प्रिलिम्स के लिए: उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS), पूंजी नियंत्रण, बाहरी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), प्रति व्यक्ति LRS वार्षिक सीमा, LRS शुरू हुई, FY27 के अप्रैल-अगस्त में LRS बहिर्प्रवाह, भारतीय कंपनियों का बाहरी FDI (अंतिम 29 महीने), LRS के तहत विदेशी संपत्ति की रिकॉर्ड खरीद
मेन्स के लिए: उदारीकृत प्रेषण योजना, पूंजी खाता परिवर्तनीयता, बाहरी FDI में उछाल, रुपये का अवमूल्यन, पूंजी नियंत्रण बनाम खुली अर्थव्यवस्था
स्रोत:Indian Express
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- LRS की वार्षिक सीमा प्रति व्यक्ति $250,000 है।
- LRS फरवरी 2004 में $25,000 की सीमा के साथ शुरू हुई थी।
- RBI ने LRS सीमा केवल एक बार घटाई है, अगस्त 2013 में।
- FY27 में भारतीयों का LRS के तहत विदेशी इक्विटी और ऋण में निवेश $4 बिलियन पार कर सकता है।
- पिछले 29 महीनों में भारतीय कंपनियों का बाहरी FDI बढ़कर $82 बिलियन हो गया।
चर्चा में क्यों?
उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के तहत विदेशी इक्विटी और ऋण में निवेश FY27 में $4 बिलियन पार करने का अनुमान है। यह उछाल घरेलू शेयर बाज़ार में कमज़ोर रिटर्न और बढ़ती आय के कारण है। इसका असर रुपये और भारत के पूंजी खाते के प्रबंधन पर पड़ता है, इसलिए यह अर्थव्यवस्था और बैंकिंग की परीक्षाओं के लिए अहम विषय है।
सारांश
- उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के तहत भारतीयों का विदेशी इक्विटी और ऋण में निवेश FY27 में पहली बार $4 बिलियन पार कर सकता है।
- FY27 के अप्रैल-अगस्त में ऐसा निवेश $1.73 बिलियन रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के $823 मिलियन से दोगुने से भी अधिक है।
- 2018-19 से 2023-24 के छह वर्षों में भारतीय कंपनियों का बाहरी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) $85 बिलियन रहा, और उसके बाद के दो वर्ष पांच महीनों में यह $82 बिलियन रहा।
- RBI ने अगस्त 2013 में वैश्विक उथल-पुथल के बीच एक बार ही $250,000 की वार्षिक LRS सीमा घटाई थी।
मुख्य बातें
LRS बहिर्प्रवाह में रिकॉर्ड
LRS के तहत विदेशी इक्विटी और ऋण में भारतीयों का निवेश FY27 में $4 बिलियन पार कर सकता है, जो FY26 की गति से दोगुने से भी अधिक है।
बाहरी FDI में उछाल
भूराजनीति और उत्पादन को स्वदेश लाने (रीशोरिंग) के कारण भारतीय कंपनियों का विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश 29 महीनों में बढ़कर $82 बिलियन हो गया।
रुपये पर दबाव और नीतिगत दुविधा
बढ़ता बहिर्प्रवाह, मुनाफे की वापसी और व्यापार घाटा रुपये को कमज़ोर करते हैं, लेकिन LRS सीमा घटाने को पूंजी नियंत्रण माना जा सकता है।
पृष्ठभूमि
उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) को RBI ने फरवरी 2004 में शुरू किया था। इसके तहत निवासी व्यक्ति प्रति वित्तीय वर्ष किसी भी अनुमत चालू या पूंजी खाता लेन-देन के लिए $250,000 तक भेज सकते हैं। शुरुआत में सीमा $25,000 थी, जिसे समय के साथ बढ़ाया गया। RBI ने इसे केवल एक बार घटाया है, अगस्त 2013 में, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के क्वांटिटेटिव ईज़िंग खत्म करने के संकेत से पैदा हुई 'टेपर टैंट्रम' के दौरान।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
LRS बहिर्प्रवाह में तेज़ बढ़ोतरी, अप्रैल-अगस्त FY27 में $1.73 बिलियन, जो पिछले वर्ष के $823 मिलियन से दोगुना है, कमज़ोर घरेलू शेयर रिटर्न (2026 में निफ्टी 6% गिरा) और बढ़ती भारतीय आय का संयुक्त परिणाम है। इसके साथ बढ़ता बाहरी FDI ($29 महीनों में $82 बिलियन) और विदेशी निवेशकों का मुनाफा वापस ले जाना रुपये पर दबाव बढ़ा रहे हैं। सरकार ने आवक बढ़ाने के उपाय किए हैं, जैसे सरकारी ऋण में विदेशी निवेश पर कर छूट और FCNR जमाओं पर विनिमय दर जोखिम स्वयं वहन करना। साथ ही इक्विटी पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर हटाने पर विचार भी हो रहा है।
