प्रिलिम्स के लिए: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), पराली जलाना, दिल्ली का औसत AQI (6 नवंबर 2026), सर्वाधिक AQI वाला स्थान, पराली जलाने का योगदान, अगली सुनवाई की तिथि, पीठ की संरचना
मेन्स के लिए: न्यायिक निगरानी, पर्यावरण शासन, व्यवहार परिवर्तन, प्रवर्तन की कमी, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल
स्रोत:Dainik Bhaskar
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का औसत AQI 391 था।
- दिल्ली के रोहिणी में सर्वाधिक AQI 475 दर्ज किया गया।
- 5 नवंबर 2026 को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14% था।
- सर्वोच्च न्यायालय की पीठ में CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।
- इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को है।
चर्चा में क्यों?
दिल्ली के वायु प्रदूषण मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने पाबंदियों और आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया। उसने कहा कि जितनी ज़्यादा पाबंदियां होंगी, उल्लंघन उतना बढ़ेगा। न्यायालय ने व्यवहार में बदलाव और जागरूकता पर ज़ोर दिया। दिल्ली का औसत AQI 391 है और 59 निगरानी केंद्रों में से 30 पर AQI 400 के पार है। अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी।
सारांश
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ज़्यादा पाबंदियां लगाने से उल्लंघन बढ़ता है, इसलिए दिल्ली के वायु प्रदूषण संकट से निपटने के लिए जनजागरूकता और व्यवहार में बदलाव ज़रूरी है।
- 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का औसत AQI 391 था। 59 में से 30 निगरानी केंद्रों पर AQI 400 से ऊपर (गंभीर श्रेणी) दर्ज हुआ, जिनमें रोहिणी (475) और IIT दिल्ली (472) सबसे खराब रहे।
- प्रदूषण के पांच प्रमुख स्रोत हैं: वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक धुआं, निर्माण की धूल, सड़क की धूल और पराली जलाना। 5 नवंबर 2026 को पराली जलाने की हिस्सेदारी 14% थी।
मुख्य बातें
पाबंदियों की प्रभावशीलता पर सवाल
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ज़्यादा आदेश और पाबंदियां ज़्यादा उल्लंघन की ओर ले जाती हैं, इसलिए दंडात्मक उपायों के बजाय जनजागरूकता और व्यवहार में बदलाव पर ज़ोर होना चाहिए।
दिल्ली का AQI गंभीर स्तर पर
दिल्ली का AQI बेहद खराब स्तर पर: दिल्ली का औसत AQI 391 (बेहद खराब) रहा, जबकि 59 में से 30 निगरानी केंद्रों पर AQI 400 से ऊपर (गंभीर) दर्ज हुआ। रोहिणी में सर्वाधिक 475 रहा।
प्रदूषण के पांच प्रमुख स्रोत चिह्नित
सरकार ने औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण, निर्माण धूल, सड़क धूल और पराली जलाने को मुख्य स्रोत बताया। पिछले दिन पराली जलाने की हिस्सेदारी 14% थी।
पृष्ठभूमि
दिल्ली-NCR में हर सर्दी में मौसमी परिस्थितियों (तापमान प्रतिलोमन, कम हवा की गति), पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने, वाहन उत्सर्जन और निर्माण धूल के कारण गंभीर वायु प्रदूषण होता है। सर्वोच्च न्यायालय कई याचिकाओं के ज़रिए स्थिति पर नज़र रख रहा है और वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत निर्देश दे चुका है। GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू करने की वैधानिक ज़िम्मेदारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
न्यायालय की यह टिप्पणी कि ज़्यादा पाबंदियों से ज़्यादा उल्लंघन होते हैं, प्रवर्तन और अनुपालन की चुनौतियों की ओर इशारा करती है। GRAP में AQI के चरणों के अनुसार बढ़ती हुई कार्रवाइयां तय हैं, जिनमें निर्माण पर रोक, ट्रकों के प्रवेश पर सीमा और डीज़ल जेनरेटर पर नियंत्रण शामिल हैं, लेकिन इनका असर प्रवर्तन और जनता के सहयोग पर निर्भर है। AQI 391 (बेहद खराब) और 400 से ऊपर के 30 केंद्र (जिनमें कई गंभीर श्रेणी में हैं) सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत देते हैं। पराली जलाने का 14% योगदान इसे एक उल्लेखनीय स्रोत बताता है, जबकि वाहन, उद्योग, निर्माण और सड़क की धूल जैसे स्थानीय स्रोत भी काफी योगदान देते हैं।
आगे की राह
