशत, 21%, गोवा में है।
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराता है।
- वर्तमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं।
चर्चा में क्यों?
14 बड़े राज्यों में आधार के वयस्क डेटाबेस की तुलना निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों से करने पर पता चलता है कि लगभग 9 करोड़ वयस्क (18 वर्ष और उससे अधिक) मतदाता सूचियों में नहीं हैं। अकेले उत्तर प्रदेश में 2.5-3 करोड़ मतदाता गायब हैं, जो उसकी वयस्क आबादी का 15-18% है। इससे भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा कराए गए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रभावशीलता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
सारांश
- भारत निर्वाचन आयोग के 14 बड़े राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद, बायोमेट्रिक रूप से दोहराव-रहित वास्तविक वयस्कों के आधार डेटाबेस की तुलना में लगभग 9 करोड़ वयस्क (18+) मतदाता सूचियों से बाहर हो गए हैं।
- उत्तर प्रदेश में आधार में पंजीकृत वयस्क 16.3 करोड़ हैं, जबकि नामांकित मतदाता केवल 13.4 करोड़ हैं। यानी 15-18% का अंतर है (लगभग 2.5-3 करोड़ मतदाता गायब)।
- राज्यों में गायब मतदाताओं की दर में भारी अंतर है: गोवा में 21%, पंजाब और उत्तराखंड में 19%, जबकि ओडिशा और तमिलनाडु में 7%। यह तीन गुना का अंतर केवल मतदान में उदासीनता से नहीं समझाया जा सकता।
- गायब मतदाताओं का सबसे अधिक प्रतिशत रखने वाले चार राज्य, गोवा, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश, 2027 की शुरुआत में होने वाले चुनावों के लिए निर्धारित हैं। खबरों के अनुसार यह केवल संयोग से अधिक हो सकता है।
मुख्य बातें
अंतर
आधार के वयस्क डेटाबेस की SIR के बाद की ECI मतदाता सूचियों से तुलना करने पर 14 राज्यों में 9 करोड़ वयस्क गायब दिखते हैं, जिनमें अकेले UP में 2.5-3 करोड़ मतदाता गायब हैं।
भिन्नता
गोवा में गायब मतदाताओं की दर 21% और ओडिशा में 7% है। यह तीन गुना का अंतर केवल मतदान में उदासीनता से नहीं समझाया जा सकता।
छोड़ा गया समाधान
मार्च 2025 में ECI ने सूचियों की सफ़ाई के लिए मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने का प्रस्ताव रखा था, पर इसे छोड़कर SIR प्रक्रिया अपनाई गई, जिसे खबर समस्याग्रस्त बताती है।
पृष्ठभूमि
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) समय-समय पर मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण करता है, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भी शामिल है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा रखे गए आधार डेटाबेस में निवासियों का बायोमेट्रिक (अंगुली की छाप और आईरिस स्कैन) और जनसांख्यिकीय डेटा होता है, और वह बायोमेट्रिक रूप से दोहराव-रहित है, यानी एक व्यक्ति दो बार दर्ज नहीं हो सकता। इसलिए जनगणना के अनुमानों की तुलना में वयस्कों की गिनती के लिए आधार अधिक भरोसेमंद आधार रेखा है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
खबर एक चौंकाने वाला निष्कर्ष सामने रखती है: 14 राज्यों के 9 करोड़ वयस्क आधार में हैं, पर मतदाता सूची में नहीं। राज्यों में गायब मतदाताओं की भिन्नता (गोवा में 21% से ओडिशा में 7%) इतनी अधिक है कि उसे मतदान में उदासीनता से विश्वसनीय रूप से नहीं समझाया जा सकता। सबसे अधिक अंतर वाले चार राज्य, गोवा, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश, 2027 की शुरुआत में मतदान में जाएंगे। खबर तर्क देती है कि यदि अंतरराज्यीय प्रवास कारण होता, तो बिहार (श्रम का बड़ा निर्यातक राज्य) में सबसे अधिक अंतर होना चाहिए था, पर वह निचले स्तर के पास है। ECI ने खुद मार्च 2025 में सूचियों की सफ़ाई के लिए मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने का प्रस्ताव रखा था, जिसका विपक्षी दलों ने समर्थन किया था, पर उसे छोड़कर SIR प्रक्रिया अपनाई गई।
आगे की राह
खबर आधार को मतदाता सूचियों की सफ़ाई के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करने की वकालत करती है, क्योंकि फर्जी लाभार्थियों को हटाकर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण में ₹5 लाख करोड़ बचाने में इसकी सफलता रही है। यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग की क्षमता और मंशा पर सवाल उठाती है, और संकेत देती है कि SIR प्रक्रिया केवल दोहराव हटाने के बजाय असली मतदाताओं को बाहर कर सकती है।
