प्रिलिम्स के लिए: ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), न्यायालय, भारत के मुख्य न्यायाधीश, मुख्य टिप्पणी, उजागर किया गया प्रदूषण का कारण, एनसीआर में वायु गुणवत्ता के लिए नोडल निकाय
मेन्स के लिए: पर्यावरणीय न्याय, व्यवहार में बदलाव बनाम नियामक पाबंदियां, त्योहारों का व्यावसायीकरण, जनजागरूकता
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर 2026 में दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई की।
- भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हैं।
- कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण का हल अकेले पाबंदियां नहीं हैं।
- कोर्ट ने दिवाली के गिफ्ट लेनदेन को वाहनों से बढ़ते प्रदूषण से जोड़ा।
- एनसीआर में वायु गुणवत्ता के लिए वैधानिक निकाय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) है।
चर्चा में क्यों?
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई में कहा कि केवल पाबंदियां लगाने से समस्या हल नहीं होगी और इससे नियमों का उल्लंघन बढ़ सकता है। कोर्ट ने दिवाली पर गिफ्ट देने की परंपरा को वाहनों से होने वाले प्रदूषण की एक वजह बताया और व्यवहार में बदलाव तथा जनजागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने गरीबों को प्रदूषण के लिए दोषी ठहराने के खिलाफ आगाह किया और कहा कि वे प्रदूषण के कारण नहीं, उसके शिकार हैं।
सारांश
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि केवल पाबंदियां और रोक लगाने से दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण का संकट हल नहीं होगा, और इससे नियमों के उल्लंघन में भी इज़ाफा हो सकता है।
- कोर्ट ने दिवाली पर गिफ्ट देने की परंपरा को वाहनों की बढ़ती आवाजाही से जोड़ा, जो प्रदूषण के स्तर को काफी बढ़ाती है।
- भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को प्रदूषण के लिए दोषी ठहराने के खिलाफ चेताया और कहा कि वे प्रदूषण के कारण नहीं, बल्कि उसके शिकार हैं।
मुख्य बातें
पाबंदियों पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि केवल पाबंदियां लगाने से प्रदूषण नहीं घटेगा और इससे कानून के और उल्लंघन हो सकते हैं।
गरीबों को दोष देना गलत
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार ठहराने के खिलाफ चेताया और उन्हें इस संकट का शिकार बताया।
पृष्ठभूमि
दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी में, खासकर दिवाली के आसपास, गंभीर वायु प्रदूषण होता है। इसकी वजह पराली जलाना, वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण की धूल और तापमान उलटफेर (temperature inversion) जैसे मौसमी कारक हैं। सर्वोच्च न्यायालय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू करने सहित कई आदेशों के ज़रिए स्थिति पर नज़र रखता रहा है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
कोर्ट की टिप्पणी ध्यान को केवल नियामक उपायों से हटाकर सामाजिक व्यवहार की ओर ले जाती है। गिफ्ट देने जैसी सांस्कृतिक प्रथा को प्रदूषण से जोड़कर यह व्यक्तिगत फैसलों और त्योहारों के व्यावसायीकरण की भूमिका सामने लाती है। मुख्य न्यायाधीश की यह टिप्पणी कि प्रदूषण में ज़्यादा योगदान अमीर वर्ग का है, न कि गरीबों का, पर्यावरणीय न्याय पर एक अहम सामाजिक-आर्थिक नज़रिया है। यह दृष्टिकोण भविष्य में ऊपर से लागू होने वाली रोक के बजाय जागरूकता अभियानों और मांग-पक्ष प्रबंधन की ओर नीति को ले जा सकता है।
आगे की राह
कोर्ट ने जनता के व्यवहार में बदलाव और जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है। आगे की नीति पर्यावरण-अनुकूल त्योहार मनाने को बढ़ावा देने, त्योहारों के दौरान अनावश्यक वाहन आवाजाही घटाने और ज़्यादा उत्सर्जन करने वाले संपन्न वर्गों पर प्रदूषण कम करने के उपाय केंद्रित करने पर हो सकती है। GRAP के चरणों और अन्य पाबंदियों की प्रभावशीलता की समीक्षा भी जारी रहेगी।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP)
- वायु प्रदूषण की गंभीरता (AQI स्तर) के आधार पर दिल्ली-एनसीआर में लागू आपातकालीन उपायों का समूह। इसमें निर्माण पर रोक, वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध और उद्योग बंद करने जैसे कदम शामिल हैं।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)
- 2021 में बना एक वैधानिक निकाय, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे लगे इलाकों में वायु गुणवत्ता सुधारने के उपायों का समन्वय और नियमन करता है।
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
- एक संख्यात्मक पैमाना, जिससे बताया जाता है कि हवा कितनी प्रदूषित है। यह 0 (अच्छी) से 500 (गंभीर) तक होता है, और इसमें 'खराब', 'बहुत खराब' तथा 'गंभीर' जैसी श्रेणियां होती हैं।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस आंकड़े पर ध्यान दें: सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण का हल अकेले पाबंदियां नहीं हैं।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: एनसीआर की वायु गुणवत्ता के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)।
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: आपातकालीन प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP)।
यह गलती न करें!
