राजव्यवस्था

सर्वोच्च न्यायालय ने 'पे माइनस पेंशन' नियम को सही ठहराया, दोबारा नियुक्त सरकारी अधिकारियों के समान वेतन के दावे को खारिज किया

6 नवंबर 20263 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 54 / 77

प्रिलिम्स के लिए: 'पे माइनस पेंशन' (वेतन में से पेंशन घटाना), समान काम के लिए समान वेतन, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC), मामला, सही ठहराया गया मुख्य प्रावधान, न्यायालय, पीठ, खारिज किया गया सिद्धांत

मेन्स के लिए: सेवा नियम, स्वीकार की गई शर्तों की बाध्यकारी प्रकृति, समान काम के लिए समान वेतन की सीमा, सेवानिवृत्त अधिकारियों की दोबारा नियुक्ति

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने 'पे माइनस पेंशन' नियम को सही ठहराया है। इसके तहत, जब लागू सेवा नियमों में इसका प्रावधान हो, तो सरकार दोबारा नियुक्त सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी के वेतन में से पेंशन की राशि घटा सकती है। न्यायालय ने कहा कि इससे 'समान काम के लिए समान वेतन' के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं होता।

सारांश

  • सर्वोच्च न्यायालय ने दोबारा नियुक्त सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों के लिए सेवा नियमों में 'पे माइनस पेंशन' प्रावधान को सही ठहराया और कहा कि यह 'समान काम के लिए समान वेतन' के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करता।
  • इस मामले में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एम. सी. भंडारी शामिल थे, जो भारतीय सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) के अध्यक्ष के रूप में दोबारा नियुक्त हुए थे।
  • न्यायालय ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 2010 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें विनियम 7(2) को असंवैधानिक बताया गया था।

मुख्य बातें

  • सर्वोच्च न्यायालय ने 'पे माइनस पेंशन' को सही ठहराया

    सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जब सेवा नियम इसका प्रावधान करते हैं, तो दोबारा नियुक्त सेवानिवृत्त अधिकारी के वेतन से पेंशन घटाना वैध है।

  • उत्तराखंड उच्च न्यायालय का फैसला पलटा गया

    सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 2010 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें 'पे माइनस पेंशन' नियम को असंवैधानिक बताकर खारिज किया गया था।

  • समान वेतन का तर्क खारिज

    न्यायालय ने कहा कि जब किसी पद का वेतन उसके विशिष्ट सेवा नियमों के अनुसार तय होता है, तो 'समान काम के लिए समान वेतन' का सिद्धांत लागू नहीं होता।

पृष्ठभूमि

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एम. सी. भंडारी 30 अगस्त 2006 को भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए। 3 नवंबर 2006 को उन्हें उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। विनियम 7(2) के अनुसार उनका वेतन तय हुआ, जिसमें वेतन में से पेंशन घटाई जाती है ('पे माइनस पेंशन')। उन्होंने और एक अन्य सदस्य ने इसे उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने अप्रैल 2010 में इस विनियम को रद्द कर दिया।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से स्पष्ट होता है कि 'पे माइनस पेंशन' नियम अपने आप में भेदभावपूर्ण नहीं है। न्यायालय के तर्क के अनुसार, अधिकारियों ने वेतन संरचना सहित सेवा की शर्तों की पूरी जानकारी के साथ नियुक्ति स्वीकार की थी। 'समान काम के लिए समान वेतन' का तर्क इसलिए विफल रहा, क्योंकि वेतन भेदभाव के कारण नहीं, बल्कि पहले से मौजूद नियम के अनुसार घटाया गया था। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि कटौती न हो, तो कुल भुगतान (वेतन + पेंशन) उस पद के वास्तविक वेतन से अधिक हो सकता है, जिससे विसंगति पैदा होगी।

आगे की राह

यह फैसला सरकारी विभागों के लिए 'पे माइनस पेंशन' नियमों की वैधता पर स्पष्टता देता है। सरकारी पद पर दोबारा नियुक्ति पर विचार कर रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लागू सेवा नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए, क्योंकि पद स्वीकार करने के बाद वे वेतन संरचना को बाद में चुनौती नहीं दे सकते। यह फैसला इस बात को मज़बूत करता है कि स्वीकार की गई सेवा शर्तें बाध्यकारी होती हैं।

