राजव्यवस्था

झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रतिबंधित भूमि सूची से 3 लाख एकड़ से अधिक जमीन हटाने और उसकी रजिस्ट्री की अनुमति देने का आदेश दिया

6 नवंबर 20262 मिनट2 स्रोत4 प्रश्नखबर 10 / 52

प्रिलिम्स के लिए: निबंधन अधिनियम, 1908, उप-निबंधक, NGDRS (राष्ट्रीय जेनेरिक दस्तावेज़ निबंधन प्रणाली), न्यायालय, मुक्त हुई जमीन, पोर्टल, रजिस्ट्री रोके जाने का वर्ष, उद्धृत अधिनियम

मेन्स के लिए: शक्तियों का पृथक्करण, न्यायिक पुनरावलोकन, भूमि प्रशासन, कार्यपालिका की अति-पहुंच

स्रोत:Dainik BhaskarDainik BhaskarHindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को NGDRS पोर्टल की प्रतिबंधित सूची से 3 लाख एकड़ से अधिक जमीन तुरंत हटाने का आदेश दिया है, जिससे आठ साल से रुकी इन जमीनों की बिक्री और रजिस्ट्री का रास्ता साफ होगा। न्यायालय ने कहा कि स्वामित्व विवाद के आधार पर निबंधन अधिकारी रजिस्ट्री नहीं रोक सकते।

सारांश

  • झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजेश शंकर ने राष्ट्रीय जेनेरिक दस्तावेज़ निबंधन प्रणाली (NGDRS) पोर्टल की प्रतिबंधित सूची से सभी भूमि प्रविष्टियां हटाने का निर्देश दिया।
  • यह आदेश झारखंड की 3 लाख से अधिक एकड़ जमीन पर लागू होता है, जिसकी बिक्री और रजिस्ट्री मार्च 2018 से रोकी गई थी।
  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निबंधन अधिनियम, 1908 और बिहार निबंधन नियमावली, 1937 उप-निबंधक को भूमि के स्वामित्व या हक़ विवाद का फैसला करने का अधिकार नहीं देते।

मुख्य बातें

  • उच्च न्यायालय का आदेश

    झारखंड उच्च न्यायालय ने NGDRS पोर्टल की प्रतिबंधित सूची से सभी भूमि प्रविष्टियां तुरंत हटाने का आदेश दिया, जिससे आठ साल का गतिरोध समाप्त हुआ।

  • निबंधन के अधिकार

    न्यायालय ने कहा कि निबंधन अधिकारी स्वामित्व विवाद तय नहीं कर सकते; उनका काम केवल कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने वाले दस्तावेज़ों का निबंधन करना है।

  • सरकार का रुख

    राज्य सरकार ने दलील दी कि सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) लंबित है और वह नया कानून लाने पर विचार कर रही है; उपायुक्त (DC) व्यक्तिगत राहत दे सकते हैं।

पृष्ठभूमि

झारखंड में मई 2016 के मुख्य सचिव के आदेश के बाद, जिसमें अवैध या संदिग्ध जमाबंदी की जांच का निर्देश था, मार्च 2018 से NGDRS पोर्टल पर 3 लाख एकड़ से अधिक जमीन प्रतिबंधित सूची में डाल दी गई। इससे इन संपत्तियों की बिक्री, रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज, लगान रसीद और बैंक लोन लगभग ठप हो गए।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

उच्च न्यायालय का फैसला कार्यपालिका की अति-पहुंच पर अंकुश लगाता है। यह स्पष्ट करके कि निबंधन अधिकारी हक़ का निर्णय नहीं कर सकते, न्यायालय ने निबंधन अधिनियम, 1908 के सीमित दायरे को दोहराया है। इससे वे लाखों भू-स्वामी लाभान्वित होंगे जो अपनी जमीन बेच या उस पर लोन नहीं ले पा रहे थे।

आगे की राह

झारखंड सरकार सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकती है या संदिग्ध भूमि लेन-देन को नियंत्रित करने के लिए नया कानून ला सकती है। इस बीच भू-स्वामी व्यक्तिगत मंज़ूरी के लिए जिला कलेक्टरों से संपर्क कर सकते हैं। यह मामला भविष्य में प्रशासनिक बाधाओं से बचने के लिए पारदर्शी और कुशल भूमि स्वामित्व प्रणाली की ज़रूरत को सामने लाता है।