चयनित राज्यों में गायब मतदाता (आधार बनाम मतदाता सूचियाँ)
| राज्य | आधार वयस्क (करोड़ में) | नामांकित मतदाता (करोड़ में) | गायब % |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 16.3 | 13.4 | 15-18% |
| गोवा | — | — | 21% |
| पंजाब | — | — | 19% |
| उत्तराखंड | — | — | 19% |
| ओडिशा | — | — | 7% |
| तमिलनाडु | — | — | 7% |
उत्तर प्रदेश से जुड़ाव
उत्तर प्रदेश की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UPPSC 9/10
उत्तराखंड की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UKPSC 8/10UKSSSC 7/10
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- मतदाता सूची / निर्वाचक नामावली
- किसी निर्वाचन क्षेत्र के सभी योग्य मतदाताओं (18 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों) की सूची, जिसे भारत निर्वाचन आयोग तैयार और संशोधित करता है। चुनाव कराने का यही आधार है।
- विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)
- निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन करने का एक विशेष अभियान, जिसमें नए मतदाता जोड़े जाते हैं, मृत या दोहराए गए नाम हटाए जाते हैं और त्रुटियाँ सुधारी जाती हैं। इसे बड़े चुनावों से पहले चलाया जाता है।
- आधार
- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा बायोमेट्रिक (अंगुली की छाप, आईरिस स्कैन) और जनसांख्यिकीय डेटा के आधार पर जारी 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या। यह बायोमेट्रिक रूप से दोहराव-रहित है।
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI)
- भारत में चुनाव प्रक्रियाओं का संचालन करने वाली एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था। इसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्त होते हैं।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 14 राज्यों की मतदाता सूचियों से 9 करोड़ वयस्क गायब; UP में अंतर: आधार में 16.3 करोड़ वयस्क बनाम 13.4 करोड़ मतदाता (15-18% गायब)
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भारत निर्वाचन आयोग (ECI); मुख्य निर्वाचन आयुक्त: ज्ञानेश कुमार
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)
यह गलती न करें!
प्रश्न आपसे 'गायब मतदाताओं' को उन लोगों के रूप में पहचानने को कह सकते हैं जिन्हें सूची से 'हटाया' गया है, पर वास्तव में ये वे वयस्क हैं जो कभी सूची में थे ही नहीं (या हटाए गए थे), केवल हटाए नहीं गए। वे SIR को मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने के पहले प्रस्ताव के साथ भी भ्रमित कर सकते हैं। एक और जाल: यह मान लेना कि अंतरराज्यीय प्रवास अंतर को समझाता है, जबकि बिहार (श्रम का बड़ा निर्यातक) में अंतर कम है, जिससे यह धारणा गलत साबित होती है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- SIR, मतदाता सूची पुनरीक्षण, आधार-मतदाता जुड़ाव, मतदाता बहिष्कार, ECI की स्वायत्तता
कहीं अटके? एक टैप में समझें
भारत निर्वाचन आयोग SIR नाम की प्रक्रिया से मतदाता सूचियाँ अद्यतन करता है। किसी ने आधार (सरकार का बायोमेट्रिक पहचान डेटाबेस) में दर्ज वयस्कों की संख्या की तुलना मतदाता सूचियों से की। उन्हें पता चला कि आधार वाले 9 करोड़ वयस्क मतदाता सूची में नहीं हैं। UP में, आधार वाले हर 100 वयस्कों में से केवल लगभग 84 मतदान के लिए पंजीकृत हैं।
- आधार डेटा की तुलना में 14 राज्यों की मतदाता सूचियों से 9 करोड़ वयस्क गायब हैं।
- उत्तर प्रदेश में आधार में 16.3 करोड़ वयस्क हैं, पर नामांकित मतदाता केवल 13.4 करोड़ हैं (15-18% गायब)।
- गायब मतदाताओं का सबसे अधिक प्रतिशत, 21%, गोवा में है।
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराता है।
- वर्तमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं।
- राजव्यवस्था: निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधार
- शासन: ई-गवर्नेंस और आधार
जुड़ी अवधारणाएँ: मतदाता सूची / निर्वाचक नामावली, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), आधार, भारत निर्वाचन आयोग (ECI)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
भारत में मतदाता सूचियों की तैयारी और पुनरीक्षण के लिए कौन-सी संवैधानिक संस्था ज़िम्मेदार है?