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

'पे माइनस पेंशन' (वेतन में से पेंशन घटाना)
ऐसा नियम, जिसके तहत सेवानिवृत्ति के बाद लिए गए नए सरकारी पद के वेतन में से पिछली सरकारी सेवा की पेंशन घटाई जाती है।
समान काम के लिए समान वेतन
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39(घ) के तहत एक सिद्धांत, जिसके अनुसार पुरुषों और महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए। यह राज्य नीति का एक निदेशक सिद्धांत है।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC)
संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत एक संवैधानिक निकाय, जो उत्तराखंड राज्य में सिविल सेवाओं की भर्ती कराता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: सर्वोच्च न्यायालय ने दोबारा नियुक्त सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए 'पे माइनस पेंशन' नियम को सही ठहराया।
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भारत का सर्वोच्च न्यायालय।
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: सेवा नियमों में 'पे माइनस पेंशन' प्रावधान; UKPSC का विनियम 7(2)।

यह गलती न करें!

परीक्षक पूछ सकते हैं कि क्या सर्वोच्च न्यायालय ने 'पे माइनस पेंशन' नियम को रद्द किया या असंवैधानिक घोषित किया। सही तथ्य यह है कि न्यायालय ने नियम को सही ठहराया। एक और भ्रम यह हो सकता है कि इसे सभी पेंशनभोगियों के लिए लागू होने वाला सामान्य नियम समझ लिया जाए; यह फैसला तभी लागू होता है जब विशिष्ट सेवा नियम इसका प्रावधान करते हों।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • सेवा नियम, स्वीकार की गई शर्तों की बाध्यकारी प्रकृति, समान काम के लिए समान वेतन की सीमा, सेवानिवृत्त अधिकारियों की दोबारा नियुक्ति

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    उत्तराखंड राज्य में सिविल सेवाओं की भर्ती कराने के लिए कौन-सा संवैधानिक निकाय ज़िम्मेदार है?

  2. Q2कठिन

    सर्वोच्च न्यायालय के 'पे माइनस पेंशन' नियम पर फैसले के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.सर्वोच्च न्यायालय ने दोबारा नियुक्त सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों के लिए 'पे माइनस पेंशन' नियम को सही ठहराया।
    2. 2.न्यायालय ने इस नियम को रद्द करने के लिए 'समान काम के लिए समान वेतन' सिद्धांत लागू किया।
    3. 3.यह मामला उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के विनियम 7(2) को दी गई चुनौती से उत्पन्न हुआ था।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एम. सी. भंडारी के UKPSC के अध्यक्ष के रूप में दोबारा नियुक्त होने पर उनके वेतन से किस मासिक पेंशन राशि को समायोजित किया गया था?

  4. Q4मध्यम

    सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लिए 'पे माइनस पेंशन' नियम पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का मुख्य प्रभाव क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 'पे माइनस पेंशन' नियम क्या है?

यह एक ऐसा नियम है, जिसके तहत सेवानिवृत्ति के बाद लिए गए नए सरकारी पद के वेतन में से पिछली सरकारी सेवा की प्राप्त पेंशन घटाई जाती है।

2. क्या सर्वोच्च न्यायालय ने 'पे माइनस पेंशन' नियम को रद्द किया?

नहीं, सर्वोच्च न्यायालय ने नियम को सही ठहराया और कहा कि जब पद के सेवा नियम इसका प्रावधान करते हैं, तो यह 'समान काम के लिए समान वेतन' के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करता।

3. इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने किस उच्च न्यायालय के फैसले को पलटा?

सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 2010 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें विनियम 7(2) को असंवैधानिक बताकर रद्द किया गया था।

4. उत्तराखंड उच्च न्यायालय में मूल मामले में याचिकाकर्ता कौन था?

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एम. सी. भंडारी, जो भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में दोबारा नियुक्त हुए थे।

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