झारखंड से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

निबंधन अधिनियम, 1908
यह केंद्रीय अधिनियम संपत्ति लेन-देन से जुड़े दस्तावेज़ों के निबंधन को नियंत्रित करता है। यह बताता है कि कौन-से दस्तावेज़ों का निबंधन अनिवार्य है और निबंधन की प्रक्रिया क्या है।
उप-निबंधक
निबंधन अधिनियम के तहत दस्तावेज़ों का निबंधन करने के लिए नियुक्त सरकारी अधिकारी। इनकी भूमिका केवल कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने देखने तक सीमित है, संपत्ति के स्वामित्व का निर्णय करना नहीं।
NGDRS (राष्ट्रीय जेनेरिक दस्तावेज़ निबंधन प्रणाली)
भारत सरकार द्वारा विकसित एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल, जिसका उद्देश्य राज्यों में भूमि निबंधन को सुव्यवस्थित करना है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: झारखंड में प्रतिबंधित सूची से मुक्त हुई 3 लाख+ एकड़ जमीन
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: झारखंड उच्च न्यायालय (न्यायाधीश राजेश शंकर)
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: निबंधन अधिनियम, 1908

यह गलती न करें!

परीक्षक निबंधन अधिनियम, 1908 को संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 के साथ भ्रमित कर सकते हैं, या 'NGDRS' को 'DILRMP' (डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम) से बदल सकते हैं। वे रजिस्ट्री रोके जाने का वर्ष (2018) बनाम मुख्य सचिव के आदेश का वर्ष (2016) भी पूछ सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • शक्तियों का पृथक्करण, न्यायिक पुनरावलोकन, भूमि प्रशासन, कार्यपालिका की अति-पहुंच

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    भारत में संपत्ति दस्तावेज़ों के निबंधन को मुख्य रूप से कौन-सा अधिनियम नियंत्रित करता है?

  2. Q2कठिन

    झारखंड उच्च न्यायालय के हालिया आदेश के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.न्यायालय ने NGDRS पोर्टल की प्रतिबंधित सूची से 3 लाख एकड़ से अधिक जमीन हटाने का आदेश दिया।
    2. 2.न्यायालय ने कहा कि उप-निबंधक दस्तावेज़ का निबंधन करने से पहले भूमि स्वामित्व विवादों का फैसला कर सकते हैं।
    3. 3.आदेश से इन जमीनों के लिए दाखिल-खारिज और बैंक लोन का रास्ता खुलता है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    झारखंड में गैर मजरुआ और अन्य गैर आबाद भूमि का निबंधन किस वर्ष से रोका गया था?

  4. Q4मध्यम

    भूमि निबंधन से संबंधित झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश का मुख्य महत्व क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 6 नवंबर 2026 को झारखंड उच्च न्यायालय ने क्या आदेश दिया?

न्यायालय ने राज्य सरकार को NGDRS पोर्टल की प्रतिबंधित सूची से 3 लाख एकड़ से अधिक जमीन तुरंत हटाने का आदेश दिया, जिससे उनकी बिक्री और रजिस्ट्री का रास्ता खुला।

2. भारत में दस्तावेज़ निबंधन किस अधिनियम से संचालित होता है?

निबंधन अधिनियम, 1908 वह मुख्य अधिनियम है जो संपत्ति लेन-देन सहित दस्तावेज़ों के निबंधन को नियंत्रित करता है।

3. इन जमीनों की रजिस्ट्री 2018 से क्यों रोकी गई थी?

झारखंड के मुख्य सचिव के मई 2016 के उस आदेश के बाद, जिसमें अवैध भूमि अभिलेखों की जांच का निर्देश था, 3 लाख एकड़ से अधिक जमीन प्रतिबंधित सूची में डाल दी गई, जिससे उनकी रजिस्ट्री रुक गई।

4. क्या उप-निबंधक भूमि स्वामित्व विवादों का फैसला कर सकते हैं?

नहीं, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निबंधन अधिकारी भूमि स्वामित्व का फैसला नहीं कर सकते; उनकी भूमिका केवल कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने वाले दस्तावेज़ों का निबंधन करने तक सीमित है।

सभी स्रोत

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