व्याख्या: भारत निर्वाचन आयोग वह स्वायत्त संवैधानिक संस्था है जो मतदाता सूचियों की तैयारी और पुनरीक्षण सहित सभी चुनाव प्रक्रियाओं के लिए ज़िम्मेदार है। UIDAI आधार संख्या जारी करता है, विधि मंत्रालय कानूनी मामले देखता है, और महापंजीयक जनगणना कराते हैं।
- Q2कठिन
आधार और मतदाता सूची डेटा की तुलना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.विश्लेषण के अनुसार 14 राज्यों के लगभग 9 करोड़ वयस्क आधार में पंजीकृत हैं, पर मतदाता सूचियों में नहीं हैं।
- 2.गायब मतदाताओं का सबसे अधिक प्रतिशत 21% के साथ गोवा में है।
- 3.अंतरराज्यीय प्रवास राज्यों में आधार वयस्कों और नामांकित मतदाताओं के बीच के अंतर को पूरी तरह समझाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: विश्लेषण में 14 राज्यों में 9 करोड़ वयस्क गायब पाए गए। कथन 2 सही है: गोवा में गायब मतदाताओं की दर सबसे अधिक, 21% है। कथन 3 गलत है: खबर तर्क देती है कि अंतरराज्यीय प्रवास अंतर को नहीं समझा सकता, क्योंकि बिहार (श्रम का बड़ा निर्यातक) में अंतर कम है, और तमिलनाडु जैसे प्राप्तकर्ता राज्यों में आधार वयस्कों से अधिक मतदाता नहीं हैं।
- Q3मध्यम
आधार-मतदाता सूची की तुलना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कितने प्रतिशत वयस्क मतदाता सूची से गायब हैं?
व्याख्या: उत्तर प्रदेश में आधार में पंजीकृत वयस्क 16.3 करोड़ हैं, पर नामांकित मतदाता केवल 13.4 करोड़, यानी लगभग 2.5-3 करोड़ का अंतर, जो उसकी वयस्क आबादी का 15-18% है। ओडिशा और तमिलनाडु के लिए दर 7% है, और गोवा के लिए 21%।
- Q4मध्यम
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने का मार्च 2025 का प्रस्ताव किस मुख्य कारण से छोड़ दिया?
व्याख्या: मार्च 2025 में ECI ने मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने का प्रस्ताव रखा, जिसका विपक्ष ने समर्थन किया था। पर तीन महीने बाद ECI ने प्रस्ताव छोड़कर इसके बजाय SIR की घोषणा कर दी। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे रद्द नहीं किया था, विपक्ष ने इसका समर्थन किया था, और आधार बायोमेट्रिक रूप से दोहराव-रहित और सक्षम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विश्लेषित 14 राज्यों की मतदाता सूचियों से कितने वयस्क गायब हैं?
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रकाशित मतदाता सूचियों से लगभग 9 करोड़ वयस्क (18 वर्ष और उससे अधिक) गायब हैं, जबकि वे आधार में पंजीकृत हैं।
2. मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?
SIR भारत निर्वाचन आयोग का एक विशेष अभियान है, जिसमें नए मतदाता जोड़े जाते हैं, मृत और दोहराए गए नाम हटाए जाते हैं और त्रुटियाँ सुधारी जाती हैं, ताकि मतदाता सूचियाँ अद्यतन रहें।
3. आधार और मतदाता पहचान पत्र के संबंध में ECI का पहले का प्रस्ताव क्या था?
मार्च 2025 में ECI ने दोहराव और फर्जी प्रविष्टियाँ हटाने के लिए मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने का प्रस्ताव रखा था। विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया, पर इसे छोड़कर SIR प्रक्रिया अपनाई गई।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