16 नवंबर 2026 की अगली सुनवाई में विशिष्ट निर्देश आ सकते हैं। बच्चों के लिए स्कूल बंद करने या हाइब्रिड मोड पर न्यायालय विशेषज्ञों की राय पर विचार कर सकता है। दीर्घकालिक उपायों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, CNG नेटवर्क का विस्तार, निर्माण धूल मानकों का सख्त पालन और पराली जलाने के विकल्प (मशीनें, बायो-डीकंपोज़र) देना शामिल है। जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर न्यायालय का ज़ोर न्यायालय की निगरानी में जन-जागरूकता अभियान का रूप ले सकता है।
दिल्ली से जुड़ाव
दिल्ली की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:DSSSB 7/10
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
- सरकारी एजेंसियों द्वारा यह बताने का संख्यात्मक पैमाना कि हवा कितनी प्रदूषित है या आगे कितनी होने का अनुमान है। भारत में AQI की छह श्रेणियां हैं: अच्छा (0-50), संतोषजनक (51-100), मध्यम (101-200), खराब (201-300), बेहद खराब (301-400) और गंभीर (401-500)।
- ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP)
- दिल्ली-NCR के लिए आपातकालीन उपायों का एक ढांचा, जिसमें AQI स्तर के आधार पर बढ़ती कार्रवाइयां तय हैं। GRAP को मूल रूप से पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) ने तैयार किया था और अब इसकी निगरानी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) करता है। अलग-अलग चरणों में निर्माण, ट्रकों के प्रवेश और डीज़ल जेनरेटर के उपयोग पर पाबंदी जैसे उपाय लागू होते हैं। हर चरण के सटीक AQI मानदंड के लिए CAQM या आधिकारिक GRAP दस्तावेज़ देखें।
- पराली जलाना
- फसल के अवशेष (मुख्य रूप से धान का भूसा) को कटाई के बाद जलाने की प्रथा, ताकि अगली फसल के लिए खेत साफ़ हो सकें। उत्तर भारत में सर्दियों के वायु प्रदूषण का यह एक बड़ा कारण है, खासकर पंजाब और हरियाणा में।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का औसत AQI 391; रोहिणी में सर्वाधिक AQI 475
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (पीठ: CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची, न्यायमूर्ति वी. मोहना)
- इस आंकड़े पर ध्यान दें: दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान: 14% (5 नवंबर 2026)
यह गलती न करें!
GRAP के चरणों और उनके AQI मानदंडों के बारे में पूछा जा सकता है। याद रखें कि GRAP के हर चरण के AQI मानदंड CAQM तय करता है, इसलिए सटीक सीमा के लिए आधिकारिक GRAP दस्तावेज़ देखें और यहां दी गई सीमाओं को अंतिम न मानें। साथ ही, पराली जलाना एक बड़ा योगदानकर्ता है लेकिन हर स्थिति में प्रमुख स्रोत नहीं होता; स्थानीय उत्सर्जन अक्सर बहुत मायने रखते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- न्यायिक निगरानी, पर्यावरण शासन, व्यवहार परिवर्तन, प्रवर्तन की कमी, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल
कहीं अटके? एक टैप में समझें
दिल्ली की हवा इतनी गंदी और सांस लेने के लिए हानिकारक हो गई है कि AQI 391 तक पहुंच गया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय में इसी मामले की सुनवाई हो रही है। न्यायालय ने कहा कि सिर्फ़ ज़्यादा नियम और पाबंदियां बनाने से कुछ नहीं होता, क्योंकि लोग उन्हें तोड़ते हैं। इसके बजाय लोगों में जागरूकता लानी होगी और उनकी आदतें बदलनी होंगी, जैसे फसल के अवशेष न जलाना और कम प्रदूषण वाले वाहनों का इस्तेमाल करना। न्यायालय 16 नवंबर को इस मामले की फिर सुनवाई करेगा।
- 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का औसत AQI 391 था।
- दिल्ली के रोहिणी में सर्वाधिक AQI 475 दर्ज किया गया।
- 5 नवंबर 2026 को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14% था।
- सर्वोच्च न्यायालय की पीठ में CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।
- इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को है।
- पर्यावरण: वायु प्रदूषण और उसका नियंत्रण
- राजव्यवस्था: न्यायपालिका और न्यायिक सक्रियता
जुड़ी अवधारणाएँ: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), पराली जलाना
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
दिल्ली के वायु प्रदूषण से संबंधित याचिका कौन-सी संवैधानिक संस्था सुन रही थी?