आगे की राह
RBI के सामने नीतिगत दुविधा है। $250,000 की LRS सीमा घटाने से बहिर्प्रवाह थम सकता है, लेकिन इसे 'पूंजी नियंत्रण' कहा जा सकता है, जिससे खुली अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की छवि को नुकसान होगा। इसकी जगह ध्यान नियामक प्रोत्साहनों से आवक बढ़ाने और वैश्विक निवेश को देश में लाने के लिए GIFT सिटी का पारिस्थितिकी तंत्र गहरा करने पर रहने की संभावना है। यह प्रवृत्ति भारतीय निवेशकों के वैश्विक वित्तीय बाज़ारों से बढ़ते जुड़ाव को भी दिखाती है, जो अर्थव्यवस्था और बैंकिंग की परीक्षाओं से संबंधित है।
LRS बहिर्प्रवाह: FY26 बनाम FY27 के अप्रैल-अगस्त
| अवधि | विदेशी इक्विटी और ऋण में LRS निवेश |
|---|---|
| FY26 के अप्रैल-अगस्त | $823 मिलियन |
| FY27 के अप्रैल-अगस्त | $1.73 बिलियन |
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS)
- RBI की एक योजना, जिसके तहत निवासी व्यक्ति प्रति वित्तीय वर्ष विदेशी शेयर, ऋण, संपत्ति, शिक्षा या यात्रा सहित किसी भी अनुमत चालू या पूंजी खाता लेन-देन के लिए $250,000 तक भेज सकते हैं।
- पूंजी नियंत्रण
- सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा किसी देश में या देश से बाहर पूंजी के प्रवाह को नियंत्रित करने के उपाय। इनमें विदेशी मुद्रा लेन-देन पर सीमा, सीमा-पार पूंजी प्रवाह पर कर, या कुछ लेन-देन पर पूर्ण रोक शामिल हो सकती है।
- बाहरी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)
- किसी घरेलू कंपनी द्वारा विदेशी कंपनी या उद्यम में किया गया निवेश, जो आमतौर पर वहां व्यावसायिक उपस्थिति स्थापित करने या नियंत्रक हिस्सेदारी लेने के लिए होता है। यह किसी देश के भुगतान संतुलन का एक घटक है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस डेटा पर ध्यान दें: प्रति व्यक्ति LRS वार्षिक सीमा: $250,000
- इस डेटा पर ध्यान दें: LRS फरवरी 2004 में $25,000 की प्रारंभिक सीमा के साथ शुरू हुई
- इस नोडल संस्था पर ध्यान दें: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) LRS का प्रशासन करता है
- इस डेटा पर ध्यान दें: RBI ने LRS सीमा केवल एक बार घटाई: अगस्त 2013
यह गलती न करें!
परीक्षक LRS सीमा घटाने (अगस्त 2013) के संदर्भ में 'पूंजी नियंत्रण' के बारे में पूछ सकते हैं, या LRS सीमा को विदेश यात्रा की सीमा के साथ भ्रमित कर सकते हैं (जो अलग और अधिक है)। वे 'बाहरी FDI' को 'आंतरिक FDI' या 'FII' (विदेशी संस्थागत निवेश) से भी बदल सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- उदारीकृत प्रेषण योजना, पूंजी खाता परिवर्तनीयता, बाहरी FDI में उछाल, रुपये का अवमूल्यन, पूंजी नियंत्रण बनाम खुली अर्थव्यवस्था
कहीं अटके? एक टैप में समझें
उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) भारतीयों को हर साल $250,000 तक विदेश धन भेजने देती है। घरेलू शेयर बाज़ार गिरने के कारण कई लोग इसके ज़रिए विदेशी शेयर और अन्य परिसंपत्तियाँ खरीद रहे हैं। सरकार को चिंता है कि देश से बहुत ज़्यादा पैसा बाहर जाने से भारतीय रुपया कमज़ोर होता है।
- LRS की वार्षिक सीमा प्रति व्यक्ति $250,000 है।
- LRS फरवरी 2004 में $25,000 की सीमा के साथ शुरू हुई थी।
- RBI ने LRS सीमा केवल एक बार घटाई है, अगस्त 2013 में।
- FY27 में भारतीयों का LRS के तहत विदेशी इक्विटी और ऋण में निवेश $4 बिलियन पार कर सकता है।
- पिछले 29 महीनों में भारतीय कंपनियों का बाहरी FDI बढ़कर $82 बिलियन हो गया।
- अर्थव्यवस्था: भुगतान संतुलन और पूंजी खाता
- अर्थव्यवस्था: बैंकिंग और RBI
जुड़ी अवधारणाएँ: उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS), पूंजी नियंत्रण, बाहरी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
भारत में उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) का प्रशासन किस संस्था द्वारा किया जाता है?