विद्यार्थी CAQM (वैधानिक निकाय) को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) या पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) के साथ भ्रमित कर सकते हैं, जिसकी जगह CAQM बनाया गया। साथ ही, कोर्ट की टिप्पणी व्यवहार में बदलाव पर है, किसी नए कानून या संशोधन पर नहीं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- पर्यावरणीय न्याय, व्यवहार में बदलाव बनाम नियामक पाबंदियां, त्योहारों का व्यावसायीकरण, जनजागरूकता
कहीं अटके? एक टैप में समझें
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि केवल नियम बनाने और चीज़ों पर रोक लगाने से दिल्ली का प्रदूषण नहीं सुधरेगा। लोगों को अपनी आदतें बदलनी होंगी। जैसे दिवाली पर गिफ्ट देने से सड़कों पर ज़्यादा गाड़ियां चलती हैं, जिससे हवा गंदी होती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदूषण के लिए गरीबों को दोष देना गलत है, क्योंकि सबसे ज़्यादा नुकसान उन्हें ही झेलना पड़ता है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर 2026 में दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण से जुड़े एक मामले की सुनवाई की।
- भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हैं।
- कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण का हल अकेले पाबंदियां नहीं हैं।
- कोर्ट ने दिवाली के गिफ्ट लेनदेन को वाहनों से बढ़ते प्रदूषण से जोड़ा।
- एनसीआर में वायु गुणवत्ता के लिए वैधानिक निकाय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) है।
- पर्यावरण: वायु प्रदूषण और उसका नियंत्रण
- राजव्यवस्था: पर्यावरण संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका
जुड़ी अवधारणाएँ: ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1मध्यम
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के उपायों को लागू करने की मुख्य ज़िम्मेदारी किस वैधानिक निकाय की है?
व्याख्या: CAQM 2021 में बना वैधानिक निकाय है, जिसका गठन विशेष रूप से एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार के समन्वय के लिए हुआ। CPCB एक राष्ट्रीय निकाय है, EPCA पहले का निकाय था जिसकी जगह CAQM आया, और मंत्रालय निगरानी करने वाला विभाग है, एनसीआर के लिए सीधे लागू करने वाला प्राधिकरण नहीं।
- Q2कठिन
सर्वोच्च न्यायालय की दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण पर टिप्पणियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण रोकने का सबसे प्रभावी उपाय पाबंदियां और रोक लगाना है।
- 2.कोर्ट ने दिवाली पर गिफ्ट देने की परंपरा को वाहनों से बढ़ते प्रदूषण से जोड़ा।
- 3.भारत के मुख्य न्यायाधीश ने गरीबों को प्रदूषण के लिए दोषी ठहराने के खिलाफ चेताया और उन्हें शिकार बताया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है, क्योंकि कोर्ट ने कहा कि केवल पाबंदियां समाधान नहीं हैं और इससे उल्लंघन बढ़ सकते हैं। कथन 2 सही है, क्योंकि कोर्ट ने गिफ्ट देने को वाहनों से होने वाले प्रदूषण का कारण बताया। कथन 3 सही है, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गरीब प्रदूषण के कारण नहीं, उसके शिकार हैं।
- Q3आसान
सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के अनुसार, दिवाली के दौरान प्रदूषण का एक बड़ा कारण किसे बताया गया?
व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय ने दिवाली पर गिफ्ट के लेनदेन को वाहनों की बढ़ती आवाजाही से जोड़ा, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। अन्य विकल्प दिल्ली के प्रदूषण के सामान्य कारण हैं, लेकिन इस टिप्पणी का विशेष केंद्र नहीं थे।
- Q4मध्यम
दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण पर सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी का मुख्य निहितार्थ क्या है कि 'कोई पाबंदी काम नहीं आएगी'?
व्याख्या: कोर्ट की टिप्पणी का आशय है कि केवल ऊपर से लागू पाबंदियों पर निर्भरता प्रभावी नहीं है। कोर्ट ने जनता के व्यवहार में बदलाव और जागरूकता पर ज़ोर दिया, यानी नियामक उपायों के पूरक के रूप में जन-भागीदारी आधारित दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया। अन्य विकल्प या तो अति हैं या टिप्पणी से निहित नहीं होते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण पर क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि केवल पाबंदियां और रोक लगाने से प्रदूषण की समस्या हल नहीं होगी और इससे उल्लंघन बढ़ सकते हैं। कोर्ट ने जनता के व्यवहार में बदलाव और अधिक जागरूकता की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने गिफ्ट देने को प्रदूषण से क्यों जोड़ा?
कोर्ट ने कहा कि दिवाली पर गिफ्ट देने की परंपरा से वाहनों की आवाजाही बढ़ती है, जो दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में एक बड़ा योगदान है।
3. भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?
भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हैं।
4. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) क्या है?
CAQM 2021 में बना एक वैधानिक निकाय है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे लगे इलाकों में वायु गुणवत्ता सुधारने के उपायों का समन्वय और नियमन करता है।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