व्याख्या: भारत का सर्वोच्च न्यायालय, जो सर्वोच्च न्यायिक निकाय है, याचिका सुन रहा था। दिल्ली उच्च न्यायालय एक अधीनस्थ न्यायालय है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण पर्यावरण मामलों के लिए एक वैधानिक निकाय है, और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग GRAP लागू करने वाला वैधानिक निकाय है, न कि कोई न्यायालय। अतः विकल्प B सही है।
- Q2कठिन
दिल्ली प्रदूषण पर सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ज़्यादा पाबंदियां लगाने से नियमों का उल्लंघन बढ़ता है।
- 2.न्यायालय ने दिल्ली के सभी स्कूल तुरंत बंद करने का निर्देश दिया।
- 3.पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है क्योंकि न्यायालय ने कहा कि ज़्यादा आदेशों से ज़्यादा उल्लंघन होते हैं। कथन 2 गलत है, क्योंकि न्यायालय ने स्कूल तुरंत बंद करने का आदेश नहीं दिया; उसने विशेषज्ञों की राय के आधार पर फैसला करने की बात कही। कथन 3 सही है क्योंकि पीठ में CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
6 नवंबर 2026 को दिल्ली में दर्ज औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कितना था?
व्याख्या: शहर का औसत AQI 391 था। 400 'गंभीर' श्रेणी की सीमा है। रोहिणी में 475 AQI दर्ज हुआ, जो सर्वाधिक है, और IIT दिल्ली में 472 दर्ज हुआ। अतः विकल्प B सही है।
- Q4मध्यम
दिल्ली के वायु प्रदूषण के संदर्भ में 'ज़्यादा पाबंदियां, ज़्यादा उल्लंघन' की सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का मुख्य निहितार्थ क्या है?
व्याख्या: इस टिप्पणी से कि पाबंदियों से उल्लंघन बढ़ते हैं, यह संकेत मिलता है कि न्यायालय मानता है कि केवल प्रवर्तन पर्याप्त नहीं है। न्यायालय ने जागरूकता के लिए मशहूर हस्तियों की मदद का सुझाव दिया और व्यवहार परिवर्तन पर ज़ोर दिया। अतः विकल्प B सही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का औसत AQI कितना था?
दिल्ली का औसत AQI 391 था, जिसे 'बेहद खराब' श्रेणी में रखा गया, और 59 में से 30 निगरानी केंद्र 400 से ऊपर (गंभीर श्रेणी) थे।
2. दिल्ली प्रदूषण मामले की सुनवाई करने वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ में कौन शामिल था?
पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।
3. सर्वोच्च न्यायालय में दिल्ली प्रदूषण मामले की अगली सुनवाई कब है?
अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को निर्धारित है।
4. न्यायालय में सरकार द्वारा चिह्नित प्रदूषण के पांच प्रमुख स्रोत कौन-से थे?
पांच प्रमुख स्रोत हैं: औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण, निर्माण और ध्वस्तीकरण की धूल, सड़क की धूल और पराली जलाना।
सभी स्रोत
मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