व्याख्या: उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) का प्रशासन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) करता है। SEBI प्रतिभूति बाज़ार को नियंत्रित करता है, वित्त मंत्रालय राजकोषीय नीति देखता है, और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एक ट्रेडिंग मंच है, प्रेषण का नियामक नहीं।
- Q2कठिन
उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.LRS फरवरी 2004 में प्रति व्यक्ति $25,000 की प्रारंभिक वार्षिक सीमा के साथ शुरू हुई थी।
- 2.RBI ने शुरुआत से अब तक LRS सीमा दो बार घटाई है, एक बार 2013 में और फिर 2022 में।
- 3.LRS के तहत वर्तमान वार्षिक सीमा प्रति व्यक्ति $250,000 है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: LRS फरवरी 2004 में $25,000 की सीमा के साथ शुरू हुई थी। कथन 2 गलत है: RBI ने सीमा केवल एक बार घटाई है, अगस्त 2013 में, दो बार नहीं। कथन 3 सही है: वर्तमान सीमा प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष $250,000 है।
- Q3मध्यम
FY27 के पहले पांच महीनों (अप्रैल-अगस्त 2026) में LRS के तहत भारतीयों ने विदेशी इक्विटी और ऋण में कितनी रकम निवेश की?
व्याख्या: RBI के आंकड़ों के अनुसार FY27 के अप्रैल-अगस्त में भारतीयों ने LRS के तहत विदेशी इक्विटी और ऋण में $1.73 बिलियन निवेश किए। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह रकम $823 मिलियन थी। $2.65 बिलियन FY26 का कुल आंकड़ा है, और $4 बिलियन FY27 के लिए अनुमानित आंकड़ा है।
- Q4मध्यम
LRS बहिर्प्रवाह और भारतीय कंपनियों के बाहरी FDI में तेज़ बढ़ोतरी से नीति-निर्माताओं की मुख्य चिंता क्या है?
व्याख्या: बढ़ते LRS बहिर्प्रवाह, बाहरी FDI, विदेशी निवेशकों द्वारा मुनाफे की वापसी और बढ़ते व्यापार घाटे का संयुक्त असर रुपये पर दबाव डालता है, जिससे वह कमज़ोर होता है। घरेलू तरलता और कर राजस्व पर असर द्वितीयक हो सकते हैं, लेकिन मुख्य वृहद-आर्थिक चिंता मुद्रा पर असर है। भारत में आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इन बहिर्प्रवाहों से सीधे नहीं जुड़ा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के तहत विदेश भेजे जाने वाले धन की वर्तमान वार्षिक सीमा क्या है?
LRS के तहत वर्तमान वार्षिक सीमा प्रति व्यक्ति प्रति वित्तीय वर्ष $250,000 है।
2. LRS कब शुरू हुई और उसकी प्रारंभिक सीमा क्या थी?
उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) RBI ने फरवरी 2004 में प्रति व्यक्ति $25,000 की प्रारंभिक वार्षिक सीमा के साथ शुरू की थी।
3. क्या RBI ने कभी LRS सीमा घटाई है?
हाँ, RBI ने LRS सीमा केवल एक बार घटाई, अगस्त 2013 में, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के 'टेपर टैंट्रम' से पैदा हुई वैश्विक उथल-पुथल के दौरान।
4. भारतीय LRS के तहत विदेश में निवेश क्यों बढ़ा रहे हैं?
भारतीय विदेश में निवेश कर रहे हैं क्योंकि घरेलू शेयर बाज़ार में रिटर्न कमज़ोर है (2026 में निफ्टी 6% गिरा), आय बढ़ रही है, और वे AI, सेमीकंडक्टर और रक्षा तकनीक जैसे वैश्विक परिसंपत्ति वर्गों में पोर्टफोलियो का विविधीकरण चाहते हैं।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

